रेडवरिया में मनरेगा कार्यों को लेकर उठे गंभीर सवाल, शिकायत से सरकारी रिकॉर्ड तक जांच की मांग
मस्टर रोल में दर्ज हाजिरी, मौके की तस्वीरें और कार्यस्थल बोर्ड के बीच तालमेल की जांच की जरूरत

सिद्धार्थनगर/बढ़नी। ग्राम पंचायत रेडवरिया में मनरेगा एवं विकास कार्यों को लेकर एक शिकायत सामने आने के बाद सरकारी कार्यों की गुणवत्ता, श्रमिकों की उपस्थिति और अभिलेखों के मिलान को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता ने खंड विकास अधिकारी, बढ़नी को प्रार्थना-पत्र देकर विभिन्न विकास कार्यों की जांच की मांग की है। शिकायत के साथ कार्यस्थल की तस्वीरें और अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए हैं।

उपलब्ध कार्यस्थल के बोर्ड पर महादेव बुजुर्ग क्षेत्र से अनवर मास्टर के खेत होते हुए याकूब के खेत तक मिट्टी कार्य का उल्लेख दिखाई देता है। बोर्ड पर कार्य आईडी 3151004018/LD/958486255824768725, कार्य प्रारंभ तिथि 05 दिसंबर 2024 तथा प्रतिदिन मजदूरी 237 रुपये अंकित दिखाई देती है।
शिकायत में मनरेगा हाजिरी पर भी सवाल
शिकायत-पत्र में ग्राम पंचायत के विभिन्न विकास कार्यों को लेकर कई बिंदुओं पर जांच की मांग की गई है। इसमें मनरेगा श्रमिकों की उपस्थिति को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने कुछ हाजिरियों को कथित रूप से गलत दर्ज किए जाने की बात कही है।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए और अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभागीय जांच के बाद ही निकलेगा।
सरकारी पोर्टल के स्क्रीनशॉट में दर्ज है श्रमिकों की उपस्थिति
उपलब्ध मनरेगा पोर्टल के स्क्रीनशॉट में उत्तर प्रदेश, जिला सिद्धार्थनगर, ब्लॉक बढ़नी और ग्राम पंचायत रेडवरिया से संबंधित कार्य एवं श्रमिक उपस्थिति का रिकॉर्ड दिखाई देता है। 19 और 20 सितंबर 2026 के रिकॉर्ड में अलग-अलग मस्टर रोल पर श्रमिकों की उपस्थिति Present दर्ज दिखाई देती है।
वहीं उपलब्ध दैनिक उपस्थिति रिकॉर्ड में 29 सितंबर 2026 को रेडवरिया के लिए एक कार्य, 20 मस्टर रोल और 187 persondays दर्ज दिखाई देते हैं। एक अन्य स्क्रीनशॉट में 1 अक्टूबर 2026 को एक कार्य, एक मस्टर रोल और 10 persondays दर्ज दिखाई देते हैं।
इन आंकड़ों को मात्र देखकर किसी प्रकार की अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अलग-अलग तारीखों और मस्टर रोल के रिकॉर्ड का विभागीय अभिलेखों से मिलान आवश्यक है।
मौके की तस्वीरों ने भी खड़े किए सवाल

उपलब्ध मौके की तस्वीरों में मिट्टी का कार्य, जलभराव और जलनिकासी से जुड़ी स्थिति दिखाई देती है। कुछ तस्वीरों में कार्यस्थल का बोर्ड भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

अब सवाल यह है कि सरकारी अभिलेख में दर्ज कार्य की मात्रा और मौके पर कराया गया वास्तविक कार्य कितना है? इसका जवाब विभागीय तकनीकी जांच और माप के बाद ही सामने आ सकता है।
पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के दौरान—
मस्टर रोल में दर्ज श्रमिकों की वास्तविक उपस्थिति,
NMMS उपस्थिति एवं जियो-टैग फोटो,
श्रमिकों के जॉब कार्ड,
मजदूरी भुगतान का रिकॉर्ड,
कार्य का स्वीकृत एस्टीमेट,
एमबी यानी Measurement Book,
मौके पर कराए गए कार्य की वास्तविक मात्रा,
कार्य की जियो-लोकेशन,
मजदूरी एवं सामग्री पर हुए खर्च का आपस में मिलान किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
शिकायत सही या गलत, जांच से ही होगा साफ
रेडवरिया का यह मामला फिलहाल शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर उठे सवालों का मामला है। उपलब्ध सामग्री किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करती। यदि जांच में रिकॉर्ड और मौके के कार्य में अंतर मिलता है तो संबंधित स्तर पर नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही नहीं पाए जाते हैं, तो यह तथ्य भी सार्वजनिक होना चाहिए।
जनहित का सवाल यही है कि मनरेगा और विकास कार्यों के लिए जारी सरकारी धन का उपयोग रिकॉर्ड के अनुसार और निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ या नहीं। इसका स्पष्ट जवाब निष्पक्ष जांच और मौके के सत्यापन से ही सामने आएगा।
नोट: यह खबर उपलब्ध शिकायत-पत्र, कार्यस्थल की तस्वीरों, कार्य बोर्ड और उपलब्ध मनरेगा पोर्टल रिकॉर्ड के आधार पर तैयार की गई है। इसमें लगाए गए आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। संबंधित ग्राम पंचायत एवं विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना उचित होगा।
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