नवजात की मौत से मचा हड़कंप, बढ़नी के निजी अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग की पैनी नजर
तीन सदस्यीय जांच समिति गठित, ओटी, लाइसेंस, चिकित्सा सुविधाओं और मानकों की होगी गहन पड़ताल; एक सप्ताह में मांगी गई रिपोर्ट
क्या है मामला?
बढ़नी स्थित निजी अस्पताल में नवजात शिशु की उपचार के दौरान मौत।
स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया।
सीएमओ के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित।
अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और लाइसेंस सहित सभी मानकों की होगी जांच।
रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
बिंदु
जानकारी
मामला
नवजात शिशु की मौत
स्थान
अल हयात हेल्थ केयर एंड फ्रैक्चर क्लीनिक, बढ़नी, शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर
कार्रवाई
तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
जांच के बिंदु
ओटी, लाइसेंस, चिकित्सा सुविधाएं, उपकरण, स्टाफ एवं मानकों का अनुपालन
रिपोर्ट
एक सप्ताह के भीतर सीएमओ को सौंपी जाएगी
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के बढ़नी कस्बे स्थित अल हयात हेल्थ केयर एंड फ्रैक्चर क्लीनिक में नवजात शिशु की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मामले को गंभीर मानते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी होने तक विभाग ने किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से परहेज किया है और कहा है कि आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
विस्तृत खबर
बढ़नी कस्बे के निजी अस्पताल में नवजात शिशु की मौत की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल पहुंची और प्रारंभिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, ऑपरेशन थिएटर (ओटी), साफ-सफाई, आवश्यक उपकरणों, लाइसेंस तथा अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन से संबंधित अभिलेखों और आवश्यक दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्पताल में शासन द्वारा निर्धारित सभी मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, जांच समिति अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, आपातकालीन सेवाओं, नवजात उपचार की व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की भी समीक्षा करेगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और किसी भी पक्ष के साथ पक्षपात नहीं किया जाएगा। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह तय होगा कि किसी प्रकार की प्रशासनिक अथवा कानूनी कार्रवाई आवश्यक है या नहीं।
इधर, नवजात की मौत के बाद क्षेत्र में विभिन्न तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी प्रकार के निष्कर्ष पर न पहुंचें। विभाग का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर निजी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता, लाइसेंस व्यवस्था और निर्धारित मानकों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर होने वाली ऐसी जांचें स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।
अधिकारी का पक्ष
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जांच समिति अस्पताल की चिकित्सा सुविधाओं, ऑपरेशन थिएटर, आवश्यक लाइसेंस, उपकरणों तथा अन्य निर्धारित मानकों की विस्तृत जांच करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सारांश
बढ़नी के निजी अस्पताल में नवजात शिशु की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था, ऑपरेशन थिएटर, लाइसेंस, उपकरण और अन्य मानकों की जांच करेगी। रिपोर्ट एक सप्ताह में सीएमओ को सौंपी जाएगी, जिसके बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति या संस्थान की जिम्मेदारी आधिकारिक रूप से तय नहीं की गई है।
संपादकीय नोट (कानूनी सुरक्षा): इस खबर में किसी भी व्यक्ति या अस्पताल को दोषी नहीं ठहराया गया है। सभी तथ्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू की गई जांच और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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