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अभयपुर में “विकास” के नाम पर बड़ा खेल…? एक ही फर्म पर लाखों के भुगतान से उठे सवाल

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इंटरलॉकिंग से लेकर हैंडपंप और निर्माण सामग्री तक एक ही फर्म को भुगतान, ग्रामीणों में चर्चा तेज

सिद्धार्थनगर | FT News Digital

 

सिद्धार्थनगर जिले के विकासखंड लोटन अंतर्गत ग्राम पंचायत अभयपुर में विकास कार्यों और सरकारी भुगतान को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पंचायत से जुड़े भुगतान अभिलेखों में “वेदिका कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स” नाम की एक ही फर्म पर लाखों रुपये के भुगतान दर्ज बताए जा रहे हैं। अब लगातार एक ही फर्म के नाम पर हुए भुगतान को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 से लेकर 2026-27 तक इंटरलॉकिंग ईंट, मौरंग, बालू, सीमेंट, सरिया, नाली निर्माण सामग्री, हैंडपंप बोर, हैंडपंप मरम्मत, साफ-सफाई और अन्य विकास कार्यों के नाम पर इसी फर्म को भुगतान दर्शाया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ग्राम पंचायत के अधिकांश कार्यों और सामग्रियों की सप्लाई आखिर एक ही फर्म के माध्यम से कैसे होती रही।

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जीएसटी विवरण और भुगतान में अंतर पर सवाल

मामले में सबसे अधिक चर्चा फर्म के जीएसटी विवरण को लेकर हो रही है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार संबंधित फर्म के जीएसटी नेचर में इलेक्ट्रिक सामान, इंटरलॉकिंग ब्रिक, लकड़ी संबंधित कार्य और सामान्य ठेकेदारी जैसे कार्य दर्ज बताए जा रहे हैं।

जबकि पंचायत अभिलेखों में सीमेंट, मौरंग, बालू, सरिया, हैंडपंप मरम्मत, हैंडपंप बोर और अन्य कई मदों में भी भुगतान दर्शाया गया है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि जिन कार्यों और सामग्रियों का स्पष्ट उल्लेख जीएसटी नेचर में नहीं है, उन मदों में भुगतान किस आधार पर किया गया।

कागजों में विकास बड़ा, धरातल पर क्या स्थिति?

दस्तावेजों में ग्राम पंचायत अभयपुर में विकास कार्यों की तस्वीर काफी बड़ी दिखाई दे रही है, लेकिन वास्तविक स्थिति क्या है, यह भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

यह दावा नहीं किया जा रहा कि कार्य हुए ही नहीं, लेकिन लगातार एक ही फर्म पर भुगतान दर्शाए जाने से पूरा मामला सवालों के घेरे में आ गया है। ग्रामीणों के बीच भी चर्चा है कि जिन कार्यों और सामग्रियों का भुगतान दिखाया गया है, क्या वे वास्तव में उसी स्तर पर धरातल पर मौजूद हैं।

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पंचायत अधिकारी का बयान भी चर्चा में

मामले को लेकर जब ग्राम पंचायत अधिकारी अभयपुर केशभान यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि टेंडर पूर्व में तैनात सचिव द्वारा कराया गया था। साथ ही उन्होंने कहा कि “आगे से सुधार किया जाएगा।”

हालांकि इस बयान के बाद भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार्यक्षेत्र और नियमों को लेकर स्पष्टता नहीं थी तो भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की गई। क्या भुगतान से पहले संबंधित कार्यों और सामग्रियों का विभागीय सत्यापन कराया गया था या नहीं, यह भी जांच का विषय बन गया है।

निष्पक्ष जांच और भौतिक सत्यापन की मांग तेज

मामले को लेकर अब ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा निष्पक्ष जांच तथा मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराने की मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि यदि भुगतान अभिलेखों और वास्तविक कार्यों में अंतर पाया जाता है तो यह पंचायत स्तर पर सरकारी धन के उपयोग और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल होगा।

फिलहाल सभी तथ्य उपलब्ध दस्तावेजों, भुगतान अभिलेखों और संबंधित पक्षों से हुई बातचीत के आधार पर सामने आए हैं। प्रशासनिक जांच और आधिकारिक सत्यापन के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


FT News Digital किसी भी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। मामला जांच और प्रशासनिक सत्यापन के अधीन है।


एक ही फर्म पर लाखों के भुगतान क्यों?

जीएसटी विवरण और भुगतान मदों में अंतर क्यों?

क्या सभी कार्य धरातल पर मौजूद हैं?

भुगतान से पहले सत्यापन हुआ था या नहीं?

क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी?


अभयपुर पंचायत में भुगतान पर उठे सवाल

 एक ही फर्म पर लाखों के भुगतान की चर्चा

जीएसटी विवरण और भुगतान मदों पर सवाल

 भौतिक सत्यापन की मांग तेज

पंचायत अधिकारी का बयान चर्चा में

विकास कार्यों की जांच की उठी मांग


“एक ही फर्म पर लाखों का भुगतान?”

“अभयपुर में विकास या सवाल?”

 

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