फ्रेंड्स टाइम्स
Breaking News
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, अमेरिकी दूतावासों की सुरक्षा कड़ी

Screenshot 20260304 081158
इंटरनेशनल डेस्क
मिडिल ईस्ट क्षेत्र में एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती खींचतान के बीच खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी दूतावासों के आसपास संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों की खबरों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

Screenshot 20260304 081127
सूत्रों के अनुसार कुछ स्थानों पर ड्रोन देखे जाने की घटनाओं के बाद अमेरिकी प्रशासन ने तत्काल सतर्कता बढ़ा दी है। इसके साथ ही अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा परामर्श जारी करते हुए उन्हें भीड़भाड़ वाले स्थानों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है।
बताया जा रहा है कि क्षेत्र में अमेरिकी दूतावासों और सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरे को देखते हुए लगातार निगरानी कर रही हैं।

Screenshot 20260304 081118
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव आगे और बढ़ता है तो इसका असर न केवल मिडिल ईस्ट बल्कि वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है। तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर भी कई देश स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।

Screenshot 20260304 081228
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय मिडिल ईस्ट में विकसित हो रही परिस्थितियों को लेकर चिंतित है और कई देश कूटनीतिक स्तर पर हालात को शांत करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

Screenshot 20260304 081108
संक्षेप में
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा
खाड़ी देशों में अमेरिकी दूतावासों की सुरक्षा बढ़ाई गई
अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह
वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर असर की आशंका

मिसाइलों की गूंज के बीच इजरायल में फंसा सिद्धार्थनगर का बेटा, परिवार की सांसें अटकीं

उत्तर प्रदेश, सिद्धार्थनगर।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और लगातार हो रहे मिसाइल हमलों के बीच Israel में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले का एक युवक फंसा हुआ है। युवक की सुरक्षा को लेकर उसके परिवार में गहरी चिंता और दहशत का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, नौगढ़ तहसील व लोटन थाना क्षेत्र के खीरी डीहा गांव निवासी शिवा सिंह वर्तमान में इजरायल में मौजूद हैं। वहां हालात युद्ध जैसे बने हुए हैं। इजरायल और Iran के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई स्थानों पर सायरन बज रहे हैं और सुरक्षा अलर्ट जारी है।
बताया जाता है कि शिवा सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ वीडियो साझा किए हैं, जिनमें उन्होंने बताया कि वह और उनके साथ मौजूद अन्य भारतीय नागरिक फिलहाल सुरक्षित हैं। हालांकि क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
FT NEWS DIGITAL की टीम ने जब खीरी डीहा गांव पहुंचकर परिवार से बातचीत की, तो परिजनों की चिंता साफ झलक रही थी। युवक की मां ने भावुक होते हुए कहा कि वह अपने बेटे की सलामती के लिए लगातार ईश्वर से प्रार्थना कर रही हैं। भाई ने बताया कि परिवार हर दिन फोन के माध्यम से हालचाल ले रहा है, लेकिन समाचार चैनलों पर दिख रही तस्वीरें मन में भय पैदा कर रही हैं।
परिजनों ने भारत सरकार से अपील की है कि इजरायल में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की जाए।
युद्ध भले ही हजारों किलोमीटर दूर हो, लेकिन उसकी चिंता सिद्धार्थनगर के इस छोटे से गांव तक महसूस की जा रही है। पूरे गांव की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि उनका बेटा सुरक्षित घर लौट आए।
FT NEWS DIGITAL इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।

मध्य पूर्व में महाविस्फोट! इज़रायल–ईरान टकराव ने रचा नया इतिहास?

200 फाइटर जेट्स की चर्चा, सैकड़ों ठिकाने निशाने पर — मौतों के दावे, आधिकारिक पुष्टि शेष
मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इज़रायल ने ईरान के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में 200 लड़ाकू विमानों और सैकड़ों ठिकानों को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है, साथ ही 201 मौतों का दावा भी सामने आया है।

Screenshot 20260301 150652
हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।


आखिर यह टकराव क्यों?
इज़रायल और ईरान के बीच सीधा युद्ध भले ही दुर्लभ रहा हो, लेकिन “शैडो वॉर” यानी परोक्ष संघर्ष वर्षों से जारी है।
परमाणु कार्यक्रम विवाद
इज़रायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता रहा है।
गाजा और हमास फैक्टर
हमास को ईरान का समर्थन इज़रायल के लिए बड़ी चिंता का विषय रहा है, खासकर गाज़ा पट्टी में संघर्ष के दौरान।
हिज़्बुल्लाह और लेबनान सीमा
ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह के जरिए उत्तरी सीमा पर दबाव बढ़ता रहा है।
सीरिया और आईआरजीसी
सीरिया में ईरानी प्रभाव और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की गतिविधियों को लेकर इज़रायल समय-समय पर एयरस्ट्राइक करता रहा है।

Screenshot 20260301 150614 अब तक क्या-क्या हुआ?
हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच ड्रोन और मिसाइल हमलों के आरोप-प्रत्यारोप
क्षेत्र में अमेरिकी और अन्य पश्चिमी देशों की सैन्य सतर्कता बढ़ी

IMG 20260301 WA1202
इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने “राष्ट्रीय सुरक्षा” को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया
ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई ने कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी

Screenshot 20260301 150630

 क्या यह पूर्ण युद्ध की ओर संकेत है?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सीधा सैन्य संघर्ष लंबा चला तो यह केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है।
अभी तक उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर स्थिति अत्यंत संवेदनशील और गतिशील है। आधिकारिक पुष्टि और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

नेपाल में दर्दनाक बस हादसा: त्रिशूली नदी में समाई यात्रियों से भरी बस, 18 की मौत

काठमांडू/पोखरा (नेपाल)।
नेपाल में एक बड़ा सड़क हादसा सामने आया है। नेपाल के पोखरा-काठमांडू मार्ग पर चल रही एक यात्री बस काठमांडू के पास स्थित त्रिशूली नदी में गिर गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 27 अन्य यात्री घायल बताए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बस पोखरा से काठमांडू की ओर जा रही थी। दुर्घटना के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, हालांकि स्थानीय प्रशासन के अनुसार हादसा तीखे मोड़ पर बस के अनियंत्रित होने की वजह से हुआ हो सकता है। राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर नदी में गिरी बस से यात्रियों को बाहर निकाला।
घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। मृतकों में महिला और पुरुष यात्री शामिल हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार एक विदेशी पर्यटक, जो स्विट्जरलैंड से था, उसके भी हादसे में प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। आधिकारिक पहचान और विस्तृत सूची जारी की जानी बाकी है।
नेपाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना के सटीक कारणों—चालक की लापरवाही, ब्रेक फेल या सड़क की स्थिति—की पड़ताल की जा रही है।
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में संकरे और घुमावदार रास्तों के कारण सड़क हादसों की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। प्रशासन ने यात्रियों से सावधानी बरतने और परिवहन कंपनियों से सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील की है।
स्थिति अपडेट:
मृतक: 18 (प्रारंभिक जानकारी)
घायल: 27
राहत-बचाव कार्य: जारी
जांच: प्रारंभ
(नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन और प्रारंभिक आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है। अंतिम आंकड़ों में परिवर्तन संभव है।)

नेपाल के 75वें प्रजातंत्र दिवस पर भारत की निर्णायक भूमिका का स्मरण

काठमांडू/विशेष रिपोर्ट।
नेपाल आज अपना 75वाँ प्रजातंत्र दिवस अत्यंत गौरव, श्रद्धा और लोकतांत्रिक उत्साह के साथ मना रहा है। फागुन 7, 2007 साल को निरंकुश राणा शासन के अंत और लोकतंत्र की स्थापना की ऐतिहासिक स्मृति में पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।
इस ऐतिहासिक परिवर्तन में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक रही है। 1950-51 में जब नेपाल राणा शासन की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, तब भारत की मध्यस्थता से हुए ‘दिल्ली समझौते’ ने संवैधानिक राजशाही और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव रखी।
जब नेपाल के राजा त्रिभुवन ने राणा शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए नेपाल छोड़ा, तब तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें शरण दी। इसके बाद भारत की सक्रिय पहल से हुआ दिल्ली समझौता नेपाल में प्रजातंत्र की स्थापना का आधार बना।
शहीदों के बलिदान को नमन
नेपाल के महान शहीद —
दशरथ चन्द
धर्मभक्त माथेमा
गंगाला श्रेष्ठ
शुक्रराज शास्त्री
ने हँसते-हँसते राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनके त्याग और जनता के जनआन्दोलन ने निरंकुश शासन को समाप्त कर लोकतंत्र की नींव रखी।
राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति में राष्ट्रीय समारोह
आज प्रातः काठमांडू के टुंडिखेल सैनिक मंच पर राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल की उपस्थिति में मुख्य राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया जा रहा है।
राष्ट्रपति पौडेल ने अपने संदेश में कहा कि 2007 साल की क्रांति ने मानवाधिकार, नागरिक स्वतंत्रता और जनता की संप्रभुता की आधारशिला रखी। उन्होंने सभी ज्ञात-अज्ञात वीरों को नमन करते हुए स्थायी शांति, सुशासन और विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
भारत-नेपाल संबंध: लोकतंत्र से विकास तक
भारत नेपाल का प्रमुख विकास साझेदार रहा है।
नेपाल का बड़ा विदेशी व्यापार भारत के साथ होता है।
तराई क्षेत्र में सड़क निर्माण, रेल संपर्क और आधारभूत संरचना विकास में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
नेपाली सेना को प्रशिक्षण और सैन्य सहयोग भी भारत-नेपाल संबंधों का अहम स्तंभ है।
1951 में राणा शासन के अंत से लेकर संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना तक, भारत ने हर चरण में नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा को मजबूती देने में सहयोग दिया है।
क्यों है यह दिन ऐतिहासिक?
फागुन 7 केवल एक तिथि नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक चेतना, जनसंकल्प और बलिदान की अमर गाथा है।
इसी क्रांति की पृष्ठभूमि में आज का संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य और वर्तमान संविधान स्थापित हुआ।
नेपाल का 75वाँ प्रजातंत्र दिवस सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनःप्रतिबद्धता का प्रतीक है।

नेपाल तराई में बदलती सियासी हवा: क्या परंपरागत दलों का गढ़ ढह रहा है?

नेपाल के तराई क्षेत्र में इस बार चुनावी माहौल कुछ अलग नजर आ रहा है। रवि लामिछाने की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) और पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार बालेन शाह के रोड शो में उमड़ी भीड़ ने परंपरागत राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।

भारत सीमा से सटे कपिलवस्तु जिला और रूपन्देही जिला में हुए इन रोड शो में भारी जनसमर्थन देखने को मिला। दोनों नेताओं के कार्यक्रम अलग-अलग समय पर हुए, लेकिन भीड़ का उत्साह लगभग समान रहा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि तराई क्षेत्र की राजनीति किसी नए मोड़ की ओर बढ़ रही है।

तराई: परंपरागत दलों का गढ़, अब नई चुनौती

नेपाल के तराई क्षेत्र में लगभग 23 जिले आते हैं और यहां की आबादी करीब 90 लाख मानी जाती है। यह इलाका लंबे समय से नेपाली कांग्रेस, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) और विभिन्न मधेशी दलों का मजबूत आधार रहा है।

हिंदू बहुल इस क्षेत्र में सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भारत से गहरा जुड़ाव महसूस किया जाता है। ऐसे में मतदाताओं का परंपरागत दलों से हटकर नई पार्टी की ओर झुकाव राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका रहा है।

लोकप्रियता और विवाद: रवि लामिछाने फैक्टर

पूर्व गृहमंत्री रह चुके रवि लामिछाने अपनी टीवी एंकरिंग और जनसरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों के कारण व्यापक लोकप्रियता रखते हैं। हालांकि वे अमेरिकी नागरिकता विवाद और धोखाधड़ी के एक मामले में जेल जाने को लेकर सुर्खियों में भी रहे।

अपने संबोधनों में वे धर्म आधारित राजनीति से दूरी बनाने की अपील करते नजर आते हैं। इससे शहरी और युवा मतदाताओं के बीच उनकी छवि एक वैकल्पिक नेतृत्व के रूप में उभर रही है।

बालेन शाह की शैली और प्रतीकात्मक संदेश

काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह अपने रोड शो के दौरान स्थानीय मंदिरों में दर्शन करते दिखाई दिए। रूपन्देही और कपिलवस्तु में उन्होंने प्रसिद्ध मरचाई माता मंदिर से अपना कार्यक्रम शुरू किया।

उनका आत्मविश्वास और समर्थकों का उत्साह ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो चुनावी परिणाम उनके पक्ष में तय हों। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रैलियों की भीड़ हमेशा चुनावी जीत की गारंटी नहीं होती।

क्या बदलेगा चुनावी गणित?

राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि इस बार तराई में समीकरण बदल सकते हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को कम आंकना वास्तविकता से आंखें मूंदने जैसा होगा।

हालांकि अंतिम फैसला मतपेटियों में बंद है। अक्सर मतदान के दिन मतदाताओं का रुझान बदल जाता है और नतीजे चौंकाने वाले आते हैं। फिर भी इस बार तराई में दिख रही हलचल पारंपरिक दलों के लिए चेतावनी संकेत जरूर है।

नेपाल के तराई क्षेत्र में उभरता जनसमर्थन यह संकेत दे रहा है कि मतदाता विकल्प तलाश रहे हैं। क्या यह बदलाव सत्ता परिवर्तन का कारण बनेगा या पारंपरिक दल वापसी करेंगे—यह आने वाला चुनाव तय करेगा। फिलहाल इतना तय है कि तराई की राजनीति नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है।

भारत के बाहर जन्मे नागरिकों के लिए मतदाता पंजीकरण में नई व्यवस्था लागू..भारत-नेपाल में खुशी की लहर

भारत के बाहर जन्मे नागरिकों को वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने संबंधी पुरानी समस्या का समाधान किया गया है, जिससे भारत और नेपाल दोनों में खुशी का माहौल है।

समस्या का समाधान: अब बाहर जन्मे भारतीय भी कर सकते हैं नामांकन 

पिछले समय में भारत के बाहर जन्मे भारतीय नागरिक फॉर्म-6 या फॉर्म-6A के माध्यम से मतदाता के रूप में आवेदन नहीं कर पा रहे थे। इसका कारण यह था कि सिस्टम में ‘भारत के बाहर’ जन्म स्थान दर्ज करने का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं था।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुसार, अब यह समस्या पूरी तरह से हल कर दी गई है।

 नई तकनीकी व्यवस्था: ‘Outside India’ विकल्प उपलब्ध

निर्वाचन आयोग ने तकनीकी कठिनाई को दूर करते हुए एक ऑफलाइन व्यवस्था लागू की है। अब:

ईआरओ-नेट और बीएलओ ऐप के डेटा एंट्री मॉड्यूल में

जन्म स्थान के रूप में ‘Outside India’ चुनने का विकल्प है।

साथ में देश का नाम दर्ज करने के लिए Text Box भी उपलब्ध है।

इससे अब भारत के बाहर जन्मे भारतीय पात्र नागरिक अपने वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन कैसे करें: फॉर्म-6 / फॉर्म-6A भरें और जमा करें 

नई व्यवस्था के तहत:

आवेदनकर्ता फॉर्म-6 या फॉर्म-6A को भौतिक रूप में भरें।

उसे अपने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी / बूथ लेवल अधिकारी के पास जमा कराएँ।

इससे अब विदेश में जन्मे पात्र नागरिक भी अपने मताधिकार का पूरा लाभ उठा सकेंगे।

भारत-नेपाल में खुशी का माहौल

इस नई व्यवस्था की घोषणा से भारत में तो लोग ख़ुश हैं ही, साथ ही नेपाल में बहुएं और वधू पक्ष के लोग भी इसे स्वागत योग्य बता रहे हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देश 

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे:

इस व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

व्यापक प्रचार-प्रसार भी करें, ताकि अधिक से अधिक पात्र नागरिक इसका लाभ उठाएँ।

मिशन पैदल भारत यात्रा पैरों से नाप रहे हैं भारत, दिलों को जोड़ रहे हैं सनोज कुमार कुशवाहा

सिद्धार्थनगर / कुशीनगर।
आज के दौर में जहाँ लोग सुविधाओं के आदी हो चुके हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के एक युवक ने भारत को जानने और जोड़ने के लिए ऐसा रास्ता चुना है, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है। यह कहानी है सनोज कुमार कुशवाहा की—जो पैरों से भारत नाप रहे हैं और दिलों को जोड़ने का काम कर रहे हैं।
सनोज कुमार कुशवाहा, निवासी धर्मपुर पर्वत, जनपद कुशीनगर, ने
21 अक्टूबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश से एक असाधारण यात्रा की शुरुआत की।
इस यात्रा का नाम है—
“मिशन पैदल भारत यात्रा”


28 हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर, वो भी पैदल
अब तक सनोज कुमार


28,200 किलोमीटर से अधिक की दूरी


29 राज्यों


सैकड़ों जिलों और हजारों गांवों
को पूरी तरह पैदल तय कर चुके हैं।
वर्तमान समय में वे उत्तर प्रदेश के 26 जनपदों की यात्रा पर हैं और हर जिले में भारतीय संस्कृति, आपसी भाईचारे और एकता का संदेश दे रहे हैं।
सिर्फ यात्रा नहीं, भारत को समझने का मिशन
सनोज कुमार कहते हैं कि यह यात्रा केवल दूरी तय करने के लिए नहीं है।
इसका असली उद्देश्य है—
भारत की संस्कृति और सभ्यता को करीब से समझना
अलग-अलग राज्यों की भाषा, खान-पान और परंपराओं को जानना
लोगों के बीच आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत करना
यात्रा के दौरान वे लोगों के घरों में रुकते हैं, उनके साथ भोजन करते हैं और आम जनजीवन को बहुत नजदीक से देखते-समझते हैं।
किताब में सहेज रहे हैं भारत की आत्मा
इस ऐतिहासिक यात्रा के अनुभवों को
सनोज कुमार एक किताब के रूप में लिख रहे हैं।
इस पुस्तक का नाम होगा—
“भारतीय संस्कृति (Indian Culture)”
इस किताब में भारत के हर कोने से जुड़ी
संस्कृति, जीवनशैली, परंपराएं और अनुभव
सरल भाषा में दर्ज किए जाएंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भारत को और गहराई से समझ सकें।


सुविधाएँ कम, हौसला बेहद बड़ा
सनोज कुमार की यात्रा किट बहुत साधारण है—
कुछ कपड़े, जरूरी दवाइयाँ और कैंप लगाने का सामान।
सुविधाएँ सीमित हैं, लेकिन हौसला और उद्देश्य बहुत विशाल।
उन्होंने बताया कि इस पूरी यात्रा के दौरान


प्रशासन का सहयोग


आम लोगों का स्नेह
उन्हें लगातार मिलता रहा है।
सिद्धार्थनगर में हुआ भव्य स्वागत
आज जनपद सिद्धार्थनगर के
नगर पालिका परिषद क्षेत्र, गांधीनगर वार्ड में
सनोज कुमार कुशवाहा का भव्य स्वागत किया गया।
स्थानीय नागरिकों ने फूल-मालाओं से उनका सम्मान किया।
इस अवसर पर नगर के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अद्भुत यात्रा की सराहना की और युवक का उत्साह बढ़ाया।
आगे की योजना
उत्तर प्रदेश के शेष जनपदों की यात्रा पूरी करने के बाद
सनोज कुमार कुछ समय का विश्राम करेंगे।
इसके बाद वे आगे की यात्राओं की योजना बनाएंगे, ताकि
भारत को जोड़ने का यह मिशन लगातार आगे बढ़ता रहे।
FT News DParagraphigital विशेष
सनोज कुमार कुशवाहा की यह पदयात्रा हमें यह सिखाती है कि—


भारत को जानने के लिए बड़ी गाड़ियों की नहीं


बल्कि बड़े हौसले और सच्चे इरादों की जरूरत होती है।
यह सिर्फ एक यात्रा नहीं,
बल्कि भारतीय संस्कृति को समझने और जोड़ने का जीवंत प्रयास है।

पाकिस्तान के हाथ से फिसलता बलूचिस्तान

अरविंद जयतिलक

(वरिष्ठ पत्रकार)

पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों के बीच छिड़ी जंग से एक बात स्पष्ट है कि अब ब्लूचिस्तान बहुत अधिक समय तक पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रहने वाला। जिस तरह ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाके सड़क पर उतरकर पाकिस्तानी सैनिकों से सीधा मोर्चा ले रहे हैं उससे साफ है कि वे आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। निःसंदेह पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में बड़े पैमाने पर ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों को नुकसान हुआ है लेकिन जिस तरह पाकिस्तानी हूकुमत के खिलाफ उठी बगावत की लौ तेज हो रही है उससे साफ है कि पाकिस्तान का विखंडन निकट है। गौर करें तो यह पहली बार नहीं है जब ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों द्वारा अपनी आजादी का बिगुल फूंका गया है। वे पाकिस्तान के निर्माण के समय से ही अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं। आमतौर पर उनके आंदोलन का आधार लोकतांत्रिक है लेकिन जब पाकिस्तानी सरकार का अत्याचार बढ़ा तो उन्हें हथियार उठाने की जरुरत आन पड़ी। अब वे अपनी आजादी के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। देखा भी जा रहा है कि वे पाकिस्तान की सरकार और सेना दोनों को कड़ी चुनौती परोस रहे हैं। याद होगा अभी गत वर्ष ही बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाइजैक कर पाकिस्तानी हुकूमत के माथे पर शिकन ला दिया था। इससे निपटने में पाकिस्तानी सेना के पसीने छूट गए थे। उस समय पाकिस्तान ने बीएलए लड़ाकों के हाथ तीस पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या की बात कबूली थी। ध्यान देना होगा कि बलोच लिबरेशन आर्मी लगातार मांग करता आ रहा है कि पाकिस्तान सरकार बलूच के राजनीतिक कैदियों, गायब हुए लोगों, अलगाववादी नेताओं, लड़ाकों और उनके कार्यकर्ताओं को बिना किसी शर्त के रिहा करे। अन्यथा उन्हें खतरनाक परिणाम भुगतना होगा। लेकिन पाकिस्तान का अत्याचार जारी है। मौजू सवाल यह है कि फिर पाकिस्तान बलूचिस्तान में अलगाववाद की उठ रही लपटों से कैसे निपटेगा? जिस तरह बलूचिस्तान की डोर उसके हाथ से फिसलती जा रही है उससे तो यहीं रेखांकित होता है कि आने वाले कुछ वर्षों में बलूचिस्तान अपनी आजादी की जंग में कामयाब होगा। ऐसा इसलिए कि पाकिस्तान में चौतरफा अराजकता का माहौल है। खैबर पख्तुनवां में भी आग लगी है। सिंध प्रांत भी उबल रहा है। पाकिस्तान की भूमि पर फन फैलाए बैठे आतंकी संगठन भी अब पाकिस्तानी संप्रभुता के लिए नई चुनौती परोस रहे हैं। फिर बलूचिस्तान कब तक पाकिस्तान का अविभाजित अंग बना रहेगा। जानना आवश्यक है कि बलूचिस्तान तेल और खनिज से संपन्न पाकिस्तान का सबसे बड़ा और कम आबादी वाला राज्य है। यहां सर्वाधिक आबादी बलूचों की है और उनका आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार उनके साथ भेदभाव और शोषण करती है। उनके खनिज संपदा का जमकर दोहन करती है लेकिन उनकी बुनियादी जरुरतों का तनिक भी ख्याल नहीं रखती है। कहना गलत नहीं होगा कि राजनीतिक तौर पर बलूचों के साथ भेदभाव, नाइंसाफी और शोषण ने वहां के लोगों के मन में पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ नफरत का भाव भर दिया है। गौर करें तो पाकिस्तानी सेना दशकों से बलूचिस्तान में अलगावादियों का उत्पीड़न व हत्या कर रही है। अब तक पाकिस्तानी सेना के हाथों हजारों बलूच नागरिक मारे जा चुके हैं। पाकिस्तानी सेना द्वारा 2006 में बलोच नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या के बाद बलूचियों पर अत्याचार पहले से बढ़ गया है। याद होगा 2005 में बलूच नेता नवाब अकबर बुगती और मीर बलाच मार्री द्वारा पाकिस्तान सरकार के समक्ष 15 सूत्री मांग रखी गयी थी। इस मांग में बलूचिस्तान प्रांत के संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण और सैनिक ठिकानों के निर्माण पर रोक का मुद्दा शीर्ष पर था। लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया। नतीजा टकराव बढ़ गया। जबकि हकीकत है कि बलूचिस्तान के नागरिक अलगाववादी नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से लैस है। पाकिस्तान के कुल प्राकृतिक गैस का एक तिहाई यही से निकलता है। लेकिन विडंबना है कि उसका आनुपातिक लाभ बलूचिस्तान को नहीं मिलता है। उदाहरण के लिए 1952 में बलूचिस्तान के डेरा बुगती में गैस के भंडार का पता लगा और 1954 से गैस का उत्पादन शुरु हो गया। पाकिस्तान के अन्य तीनों प्रांतों को उसका लाभ तुरंत मिलने लगा लेकिन बलूचिस्तान को यह लाभ 1985 में मिला। इसी तरह चीन के साथ तांबा, सोना और चांदी उत्पादन करने की पाकिस्तानी चगाई मरुस्थल योजना 2002 में आकार ली। तय हुआ कि बलूचिस्तान को उसका वाजिब लाभ मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस योजना के तहत प्राप्त लाभ में चीन का हिस्सा 75 फीसद और पाकिस्तान का 25 फीसद है। लेकिन इस 25 फीसद में बलूचिस्तान के हिस्से में सिर्फ 2 फीसद ही आता है। यह स्थिति तब है जब पाकिस्तानी संविधान के 18 वें संशोधन के मुताबिक बलूचिस्तान को विशेष अधिकार प्राप्त है। इसी नाइंसाफी का नतीजा है कि बलूचिस्तान के नागरिक आक्रोशित हैं और पाकिस्तान से अलग होने की मांग कर रहे हैं। वैसे भी गौर करें तो बलूचिस्तान कभी भी पाकिस्तान का नैसर्गिक हिस्सा नहीं रहा है। इतिहास में जाएं तो 15 अगस्त, 1947 को भारत के साथ ही बलूचिस्तान ने भी अपनी आजादी का एलान किया था। लेकिन अप्रैल 1948 में पाकिस्तानी सेना ने मीर अहमद यार खान को अपना राज्य कलात छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उनसे जबरन कलात की आजादी के खिलाफ समझौते पर हस्ताक्षर करवाया गया जबकि उनके भाई प्रिंस अब्दुल करीम खान इस समझौते के विरुद्ध थे। वे किसी भी कीमत पर बलूचिस्तान का 23 फीसद हिस्सा पाकिस्तान को देने को तैयार नहीं थे। लिहाजा उन्होंने 1948 में पाकिस्तान के खिलाफ अलगाव का बिगुल फूंक दिया। उनके नेतृत्व में बलूच नागरिकों ने अफगानिस्तान की जमीन से पाक सैनिकों के खिलाफ गुरिल्ला जंग छेड़ दिया। इस संघर्ष को नवाब नवरोज खान ने आगे बढ़ाया लेकिन इसकी कीमत उन्हें भारी चुकानी पड़ी। पाकिस्तान की सरकार ने उनके दोनों बेटों और भतीजों को फांसी पर लटका दिया। इस अत्याचार के बाद भी जब बलूचों का स्वर धीमा नहीं पड़ा तो यहां 1973-74 में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया और अलगाववादियों के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई तेज हो गयी। इस दौरान तकरीबन 8000 बलूची नागरिक मारे गए और हजारों घायल हुए। लेकिन गौर करें तो पाकिस्तानी सेना के जुल्म के बाद भी आजादी का स्वर थमा नहीं है। मौजूदा समय में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट, यूनाइटेड बलोच आर्मी, लश्कर ए बलूचिस्तान और बलूचिस्तान लिबरेशन यूनाइटेड फ्रंट जैसे संगठन बलूचिस्तान की आजादी के लिए आंदोलित हैं। पाकिस्तान के लिए यह मुसीबत पैदा करने वाला है कि भारत ही नहीं अमेरिका भी बलूचिस्तान पर पाकिस्तानी सेना द्वारा मानवाधिकार हनन और अत्याचारपूर्ण कार्रवाई का अनैतिक मान रहा है। याद होगा गत वर्ष पहले कैलिफोर्निया के रिपब्लिकन सांसद दाना रोहराबचेर ने दो अन्य सांसदों के समर्थन से अमेरिकी कांग्रेस में बलूचिस्तान के लोगों के लिए इन जुल्मों के खिलाफ ‘आत्मनिर्णयन’ के अधिकार की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि बलूचिस्तान का प्रदेश पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में फैला हुआ है और यहां के लोगों को संप्रभु अधिकार प्राप्त नहीं है। याद होगा वर्ष 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उलंघन का मुद्दा उठाए जाने से पाकिस्तान घिर गया था। तब उसकी बोलती बंद हो गयी थी। उसे इतना करारा झटका लगा था कि वह निर्वासित बलूच नेताओं से बातचीत को तैयार हो गया था। तब बलूचिस्तान प्रांत के मुख्यमंत्री नवाब सनाउल्ला जेहरी और पाकिस्तानी सेना के दक्षिणी कमान के कमांडर आमिर रियाज ने बलूच नेताओं से बातचीत का पैगाम भेजा। तब बलूच नेताओं ने भारतीय प्रधानमंत्री के समर्थन से उत्साहित होकर भारत का शुक्रिया जताया था। दो राय नहीं कि आने वाले दिनों दुनिया के अन्य देश भी बलूचिस्तान के मसले पर मुखर होंगें और पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेगी।

डोडा में सेना का वाहन दुर्घटनाग्रस्त: पहाड़ी सड़क पर खाई में गिरा, कई जवान शहीद व घायल | रेस्क्यू जारी

जम्मू-कश्मीर | डोडा
जम्मू-कश्मीर के डोडा ज़िले में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहाँ ड्यूटी पर तैनात भारतीय सेना का एक वाहन भद्रवाह-चंबा मार्ग पर खन्नी टॉप के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वाहन पहाड़ी क्षेत्र की संकरी सड़क पर अनियंत्रित होकर सड़क से फिसल गया और गहरी खाई में जा गिरा।
इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में कुछ जवानों के शहीद होने और कई अन्य के घायल होने की सूचना है। हालांकि, जवानों की संख्या और स्थिति को लेकर अंतिम आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार किया जा रहा है।

रेस्क्यू और राहत कार्य
घटना की सूचना मिलते ही सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमों ने मौके पर पहुँचकर बचाव अभियान शुरू किया। दुर्गम पहाड़ी इलाका और कठिन रास्तों के कारण रेस्क्यू कार्य चुनौतीपूर्ण रहा, फिर भी घायलों को प्राथमिकता के आधार पर बाहर निकाला गया।
घायल जवानों को पहले भद्रवाह के अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया। गंभीर रूप से घायल जवानों को बेहतर इलाज के लिए उधमपुर स्थित सैन्य अस्पताल भेजा गया है, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।

देश में शोक की लहर
इस हादसे की खबर सामने आने के बाद देशभर में शोक की लहर है। प्रशासनिक और सैन्य स्तर पर स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है। अधिकारियों ने शहीद जवानों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।

वीरों को नमन
यह दुर्घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि भारतीय सेना के जवान कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी देश की सेवा में डटे रहते हैं। पहाड़ों, दुर्गम रास्तों और जोखिम भरे इलाकों में ड्यूटी निभाते हुए उनका समर्पण और बलिदान देश के लिए अमूल्य है।

FT NEWS DIGITAL शहीद जवानों को नमन करता है और घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है।

यह रिपोर्ट प्रारंभिक व आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। विस्तृत विवरण एवं अंतिम पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा जारी किए जाने के बाद अपडेट की जाएगी।

error: कोई भी कंटेंट कॉपी न करें, नहीं तो आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।