17 साल से रुकी चकबंदी को मिलेगी रफ्तार? प्रशासन ने गांव पहुंचकर शुरू किया जनजागरूकता अभियान

एडीएम (न्याय) डॉ. ज्ञान प्रकाश ने ग्रामीणों से किया संवाद, ड्रोन, रोवर और AI तकनीक से पारदर्शी चकबंदी का दिया भरोसा, आम सहमति से आगे बढ़ेगी प्रक्रिया।
स्थान: ग्राम सोनौरा तप्पा नादेपार, तहसील नौगढ़, सिद्धार्थनगर
कार्यक्रम: चकबंदी जागरूकता अभियान
सिद्धार्थनगर।
जनपद के ग्राम सोनौरा तप्पा नादेपार में वर्षों से रुकी चकबंदी प्रक्रिया को फिर से गति देने के उद्देश्य से प्रशासन ने जनजागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। इसी क्रम में अपर जिलाधिकारी (न्याय) एवं उप संचालक चकबंदी डॉ. ज्ञान प्रकाश ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद किया और आधुनिक तकनीक के माध्यम से पारदर्शी एवं विवादमुक्त चकबंदी का भरोसा दिलाया।
गांव के प्राथमिक विद्यालय में आयोजित बैठक में चकबंदी अधिकारी राजेंद्र प्रसाद यादव, सहायक चकबंदी अधिकारी राजेश मिश्रा, ग्राम प्रधान श्रीमती रीता, चकबंदी समिति के सदस्य तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने अपनी शंकाएं रखते हुए बताया कि गांव में पहले से चकरोड, सेक्टर मार्ग, प्राथमिक विद्यालय, पंचायत भवन और आंगनबाड़ी जैसी सार्वजनिक सुविधाएं पर्याप्त हैं तथा प्रथम चक्र की चकबंदी से वे संतुष्ट हैं। इसी कारण नई चकबंदी को लेकर उनके मन में कुछ आशंकाएं बनी हुई हैं।
ग्रामीणों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए डॉ. ज्ञान प्रकाश ने कहा कि द्वितीय चक्र की चकबंदी में केवल आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं के लिए ही नाममात्र की कटौती की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार पूरी प्रक्रिया में ड्रोन सर्वे, रोवर तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जाएगा, जिससे भूमि अभिलेख और नक्शे अधिक सटीक, पारदर्शी और डिजिटल स्वरूप में तैयार होंगे।
उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक से चकरोड, नालियां और खेतों की वास्तविक सीमाएं स्पष्ट होंगी, जिससे भूमि विवाद और अवैध कब्जों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। साथ ही किसानों को बड़े और व्यवस्थित खेत मिलने से खेती की लागत घटेगी तथा उत्पादन और आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
हालांकि प्रशासन की ओर से दी गई विस्तृत जानकारी के बाद ग्रामीणों में चकबंदी को लेकर उत्सुकता बढ़ी, लेकिन पुरानी व्यवस्था से संतुष्ट होने के कारण उन्होंने अभी अंतिम सहमति नहीं दी। इस पर एडीएम (न्याय) ने किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें विचार के लिए समय दिया।
बैठक के अंत में डॉ. ज्ञान प्रकाश ने चकबंदी अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव में लगातार चौपाल और जनसंवाद आयोजित किए जाएं, ताकि प्रत्येक किसान की शंकाओं का समाधान कर पूर्ण आम सहमति के आधार पर चकबंदी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
सोनौरा तप्पा नादेपार में वर्षों से रुकी चकबंदी प्रक्रिया को पुनः शुरू कराने के लिए प्रशासन ने जनसंवाद अभियान शुरू किया। एडीएम (न्याय) डॉ. ज्ञान प्रकाश ने ग्रामीणों को ड्रोन, रोवर और AI आधारित आधुनिक चकबंदी के लाभ बताए तथा सहमति बनाकर प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
समाचार टिप्पणी
भूमि विवादों को कम करने, अभिलेखों को आधुनिक बनाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित चकबंदी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि किसी भी गांव में ऐसी प्रक्रिया तभी सफल हो सकती है जब ग्रामीणों का विश्वास और व्यापक सहमति दोनों साथ हों। प्रशासन का संवाद आधारित प्रयास इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा सकता है।
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