पांच दिन तक मोर्चरी में रहा भोलू का शव, पुलिस सुरक्षा के बीच हुआ अंतिम संस्कार; दो अन्य लोगों की भूमिका पर परिवार ने उठाए
सिद्धार्थनगर। मोहाना थाना क्षेत्र के गुजरौलिया टोला बेलौहा में युवक भोलू उर्फ शिवा की हत्या के मामले में पांच दिनों तक चला घटनाक्रम रविवार को अंतिम संस्कार के साथ एक नए चरण में पहुंच गया। पुलिस की मौजूदगी में पोस्टमार्टम के बाद मोर्चरी में रखे शव को गांव लाया गया, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान परिवार का आक्रोश, लगातार विरोध-प्रदर्शन और मामले में अन्य लोगों की कथित भूमिका की जांच की मांग चर्चा में रही।
28 अक्टूबर को लोहे की रॉड से हमले में युवक की मौत के बाद मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा। पुलिस ने तहरीर के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस की ओर से घटना में इस्तेमाल की गई बताई गई लोहे की रॉड बरामद करने की जानकारी भी दी गई। हालांकि, परिजन इस कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखाई दिए। परिवार की ओर से दो अन्य लोगों की कथित संलिप्तता की जांच कर उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की मांग उठाई जाती रही।
क्या है पूरा मामला?
सिद्धार्थनगर जिले के लोटन कोतवाली क्षेत्र के खखरा गांव निवासी भोलू उर्फ शिवा की 28 अक्टूबर 2026 को मोहाना थाना क्षेत्र के बेलौहा गांव के पास लोहे की रॉड से हमला किए जाने के बाद मौत हो गई थी। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस घायल युवक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोटन ले गई, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों की ओर से घटना को लेकर पुरानी रंजिश और पहले हुए विवाद की बात सामने रखी गई। पुलिस ने प्राप्त तहरीर के आधार पर हत्या सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की।
24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी, लोहे की रॉड बरामद करने का पुलिस का दावा
मामले में पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई के अनुसार, 29 अक्टूबर को मोहाना पुलिस ने अभिलाष उपाध्याय उर्फ डब्लू को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी गुजरौलिया टोला बेलौहा का निवासी है।
पुलिस ने गिरफ्तारी के साथ ही घटना में इस्तेमाल की गई बताई गई एक लोहे की रॉड बरामद करने की जानकारी दी। आरोपी को न्यायालय भेजे जाने की बात भी पुलिस की ओर से सामने आई।
पुलिस की इस कार्रवाई को मामले में शुरुआती महत्वपूर्ण कदम माना गया, लेकिन इसके बाद भी परिवार की ओर से कुछ अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग जारी रही।
एक गिरफ्तारी के बाद भी क्यों जारी रहा विरोध?
इस प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब मृतक के परिजनों ने हत्या की घटना में दो अन्य लोगों के शामिल होने की आशंका जताते हुए उनके विरुद्ध भी जांच और कार्रवाई की मांग उठाई।
परिवार का कहना था कि घटना के सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए और जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, उनके संबंध में भी पुलिस निष्पक्षता से जांच करे।
इसी मांग को लेकर अलग-अलग दिनों में लोटन-कोल्हुई मार्ग, मोहाना-लोटन मार्ग और सिकरी बाजार में विरोध-प्रदर्शन एवं सड़क जाम की स्थिति बनी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिजनों तथा ग्रामीणों से बातचीत की और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
31 अक्टूबर को भी सिकरी बाजार में करीब डेढ़ घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा। इस दौरान परिवार की ओर से दो अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग दोहराई गई।
पांचवें दिन पिता के पहुंचने के बाद हुआ अंतिम संस्कार
मामले में एक भावनात्मक पहलू यह भी रहा कि घटना के समय मृतक के पिता दूसरे प्रदेश में थे। उनके गांव पहुंचने तक पोस्टमार्टम के बाद शव को मोर्चरी में रखवाया गया था।
परिवार की ओर से पहले ही अन्य लोगों की कथित भूमिका की जांच की मांग उठाई जा रही थी। पिता के गांव पहुंचने के बाद भी परिवार ने अपनी मांग दोहराई और कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध जताया।
आखिरकार रविवार, 1 नवंबर को पुलिस की मौजूदगी में मोर्चरी से शव गांव पहुंचाया गया। शव घर पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। मां, बहन और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल रहा। काफी समझाने-बुझाने के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार किया।
मोहाना थानाध्यक्ष जितेंद्र सिंह के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की देखरेख में अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा।
अब जांच के सामने हैं ये महत्वपूर्ण सवाल
इस पूरे प्रकरण में एक आरोपी की गिरफ्तारी और कथित हथियार की बरामदगी के बाद भी कुछ ऐसे बिंदु हैं, जिनका स्पष्ट होना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
परिवार की ओर से जिन दो अन्य लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, उनकी शिकायत और आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंची है? घटना से पहले हुए कथित विवाद की वास्तविक वजह क्या थी? घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और अन्य उपलब्ध तथ्यों से घटनाक्रम की कौन-सी तस्वीर सामने आती है?
इन सभी बिंदुओं का निष्पक्ष परीक्षण विवेचना का हिस्सा होना चाहिए। फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में दो अन्य लोगों की संलिप्तता की पुष्टि अथवा उनके विरुद्ध किसी अंतिम पुलिस निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।
पुलिस की जांच पर टिकी निगाहें
भोलू हत्याकांड में पांच दिनों तक चले घटनाक्रम के बाद अंतिम संस्कार तो संपन्न हो गया, लेकिन परिवार की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब जांच के निष्कर्षों से ही मिल सकेगा।
पुलिस पहले ही एक आरोपी की गिरफ्तारी और कथित वारदात में प्रयुक्त लोहे की रॉड बरामद करने की जानकारी दे चुकी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विवेचना में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर घटना की पूरी कड़ी किस तरह स्पष्ट होती है।
परिवार की मांग, पुलिस की कार्रवाई और जांच की निष्पक्षता तीनों इस मामले के महत्वपूर्ण पहलू हैं। किसी भी व्यक्ति की भूमिका का निर्धारण आरोपों के बजाय साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होना चाहिए।
FT NEWS DIGITAL की विशेष रिपोर्ट।
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