लखपति दीदी के दावों के बीच महिला कर्मियों की मुश्किलें, बांसी में कांग्रेस का प्रदर्शन
बीसी सखियों के कर्ज और महिला मेटों को काम न मिलने का मुद्दा उठा, तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

सिद्धार्थनगर/बांसी। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के सरकारी प्रयासों के बीच स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की समस्याओं को लेकर बांसी में आवाज उठी। शुक्रवार को कांग्रेस नेता हेमन्त चौधरी के नेतृत्व में माधव पार्क में धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बीसी सखियों पर ऋण का बोझ, बैंकिंग कार्यों से अपेक्षित आमदनी नहीं होने और महिला मेटों को पर्याप्त काम नहीं मिलने जैसे मुद्दे उठाए। प्रदर्शन के बाद तहसीलदार बांसी को ज्ञापन सौंपकर संबंधित समस्याओं के समाधान की मांग की गई।
योजनाओं के दावों और जमीनी हकीकत पर सवाल
धरने के दौरान हेमन्त चौधरी ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन इनके लाभार्थियों को यदि नियमित काम और पर्याप्त आमदनी नहीं मिलती, तो आत्मनिर्भरता का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति की समीक्षा कराने की मांग की।
बीसी सखियों के ऋण और आमदनी का मुद्दा
हेमन्त चौधरी के मुताबिक, बीसी सखियों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने के लिए 75 हजार रुपये तक का ऋण पांच प्रतिशत ब्याज पर दिए जाने, शुरुआती छह महीने तक प्रतिमाह चार हजार रुपये की सहायता और बैंकिंग लेनदेन के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। उन्होंने मशीनों पर करीब 40 हजार रुपये खर्च होने का भी उल्लेख किया।
उनका आरोप है कि कई महिलाओं को अपेक्षा के अनुरूप लेनदेन और नियमित आय नहीं मिल पा रही है, जबकि ऋण चुकाने की जिम्मेदारी बनी हुई है। ऐसे में महिलाओं की वास्तविक आमदनी, मशीनों के उपयोग और ऋण की शर्तों की जांच जरूरी है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभागों का पक्ष उपलब्ध नहीं है।
स्वयं सहायता समूहों के ब्याज पर भी उठे सवाल
कांग्रेस नेता ने स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाले ऋण पर ब्याज की दरों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में ब्याज दर 12 प्रतिशत तक पहुंचती है। उनका कहना था कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं में ऋण की शर्तें, आर्थिक सहायता और आय के अवसर इस तरह होने चाहिए कि लाभार्थियों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव न पड़े।
महिला मेटों को काम दिलाने की मांग
धरना-प्रदर्शन में महिला मेटों की समस्याओं का मुद्दा भी उठाया गया। हेमन्त चौधरी ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायतों में महिला मेटों को पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है। उन्होंने संबंधित विभागों से काम की उपलब्धता, मानदेय और भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने तथा पात्र महिला कर्मियों को नियमानुसार काम उपलब्ध कराने की मांग की।
ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन के बाद तहसीलदार बांसी को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें महिला कर्मियों के रोजगार, मानदेय, ऋण और ब्याज से संबंधित समस्याओं पर ध्यान देने तथा संबंधित विभागों से आवश्यक कार्रवाई कराने की मांग की गई।
इस दौरान समूह की प्रदेश प्रभारी पिंकी गौड़, जिलाध्यक्ष अनीता विश्वकर्मा, साहजहां, कुसुम लोधी, अनु यादव तथा कांग्रेस कार्यकर्ता अभिनव राय और विकी रिजवी सहित बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं मौजूद रहीं।
प्रशासन के सामने प्रमुख मांगें
– बीसी सखियों को बैंकिंग लेनदेन के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की समीक्षा।
– ऋण, ब्याज और मशीनों के उपयोग की वास्तविक स्थिति की जांच।
– महिला मेटों को नियमानुसार काम उपलब्ध कराने की व्यवस्था।
– मानदेय और भुगतान से जुड़ी समस्याओं का निस्तारण।
– संबंधित विभागों से जवाब लेकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना।
डिजिटल सारांश
बांसी के माधव पार्क में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की समस्याओं को लेकर कांग्रेस नेता हेमन्त चौधरी के नेतृत्व में धरना दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने बीसी सखियों की आय और ऋण तथा महिला मेटों को काम नहीं मिलने के मुद्दे उठाते हुए तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
संपादकीय टिप्पणी | योजनाओं की सफलता का पैमाना वास्तविक लाभ
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली योजनाओं की सफलता केवल घोषणाओं या लाभार्थियों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके जीवन में आए वास्तविक आर्थिक बदलाव से आंकी जानी चाहिए। यदि किसी लाभार्थी पर ऋण की जिम्मेदारी है, तो उसके सामने काम और आय के पर्याप्त अवसर भी होने चाहिए। बांसी में उठाए गए सवालों की निष्पक्ष जांच कर संबंधित विभागों का पक्ष सामने लाना और तथ्यों के आधार पर समाधान करना जरूरी है। इससे न केवल महिलाओं का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक तस्वीर भी सामने आएगी।
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