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“एक खेत… तीन फसलें” : वैज्ञानिक खेती और वार्षिक नियोजन से बदलेगी किसानों की तस्वीर – अभिनव सिंह

 

सिद्धार्थनगर। बदलते मौसम, घटते जलस्तर और बढ़ती खेती लागत के बीच किसानों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिक खेती, वार्षिक फसल नियोजन और जल संरक्षण आधारित खेती पर विशेष जोर दिया गया।

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गौतम बुद्ध जागृति समिति द्वारा आयोजित किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक तकनीकों और कम लागत वाली टिकाऊ खेती अपनाने की सलाह दी। कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में मौजूद सहायक विकास अधिकारी (कृषि) अभिनव सिंह ने कहा कि यदि किसान समय चक्र और फसल अवधि को ध्यान में रखते हुए खेत का वार्षिक नियोजन करें, तो एक ही खेत से वर्ष में तीन फसलें लेकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ाई जा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन की शुरुआत हो चुकी है, इसलिए किसान अपनी भूमि की प्रकृति के अनुसार बीजों का चयन करें तथा मिट्टी की जांच कराकर संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फसलों में अत्यधिक पानी देना नुकसानदायक साबित हो सकता है और सीमित एवं संतुलित सिंचाई ही बेहतर उत्पादन की कुंजी है।

तकनीकी सहायक कृषि छोटेलाल ने खरीफ और रबी सीजन के बीच सब्जियों, दलहन और तिलहन की लाभकारी खेती पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही जैविक खेती, रोग एवं कीट नियंत्रण, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उपायों पर किसानों को प्रशिक्षित किया गया।

कार्यक्रम में संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि “मौसम परियोजना” के तहत किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खेती के लिए तैयार किया जा रहा है। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन, वैकल्पिक सौर ऊर्जा और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को डीएसआर विधि, मेड़बंदी, मिश्रित खेती, हरी खाद, कम पानी वाली किस्में, सूखा एवं बाढ़ सहनशील फसलें, अगेती खेती और मृदा स्वास्थ्य सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यवहारिक जानकारी दी गई।

इस मौके पर सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधक करुणाकर पाण्डेय सहित कई कृषि कार्यकर्ता और किसान मौजूद रहे। कार्यक्रम को किसानों के लिए जागरूकता और आधुनिक खेती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

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