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बिजली के खम्भे में लगी आग की सूचना पर भड़की PRV 8493, कॉलर को ही सुनाई खरी-खोटी!

बड़ी लापरवाही या संवेदनहीनता?


बांसी, सिद्धार्थनगर

थाना कोतवाली बांसी क्षेत्र के मंगल बाजार स्थित सीएस गली के सामने बीती रात बिजली के खम्भे में अचानक शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई। देखते ही देखते खम्भे से जलती हुई तार नीचे सड़क की ओर गिरने लगी। इसी दौरान बाइक से गुजर रहे एक राहगीर के ऊपर जलती तार गिर गई, जिससे उसके कपड़ों में आग लग गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना रात लगभग 12 बजे की बताई जा रही है। मौके पर मौजूद नगरवासियों ने तत्काल आपातकालीन सहायता के लिए यूपी-112 पर सूचना दी, ताकि पुलिस और संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर राहत कार्य करा सके। लेकिन आरोप है कि सूचना पर पहुंची PRV 8493 की टीम ने राहत पहुंचाने के बजाय कॉलर को ही फटकार लगानी शुरू कर दी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस कर्मियों ने यह कहते हुए नाराजगी जताई कि ऐसी सूचना बिजली विभाग को देनी चाहिए थी, 112 पर क्यों दी गई। जबकि सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस स्वयं हर प्रकार की आकस्मिक स्थिति, आपदा और आपातकालीन घटनाओं में यूपी-112 पर सूचना देने के लिए जनता को लगातार जागरूक करती रही है, ताकि समय रहते सहायता मिल सके और घटनाओं का रिकॉर्ड दर्ज हो सके।

घटना के बाद क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोगों का कहना है कि यदि बिजली के खम्भे में आग लगने जैसी खतरनाक स्थिति में भी जनता 112 पर सूचना नहीं देगी, तो आखिर आपदा के समय किससे मदद मांगी जाए? लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि मौके पर पहुंचे पीआरवी कर्मियों के पास स्थानीय विद्युत विभाग के अधिकारियों या कर्मचारियों के संपर्क नंबर तक उपलब्ध नहीं थे, जिससे तत्काल समन्वय स्थापित कर राहत कार्य कराया जा सके।

नगरवासियों में इस घटना के बाद यह भ्रम भी देखने को मिला कि कहीं यूपी-112 सेवा केवल मारपीट और झगड़े तक ही सीमित तो नहीं समझी जा रही। जबकि आग, सड़क हादसा, बिजली दुर्घटना और अन्य आकस्मिक घटनाओं में भी पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी राहत और समन्वय स्थापित करने की होती है।

हालांकि, इस मामले में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन जिस प्रकार आम नागरिक द्वारा दी गई आपदा संबंधी सूचना पर कथित तौर पर असंतोष जताया गया, उसने पुलिस की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और उच्चाधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं पर जनता को बेहतर और सम्मानजनक सहायता उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

सवाल जो उठ रहे हैं…

क्या आपदा की सूचना देना आम नागरिक की गलती है?

क्या यूपी-112 केवल विवाद और मारपीट तक सीमित सेवा बनकर रह गई है?

क्या पीआरवी वाहनों को संबंधित विभागों के समन्वय हेतु आवश्यक संपर्क सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है?

आखिर आम जनता आपात स्थिति में किसे फोन करे?

प्रशासन से जनता की मांग

क्षेत्रीय लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि:

बिजली के जर्जर तारों और खम्भों की तत्काल जांच कराई जाए।

यूपी-112 कर्मियों को आपदा प्रबंधन और जनसंपर्क व्यवहार को लेकर संवेदनशील प्रशिक्षण दिया जाए।

पीआरवी वाहनों में संबंधित विभागों के आपातकालीन संपर्क नंबर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं।

मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

FT News Digital

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