ककरहवा में छात्र-छात्राओं, एसएसबी और सामाजिक संस्थाओं की संयुक्त रैली, ‘सतर्क समाज ही रोक सकता है मानव तस्करी’
ककरहवा में छात्र-छात्राओं, एसएसबी और सामाजिक संस्थाओं की संयुक्त रैली, ‘सतर्क समाज ही रोक सकता है मानव तस्करी’

स्थान: ककरहवा, सिद्धार्थनगर
अवसर: अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रोकथाम दिवस
मुख्य उद्देश्य: मानव तस्करी के प्रति जनजागरूकता और सामाजिक सहभागिता बढ़ाना

भारत-नेपाल सीमा पर मानव तस्करी के खिलाफ गुरुवार को जागरूकता की मजबूत आवाज गूंजी। सिद्धार्थनगर के सीमावर्ती कस्बा ककरहवा में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रोकथाम दिवस पर छात्र-छात्राओं, एसएसबी, शिक्षकों और सामाजिक संस्थाओं ने विशाल जागरूकता रैली निकालकर लोगों को इस गंभीर अपराध के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया। सीमा क्षेत्र में आयोजित यह अभियान आमजन को जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
मुख्य खबर
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा से लगे ककरहवा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रोकथाम दिवस के अवसर पर मानव सेवा संस्थान, गोरखपुर (शाखा ककरहवा) एवं राजकीय इंटर कॉलेज ककरहवा के संयुक्त तत्वावधान में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत राजकीय इंटर कॉलेज परिसर से हुई, जहां से छात्र-छात्राओं ने हाथों में जागरूकता संबंधी बैनर और तख्तियां लेकर रैली निकाली। रैली ककरहवा बाजार एवं सीमा क्षेत्र के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। इस दौरान प्रतिभागियों ने मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता से जुड़े नारे लगाकर लोगों से सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना संबंधित एजेंसियों को देने की अपील की।
रैली के समापन पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के ककरहवा इंचार्ज असिस्टेंट कमांडेंट नीलेश मासुले ने कहा कि मानव तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी मुद्दा है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकों की सतर्कता और समय पर दी गई सूचना इस अपराध की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मानव सेवा संस्थान की आलिया गुप्ता (FAC), अखिलेश कुमार (CH) तथा मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान के राम शंकर (ब्लॉक कोऑर्डिनेटर) ने छात्र-छात्राओं को मानव तस्करी के विभिन्न स्वरूपों, इसके दुष्परिणामों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही इस अपराध के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय कुमार श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों से समाज में जागरूकता फैलाने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित विभागों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में शिक्षक-शिक्षिकाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही। अंत में सभी प्रतिभागियों ने मानव तस्करी मुक्त समाज के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।
भारत-नेपाल सीमा पर निकली जागरूकता रैली।
छात्र-छात्राओं ने मानव तस्करी के खिलाफ दिया संदेश।
एसएसबी व सामाजिक संस्थाओं ने किया संयुक्त आयोजन।
सीमा क्षेत्र में लोगों से सतर्क रहने की अपील।
मानव तस्करी मुक्त समाज बनाने का लिया संकल्प।
संपादकीय टिप्पणी
मानव तस्करी एक गंभीर सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय अपराध है, जिसकी रोकथाम केवल सुरक्षा एजेंसियों के भरोसे संभव नहीं। समाज, विद्यालय, परिवार और प्रशासन की संयुक्त जागरूकता ही इस अपराध के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच बन सकती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे अभियान लोगों को सचेत करने और अपराधियों के मंसूबों को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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