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कलम ऐसी चली कि सदियां बदल गईं, लेकिन शब्द आज भी जीवित हैं

तुलसीदास जयंती विशेष: रामचरितमानस के रचयिता ने भक्ति, लोकभाषा और साहित्य को दी ऐसी विरासत, जो आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा है


सदियां गुजर गईं, राज-पाट बदल गए, भाषाएं बदलीं, लेकिन एक कवि की लेखनी आज भी घर-घर में सुनाई देती है।

वह नाम है—गोस्वामी तुलसीदास।

आज, 19 अगस्त 2026, श्रावण शुक्ल सप्तमी के अवसर पर तुलसीदास जयंती मनाई जा रही है। परंपरा के अनुसार इसी तिथि को गोस्वामी तुलसीदास का जन्म माना जाता है।

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तुलसीदास केवल एक कवि नहीं थे। उनकी सबसे बड़ी ताकत यह थी कि उन्होंने रामकथा को ऐसी लोकभाषा में लिखा, जिसे आम आदमी समझ सके, गा सके और अपने जीवन से जोड़ सके।

उनकी रामचरितमानस ने भक्ति साहित्य के साथ-साथ भारतीय लोकजीवन, रामलीला, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं पर गहरा प्रभाव डाला।


आज क्यों याद किए जा रहे हैं तुलसीदास?

19 अगस्त — तुलसीदास जयंती

श्रावण शुक्ल सप्तमी को परंपरागत रूप से तुलसीदास जयंती मनाई जाती है।

प्रमुख रचनाएं:

रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली सहित अनेक कृतियां।

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जन्म को लेकर इतिहास में अलग-अलग मत

तुलसीदास के जन्म-वर्ष और जन्मस्थान को लेकर इतिहास और परंपराओं में मतभेद मिलते हैं। विभिन्न स्रोत अलग-अलग विवरण देते हैं। इसलिए उनके जन्म को लेकर किसी एक ईसवी वर्ष को निर्विवाद तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

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इतिहास संबंधी स्रोतों में 16वीं शताब्दी का समय प्रमुख रूप से सामने आता है और उनकी जन्म-जयंती श्रावण शुक्ल सप्तमी को मनाने की परंपरा है।

यही कारण है कि तुलसीदास जयंती का महत्व केवल एक जन्मदिन मनाने तक सीमित नहीं है। यह उस साहित्यिक विरासत को याद करने का अवसर है, जिसने भारतीय समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

वह रचना जिसने रामकथा को जन-जन की भाषा बना दिया

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तुलसीदास की सबसे प्रसिद्ध कृति है—रामचरितमानस।

यह अवधी भाषा में रचित महाकाव्यात्मक ग्रंथ है, जिसमें भगवान राम के जीवन और आदर्शों को केंद्र में रखा गया है। तुलसीदास ने संस्कृत की विद्वत परंपरा से बाहर निकलकर लोकभाषा में रामकथा को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाया।

यही उनकी लेखनी की सबसे बड़ी ताकत बनी।

भाषा सरल हुई, कथा जन-जन तक पहुंची और साहित्य लोकजीवन का हिस्सा बन गया।

लेखनी में भक्ति थी, लेकिन प्रभाव साहित्य से कहीं आगे गया

तुलसीदास की रचनाओं का प्रभाव केवल धार्मिक पाठ तक सीमित नहीं रहा।

रामचरितमानस और उनकी अन्य रचनाओं का प्रभाव लोकनाट्य, रामलीला, संगीत, लोकभाषा और भारतीय सांस्कृतिक जीवन में दिखाई देता है। तुलसीदास को रामभक्ति की परंपरा के प्रमुख कवियों में गिना जाता है।

उनकी लेखनी ने भगवान राम के चरित्र के माध्यम से मर्यादा, करुणा, कर्तव्य, त्याग और आदर्श जीवन जैसे मूल्यों को साहित्यिक अभिव्यक्ति दी।

हनुमान चालीसा से घर-घर तक पहुंचा नाम

तुलसीदास की पहचान केवल रामचरितमानस तक सीमित नहीं है।

हनुमान चालीसा भी उनकी सबसे लोकप्रिय रचनाओं में मानी जाती है। आज भी देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका पाठ व्यापक रूप से किया जाता है।

यही वजह है कि तुलसीदास का नाम केवल साहित्य के इतिहास में दर्ज नहीं है, बल्कि आज भी लोगों की दैनिक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में सुनाई देता है।

कहा जाता है, एक घटना ने बदल दी जीवन की दिशा

तुलसीदास के जीवन से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथाओं में उनकी पत्नी रत्नावली से जुड़ा प्रसंग आता है।

लोकप्रिय परंपरा के अनुसार, पत्नी के प्रति अत्यधिक आसक्ति को लेकर रत्नावली ने उन्हें भगवान राम की भक्ति की ओर प्रेरित करने वाली बात कही। इसके बाद तुलसीदास के जीवन की दिशा बदलने की कथा प्रचलित है।

हालांकि यह प्रसंग जीवनी-परंपरा और लोककथाओं में मिलता है, इसलिए इसे निर्विवाद ऐतिहासिक घटना की तरह नहीं बल्कि प्रचलित कथा के रूप में प्रस्तुत करना उचित है।

तुलसीदास की सबसे बड़ी ताकत—लोकभाषा

जिस समय धार्मिक और साहित्यिक ज्ञान का बड़ा हिस्सा संस्कृत जैसी शास्त्रीय भाषाओं में उपलब्ध था, उस दौर में तुलसीदास ने अवधी और ब्रज जैसी लोकभाषाओं में रचनाएं कीं।

यही वजह है कि उनकी कविता सिर्फ विद्वानों तक सीमित नहीं रही।

वह गांव तक पहुंची, शहर तक पहुंची, घर तक पहुंची और पीढ़ियों तक पहुंचती चली गई।

यही किसी रचनाकार की सबसे बड़ी सफलता होती है—कि उसका लिखा हुआ समय के साथ पुराना न हो, बल्कि हर पीढ़ी उसे अपने तरीके से पढ़े।


तुलसीदास को पढ़ना क्यों जरूरी है?

तुलसीदास को केवल धार्मिक दृष्टि से पढ़ना उनके साहित्यिक महत्व को छोटा कर देना होगा।

उनकी भाषा, कथ्य, चरित्र-निर्माण और लोकभाषा के प्रयोग ने हिंदी साहित्य और उत्तर भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को गहराई से प्रभावित किया।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यही कही जा सकती है कि उन्होंने एक विशाल कथा को ऐसी भाषा और शैली में प्रस्तुत किया, जो सदियों बाद भी लोगों के बीच जीवित है।

सारांश

आज तुलसीदास जयंती है।

एक ऐसे कवि को याद करने का दिन, जिसकी कलम ने रामकथा को जनभाषा में नई पहचान दी।

एक ऐसे रचनाकार को याद करने का दिन, जिसकी रामचरितमानस आज भी भारतीय सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

एक ऐसे साहित्यकार को याद करने का दिन, जिसकी हनुमान चालीसा आज भी घर-घर में सुनाई देती है।

और सबसे बढ़कर—

एक ऐसे कवि को याद करने का दिन, जिसने यह साबित किया कि जब शब्द लोक की भाषा में उतरते हैं, तो वे केवल पुस्तक में नहीं रहते—वे पीढ़ियों की स्मृति बन जाते हैं।

टिप्पणी

तुलसीदास का जीवन और साहित्य आज भी इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि उनके शब्दों ने समय की सीमाओं को पार किया।

उनकी लेखनी ने केवल कथा नहीं कही, बल्कि समाज के सामने आदर्शों और जीवन-मूल्यों की एक साहित्यिक दुनिया रखी।

आज तुलसीदास जयंती पर उन्हें याद करने का सबसे सार्थक तरीका यही है कि हम उनकी रचनाओं को केवल श्रद्धा से न देखें, बल्कि साहित्य, भाषा और भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में उनके योगदान को भी समझें।

सदियां बीत गईं, लेकिन तुलसी की लेखनी आज भी बोल रही है।

और शायद यही किसी रचनाकार की अमरता है।

FT News Digital — विशेष प्रस्तुति

नई दिल्ली में संयुक्त संसदीय समिति की बैठक, तीन अहम संशोधन विधेयकों पर हुआ मंथन

संविधान संशोधन, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर संयुक्त संसदीय समिति में हुई चर्चा।


नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त संसदीय समिति (Joint Parliamentary Committee) की बैठक में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 तथा केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में समिति के सदस्यों ने विभिन्न प्रावधानों पर विचार-विमर्श करते हुए अपने सुझाव भी रखे।

नई दिल्ली में हुई अहम बैठक

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में देश के संवैधानिक और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित संशोधनों के विभिन्न पहलुओं का परीक्षण करना और संबंधित पक्षों के सुझावों पर विचार करना था।

बैठक में The Constitution (One Hundred and Thirtieth Amendment) Bill, 2025, The Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill, 2025 तथा The Government of Union Territories (Amendment) Bill, 2025 के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।


बैठक की प्रमुख बातें

नई दिल्ली में संयुक्त संसदीय समिति की बैठक आयोजित।

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पर विचार।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा।

केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 भी एजेंडे में शामिल।

समिति के सदस्यों ने विभिन्न बिंदुओं पर सुझाव और विचार रखे।

क्या है संयुक्त संसदीय समिति (JPC)?

संयुक्त संसदीय समिति संसद की एक विशेष समिति होती है, जिसका गठन किसी महत्वपूर्ण विधेयक या विषय की विस्तृत समीक्षा के लिए किया जाता है। समिति संबंधित विधेयकों के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट और सुझाव संसद के समक्ष प्रस्तुत करती है।

सोशल मीडिया के माध्यम से दी जानकारी

बैठक में शामिल सदस्य ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इन तीनों महत्वपूर्ण विधेयकों पर आयोजित संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में भाग लिया। पोस्ट में गृह मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और MyGov India को भी टैग किया गया।

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FT NEWS DIGITAL — सच और… कुछ नहीं।

बरसात बनी मासूम की मौत का सबब! छत पर गई 10 वर्षीय राधा की संदिग्ध मौत

बरसाती मौसम बना मासूम की मौत का कारण? छत पर गई 10 वर्षीय बालिका की संदिग्ध मौत, परिजनों ने सर्पदंश की जताई आशंका; पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें


घटना: संदिग्ध परिस्थितियों में 10 वर्षीय बालिका की मौत

मृतका: राधा (10 वर्ष), पुत्री दुर्बली

स्थान: ग्राम सुकरौली, थाना शिवनगर तिवारी, जनपद सिद्धार्थनगर

समय: रविवार शाम लगभग 6:00 बजे

स्थिति: परिजनों ने सर्पदंश की आशंका जताई, पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मृत्यु का वास्तविक कारण रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।


बरसात का मौसम अपने साथ जहां राहत लेकर आता है, वहीं लापरवाही और प्राकृतिक खतरों के कारण कई परिवारों के लिए यह दर्द और त्रासदी का कारण भी बन जाता है। सिद्धार्थनगर जनपद के ग्राम सुकरौली में रविवार शाम एक ऐसा ही हृदयविदारक हादसा सामने आया, जिसने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। महज 10 वर्ष की मासूम राधा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि बच्ची को छत पर किसी जहरीले जीव, संभवतः सांप ने काट लिया था। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

विस्तृत समाचार

थाना शिवनगर तिवारी क्षेत्र के ग्राम सुकरौली निवासी दुर्बली की 10 वर्षीय पुत्री राधा रविवार शाम लगभग छह बजे घर की छत पर किसी घरेलू कार्य से गई थी। परिजनों के अनुसार, कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिवार को आशंका है कि बच्ची को किसी जहरीले जीव ने काट लिया था। आनन-फानन में उसे बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।

घटना के बाद पूरे परिवार में कोहराम मच गया। जिस घर में कुछ देर पहले तक बच्चे की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में भी शोक का माहौल बना हुआ है।

घटना की सूचना मृतका के पिता दुर्बली ने पुलिस को दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। समाचार लिखे जाने तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने नहीं आई थी, इसलिए मृत्यु का वास्तविक कारण आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बरसात में बढ़ जाता है खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम में सांप और अन्य जहरीले जीव अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं और कई बार घरों की छत, आंगन, लकड़ी, भूसे, झाड़ियों तथा जलभराव वाले स्थानों में पहुंच जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतना बेहद आवश्यक है।

जनहित में अपील

यदि किसी व्यक्ति को सांप या किसी जहरीले जीव के काटने की आशंका हो तो समय बर्बाद न करें। झाड़-फूंक, टोना-टोटका या घरेलू उपचार के बजाय तत्काल निकटतम सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पताल पहुंचें। समय पर चिकित्सकीय उपचार से कई मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि बरसात के मौसम में छोटी-सी सावधानी भी बड़ी दुर्घटनाओं को टाल सकती है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार जारी की जा रही सावधानियों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

रिपोर्ट: विजय पाल चतुर्वेदी

FT News Digital

यह संस्करण भावनात्मक प्रभाव बनाए रखता है, लेकिन किसी अपुष्ट दावे को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। इससे खबर प्रभावशाली होने के साथ-साथ पत्रकारिता और कानूनी दृष्टि से भी सुरक्षित रहती है।

लोटन ब्लॉक में पंचायत सचिव से कथित मारपीट, दो नामजद के खिलाफ मुकदमा दर्ज

हेडिंग

लोटन ब्लॉक में पंचायत सचिव से कथित मारपीट, दो नामजद के खिलाफ मुकदमा दर्ज

गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी व जातिसूचक शब्द कहने का आरोप; पुलिस ने शुरू की जांच


स्थान: लोटन, सिद्धार्थनगर

दिनांक: 10 जुलाई 2026

मुख्य बिंदु:

पंचायत सचिव की तहरीर पर दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज।

ब्लॉक सभागार में विभागीय कार्य के दौरान हुआ कथित विवाद।

मारपीट, धमकी और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का आरोप।

पुलिस ने निष्पक्ष जांच के बाद विधिक कार्रवाई का दिया भरोसा।


रिपोर्ट : FT NEWS DIGITAL ब्यूरो


सिद्धार्थनगर जिले के लोटन विकास खंड सभागार में तैनात एक पंचायत सचिव के साथ कथित मारपीट, अभद्रता, जान से मारने की धमकी और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का मामला सामने आया है। पीड़ित की तहरीर पर लोटन थाना पुलिस ने दो नामजद आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष विवेचना कर साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पूरी खबर

सिद्धार्थनगर। जनपद के लोटन विकास खंड में तैनात पंचायत सचिव के साथ कथित मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ब्लॉक सभागार में विभागीय कार्य के दौरान हुए विवाद के बाद पीड़ित पंचायत सचिव ने पुलिस को तहरीर देकर दो व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

तहरीर के अनुसार पंचायत सचिव रविंद्र कुमार जाटव गुरुवार को लोटन ब्लॉक सभागार में बैठकर विभागीय कार्यों का निस्तारण कर रहे थे। इसी दौरान पीयूष सिंह और गुड्डू यादव नामक दो व्यक्ति सभागार में पहुंचे। आरोप है कि दोनों ने बिना किसी कारण गाली-गलौज शुरू कर दी। जब पंचायत सचिव ने इसका विरोध किया तो कथित रूप से उनके साथ मारपीट की गई तथा जान से मारने की धमकी दी गई।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विवाद के दौरान आरोपियों द्वारा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानित किया गया। घटना के बाद सचिव ने पुलिस से सुरक्षा तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

तहरीर प्राप्त होने के बाद लोटन थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना प्रारंभ कर दी है। पुलिस घटनास्थल से जुड़े तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों तथा संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच कर रही है।

इस संबंध में थाना प्रभारी लोटन हरिओम कुशवाहा ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुरूप विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

घटना के बाद ब्लॉक परिसर में कुछ समय के लिए चर्चा का माहौल बना रहा। हालांकि प्रशासनिक कार्य सामान्य रूप से जारी रहे। पुलिस का कहना है कि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जांच पूरी तरह साक्ष्यों एवं कानून के आधार पर की जाएगी।

सारांश

लोटन ब्लॉक सभागार में पंचायत सचिव के साथ कथित मारपीट, गाली-गलौज, धमकी और जातिसूचक टिप्पणी के आरोप में दो व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामला जांचाधीन है और अंतिम कार्रवाई विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

कानूनी अस्वीकरण: यह समाचार पुलिस में दर्ज तहरीर एवं प्राथमिकी के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में वर्णित आरोप शिकायतकर्ता के हैं। आरोपों की पुष्टि जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी।

“डिजिटल युग में सूचना विभाग की बड़ी छलांग, ‘सूचना प्रवाह’ से अब जनता तक पहुंचेगी सरकार की हर पहल”

डिजिटल युग में सूचना क्रांति का नया अध्याय, ‘सूचना प्रवाह’ यूट्यूब चैनल का शुभारंभ

सरकार और जनता के बीच बनेगा मजबूत डिजिटल सेतु, योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी पहुंचेगी सीधे लोगों तक

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उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने डिजिटल संचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल ‘सूचना प्रवाह’ का शुभारंभ किया है। लोक भवन, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों ने चैनल का शुभारंभ कर इसे जनसंपर्क और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया।


स्थान : लोक भवन, लखनऊ

आयोजन : सूचना प्रवाह यूट्यूब चैनल का शुभारंभ

आयोजक : सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश

उद्देश्य : सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की प्रमाणिक जानकारी आमजन तक पहुंचाना

मुख्य अतिथि : सूचना निदेशक विशाल सिंह एवं अपर सूचना निदेशक अरविंद कुमार मिश्र


क्या है ‘सूचना प्रवाह’?

✔ सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का आधिकारिक यूट्यूब चैनल

✔ सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की प्रमाणिक जानकारी

✔ वृत्तचित्र, विशेष रिपोर्ट और प्रेरणादायी वीडियो का प्रसारण

✔ आमजन और शासन के बीच संवाद को मजबूत बनाने का माध्यम

मुख्य उद्देश्य

🔹 जनहितकारी योजनाओं की सही जानकारी

🔹 विकास परियोजनाओं की पहुंच बढ़ाना

🔹 डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पारदर्शी संवाद

🔹 सरकारी अभियानों को जन-जन तक पहुंचाना

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने डिजिटल मीडिया की बढ़ती भूमिका को देखते हुए अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल ‘सूचना प्रवाह’ की शुरुआत की है। इस मंच के माध्यम से प्रदेश सरकार की योजनाओं, विकास परियोजनाओं, उपलब्धियों और जनहितकारी कार्यक्रमों की तथ्यपरक एवं प्रमाणिक जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाएगी।

मुख्य समाचार

लखनऊ, 18 जून। डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और बदलते संचार माध्यमों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने जनसंचार के क्षेत्र में एक नई पहल करते हुए अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल ‘सूचना प्रवाह’ का शुभारंभ किया है।

लोक भवन, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में सूचना निदेशक विशाल सिंह तथा अपर सूचना निदेशक अरविंद कुमार मिश्र ने संयुक्त रूप से चैनल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर निर्माता फिल्म अभय कुमार श्रीवास्तव, फिल्म निर्माण प्रबंधक संदीप पांडेय सहित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

‘सूचना प्रवाह’ को प्रदेश सरकार और आमजन के बीच एक मजबूत डिजिटल संवाद मंच के रूप में विकसित किया गया है। इस मंच के माध्यम से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास परियोजनाओं, महत्वपूर्ण निर्णयों, उपलब्धियों, जनहितकारी कार्यक्रमों तथा शासन की विभिन्न पहलों से जुड़ी प्रमाणिक और त्वरित जानकारी नागरिकों तक पहुंचाई जाएगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सूचना निदेशक विशाल सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल मीडिया जनसंचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में ‘सूचना प्रवाह’ सरकार और जनता के बीच संवाद का एक सशक्त सेतु सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि चैनल के माध्यम से लोगों को योजनाओं और विकास कार्यों की विश्वसनीय जानकारी सरल और आकर्षक तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी।

अपर सूचना निदेशक अरविंद कुमार मिश्र ने कहा कि विभाग आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए जनसंचार के नए आयाम स्थापित कर रहा है। ‘सूचना प्रवाह’ प्रदेश की विकास यात्रा और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सूचना विभाग का मानना है कि यह मंच न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाएगा, बल्कि शासन और नागरिकों के बीच विश्वास एवं संवाद को भी और अधिक मजबूत बनाएगा।

 

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