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एम्बुलेंस माफिया पर बड़ा एक्शन” बीआरडी के प्रधानाचार्य की तहरीर पर केस, मरीजों को गुमराह कर प्राइवेट अस्पताल भेजने वाला गिरोह धराया, 6 गिरफ्तार

गोरखपुर। गोरखपुर में मरीजों की मजबूरी को “मौका” बनाकर खेल रहे एम्बुलेंस माफिया पर आखिरकार पुलिस का शिकंजा कस गया। थाना गुलरिहा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मरीजों को बहला-फुसलाकर प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई को स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे संगठित “दलाली तंत्र” पर बड़ी चोट के रूप में देखा जा रहा है।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. राम कुमार जायसवाल ने लिखित तहरीर देकर मरीजों को गुमराह किए जाने की शिकायत दर्ज कराई। वहीं, अस्पताल परिसर में तैनात सैनिक सुपरवाइजर केदार कुमार पांडे की सतर्कता और सूझबूझ से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान हुई, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

घटना का संक्षिप्त विवरण

14 अप्रैल को बीआरडी मेडिकल के 500 बेड वाली बिल्डिंग पर सरकारी एंबुलेंस से एक बच्चे को लेकर परिजन पहुंचे। वहां तैनात कर्मचारी ने बेड खाली न होने की बात कही। आरोप है कि इसके बाद सरकारी एंबुलेंस चालक ने प्राइवेट अस्पताल के मैनेजर को फोन किया जिसके बाद एम्बुलेंस पहुंची और बीआरडी के मुख्य गेट के पास स्थित शौचालय के पास आ कर खड़ी हो गई। दलाल परिजनों को पैदल ही ले जा रहे थे। शक होने पर ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने पूछताछ की जिसके बाद एम्बुलेंस चालक और परिजन अलग अलग बयान देने लगे। जहां एम्बुलेंस चालक ने घर ले जाने की बात कही, वहीं परिजन प्राइवेट अस्पताल जाने की बात बताए। जिसके बाद मेडिकल पुलिस चौकी को इसकी सूचना दी गई और संदिग्धों को हिरासत में ले लिया गया।

कैसे काम करते है मरीज माफिया?

गैंग में शामिल लोग खासतौर पर बाहर से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को निशाना बनाता है।

मरीज की स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं को कमतर बताया जाता और डर का माहौल बनाकर उन्हें तत्काल “बेहतर इलाज” के नाम पर प्राइवेट अस्पताल भेजने के लिए तैयार किया जाता।

एम्बुलेंस पहले से तैयार रहती है और मरीज को सीधे तयशुदा अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है। जहां से इस पूरे नेटवर्क को मोटा कमीशन मिलता है।

गिरफ्तार अभियुक्तों का नाम व पता

गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान वेदप्रकाश पुत्र मुन्नीलाल, निवासी भागलपुर, थाना पीपीगंज, जनपद गोरखपुर,

राहुल पुत्र रामअनुज, निवासी कटुई, थाना ललिया, जनपद बलरामपुर,

गुंजेश यादव पुत्र झिंगुरी यादव, निवासी बंधवा, थाना रामकोला, जनपद कुशीनगर,

अमन पाण्डेय पुत्र राजकुमार पाण्डेय, निवासी घोरही, थाना महुली, जिला संतकबीरनगर,

अंकित शुक्ला पुत्र मोहन शुक्ला, निवासी पकड़ी मिसराइन, थाना कटया, जिला गोपालगंज (बिहार),

राहुल शर्मा पुत्र सुनील शर्मा, निवासी गाईबेला, थाना सिकरीगंज, जनपद गोरखपुर के रूप में हुई है।

गिरफ्तारी में ये रहे शामिल

उपनिरीक्षक मदन मोहन मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की। टीम में उ.नि

विकास कुमार मिश्रा, उ.नि. राहुल कुमार, हेड कांस्टेबल सदानंद यादव सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।

बड़ा सवाल

इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह सिर्फ कुछ दलालों का काम है या इसके पीछे एक बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा है?

आगे की कार्रवाई?

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि किन-किन प्राइवेट अस्पतालों से इनका सीधा संपर्क था।

पत्नी को फावड़े से काटकर हत्या,आरोपी पति गिरफ्तार

गोरखपुर : खजनी थाना क्षेत्र के धाधूपार गांव में पति ने फावड़े और कुल्हाड़ी से अपनी पत्नी की गला काटकर हत्या कर दी। यह घटना मंगलवार 3 मार्च की रात करीब 1 बजे हुई। खजनी पुलिस ने आरोपी पति अशोक निषाद (45) को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी अशोक निषाद को अपनी पत्नी के अनैतिक संबंधों का संदेह था, जिसके चलते उसने इस वारदात को अंजाम दिया। घटना के तुरंत बाद खजनी पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था।

हिरासत में लेने के बाद आरोपी अशोक निषाद मनोरोगी की तरह बड़बड़ा रहा था कि उसे पचासों लोगों ने घेर लिया है और वे उसे मार डालेंगे। पुलिस ने उसे शांत कराया। अगले दिन सुबह 10 बजे पुलिस आरोपी को घटनास्थल पर ले गई, जहां उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त फावड़ा और कुल्हाड़ी बरामद की गई। पुलिस ने घटनास्थल से खून से सनी मिट्टी भी साक्ष्य के तौर पर एकत्र कर सील कर दिया है।

मृतका नीलम के पिता राजेंद्र प्रसाद की तहरीर पर खजनी थाने में केस संख्या 64/26 में बीएनएस की धारा 103 (1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मृतका के पिता ने पुलिस को बताया कि उनका दामाद अक्सर शराब पीकर बेटी के साथ मारपीट करता था। पति-पत्नी के बीच विवाद के बाद ही उसने बेटी की गला काटकर हत्या की।

वारदात की सूचना मिलने पर क्षेत्राधिकारी खजनी दीपांशी राठौर ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली। आरोपी को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में सब इंस्पेक्टर रामदयाल यादव, महिला सब इंस्पेक्टर प्रीति यादव, हेड कांस्टेबल अनिल चौधरी, कांस्टेबल जितेंद्र यादव, मनीष कुमार और महिला कांस्टेबल मनीषा वर्मा शामिल थे।

मां की मौत और पिता के जेल जाने के बाद मृतका के दोनों बच्चों को उनके ननिहाल के लोग अपने साथ ले गए हैं।

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