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गोरखपुर में मोतियाबिंद ऑपरेशन बना त्रासदी 30 मरीजों में 18 को गंभीर संक्रमण, 9 की आंखें निकालनी पड़ीं; अस्पताल सील, मजिस्ट्रियल जांच शुरू

गोरखपुर/सिकरीगंज | रिपोर्ट: धनेश कुमार
गोरखपुर के सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाइटेक हॉस्पिटल में आयोजित आई कैंप के बाद बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया है। 1 फरवरी को लगाए गए कैंप में 30 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया था। आरोप है कि ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर ही कई मरीजों की आंखों में तेज दर्द, सूजन, खून और मवाद की शिकायत शुरू हो गई।
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच और कल्चर रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है। जानकारी के अनुसार 18 मरीजों में गंभीर इंफेक्शन पाया गया, जबकि 9 मरीजों की हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें आंख निकालनी पड़ी। कई मरीजों का इलाज लखनऊ, वाराणसी और दिल्ली के सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में जारी है।
पीड़ित परिवारों का दर्द
इन्दारी निवासी संजय सिंह ने बताया कि उनके पिता का ऑपरेशन इसी अस्पताल में हुआ था। ऑपरेशन के बाद आंख से लगातार खून बहने लगा। पहले वाराणसी और फिर दिल्ली ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर बताते हुए आंख निकालने की सलाह दी।
एक अन्य पीड़िता की बहू रेखा ने बताया कि ऑपरेशन के बाद आंख में असहनीय दर्द और मवाद की समस्या शुरू हो गई। अब दवाइयों के सहारे इलाज चल रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई
मामला सामने आते ही गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा ने अस्पताल को सील करने और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ी तो रजिस्ट्रेशन भी निरस्त किया जाएगा।
वहीं सीएमओ डॉ राजेश झा ने बताया कि 4 फरवरी को जानकारी मिलने के बाद जिला स्तरीय जांच कमेटी गठित की गई। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी टीम द्वारा भी जांच की गई है। प्रथम दृष्टया मामला संक्रमण का प्रतीत होता है। एहतियातन अस्पताल के नेत्र विभाग को सील कर दिया गया है।
सियासी प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि गोरखपुर में लोगों की आंखों की रोशनी चली गई और जिम्मेदार लोग मौन हैं।
बड़े सवाल
क्या ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण नियंत्रण के मानकों का पालन नहीं हुआ?
क्या उपकरण या दवाएं संक्रमित थीं?
क्या आई कैंप की निगरानी में चूक हुई?
यह घटना प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल जांच जारी है और पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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अवैध हथियार की नुमाइश बनी मौत की वजह, गोरखपुर में दोस्ती का दर्दनाक अंत

गोरखपुर | थाना: चिलुआताल
गोरखपुर के चिलुआताल क्षेत्र में दोस्तों के बीच बैठकी उस समय मातम में बदल गई, जब अवैध पिस्टल का प्रदर्शन एक युवक की जान ले बैठा। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना में इस्तेमाल की गई 32 बोर पिस्टल, आठ जिंदा कारतूस, तीन मोटरसाइकिल और एक अर्टिगा कार बरामद की गई है।
क्या हुआ था उस रात?
पुलिस के अनुसार मृतक अरुण अपने करीबी दोस्तों के साथ बैठा था। बातचीत के दौरान विशाल सिंह ने अपने पास मौजूद अवैध पिस्टल निकालकर दोस्तों को दिखाना शुरू किया।
बताया जा रहा है कि सभी युवक पिस्टल को घेरे में खड़े होकर देख रहे थे। इसी दौरान अचानक ट्रिगर दब गया और गोली सीधे अरुण को जा लगी।
गोली लगते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायल युवक को बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर टीम गठित की गई।
तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर सभी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में बीएनएस की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और आर्म्स एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
प्रेस वार्ता में खुलासा
मामले का खुलासा पुलिस लाइन स्थित सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में किया गया।
इस दौरान ज्ञानेंद्र (पुलिस अधीक्षक उत्तरी),
दिनेश कुमार पुरी (पुलिस अधीक्षक दक्षिणी)
और अनुराग सिंह (क्षेत्राधिकारी कैंपियरगंज) मौजूद रहे।
अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि अवैध हथियार रखना और उसका प्रदर्शन करना गंभीर अपराध है।
कानूनी स्थिति
हत्या से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज
आर्म्स एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं
सभी आरोपी न्यायालय में पेश किए जा रहे हैं
आपराधिक इतिहास की जांच जारी
युवाओं के लिए चेतावनी
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि
“एक पल की लापरवाही ने एक युवक की जान ले ली और कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।”
यह घटना युवाओं के लिए सबक है कि अवैध हथियारों का शौक जानलेवा साबित हो सकता है।

मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान- अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कर्मियों का मानदेय बढ़ेगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बजट सत्र में विधान परिषद को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बजट में अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय वृद्धि की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित कर्मियों का मानदेय जल्द ही बढ़ाया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू करने की घोषणा करते हुए बताया कि यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगी।

बजट सत्र में कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार प्रदेश के शिक्षा और पोषण से जुड़े कर्मचारियों के योगदान को भली-भांति समझती है। उन्होंने कहा कि अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सरकार ने बजट में इनके मानदेय बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रावधान कर दिए हैं, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

1 अप्रैल से लागू होगी कैशलेस व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू की जा रही है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगी। इस कदम का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों को सुविधाजनक भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराना है।

सरकार का दावा है कि इससे भुगतान प्रक्रिया तेज और सुगम होगी।

उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ ने जताया आभार

इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ के अध्यक्ष विक्रम सिंह ने सरकार और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, “हमारा 25,000 अनुदेशकों का परिवार सरकार का धन्यवाद ज्ञापित करता है। मुख्यमंत्री जी ने हमारे लंबे समय से लंबित मुद्दे को गंभीरता से लिया है। यह निर्णय अनुदेशक परिवार के लिए राहत भरा है।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा मानदेय वृद्धि का निर्णय प्रदेश के शिक्षा तंत्र को और सशक्त बनाएगा।

शिक्षा और पोषण व्यवस्था को मिलेगा मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि मानदेय वृद्धि से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और शिक्षा तथा आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

प्रदेश में बड़ी संख्या में अनुदेशक, शिक्षामित्र और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यह फैसला व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

दबिश से लौट रही पुलिस की स्कॉर्पियो दुर्घटनाग्रस्त, दारोगा की हुई मौत; कई घायल

गोरखपुर। महराजगंज से दबिश देकर लौट रही गोरखपुर पुलिस की टीम की स्कॉर्पियो श्यामदेउरवा क्षेत्र में दर्दनाक हादसे का शिकार हो गई। वाहन अनियंत्रित होकर पहले डिवाइडर से टकराया और फिर सड़क किनारे पेड़ से जा भिड़ा। इस दुर्घटना में दारोगा संतोष कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एसएसआई रमेश चंद्र कुशवाहा, महिला दारोगा गीता समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस टीम महराजगंज में एक मामले में दबिश देकर वापस गोरखपुर लौट रही थी। देर रात श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र में अचानक वाहन अनियंत्रित हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कॉर्पियो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। आसपास के लोगों की सूचना पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल अस्पताल भिजवाया।

सभी घायलों का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, जहां उनकी हालत पर चिकित्सकों की निगरानी रखी जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल लिया।

पुलिस द्वारा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्राथमिक तौर पर वाहन के अनियंत्रित होने को हादसे की वजह माना जा रहा है। मृतक दारोगा के परिजनों को सूचना दे दी गई है और आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

गोरखपुर में संघ शताब्दी वर्ष पर सामाजिक सद्भाव बैठक, सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने दिया एकता का संदेश

गोरखपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्ष प्रांत की ओर से संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत रविवार को तारामंडल स्थित बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में विभिन्न जाति, समाज और पंथ के प्रमुख प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सामाजिक एकता और समरसता पर जोर दिया।

स्वार्थ का अपनापन टिकता नहीं है

अपने उद्बोधन में डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज वही है, जिसका परस्पर जुड़ाव हो। स्वार्थ पर आधारित संबंध स्थायी नहीं होते। उन्होंने कहा कि अन्य देशों में मनुष्य-मनुष्य का संबंध सौदे की तरह देखा जाता है, लेकिन भारत में संबंध अपनेपन पर आधारित हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में विविधताएं हैं, अनेक रीति-रिवाज हैं, फिर भी समाज एक सूत्र में बंधा है। यही भारतीय संस्कृति की विशेषता है।

जीवन का सत्य भगवान हैं

सरसंघचालक ने कहा कि भारत विविधता में एकता का देश है क्योंकि यहां एक चैतन्य सबमें समान रूप से विद्यमान है, जिसे हम भगवान कहते हैं। भारत को हम माता मानते हैं।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग वेशभूषा, भाषा और रंग-रूप कभी अलगाव का कारण नहीं बनते। हमारी संस्कृति में नारी को वात्सल्य और सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। समाज का लक्ष्य जीवन के सत्य को जानना है और जीवन का सत्य भगवान हैं।

समान लक्ष्य और समान संस्कृति पर जोर

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज सद्भाव से चलता है। केवल कानून और पुलिस से समाज नहीं चल सकता। यदि समाज में सद्भावना नहीं होगी तो व्यवस्था टिक नहीं पाएगी।

उन्होंने कहा कि संघ के 100 वर्ष पूरे होना उत्सव का विषय नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। ब्लॉक स्तर पर वर्ष में दो-तीन बार बैठकर समाज के विषयों पर चर्चा होनी चाहिए।

हिन्दू समाज में पूर्ण स्वतंत्रता

सरसंघचालक ने कहा कि हिन्दू समाज में पूर्ण स्वतंत्रता है। हमें यह विचार करना चाहिए कि हम समाज के लिए क्या कर रहे हैं और क्या कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अपनी जाति-समाज की चिंता करना अच्छी बात है, लेकिन हमें बड़े समाज के हित को ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए। भारत स्वार्थ नहीं देखता, बल्कि विश्व के संकट में सहायता के लिए आगे आता है।

समाज स्वयं आगे बढ़े, संघ करेगा सहयोग

कार्यक्रम में विभिन्न समाजों और पंथों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए। जिज्ञासाओं के उत्तर देते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि समाज स्तर पर कार्य स्वयं करना होगा, केवल संघ के भरोसे नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि खंड स्तर पर समाज के प्रमुख लोग मिलकर जिम्मेदारी लें और किसी भी समस्या का समाधान सामूहिक रूप से करें। देश ठीक रहेगा तो हम भी ठीक रहेंगे।

पंगत में किया सहभोज, भारत माता की आरती के साथ समापन

बैठक के बाद सरसंघचालक ने विभिन्न जाति और पंथ के प्रतिनिधियों के साथ पंगत में भोजन किया। मंच पर प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की प्रस्तावना सह प्रांत सद्भाव प्रमुख शिवाजी राय ने रखी तथा सामाजिक सद्भाव प्रमुख डॉ. राकेश कुमार सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ।

गोरखपुर में सनसनी: बैंक क्लर्क की पत्नी की संदिग्ध मौत, मायके पक्ष बोला– “गला घोंटकर लटकाया गया”

उत्तर प्रदेश जनपद गोरखपुर। तिवारीपुर थाना क्षेत्र के दुर्गाबाड़ी रोड पर गुरुवार शाम एक घर के अंदर जो दृश्य सामने आया, उसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। बैंक ऑफ बड़ौदा में कार्यरत क्लर्क विनय सागर की पत्नी काजल सोनकर (30) का शव कमरे में फंदे से लटका मिला। सूचना मिलते ही क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और कुछ ही देर में मामला हंगामे में बदल गया।


 बंद कमरे में लटकी मिली काजल
परिवार के मुताबिक, घर के भीतर कमरे में काजल फंदे से लटकी मिली। सबसे पहले सास की नजर उस पर पड़ी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतरवाया और पूरे कमरे को जांच के दायरे में लिया।
काजल की शादी तीन साल पहले गोरखनाथ क्षेत्र से हुई थी। एक साल की मासूम बच्ची भी है, जो अब मां के साये से वंचित हो गई।
यह आत्महत्या नहीं, हत्या है” — मायके पक्ष का सीधा आरोप
घटना की खबर मिलते ही काजल की मां, चाचा रामआशीष और अन्य परिजन मौके पर पहुंच गए। उन्होंने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि काजल की पहले गला दबाकर हत्या की गई और फिर उसे फंदे से लटका दिया गया।
परिजनों का दावा है कि घटना के समय पति विनय सागर और उसकी मां घर पर मौजूद नहीं थे। आरोप है कि सूचना के बाद दोनों घर छोड़कर चले गए। इससे संदेह और गहरा गया।
गुस्साए परिजनों ने मौके पर हंगामा किया। इस दौरान घर में कहासुनी और हाथापाई की भी स्थिति बन गई। पुलिस को काफी मशक्कत के बाद माहौल शांत कराना पड़ा।
मौके पर पहुंचे अधिकारी, फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी और तिवारीपुर थाना प्रभारी पंकज सिंह पुलिस बल के साथ पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और जरूरी साक्ष्य जुटाए।
शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी।
एक साल की बच्ची को साथ ले गए ननिहाल वाले
घटना के बाद मायके पक्ष एक साल की बच्ची को अपने साथ ले गया। काजल के पिता राममिलन का पहले ही निधन हो चुका है। अब मायके पक्ष इंसाफ की मांग कर रहा है।
सवाल जो जांच के घेरे में
क्या काजल ने खुदकुशी की या उसकी जान ली गई?
घटना के वक्त घर में असल में कौन मौजूद था?
पति और सास की भूमिका क्या रही?
क्या दांपत्य जीवन में तनाव था?
इन सभी बिंदुओं पर पुलिस जांच में जुटी है।
पुलिस का कहना
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, “मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्य के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।”

UGC-NET में हर्ष प्रताप सिंह का शानदार प्रदर्शन, सांसद रविकिशन ने दी बधाई

गोरखपुर: UGC-NET परीक्षा 2026 के परिणाम में गोरखपुर के लिए गर्व की खबर सामने आई है। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग के छात्र हर्ष प्रताप सिंह का चयन हुआ है। खास बात यह है कि विभाग से इस परीक्षा में एकमात्र चयनित अभ्यर्थी के रूप में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है।

सांसद रवि किशन ने दी बधाई

हर्ष की इस सफलता पर गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रवि किशन शुक्ला ने उन्हें बधाई संदेश जारी करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। रविकिशन ने कहा कि,

प्रिय हर्ष प्रताप सिंह जी

“कल UGC – NET परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा हमको अवगत कराया गया कि दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के शिक्षाशास्त्र विभाग से एकमात्र आपका चयन हुआ है। विभाग की इस उपलब्धि से मन प्रसन्नचित हो उठा । आपको आपके भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं महादेव आपको शीघ्र डॉक्टर की उपाधि प्रदान कराएं । विभाग द्वारा यह सूचना पाया और ऐसा भी सुना कि आप भविष्य में इससे भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे और सभी के चहेते बने रहेंगे। यह भी ज्ञात हुआ कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक कार्यक्रम में सदैव आपका प्रदर्शन अच्छा रहा है।आपको आपके उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई प्रिय।”

बेहतर प्रदर्शन के लिए पहचाने जाते हैं हर्ष

विश्वविद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, हर्ष प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में हमेशा सक्रिय और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों में शामिल रहे हैं। उनकी इस सफलता से अन्य छात्रों को भी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरणा मिलेगी।

विभाग के लिए गर्व का क्षण

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, हर्ष प्रताप सिंह का चयन शिक्षाशास्त्र विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विभाग के शिक्षकों और छात्रों में इस सफलता को लेकर खुशी का माहौल है। कुलपति पूनम टंडन, प्रोफेसर मीतू सिंह कौशिक आदि लोगों ने हर्ष की इस सफलता पर खुशी व्यक्त की है।

यह उपलब्धि न केवल छात्र की मेहनत और लगन को दर्शाती है, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को भी मजबूत करती है।

परिवार और विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल

हर्ष प्रताप सिंह की इस सफलता से पिता अजय सिंह, माता पुनीता सिंह, भाई राघवेंद्र, बहन राजनीता, हर्षिता, आकाश, शिवम तथा अन्य लोगों ने खुशी जाहिर की है।

चीनी मांझे पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, कोतवाली क्षेत्र में चला सघन चेकिंग अभियान*

गोरखपुर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद जनपद में प्रतिबंधित चीनी मांझे के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। शासन के निर्देशों का पालन कराते हुए शुक्रवार को कोतवाली थाना क्षेत्र में पतंग और मांझा बेचने वाली दुकानों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया।

सीओ कोतवाली ओमकार दत्त तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने क्षेत्र की कई दुकानों पर पहुंचकर मांझे की गहन जांच की। इस दौरान दुकानों में रखे स्टॉक को खंगाला गया और यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं भी प्रतिबंधित चाइनीज मांझा की बिक्री या भंडारण न हो।

दुकानों को दिया निर्देश 

हालांकि अभियान के दौरान किसी भी दुकान पर प्रतिबंधित मांझा बरामद नहीं हुआ, लेकिन पुलिस ने सभी दुकानदारों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि कोई भी दुकानदार इसकी बिक्री करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

चालकों और बच्चों के लिए खतरनाक

सीओ ओमकार दत्त तिवारी ने बताया कि चीनी मांझा आम लोगों, खासकर दोपहिया वाहन चालकों और बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है और इससे कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसी कारण शासन स्तर से इसके निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाई गई है।

आम जनता से अपील

पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि सुरक्षित मांझे का ही इस्तेमाल करें और प्रतिबंधित सामग्री की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। प्रशासन का यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

जिसमें दम है गोली मार के दिखाओ- जानिए कथा के बीच में क्यों ललकारे राजन जी महाराज

गोरखपुर। शहर में चल रही प्रसिद्ध कथावाचक राजन जी महाराज की श्री राम कथा के दौरान एक विवादित घटना सामने आई है, जिसने श्रद्धालुओं के बीच चर्चा तेज कर दी है। कथा के दौरान राजन जी महाराज की टीम के एक सदस्य को कथित रूप से गोली मारने की धमकी दिए जाने की बात कही जा रही है। घटना के बाद राजन जी महाराज ने आहत होकर कथा बीच में छोड़ने का मन भी बना लिया था।

बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महाराज मंच से घटना का जिक्र करते हुए दिखाई देते हैं।

हमारे घर में ही हुआ बवाल: राजन जी महाराज 

कथा के दौरान सामने आए वीडियो में राजन जी महाराज कहते हुए सुनाई देते हैं कि:

“गोरखपुर, देवरिया, सीवान हमारा घर है। 16 साल की यात्रा में पहली बार ऐसी घटना हुई है। हमारे घर में भगदड़ जैसी स्थिति बनी। हमारी टीम के लोगों को गोली मारने को कहा गया… किसने मां का दूध पिया है,अगर किसी में हिम्मत है तो गोली मारकर दिखाओ”

उनका कहना था कि मंच पर लोगों की भीड़ चढ़ने की वजह से व्यवस्था बिगड़ी और इसके बाद टीम को मंच पर लोगों को आने से रोकना पड़ा, जिससे विवाद बढ़ गया।

27 जनवरी से 4 फरवरी तक चल रही है 9 दिवसीय राम कथा

गोरखपुर के चम्पा देवी पार्क में राजन जी महाराज की 9 दिवसीय श्री राम कथा का आयोजन 27 जनवरी से शुरू हुआ है, जिसका समापन 4 फरवरी को प्रस्तावित है।

सूत्रों के अनुसार, कथा के तीसरे दिन यानी 29 जनवरी को आयोजकों के एक पक्ष और कथावाचक की टीम के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जो बाद में तीखी बहस में बदल गई।

आयोजकों और टीम के बीच कहासुनी, कथित धमकी से बढ़ा मामला

बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा कथावाचक की टीम को गोली मारने की धमकी दिए जाने की बात कही गई। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

घटना के बाद राजन महाराज ने कथा छोड़कर वापस जाने की इच्छा जताई, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा समझाने के बाद उन्होंने कथा जारी रखने का निर्णय लिया।

भक्तों के सामने भावुक हुए महाराज

अगले दिन कथा के दौरान राजन महाराज ने भावुक स्वर में कहा:

“हम प्रेम से कथा सुनाने आए हैं, उसी प्रेम से सुनिए। 16 साल में पहली बार ऐसी स्थिति आई है।”

उनकी इस बात से पंडाल में मौजूद कई श्रद्धालु भावुक हो गए।

मुलाकात के नाम पर पैसे लेने वालों को चेतावनी

कथा के दौरान महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि उनसे मिलने के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता।

उन्होंने कहाकि:

सुनने में आया है कि कोई हमसे मिलवाने के नाम पर 1100 रुपये ले रहा है। ऐसे लोग सावधान हो जाएं। हम देश-विदेश कहीं भी कथा करते हैं, मिलने के लिए कभी पैसा नहीं लेते।”

शहर की छवि पर सवाल

धार्मिक आयोजनों में इस तरह के विवाद को लेकर स्थानीय लोगों में भी चर्चा है। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजन शांति और श्रद्धा का संदेश देते हैं, ऐसे में विवाद दुखद है।

प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट नहीं

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक किसी प्रशासनिक कार्रवाई या आधिकारिक बयान की पुष्टि नहीं हुई है। मामला जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

गोरखपुर में दिल दहला देने वाली वारदात युवती की सिर कुचलकर बेरहमी से हत्या, पुलिया के नीचे झाड़ियों में मिला अर्धनग्न शव अब तक नहीं हो सकी पहचान, इलाके में दहशत

गोरखपुर।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई, जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। बैरघटा गांव के पास स्थित एक पुलिया के नीचे झाड़ियों में एक युवती का अर्धनग्न शव मिलने से हड़कंप मच गया।
सुबह करीब छह बजे स्थानीय लोगों ने पुलिया के नीचे संदिग्ध अवस्था में शव पड़ा देखा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की।
🔍 सिर कुचलकर की गई हत्या, कहीं और वारदात की आशंका
घटनास्थल की हालत देखकर पुलिस को आशंका है कि युवती की निर्मम हत्या किसी अन्य स्थान पर की गई, और बाद में शव को रात के अंधेरे में पुलिया के नीचे लाकर फेंक दिया गया।
युवती के सिर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि सिर कुचलकर हत्या की गई है।
🚨 पहचान नहीं, पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
अब तक मृतका की पहचान नहीं हो सकी है। आसपास के थानों में गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाली जा रही है। पुलिस हर एंगल से मामले की जांच में जुटी हुई है।
👮‍♂️ फॉरेंसिक टीम सक्रिय, जल्द खुलासे की उम्मीद
मौके पर फॉरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की असली वजह और समय का स्पष्ट पता चल सकेगा।
😨 इलाके में डर का माहौल
इस सनसनीखेज वारदात के बाद से गांव और आसपास के क्षेत्रों में भय का माहौल है। लोग डरे हुए हैं और जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

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