फ्रेंड्स टाइम्स
Breaking News
आदेश कागज पर, तबादला जमीन पर बेअसर?

Screenshot 20260829 112923

सीएमओ के स्पष्ट आदेश के बाद भी तीन संविदा कर्मियों की रवानगी पर सवाल, आखिर किसके इशारे पर रुका अनुपालन?

तहसील रिपोर्टर — शोहरतगढ़: कमलेश मिश्रा

Screenshot 20260829 112917


| आदेश की स्याही सूखी नहीं, सवाल खड़े

सिद्धार्थनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से जारी आदेश में तीन संविदा कर्मियों के तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में संबंधित कर्मियों को वर्तमान तैनाती स्थल से कार्यमुक्त होकर नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के लिए स्पष्ट रूप से कहा गया है। बावजूद इसके, यदि आदेश के बाद भी संबंधित कर्मचारी पुराने स्थान पर ही कार्यरत हैं, तो यह प्रशासनिक अनुशासन और आदेश के अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।IMG 20260829 WA0333


| तीन नाम, तीन नई तैनातियां

सीएमओ कार्यालय के 20 अगस्त 2026 के आदेश के अनुसार—

मालती शर्मा, ब्लॉक लेखा प्रबंधक — शोहरतगढ़ से बढ़नी।

सुरेंद्र नाथ पाल, ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर — शोहरतगढ़ से बसंतपुर।

प्रदीप कुमार, ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर — बसंतपुर से शोहरतगढ़।

आदेश में तत्काल प्रभाव से स्थानीय व्यवस्था पर कार्यभार से मुक्त होकर नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण कराने तथा अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।


| सीएमओ के आदेश की अनुपालना पर ही उठे सवाल

शोहरतगढ़। स्वास्थ्य विभाग में स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद अब उसके अनुपालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिद्धार्थनगर की ओर से जारी आदेश में तीन संविदा कर्मियों की तैनाती बदलते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से नवीन स्थानों पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

मगर सवाल यह है कि यदि आदेश जारी होने के बावजूद संबंधित कर्मी पुरानी जगह से कार्यमुक्त नहीं हुए हैं, तो आखिर आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी किसकी है?

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी आदेश में केवल स्थानांतरण का उल्लेख नहीं है, बल्कि संबंधित कर्मचारियों को पुरानी तैनाती से मुक्त कर नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण कराने की बात स्पष्ट रूप से कही गई है।

ऐसे में यदि जमीनी स्तर पर आदेश का अनुपालन नहीं हुआ है तो यह महज एक कर्मचारी की मनमानी का मामला नहीं, बल्कि आदेश के क्रियान्वयन की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़ा करता है।

सबसे बड़ा सवाल—संरक्षण किसका?

यदि संबंधित कर्मचारी वास्तव में स्थानांतरण आदेश के बावजूद पुरानी तैनाती पर काम कर रहे हैं, तो यह पता लगाया जाना जरूरी है कि उन्हें वहां काम करने की अनुमति किस अधिकारी या सक्षम स्तर के आदेश से मिली है।

क्या कार्यमुक्त करने की कार्रवाई नहीं हुई?

क्या नवीन तैनाती स्थल पर ज्वाइन कराने की प्रक्रिया रोक दी गई?

या फिर किसी स्तर पर मौखिक निर्देश के जरिए शासन/विभागीय आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया?

इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष से ही सामने आना चाहिए।

सारांश | आदेश स्पष्ट, अनुपालन की तस्वीर धुंधली

सीएमओ सिद्धार्थनगर द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश की प्रति में तीन कर्मियों की तैनाती बदलने और तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिखाई देते हैं। अब यदि आदेश के बावजूद कोई कर्मचारी पुराने स्थान पर बना हुआ है, तो यह जांच का विषय है कि कार्यभार से मुक्त करने और नवीन तैनाती पर भेजने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

यह खबर किसी कर्मचारी को दोषी घोषित नहीं करती। तथ्यात्मक रूप से यह केवल विभागीय आदेश और उसके संभावित अनुपालन के बीच उठ रहे सवालों को सामने रखती है।

टिप्पणी | सरकारी आदेश की ताकत उसके अनुपालन में होती है

सरकारी दफ्तरों में आदेश जारी होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन उसकी असली परीक्षा तब होती है जब वह जमीन पर लागू किया जाता है। यदि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी कोई कर्मचारी पुरानी जगह पर बना रहता है, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे कि आदेश लागू क्यों नहीं हुआ और जिम्मेदारी किसकी है?

अगर सब कुछ नियम के मुताबिक हुआ है तो विभाग को कार्यमुक्ति और नई तैनाती की स्थिति स्पष्ट करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। और यदि आदेश का अनुपालन नहीं हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारी यह बताएं कि क्यों नहीं हुआ।

सवाल किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि विभागीय आदेश की गरिमा और पारदर्शिता का है।

FT NEWS DIGITAL का सवाल

“जब आदेश में तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण और अनुपालन के निर्देश हैं, तो फिर जमीनी स्तर पर इसकी स्थिति क्या है? अगर कोई कर्मचारी अभी भी पुरानी जगह पर है, तो उसे वहां काम करने की अनुमति किस आधार पर मिली?”

नोट: संबंधित कर्मियों या विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए। इससे खबर की निष्पक्षता और कानूनी मजबूती दोनों बनी रहेंगी।

 

Views: 115

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: कोई भी कंटेंट कॉपी न करें, नहीं तो आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।