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गोरखपुर में करोड़ों के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार

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FT NEWS DIGITAL “सच और…कुछ नहीं” गोरखपुर | ब्यूरो रिपोर्ट : धनेश कुमार

फर्जी दस्तावेजों से बनते थे मर्चेंट क्यूआर कोड, देशभर में साइबर ठगी से जुड़े करोड़ों के लेन-देन की जांच शुरू

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13 मोबाइल, 5 सिम कार्ड, 1308 साउंड पॉड और 866 क्यूआर स्कैनर बरामद

 फर्जी आधार, पैन कार्ड और बैंक खातों के जरिए चल रहा था नेटवर्क

 कई राज्यों में दर्ज साइबर शिकायतों से जुड़े मिले सुराग

 पुलिस अन्य आरोपियों और नेटवर्क के विस्तार की जांच में जुटीसा

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रांश

गोरखपुर पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी दस्तावेजों के जरिए मर्चेंट क्यूआर कोड बनाकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन के संकेत मिले हैं। पुलिस को मामले में और बड़े खुलासों की उम्मीद है।

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गोरखपुर

साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गोरखपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों की मदद से विभिन्न डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म पर मर्चेंट खाते तैयार कर साइबर अपराधियों को सुविधा उपलब्ध कराता था।

पुलिस अधीक्षक नगर के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी कोतवाली के पर्यवेक्षण में कोतवाली पुलिस, साइबर कमांडो टीम और जनपदीय एंटी थेफ्ट टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संकेत राय, तौहीद आलम उर्फ गोलू और राज सिंह के रूप में हुई है।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 13 मोबाइल फोन, 5 सिम कार्ड, 1308 साउंड पॉड तथा 866 क्यूआर स्कैनर बरामद किए हैं। बरामद मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों की जांच में कई फर्जी दस्तावेज, बैंक खातों से संबंधित जानकारी तथा संदिग्ध डिजिटल रिकॉर्ड मिलने की बात सामने आई है।

पुलिस जांच के अनुसार आरोपी कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों के माध्यम से डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म पर मर्चेंट क्यूआर कोड तैयार कराते थे। इन खातों का उपयोग संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के लिए किया जाता था। जांच में ऐसे कई बैंक खातों की जानकारी मिली है जिनसे जुड़े मामलों में देश के विभिन्न राज्यों से साइबर शिकायतें दर्ज होने के संकेत प्राप्त हुए हैं।

पूछताछ के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि गिरोह लोगों को प्रलोभन देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। बाद में इन खातों को डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म पर मर्चेंट के रूप में पंजीकृत कर उनसे जुड़े क्यूआर कोड और साउंड पॉड सक्रिय किए जाते थे। इससे खातों में अधिक लेन-देन दर्शाकर उन्हें सक्रिय बनाए रखने का प्रयास किया जाता था।

पुलिस ने बरामदगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित धाराओं तथा आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की गहन जांच जारी है और पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य संभावित सदस्यों तथा उनके नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर साइबर अपराध से जुड़े और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

 

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