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सिद्धार्थनगर बार एसोसिएशन की बड़ी कार्रवाई: अधिवक्ता इजहार अहमद खान की सदस्यता समाप्त, चैम्बर सील

सिद्धार्थनगर। सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी ने अधिवक्ता इजहार अहमद खान के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी सदस्यता समाप्त कर दी है। कार्यकारिणी के सर्वसम्मत निर्णय के बाद उनके चैम्बर को भी तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।

आपातकालीन बैठक में लिया गया निर्णय

जानकारी के अनुसार, दिनांक 03 फरवरी 2026 को सायं 4 बजे बार एसोसिएशन की आपातकालीन बैठक अध्यक्ष अखण्ड प्रताप सिंह की अध्यक्षता एवं महामंत्री कृपाशंकर त्रिपाठी के संचालन में आयोजित की गई। बैठक में सभी कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि इजहार अहमद खान द्वारा अधिवक्ता समुदाय के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग कार्यकारिणी को सुनाई गई। इसके बाद उन्हें 6 फरवरी 2026 तक स्पष्टीकरण देने हेतु नोटिस जारी किया गया था।

स्पष्टीकरण न मिलने पर बढ़ी कार्रवाई

निर्धारित समय तक संतोषजनक जवाब न मिलने पर 6 फरवरी को दोपहर 1 बजे पुनः कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई। बैठक में पूर्व में लगे आरोपों और हालिया घटनाओं पर चर्चा के बाद कार्यकारिणी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

कार्यकारिणी ने जताई गंभीर आपत्ति

बैठक में बताया गया कि अधिवक्ता पर पूर्व में भी विवादित आचरण के आरोप लग चुके हैं। हालिया घटना के बाद बार परिसर और अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश का माहौल बताया गया। कार्यकारिणी ने इसे बार की गरिमा और अनुशासन के विरुद्ध मानते हुए कड़ा कदम उठाया।

सदस्यता समाप्त, चैम्बर किया गया सील

कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से इजहार अहमद खान की बार एसोसिएशन सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया। साथ ही उनके चैम्बर को सील कर कार्यकारिणी के नियंत्रण में लेने का आदेश दिया गया, जिसका तत्काल अनुपालन भी कराया गया।

बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा कि

बार एसोसिएशन अध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह और पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन की गरिमा, अनुशासन और पेशे की मर्यादा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है, और भविष्य में भी किसी भी अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी नौकरी से पहले उजड़ा घर! खेसरहा हत्याकांड का 24 घंटे में खुलासा, चार गिरफ्तार

सिद्धार्थनगर।
खेसरहा थाना क्षेत्र के बहुचर्चित और सनसनीखेज हत्याकांड का सिद्धार्थनगर पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर बड़ी सफलता हासिल की है। सरकारी नौकरी मिलने से ठीक पहले एक नवयुवक की बेरहमी से हत्या के मामले में पुलिस ने चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त आला-ए-क़त्ल व मोटरसाइकिल बरामद की है।


यह दर्दनाक घटना खेसरहा थाना क्षेत्र के बनुहिया बुजुर्ग गांव की है, जहां निवासी मनोज कुमार की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। मनोज के पिता सफाईकर्मी थे, जिनका कुछ समय पूर्व निधन हो गया था। पिता की मृत्यु के बाद मनोज को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में थी, लेकिन उससे पहले ही एक परिवार की उम्मीदें हमेशा के लिए टूट गईं।
परिजनों के अनुसार, मनोज कुमार सुबह दूध देने के लिए घर से निकले थे। गांव के दक्षिण दिशा में स्थित बाग के पास पुरानी रंजिश को लेकर उन पर जानलेवा हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल मनोज को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में आक्रोश और शोक का माहौल बन गया था।
इस चुनौतीपूर्ण मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद के नेतृत्व तथा क्षेत्राधिकारी बांसी सुश्री रोहिणी यादव के पर्यवेक्षण में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने वैज्ञानिक, तकनीकी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर तेज़ और सटीक कार्रवाई करते हुए चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।

इस कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम में रहे:
अनूप कुमार मिश्र – थानाध्यक्ष, खेसरहा
उप निरीक्षक हरेंद्र चौहान – प्रभारी सर्विलांस सेल (मय टीम)
उप निरीक्षक राघवेन्द्र प्रताप यादव – थाना खेसरहा
उप निरीक्षक रवि प्रताप सिंह सेंगर – थाना खेसरहा
हेड कांस्टेबल राहुल सिंह
हेड कांस्टेबल रामकिशुन
हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र कुमार
कांस्टेबल अजीत कुमार
कांस्टेबल अनिल कुमार
महिला कांस्टेबल संगीता देवी

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। सभी अभियुक्तों को कानूनी प्रक्रिया के तहत माननीय न्यायालय भेज दिया गया है, जबकि पुलिस आगे की विधिक कार्रवाई में जुटी हुई है।

यह घटना समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि आपसी रंजिश और हिंसा का अंत केवल पछतावे, बर्बादी और जेल तक ही पहुंचता है।

सरकारी नौकरी से पहले उजड़ा घर! खेसरहा हत्याकांड का 24 घंटे में खुलासा, चार गिरफ्तार

सिद्धार्थनगर।
खेसरहा थाना क्षेत्र के बहुचर्चित और सनसनीखेज हत्याकांड का सिद्धार्थनगर पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर बड़ी सफलता हासिल की है। सरकारी नौकरी मिलने से ठीक पहले एक नवयुवक की बेरहमी से हत्या के मामले में पुलिस ने चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त आला-ए-क़त्ल व मोटरसाइकिल बरामद की है।


यह दर्दनाक घटना खेसरहा थाना क्षेत्र के बनुहिया बुजुर्ग गांव की है, जहां निवासी मनोज कुमार की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। मनोज के पिता सफाईकर्मी थे, जिनका कुछ समय पूर्व निधन हो गया था। पिता की मृत्यु के बाद मनोज को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में थी, लेकिन उससे पहले ही एक परिवार की उम्मीदें हमेशा के लिए टूट गईं।
परिजनों के अनुसार, मनोज कुमार सुबह दूध देने के लिए घर से निकले थे। गांव के दक्षिण दिशा में स्थित बाग के पास पुरानी रंजिश को लेकर उन पर जानलेवा हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल मनोज को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में आक्रोश और शोक का माहौल बन गया था।
इस चुनौतीपूर्ण मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद के नेतृत्व तथा क्षेत्राधिकारी बांसी सुश्री रोहिणी यादव के पर्यवेक्षण में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने वैज्ञानिक, तकनीकी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर तेज़ और सटीक कार्रवाई करते हुए चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।

इस कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम में रहे:
अनूप कुमार मिश्र – थानाध्यक्ष, खेसरहा
उप निरीक्षक हरेंद्र चौहान – प्रभारी सर्विलांस सेल (मय टीम)
उप निरीक्षक राघवेन्द्र प्रताप यादव – थाना खेसरहा
उप निरीक्षक रवि प्रताप सिंह सेंगर – थाना खेसरहा
हेड कांस्टेबल राहुल सिंह
हेड कांस्टेबल रामकिशुन
हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र कुमार
कांस्टेबल अजीत कुमार
कांस्टेबल अनिल कुमार
महिला कांस्टेबल संगीता देवी

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। सभी अभियुक्तों को कानूनी प्रक्रिया के तहत माननीय न्यायालय भेज दिया गया है, जबकि पुलिस आगे की विधिक कार्रवाई में जुटी हुई है।

यह घटना समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि आपसी रंजिश और हिंसा का अंत केवल पछतावे, बर्बादी और जेल तक ही पहुंचता है।

UGC-NET में हर्ष प्रताप सिंह का शानदार प्रदर्शन, सांसद रविकिशन ने दी बधाई

गोरखपुर: UGC-NET परीक्षा 2026 के परिणाम में गोरखपुर के लिए गर्व की खबर सामने आई है। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग के छात्र हर्ष प्रताप सिंह का चयन हुआ है। खास बात यह है कि विभाग से इस परीक्षा में एकमात्र चयनित अभ्यर्थी के रूप में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है।

सांसद रवि किशन ने दी बधाई

हर्ष की इस सफलता पर गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रवि किशन शुक्ला ने उन्हें बधाई संदेश जारी करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। रविकिशन ने कहा कि,

प्रिय हर्ष प्रताप सिंह जी

“कल UGC – NET परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा हमको अवगत कराया गया कि दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के शिक्षाशास्त्र विभाग से एकमात्र आपका चयन हुआ है। विभाग की इस उपलब्धि से मन प्रसन्नचित हो उठा । आपको आपके भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं महादेव आपको शीघ्र डॉक्टर की उपाधि प्रदान कराएं । विभाग द्वारा यह सूचना पाया और ऐसा भी सुना कि आप भविष्य में इससे भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे और सभी के चहेते बने रहेंगे। यह भी ज्ञात हुआ कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक कार्यक्रम में सदैव आपका प्रदर्शन अच्छा रहा है।आपको आपके उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई प्रिय।”

बेहतर प्रदर्शन के लिए पहचाने जाते हैं हर्ष

विश्वविद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, हर्ष प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में हमेशा सक्रिय और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों में शामिल रहे हैं। उनकी इस सफलता से अन्य छात्रों को भी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरणा मिलेगी।

विभाग के लिए गर्व का क्षण

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, हर्ष प्रताप सिंह का चयन शिक्षाशास्त्र विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विभाग के शिक्षकों और छात्रों में इस सफलता को लेकर खुशी का माहौल है। कुलपति पूनम टंडन, प्रोफेसर मीतू सिंह कौशिक आदि लोगों ने हर्ष की इस सफलता पर खुशी व्यक्त की है।

यह उपलब्धि न केवल छात्र की मेहनत और लगन को दर्शाती है, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को भी मजबूत करती है।

परिवार और विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल

हर्ष प्रताप सिंह की इस सफलता से पिता अजय सिंह, माता पुनीता सिंह, भाई राघवेंद्र, बहन राजनीता, हर्षिता, आकाश, शिवम तथा अन्य लोगों ने खुशी जाहिर की है।

तिरुपति लड्डू घी प्रकरण: CBI की चार्जशीट से उठा आस्था और व्यवस्था पर बड़ा सवाल

नई दिल्ली / तिरुपति।
देश के सबसे प्रतिष्ठित और आस्था से जुड़े धार्मिक स्थलों में शामिल तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) से जुड़ा एक गंभीर मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। लड्डू प्रसाद निर्माण में उपयोग किए गए घी की आपूर्ति को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विस्तृत जांच के बाद अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है।
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि तिरुपति मंदिर में वितरित होने वाला लड्डू प्रसाद न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का प्रतीक भी माना जाता है।
जांच में क्या सामने आया
CBI-SIT की जांच के अनुसार, प्रसाद निर्माण के लिए वर्षों तक जिस घी की आपूर्ति की गई, उसकी गुणवत्ता, स्रोत और आपूर्ति प्रक्रिया को लेकर कई स्तरों पर अनियमितताएं पाई गईं।
जांच एजेंसी का कहना है कि घी की सप्लाई तय मानकों और प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं थी।
बताया गया है कि यह आपूर्ति लंबे समय तक और बड़ी मात्रा में की गई, जिसकी कुल मात्रा लाखों किलोग्राम तक बताई जा रही है। इसी आपूर्ति श्रृंखला में गड़बड़ी के संकेत मिलने के बाद मामला CBI तक पहुंचा।
चार्जशीट और आगे की प्रक्रिया
CBI ने अपनी जांच पूरी कर संबंधित अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है।
चार्जशीट में आपूर्तिकर्ताओं, संबंधित व्यक्तियों और व्यवस्था से जुड़े कुछ जिम्मेदार पक्षों की भूमिका का उल्लेख किया गया है। हालांकि, जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही किया जाएगा।
CBI सूत्रों के अनुसार, मामले में दस्तावेज़ी साक्ष्य, आपूर्ति रिकॉर्ड और गुणवत्ता जांच रिपोर्ट को आधार बनाया गया है।
आस्था से जुड़ा मामला, इसलिए संवेदनशीलता अधिक
तिरुपति मंदिर में लड्डू प्रसाद की एक विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है। ऐसे में इस मामले ने आस्था, पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास जैसे मुद्दों को भी केंद्र में ला दिया है।
हालांकि, मंदिर प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में प्रसाद निर्माण और वितरण व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित और सुरक्षित है, तथा भविष्य में ऐसी किसी भी संभावना को रोकने के लिए सप्लाई सिस्टम को और सख्त किया गया है।
आधिकारिक पक्ष
CBI और प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामला अदालत के विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।
फिलहाल किसी भी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।नि

ष्कर्ष

तिरुपति लड्डू घी से जुड़ा यह प्रकरण केवल एक आपूर्ति विवाद नहीं, बल्कि आस्था से जुड़े सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही का मामला बन गया है।
CBI की चार्जशीट के बाद अब सभी की निगाहें अदालत की कार्यवाही और आगे सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं।

सिद्धार्थनगर में कानून व्यवस्था पर सवाल: व्यापारी से मारपीट के बाद कार्रवाई न होने पर व्यापारियों का सदर थाने पर घंटों प्रदर्शन

सिद्धार्थनगर नगर क्षेत्र में हाल ही में हुए एक विवाद ने शहर की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक व्यापारी के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद जब अपेक्षित पुलिस कार्रवाई नहीं हुई, तो व्यापारिक संगठनों में रोष व्याप्त हो गया।
शनिवार को व्यापारियों ने पहले पीड़ित के आवास पर बैठक की, जिसके बाद संगठित रूप से सदर थाने पहुंचकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन कई घंटों तक चला, जिसमें व्यापारियों ने अपनी नाराज़गी जताते हुए पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
व्यापारियों का पक्ष
व्यापारियों का कहना है कि यदि किसी भी नागरिक के साथ सार्वजनिक स्थान या प्रतिष्ठान में इस प्रकार की घटना होती है, तो उस पर त्वरित कार्रवाई होना जरूरी है।
उनका यह भी कहना है कि व्यापारिक समुदाय कानून का सम्मान करता है, लेकिन अन्याय को मौन रहकर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
धरने के दौरान धार्मिक प्रतीक के रूप में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया, जिससे प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण बना रहा।
घटनाक्रम क्या रहा
सूत्रों के अनुसार, शहर के बाजार क्षेत्र में पुराने विवाद को लेकर कुछ युवकों के बीच कहासुनी हुई, जो बाद में हाथापाई में बदल गई।
बताया जा रहा है कि स्थिति उस समय बिगड़ी जब बड़ी संख्या में युवक मौके पर एकत्र हो गए, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात को नियंत्रित किया।
 वार्ता के बाद स्थिति सामान्य
शाम के समय दोनों पक्षों के प्रतिनिधि, चिकित्सा संस्थान से जुड़े वरिष्ठ डॉक्टर और प्रशासनिक अधिकारी सदर थाने पर एकत्र हुए।
सीओ स्तर के अधिकारी की मौजूदगी में विस्तृत बातचीत हुई, जिसमें पूर्व घटनाओं, नुकसान की भरपाई और भविष्य में ऐसे विवाद न होने पर सहमति बनी।
आपसी समझ और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों ने फिलहाल किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से दूरी बनाए रखने का निर्णय लिया।
प्रशासन का रुख
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित हो चुका है और वर्तमान में स्थिति पूरी तरह सामान्य है।
प्रशासन का दावा है कि भविष्य में किसी भी तरह की कानून व्यवस्था भंग करने वाली गतिविधि पर सख्त नजर रखी जाएगी।