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न्यायालय के आदेश की तामिला के लिए पुलिस पहुंची गांव, बंद मिला संबंधित घर

सिद्धार्थनगर में धारा 82 Cr.P.C. के आदेश की तामिला की कार्रवाई, घर और सार्वजनिक स्थान पर चस्पा की गई आदेश की प्रति

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सिद्धार्थनगर, 02 अक्टूबर 2026। न्यायालय द्वारा जारी आदेश की तामिला के क्रम में थाना सिद्धार्थनगर पुलिस ने ग्राम पिपरी बुजुर्ग में नियमानुसार कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार संबंधित व्यक्ति के घर पहुंचने पर मकान पर ताला लगा मिला, जिसके बाद न्यायालय के आदेश की प्रति घर के दरवाजे पर चस्पा की गई।

 

पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक कार्रवाई मु0अ0सं0 404/2023, थाना सिद्धार्थनगर से संबंधित है। मामले में सिविल जज जूनियर डिवीजन FTC प्रथम, जनपद सिद्धार्थनगर के न्यायालय द्वारा मुजम्मिल खान पुत्र तज्जमुल हुसैन, निवासी पिपरी बुजुर्ग, टोला भदोखर, थाना इटवा, जनपद सिद्धार्थनगर के विरुद्ध धारा 82 Cr.P.C. के तहत आदेश जारी किया गया था।

 

पुलिस टीम उप निरीक्षक अशोक कुमार के नेतृत्व में हमराह पुलिसकर्मियों के साथ ग्राम पिपरी बुजुर्ग पहुंची। पुलिस के अनुसार मौके पर संबंधित घर बंद मिला। इसके बाद न्यायालय के आदेश की एक प्रति ग्राम प्रधान अबुसाद, BDC वजाउद्दीन एवं ग्राम के अन्य संभ्रांत व्यक्तियों की मौजूदगी में घर के दरवाजे पर चस्पा की गई।

इसके अतिरिक्त आदेश की दूसरी प्रति गांव के प्राथमिक विद्यालय के सार्वजनिक स्थान पर, लोगों की नजर में आने वाले स्थान पर चस्पा किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।

पुलिस प्रेस नोट के अनुसार आदेश की तामिला के क्रम में फिरोज निवासी सुभाष नगर, थाना नौगढ़ द्वारा गांव में घूम-घूमकर मुनादी भी कराई गई। पुलिस के मुताबिक पूरी कार्रवाई की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी मोबाइल के माध्यम से कराई गई है।


कार्रवाई का मुख्य बिंदु


घर पर मिला ताला → न्यायालय का आदेश चस्पा → सार्वजनिक स्थान पर भी प्रति लगाई गई → गांव में मुनादी → कार्रवाई की फोटो-वीडियोग्राफी


सारांश


न्यायालय के आदेश की तामिला के क्रम में थाना सिद्धार्थनगर पुलिस ने ग्राम पिपरी बुजुर्ग में कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार संबंधित घर बंद मिलने पर आदेश की प्रति घर के दरवाजे पर तथा सार्वजनिक स्थान पर चस्पा की गई और मुनादी भी कराई गई।

कानूनी सावधानी: यह खबर पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। न्यायालय की प्रक्रिया के तहत की गई इस कार्रवाई को संबंधित व्यक्ति के दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाना है।

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