फ़िराक़ की शायरी में आज भी जिंदा है गोरखपुर की साहित्यिक विरासत

130वीं जयंती पर युवा कवियों, शायरों और समाजसेवियों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दी श्रद्धांजलि
गोरखपुर, 28 अगस्त।
उर्दू अदब के मशहूर शायर और अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंच पर गोरखपुर का नाम रोशन करने वाले रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’ गोरखपुरी की 130वीं जयंती पर साहित्यिक जगत ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। गोरखपुर लिटरेरी सोसायटी के तत्वावधान में बेतियाहाता स्थित फ़िराक़ गोरखपुरी की प्रतिमा पर युवा कवियों, शायरों एवं समाजसेवियों ने माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर उनके साहित्यिक योगदान को याद किया।
INSET | अदब की दुनिया का अमर नाम
फ़िराक़ गोरखपुरी केवल एक शायर का नाम नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य की उस समृद्ध परंपरा की पहचान हैं, जिसमें भाषा, संवेदना और मानवीय भावनाओं का अद्भुत संगम दिखाई देता है। उनकी रचनाएं आज भी साहित्य प्रेमियों को जोड़ती हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।
INBOX | गोरखपुर को फ़िराक़ पर गर्व
कार्यक्रम में युवा कवि एवं शायर मिन्नत गोरखपुरी ने कहा कि फ़िराक़ गोरखपुरी अपनी शायरी और उर्दू साहित्य के माध्यम से रहती दुनिया तक लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे। उन्होंने कहा कि फ़िराक़ की साहित्यिक विरासत गोरखपुर की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी एवं साहित्य प्रेमी सरदार जसपाल सिंह ने की। उन्होंने कहा कि फ़िराक़ गोरखपुरी पर सिर्फ गोरखपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश को गर्व है। उनके साहित्यिक योगदान ने शहर की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।
कार्यक्रम में युवाओं की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम का संयोजन युवा शायर गौतम गोरखपुरी ने तथा सह-संयोजन ई. बृजमोहन ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी एवं साहित्य प्रेमी एडवोकेट पूजा गुप्ता, अनुराग माझावर, गौतम गोरखपुरी, उत्कर्ष पाठक उत्पल, अभिषेक शर्मा, मोहम्मद अब्दुल्ला, एडवोकेट मिनहाज सिद्दीकी और सुशील सिंह सहित अन्य लोगों ने फ़िराक़ गोरखपुरी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम के अंत में संयोजक गौतम गोरखपुरी ने उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य और समाज के प्रति लोगों की सहभागिता ही ऐसी महान साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।
सारांश
फ़िराक़ गोरखपुरी की 130वीं जयंती पर गोरखपुर में साहित्य प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया। बेतियाहाता स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि कर उनके साहित्यिक योगदान को नमन किया गया। वक्ताओं ने फ़िराक़ की रचनाओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
की धरती से निकली फ़िराक़ की आवाज आज भी अदब की दुनिया में गूंज रही है। उनकी 130वीं जयंती पर शहर के युवा कवियों, शायरों और समाजसेवियों ने एकजुट होकर महान शायर को श्रद्धांजलि दी और उनकी साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
संपादकीय टिप्पणी
साहित्य की असली ताकत यही है कि समय गुजर जाता है, लेकिन शब्द नहीं मरते। फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी ने गोरखपुर को साहित्य के वैश्विक मानचित्र पर पहचान दिलाई। उनकी जयंती पर युवा पीढ़ी का एकत्र होकर उन्हें याद करना इस बात का संकेत है कि महान रचनाकारों की विरासत किताबों तक सीमित नहीं रहती—वह समाज की चेतना में जीवित रहती है। जरूरत है कि फ़िराक़ के साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजन निरंतर होते रहें।
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