शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, पांच सूत्रीय मांगों के समाधान की उठाई आवाज

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सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में पिछले 26 वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षामित्रों की विभिन्न समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन कलेक्ट्रेट में अपर जिलाधिकारी गौरव श्रीवास्तव को दिया गया।
संघ के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत यादव ने कहा कि शासन स्तर से शिक्षामित्रों के हित में कई आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन अनेक जनपदों में उनका पूर्ण पालन अभी तक नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि 3 जनवरी 2025 को जारी शासनादेश के तहत शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय में वापसी तथा महिला शिक्षामित्रों को उनके पति के निवास स्थान की ग्राम पंचायत स्थित विद्यालय में स्थानांतरण का प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद लखनऊ और बाराबंकी को छोड़कर अधिकांश जिलों में प्रक्रिया अधूरी है, जिससे कई शिक्षामित्रों को प्रतिदिन 80 से 90 किलोमीटर तक की दूरी तय कर विद्यालय पहुंचना पड़ रहा है।
ज्ञापन में संघ ने बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के लिए आयोजित होने वाली विशेष टीईटी परीक्षा में शिक्षामित्रों को सम्मिलित करने का अवसर देने की मांग की। साथ ही टीईटी एवं एनसीटीई के मानकों को पूरा करने वाले लगभग 60 हजार शिक्षामित्रों को सुपरटेट से छूट देकर शिक्षक पद पर समायोजित करने की भी मांग उठाई गई।
इसके अतिरिक्त शिक्षामित्रों को 11 माह के बजाय 12 माह का मानदेय, योग्यता एवं अनुभव के आधार पर सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने तथा सेवा के दौरान आकस्मिक निधन होने पर उनके आश्रित परिवार को आर्थिक सहायता एवं एक सदस्य को योग्यता के अनुसार नौकरी दिए जाने की भी मांग की गई।
जिला महामंत्री यशवंत सिंह ने मुख्यमंत्री से शिक्षामित्रों की समस्याओं के शीघ्र एवं स्थायी समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।
इस दौरान जिला संरक्षक श्याम नारायण त्रिपाठी, अशोक मिश्रा, उपेंद्र सिंह, धर्मेंद्र त्रिपाठी, सुनील मिश्रा, यूनुस खान, अनुपमा द्विवेदी, घनश्याम पांडेय, अखिलेश त्रिपाठी, लवकुश, मुक्तनाथ सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र उपस्थित रहे।
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