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सिद्धार्थनगर: पांच साल बाद भी शुरू नहीं हो सका सामुदायिक शौचालय, ग्रामीणों को हो रही परेशानी

सिद्धार्थनगर। जिले के खेसरहा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मरवटिया द्वितीय में निर्मित सामुदायिक शौचालय के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण के कई वर्ष बीतने के बाद भी यह सुविधा नियमित रूप से संचालित नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि शौचालय तक पहुंचने के लिए रास्ते की व्यवस्था नहीं होने और आवश्यक सुविधाओं की कमी के कारण इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक, स्वच्छ भारत अभियान के तहत वर्ष 2018 में करीब चार लाख रुपये की लागत से इस सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। वर्ष 2022 में इसकी मरम्मत भी कराई गई, लेकिन इसके बावजूद शौचालय के नियमित संचालन की समस्या बनी हुई है।


रास्ता और जरूरी सुविधाओं की कमी का दावा


ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय आबादी से दूर खेतों के बीच स्थित है। वहां तक पहुंचने के लिए सुगम रास्ता नहीं होने के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। उनका यह भी कहना है कि परिसर में पानी की टंकी मौजूद होने के बावजूद बिजली और पानी की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं के चलते शौचालय का इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, भवन के आसपास घास-झाड़ियां उगने और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने से भी इसका उपयोग प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर शौचालय को उपयोग योग्य बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।


केयरटेकर की नियुक्ति नहीं होने का मुद्दा


ग्रामीणों ने शौचालय के संचालन के लिए केयरटेकर की व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा भी उठाया है। उनके अनुसार, देखरेख और नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होने से सरकारी संसाधन का अपेक्षित लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है। लोगों ने रास्ता बनवाने, बिजली-पानी की व्यवस्था दुरुस्त कराने और नियमित देखरेख सुनिश्चित करने की मांग की है।


जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन


इस मामले में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) चौधरी ने बताया कि उन्हें प्रकरण की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और कमियां सामने आने पर उन्हें दूर कराने के लिए संबंधित सचिव को निर्देशित किया जाएगा।

अब देखना होगा कि जांच के बाद शौचालय के संचालन में आ रही समस्याओं का समाधान कब तक हो पाता है और ग्रामीणों को इस सुविधा का लाभ कब मिलने लगता है।


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