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डीपीआर ओ के खिलाफ हुए कर्मचारी , लगाए मुर्दाबाद के नारे

संवाददाता: अर्जुन सिंह, 

संतकबीरनगर 19 मार्च 2026। विकास भवन स्थित जिला पंचायत राज अधिकारी के कार्यालय में सफाई कर्मी बाबू के पद पर घूस लेते हुए एंटी करप्शन टीम के द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तारी का मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा था तब तक जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार यादव के खिलाफ राज्य कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी के नेतृत्व में कर्मचारियों ने लगाया मुर्दाबाद का नारा प्रो वापस जाओ डी प्रो भ्रष्ट है जैसे नारा लगाते हुए विकास भवन कार्यालय से निकलकर जिला अधिकारी कार्यालय में पहुंचकर ज्ञापन सौंपते हुए उनके निलंबन की मांग की गई ,

इधर सूत्रों की अगर मानें तो आमजन लोगों से कहते सुना गया है कि उक्त अधिकारी जितना भ्रष्ट है उतना ही इसकी पकड़ भी है क्योंकि इसका संबंध पंचायती राज्य मंत्री ओमप्रकाश राजभर के लड़के के साथ है जिसका फायदा या भरपूर उठाते नजर आ रहे हैं किसी ने ठीक ही कहा है की *सैया भाई कोतवाल अब डर काहे का* जिसके सर पर स्वयं पंचायती राज मंत्री का हाथ हो उसे डरने की क्या जरूरत है इतने घोर विरोध के बावजूद भी जनपद संत कबीर नगर में अंगद की तरह पांव जमाए बैठे हुए हैं जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार यादव देखना यह है कि कर्मचारी यूनियन का संगठन कितनी मजबूती से इनका विरोध करते हुए इन्हें निलंबन करवाने में सफल होगा यह आने वाला समय ही बताएगा,

जिलाधिकारी ने की सड़क सड़क सुरक्षा समिति की बैठक

संत कबीर नगर 19 मार्च, 2026।जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी उपस्थित रहे।

बैठक में सड़क सुरक्षा समिति की विगत बैठकों में दिए गए निर्देशों की विभिन्न विभागों द्वारा अनुपालन आख्या एवं कृत कार्यवाही की समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने एन0एच0ए0आई0 मार्ग के किनारे झाड़ियों की साफ-सफाई, पटरी मरम्मत, नाली मरम्मत एवं अवैध कट्स आदि के सम्बन्ध में सड़क सुरक्षा से संबंधित बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा की गयी। मार्ग के किनारों पर झाड़ियों के साफ सफाई के संबंध में एन0एच0ए0आई0 के प्रतिनिधि को निर्देशित किया गया।

एनएचएआई मार्ग पर दुर्घटना आदि की स्थिति में एंबुलेंस एवं क्रेन की उपलब्धता के बारे में जिलाधिकारी ने एनएचएआई प्रतिनिधि को जनपद में क्रेन की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया।

जिलाधिकारी ने परिवहन विभाग/यातायात पुलिस को निर्देश दिया कि सड़कों पर गलत साइड एवं नो-पार्किंग में खड़े वाहनों का नियमित तौर पर जांच कर चालान किया जाए तथा चालान किए गए वाहनों की संख्या को भी दर्शाया जाए। उन्होंने परिवहन एवं संबंधित पुलिस अधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद में अभियान चलाकर माल वाहक गाड़ियों के पीछे विशेष तौर पर ट्रैक्टर ट्राली के पीछे रिफलेक्टर रेडियम पट्टी लगाया जाए जिससे दुर्घटना होने की संभावनाओं से बचा जा सके।

बैठक में जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि जनपद के मुख्य चौराहों पर यातायात के समुचित व्यवस्था हेतु ट्रैफिक लाईट की व्यवस्था करायी जाय तथा सुरक्षा के दृष्टिकोण से सम्बंधित संकेतकों को भी स्पष्ट रूप से दर्शाया जाए।

जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि प्रत्येक ब्लैक स्पॉट पर टेबल टॉप रम्बल स्ट्रिप बनाया जाय एवं सीट बेल्ट व हेलमेट का पालन करने हेतु प्रचार-प्रसार किया जाय तथा सीट बेल्ट व हेलमेट का प्रयोग न करने वालों के विरूद्ध विधिक कार्यवाही एवं नियमानुसार चालान भी किया जाय। उन्होंने सम्बंधित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि समस्त विभाग सड़क सुरक्षा सम्बंधित नियमों का पालन करने के दृष्टिगत आम नागरिकों को प्रचार-प्रसार के विभिन्न माध्यमों से जागरूक करें।

जिलाधिकारी द्वारा परिवहन विभाग को निर्देशित किया गया की जनपद के समस्त स्कूली वाहनों का शत प्रतिशत सत्यापन किया जाय, वाहनों की परमिट एवं फिटनेस की जांच एक निश्चित समय अंतराल पर की जाती रहे और समस्त अनफिट वाहनों का चालान कर बंद कराया जाए। उन्होंने कहा कि इसको गंभीरता से लिया जाए, किसी भी विद्यालय में एक भी अनफिट वाहन नहीं चलने चाहिए। उन्होंने कहां की जनपद में चल रहे 15 वर्ष से पुराने वाहनों का चिन्हीकरण करते हुए उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाए।

एआरटीओ द्वारा अवगत कराया गया कि 15 वर्ष से अधिक वाहनों पर कार्यवाही करते हुए जनपद में 418 वाहनों को निष्प्रयोज्य कराया गया है और 2000 से अधिक वाहनों पर कार्यवाही की गई है। उन्होंने बताया कि 150 स्कूली वाहनों को अनफिट पाए जाने पर संबंधित थानों को सूची भेज दी गई है।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रामानुज कनौजिया, पुलिस क्षेत्राधिकारी यातायात प्रियम राजशेखर पांडेय, एआरटीओ प्रियंवदा सिंह, यातायात निरीक्षक परमहंस, एनएचएआई प्रतिनिधि, एनएच प्रतिनिधि सहित संबंधित अधिकारी आदि उपस्थित रहे।

बहाली की फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर रुपये लेने का आरोप, कर्मचारी गिरफ्तार

संतकबीर नगरसंवाददाता: अर्जुन सिंह, FT News Digital

संतकबीर नगर के विकास भवन स्थित जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कार्यालय से संबंधित एक मामले में एंटी करप्शन टीम ने एक कर्मचारी को रुपये लेते हुए पकड़ने का दावा किया है। टीम के अनुसार, आरोपी को 10 हजार रुपये लेते समय हिरासत में लिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, महुली थाना क्षेत्र के कोहना गांव निवासी सुधीर सिंह पंचायत विभाग में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत हैं। मार्च 2025 में एक प्रकरण में गिरफ्तारी के बाद विभाग द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया था। अप्रैल 2025 में रिहाई के बाद जून माह में उनकी अंतरिम बहाली की गई, जबकि पूर्ण बहाली एवं बकाया वेतन का भुगतान लंबित बताया जा रहा है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि डीपीआरओ कार्यालय में कार्यरत राजन कुमार, जो मूलतः सफाईकर्मी हैं और स्थापना संबंधी कार्य देख रहे थे, द्वारा फाइल आगे बढ़ाने एवं पूर्ण बहाली कराने के नाम पर रुपये की मांग की गई। आरोप के अनुसार प्रारंभ में 40 हजार रुपये मांगे गए, जिस पर बाद में 30 हजार रुपये पर सहमति बनी।

बताया जाता है कि शिकायतकर्ता द्वारा 13 मार्च को एंटी करप्शन इकाई में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके आधार पर टीम ने आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए बुधवार को कार्रवाई की। टीम दो स्वतंत्र गवाहों के साथ विकास भवन परिसर पहुंची।

एंटी करप्शन टीम के अनुसार, पूर्व निर्धारित योजना के तहत जैसे ही शिकायतकर्ता द्वारा 10 हजार रुपये दिए गए, आरोपी को मौके पर पकड़ लिया गया। इसके बाद आवश्यक परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें रुपये लेने की पुष्टि होने का दावा किया गया है।

पुलिस ने आरोपी को कोतवाली खलीलाबाद लाकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आगे की विधिक कार्रवाई प्रचलित है।

महत्वपूर्ण बिंदु

बहाली एवं बकाया वेतन का मामला लंबित

रुपये मांगने का आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाया गया

एंटी करप्शन टीम द्वारा ट्रैप कार्रवाई का दावा

मामले में जांच एवं विधिक प्रक्रिया जारी

स्पष्टीकरण

इस प्रकरण में लगाए गए आरोप शिकायत के आधार पर हैं। मामले की पुष्टि न्यायालय एवं जांच प्रक्रिया के उपरांत ही मानी जाएगी।

 

मॉर्निंग वॉक बनी मौत का सफर: पारिवारिक रंजिश में बीजेपी नेता की हत्या, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

गोरखपुर से धनेश कुमार की रिपोर्ट
गोरखपुर।
चिलुआताल थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब भारतीय जनता पार्टी से जुड़े स्थानीय नेता राजकुमार चौहान की निर्मम हत्या कर दी गई। इस वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घात लगाकर किया गया हमला
जानकारी के अनुसार, राजकुमार चौहान रोज की तरह सुबह टहलने के लिए घर से निकले थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए हमलावरों ने उन्हें निशाना बना लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार—
पहले गोली मारकर गिराया गया
इसके बाद धारदार हथियार से कई वार किए गए
हमला इतना तेज और सुनियोजित था कि मौके पर ही उनकी मौत हो गई
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।
रिश्तों की रंजिश बनी मौत की वजह
पुलिस जांच में सामने आया कि यह हत्या किसी लूट या बाहरी दुश्मनी का मामला नहीं, बल्कि—
 चचेरे भाई (कजिन) से जुड़ा पुराना विवाद
 पारिवारिक रंजिश और तनाव
 बदले की भावना में रची गई साजिश
बताया जा रहा है कि लंबे समय से चल रहा विवाद धीरे-धीरे खूनी अंजाम तक पहुंच गया।
कौन है आरोपी
पुलिस के अनुसार—
इस मामले में मुख्य आरोपी मृतक का रिश्तेदार है
आरोपी उसी इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है
पूछताछ में उसने रंजिश के चलते हत्या की साजिश की बात कबूल की है
पुलिस ने कैसे किया खुलासा
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए—
आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले
स्थानीय लोगों से पूछताछ की
तकनीकी सर्विलांस की मदद से आरोपी तक पहुंच बनाई
इसके बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
इलाके में पुलिस अलर्ट
घटना के बाद स्थिति को देखते हुए—
क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया
अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की

संयुक्त विकास आयुक्त ने किया नाथनगर ब्लॉक का दौरा

संतकबीरनगर। बस्ती मंडल के संयुक्त विकास आयुक्त निर्मल कुमार द्विवेदी ने बुधवार को नाथनगर ब्लॉक का मुआयना किया। ब्लॉक क्षेत्र में चलाई जा रही शासकीय योजनाओं के रफ्तार पर जेडीसी ने संतुष्टि जताई। सभी योजनाओं की समीक्षा के साथ ही ब्लॉक परिसर में निर्माणाधीन बीडीओ कार्यालय का निरीक्षण भी किया। जेडीसी के निरीक्षण के दौरान ब्लॉक कर्मी अलर्ट मोड में नजर आए।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत जेडीसी निर्मल कुमार द्विवेदी नाथनगर ब्लॉक मुख्यालय पहुंचे। बीडीओ कुलदीप कुमार को साथ लेकर ब्लॉक परिसर में निर्माणाधीन बीडीओ कार्यालय के निर्माण कार्य का जायजा लिया। बीडीओ कुलदीप कुमार ने बताया कि लगभग साढ़े 15 लाख रुपए की लागत से उक्त भवन का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। जेई आरईएस से स्टीमेट के हर बिंदु की जानकारी लिया। बन कर तैयार हुए बीडीओ आवास के बारे में भी जेडीसी ने जानकारी लिया। बाद में उन्होंने विभाग वार चल रहे शासकीय योजनाओं की समीक्षा भी किया। मनरेगा के तहत समूचे वित्तीय वर्ष में अर्जित मानव दिवस और पक्की परियोजनाओं की भी डिटेल जानी। मनरेगा में भुगतान प्रक्रिया और 60 :40 के अनुपात में दी गई स्वीकृतियों पर संतुष्टि जताई। एनआरएलएम में पंजीकृत समूहों की डिटेल जानने के बाद जेडीसी ने समूह सृजन में और तेजी लाए जाने का निर्देश दिया। स्वच्छता अभियान की धरातल पर स्थिति के बारे मे जानकारी लिया। निःशुल बोरिंग, प्रधानमंत्री आवास, पेंशन, किसान सम्मान निधि, फॉर्मर आईडी और क्रॉप सर्वे सहित सभी विकासोन्मुखी योजनाओं के प्रगति की भी समीक्षा किया। जेडीसी ने कहा कि ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में चलाई जा रही योजनाओं का अभिलेखीय अवलोकन करने के बाद निरीक्षण आख्या तैयार की जायेगी। श्री द्विवेदी ने बीडीओ कुलदीप कुमार के कार्यप्रणाली पर संतुष्टि जताई। इस दौरान एडीओ ग्राम विकास अभय प्रताप सिंह, एडीओ पंचायत सतीश कुशवाहा, निवर्तमान लेखाकार दीपक कुमार सिंह, ब्लॉक टीए संजय पांडेय, ममता यादव, संदीप शुक्ला, जयंत कुमार आदि लोग मौजूद रहे।

यूपी पंचायत चुनाव : तैयारियां पूरी, तारीख पर सस्पेंस बरकरार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जिला त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। भले ही चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ हो, लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज़ी से अंतिम चरण में पहुंच रही हैं। चुनाव हेतु मतपत्रों की छपाई का कार्य शुरू हो चुका है और इन्हें चरणबद्ध तरीके से जनपदों को भेजा जा रहा है।

● इस बार चुनाव प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए चारों पदों के लिए अलग-अलग रंगों के मतपत्र निर्धारित किए गए है, ग्राम प्रधान के लिए सफेद, ग्राम पंचायत सदस्य के लिए गुलाबी, क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) के लिए नीला और जिला पंचायत सदस्य के लिए पीला मतपत्र होगा। इस व्यवस्था से न केवल मतदान कर्मियों को सहूलियत मिलेगी, बल्कि मतदाता भी बिना किसी भ्रम के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। मतगणना के दौरान भी पर्चियों की पहचान और अलगाव आसान होगा।

● प्रदेश में लगभग 58 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में चुनाव प्रस्तावित हैं, जिनमें करीब 8 लाख ग्राम पंचायत सदस्य, 75 हजार से अधिक क्षेत्र पंचायत सदस्य और लगभग 3 हजार जिला पंचायत सदस्य चुने जाएंगे। इतने बड़े लोकतांत्रिक आयोजन को लेकर प्रशासन पूरी तत्परता से जुटा हुआ है।

● हालांकि, चुनाव की तारीखों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसकी प्रमुख वजह पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन में हो रही देरी है, जिससे आरक्षण प्रक्रिया फिलहाल अधर में लटकी हुई है। सरकार ने हाईकोर्ट में आयोग गठन का आश्वासन जरूर दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।

● पंचायत चुनाव 2026 में देरी की बड़ी वजह जनगणना भी है, क्यों कि जनगणना भी राष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसे लेकर प्रदेश सरकार युद्धस्तर पर लगी है।

● उधर, वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है—ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026, जिला पंचायत का 11 जुलाई 2026 और क्षेत्र पंचायत का 19 जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि चुनावी तैयारियां पूरी होने के बावजूद आरक्षण व जनगणना का पेच ही तारीखों की घोषणा में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

● अब देखना यह होगा कि सरकार कब तक आरक्षण प्रक्रिया को पूरा कर चुनाव की तारीखों का ऐलान करती है और प्रदेश में इस महापर्व की शुरुआत होती है।

संवाददाता: अर्जुन सिंह

गोंडा में दर्दनाक प्रेम कहानी का अंत: साथ जीने की चाह अधूरी, मौत ने जोड़ दी टूटी डोर

एक ही दिन, दो अलग जगह… प्रेमिका ट्रेन से कटी, प्रेमी पेड़ से लटका मिला — जांच में जुटी पुलिस


उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में सामने आई यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक अधूरी प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत बन गई।
बताया जा रहा है कि यह कहानी दो ऐसे युवाओं की है, जो एक-दूसरे के साथ जीवन बिताना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियां शायद उनके साथ नहीं थीं। गांव और समाज के बीच पनपी यह मोहब्बत धीरे-धीरे दबाव और असमंजस के घेरे में आ गई।


स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध था। मुलाकातें कम थीं, लेकिन भावनाएं गहरी बताई जा रही हैं।
परिवारों की असहमति, सामाजिक बंधन और भविष्य की अनिश्चितता ने कथित तौर पर इस रिश्ते को मुश्किल मोड़ पर ला खड़ा किया।
बताया जाता है कि हाल के दिनों में दोनों के बीच बातचीत बढ़ी थी — जैसे कोई बड़ा फैसला लिया जा रहा हो। लेकिन उस फैसले का अंजाम इतना भयावह होगा, इसका अंदाजा शायद किसी को नहीं था।
घटना का दिन 
17 मार्च 2026 के मध्य
सुबह का वक्त…
रेलवे ट्रैक के पास लोगों की भीड़ जमा होती है। एक युवती का शव मिलने की खबर फैलती है। प्रथम दृष्टया यह आशंका जताई जाती है कि उसने ट्रेन के सामने आकर अपनी जान दे दी।
इसी बीच, कुछ ही समय बाद, गांव से कुछ दूरी पर एक पेड़ से लटका युवक का शव मिलने की सूचना मिलती है।
दोनों घटनाओं के बीच संबंध जुड़ते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल जाती है।
पुलिस जांच
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार:
“प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन अभी जांच जारी है। प्रेम प्रसंग, पारिवारिक विवाद सहित सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।”
मोबाइल कॉल डिटेल्स, आपसी संपर्क और घटना से पहले की परिस्थितियों को भी खंगाला जा रहा है, ताकि सच्चाई स्पष्ट हो सके।
सामाजिक और मानवीय पहलू
यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है —
क्या संवाद की कमी ने दो जिंदगियों को खत्म कर दिया?
क्या सामाजिक दबाव इतना भारी पड़ गया कि जिंदगी छोटी लगने लगी?
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में समय रहते संवाद, सहमति और मानसिक सहयोग बेहद जरूरी है।

रिश्तों को रौंदने वाले बेटे को उम्रकैद

DNA बना सबसे बड़ा गवाह, बरेली कोर्ट का सख्त संदेश
बरेली | 16 मार्च (संवाददाता)
रिश्तों को शर्मसार कर देने वाले एक बेहद संवेदनशील मामले में बरेली की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी पुत्र को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
क्या है पूरा मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला भमोरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक युवक पर अपनी ही माता के साथ गंभीर आपराधिक कृत्य करने का आरोप लगाया गया था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि घटना के समय आरोपी के नशे में होने तथा पीड़िता को धमकाने जैसे आरोप भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
नोट: आरोपों की पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर की गई है।
गवाह पलटे, लेकिन विज्ञान बना आधार
सुनवाई के दौरान कुछ गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए, जिससे मामला जटिल होता नजर आया।
लेकिन जांच में सामने आई DNA रिपोर्ट को अदालत ने निर्णायक साक्ष्य मानते हुए कहा कि:
“वैज्ञानिक साक्ष्य परिस्थितियों में सच्चाई स्थापित करने में सक्षम होते हैं।”
अदालत का फैसला
अपर सत्र न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए:
आजीवन कठोर कारावास
✔ ₹22,000 का अर्थदंड
की सजा सुनाई।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अर्थदंड में से ₹20,000 पीड़िता को प्रदान किए जाएं।
अदालत की सख्त टिप्पणी
फैसले में न्यायालय ने कहा कि:
पारिवारिक संबंध किसी अपराध को कम नहीं करते
गवाहों के बदलते बयान के बावजूद न्याय साक्ष्यों पर आधारित होता है
समाज के लिए बड़ा संदेश
यह फैसला कई स्तर पर एक स्पष्ट संदेश देता है:
कानून के सामने कोई भी अपराधी नहीं बच सकता
वैज्ञानिक जांच (DNA) न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाती है
संवेदनशील मामलों में अदालत का रुख सख्त रहेगा


मामला: भमोरा थाना क्षेत्र, बरेली
निर्णय: 16 मार्च 2026
सजा: उम्रकैद + ₹22,000 जुर्माना
मुख्य आधार: DNA साक्ष्य

भाजपा महिला मोर्चा की क्षेत्रीय मंत्री चित्रा देवी ने मनोनीत पार्षदों को दी बधाई

गोरखपुर 17 मार्च। भाजपा महिला मोर्चा की क्षेत्रीय मंत्री चित्रा देवी ने उत्तर प्रदेश शासन नगर विकास से नामित/नव नियुक्त गोरखपुर नगर निगम के कुल 10 मनोनीत पार्षद आदरणीय रितेश सिंह , दुर्गेश बजाज , अष्टभुजा श्रीवास्तव , संजय कुमार वैश्य , आलोक सिंह विशेन , वीर सिंह सोनकर , शिवम पांडेय , अरविंद निषाद , चंदन आर्या , ममता जायसवाल को हृदय की गहराईयों से हार्दिक बधाई दी हैं।

उन्होंने कहा कि मनोनीत कर सरकार ने कर्मठ कार्यकर्ताओं का सम्मान किया है । उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए आभार जताया है ।

 

“मेहदावल में प्रसव के दौरान उठे सवाल, परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप”

संत कबीर नगर जिले के मेहदावल क्षेत्र में एक निजी अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
बेलहर कला निवासी एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि उनकी गर्भवती पत्नी का समय से पहले ऑपरेशन किया गया…
और पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधा के अभाव में नवजात की मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रसूता को पेट में दर्द होने पर परिजन मेहदावल स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद डॉक्टर द्वारा सामान्य डिलीवरी संभव न होने की बात कही गई और तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी गई।
परिवार का कहना है कि डॉक्टर की चेतावनी से घबराकर उन्होंने ऑपरेशन की अनुमति दे दी…
जिसके बाद बच्चे का जन्म हुआ, लेकिन कुछ ही समय बाद उसकी हालत गंभीर बताई गई और उसे रेफर कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि नवजात को पहले खलीलाबाद और फिर गोरखपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया…
जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रसव की संभावित तिथि आगे की थी…
ऐसे में समय से पहले ऑपरेशन और अस्पताल में पर्याप्त आपातकालीन सुविधाओं की कमी इस घटना का कारण हो सकती है।
हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासनिक एंगल (सुरक्षित लाइन)
फिलहाल मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जांच की बात कही जा रही है…
जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

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