संविधान-आरक्षण के मुद्दे पर सपा का सियासी दांव, बहुजन समाज से एकजुट होने की अपील

PDA जन पंचायत में मिठाई लाल भारती का भाजपा पर तीखा हमला; बोले—संविधान और आरक्षण की रक्षा के लिए सपा के साथ आए बहुजन समाज
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले PDA की सियासत को धार देने की कवायद सिद्धार्थनगर में भी तेज होती दिखाई दे रही है। शनिवार को शहर में समाजवादी पार्टी के तत्वावधान में आयोजित सामाजिक एकता/PDA जन पंचायत सम्मेलन में बाबा साहब आंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिठाई लाल भारती ने संविधान, आरक्षण और निजीकरण को लेकर भाजपा पर कई गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने बहुजन समाज से अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के साथ एकजुट होने की अपील की।
| संविधान और आरक्षण को बनाया बड़ा मुद्दा
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मिठाई लाल भारती ने कहा कि बहुजन समाज के सामने संविधान और आरक्षण की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। उन्होंने कहा कि यदि बहुजन समाज अपने अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखना चाहता है तो उसे राजनीतिक रूप से एकजुट होना होगा।
भारती ने निजीकरण की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए आरक्षण के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने भाजपा की दलित और पिछड़ा वर्ग की राजनीति पर भी तीखा हमला किया।
यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि भाजपा को लेकर कही गई बातें मिठाई लाल भारती के राजनीतिक आरोप और दावे हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

| “2024 में दलित समाज ने दिया बड़ा संदेश”
मिठाई लाल भारती ने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं के एक हिस्से ने समाजवादी पार्टी के पक्ष में मतदान कर भाजपा को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया।
उन्होंने दावा किया कि संविधान से जुड़े मुद्दों ने लोकसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अब यही मुद्दे 2027 के विधानसभा चुनाव में भी प्रमुखता से उठेंगे।
| बसपा को लेकर भी साधा निशाना
भारती ने अपने संबोधन में बसपा नेतृत्व को लेकर भी राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दलित वोटों के बंटवारे से भाजपा को फायदा पहुंच सकता है।
हालांकि यह भी वक्ता का राजनीतिक दावा है। संबंधित दलों की ओर से इस सम्मेलन में लगाए गए आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना उचित होगा।
2027 को लेकर सैयदा खातून का बड़ा सियासी संदेश
विधायक सैयदा खातून ने कहा कि उनके अनुसार 2027 का विधानसभा चुनाव केवल सरकार बनाने का चुनाव नहीं होगा, बल्कि संविधान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों का भी चुनाव होगा।
उन्होंने दलित और पिछड़े समाज से राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाने की अपील की।
PDA के जरिए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
सम्मेलन में संविधान, आरक्षण, दलित-पिछड़ा प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। वक्ताओं के संबोधन से साफ संकेत मिला कि समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में PDA—पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—समीकरण को प्रमुख राजनीतिक आधार बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक विजय पासवान, चौधरी अमर सिंह, बेचई यादव, राममिलन भारती, घिसियावन यादव, चंद्रमणि यादव, सुरेश यादव, कमरुज्जमा खान, मोहम्मद इदरीश पटवारी, प्रदीप पथरकट, रामसेवक लोधी, चंद्रभान पहलवान, रिंधू पासवान, चंद्रभूषण आर्य, रामबहार कनौजिया, पुनीत गौतम, वीरेंद्र तिवारी, जुबेदा चौधरी, रामधीरज साहनी, कलाम सिद्दीकी, सोनू यादव, पारसनाथ विश्वकर्मा और जेपी यादव समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
| 2027 से पहले तेज हुई सियासी गोलबंदी
सिद्धार्थनगर की PDA जन पंचायत ने साफ कर दिया कि 2027 से पहले संविधान, आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर राजनीतिक मुकाबला और तेज हो सकता है। सपा के मंच से बहुजन समाज को अपने साथ जोड़ने की खुली अपील हुई है। दूसरी ओर भाजपा और बसपा पर लगाए गए आरोप फिलहाल वक्ताओं के राजनीतिक दावे हैं।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या संविधान और आरक्षण का मुद्दा 2027 में PDA को एकजुट कर पाएगा, या भाजपा और अन्य दल इस सियासी रणनीति की नई काट निकालेंगे?

