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आजमगढ़ और मऊ में अनुदेशक संघ प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह का जबरदस्त स्वागत

मऊ/आजमगढ़। परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह के मऊ और आजमगढ़ दौरे में अनुदेशकों का उत्साह चरम पर दिखाई दिया। दोनों जनपदों में सैकड़ों अनुदेशकों ने उनका भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में संगठन की जिला और ब्लॉक कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में अनुदेशक मौजूद रहे।

प्रदेश अध्यक्ष के साथ प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं कोर कमेटी सदस्य अभिषेक राय सहित कई प्रांतीय पदाधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम को संगठन ने अनुदेशकों की एकजुटता और अधिकारों की लड़ाई का नया संदेश बताया।

सुप्रीम कोर्ट की जीत को बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

कार्यक्रम के दौरान सुप्रीम कोर्ट से मिले 17 हजार रुपये मानदेय, मार्च 2017 से एरियर के अधिकार तथा नियमितीकरण की लड़ाई को प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि संगठन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने के लिए लगातार प्रयास करेगा।

“नियमितीकरण तक चैन से नहीं बैठूंगा” : विक्रम सिंह 

अनुदेशकों को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि एक समय ऐसा था जब 17 हजार रुपये मानदेय मिलना भी असंभव माना जा रहा था, लेकिन संगठन के संघर्ष ने इसे संभव कर दिखाया।

उन्होंने कहा, “जब तक प्रदेश के अंतिम अनुदेशक का नियमितीकरण नहीं हो जाता, तब तक मेरा संघर्ष जारी रहेगा। संगठन की एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”

उन्होंने सभी अनुदेशकों से संगठन को मजबूत बनाने और एकजुट रहने की अपील की।

आयोजकों का किया सम्मान

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मऊ के जिलाध्यक्ष इंद्र प्रताप राव, आजमगढ़ के जिलाध्यक्ष गणेश यादव तथा दोनों जनपदों की जिला और ब्लॉक कार्यकारिणी की सराहना की गई। संगठन ने कहा कि प्रदेशभर में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से अनुदेशकों को एकजुट किया जाएगा।

संगठन का कहना है कि अब उसका मुख्य लक्ष्य सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूर्ण क्रियान्वयन और अनुदेशकों का नियमितीकरण सुनिश्चित कराना है।

सुप्रीम कोर्ट से अनुदेशकों को बड़ी राहत: यूपी सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज, एरियर पर फैसला बरकरार

लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों के लिए आज एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल पुनर्विचार याचिका (Review Petition) को खारिज कर दिया है, जिससे 4 फरवरी को सुनाया गया ऐतिहासिक निर्णय यथावत बना हुआ है।

गौरतलब है कि 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अनुदेशकों के 17000 रुपए मानदेय, लगभग 9 वर्षों के एरियर, नियमितीकरण तथा अन्य सेवा संबंधी लाभों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। 17000 तो सरकार ने दे दिया लेकिन एरियर के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया है।

इस निर्णय के बाद प्रदेशभर के हजारों अनुदेशकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। विभिन्न जिलों में अनुदेशकों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह का बयान

अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा—

“हम सर्वोच्च न्यायालय का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं, जिसने न्याय और संविधान की भावना के अनुरूप अनुदेशकों के अधिकारों की रक्षा की है। सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज होना हजारों अनुदेशकों के संघर्ष की बड़ी जीत है। अब हम प्रदेश सरकार से अपेक्षा करते हैं कि वह बिना किसी विलंब के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करे और सभी पात्र अनुदेशकों  9 वर्षों का एरियर, नियमितीकरण तथा न्यायालय द्वारा निर्धारित अन्य सभी लाभ शीघ्र उपलब्ध कराए।”

उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल आर्थिक लाभ का विषय नहीं, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे अनुदेशकों के सम्मान और अधिकारों की भी जीत है।

अब सरकार पर बढ़ा अनुपालन का दबाव

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुनर्विचार याचिका खारिज किए जाने के बाद अब प्रदेश सरकार पर न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने का दबाव बढ़ गया है। प्रदेशभर के अनुदेशक अब आदेश के क्रियान्वयन और बकाया भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी के हाथों सम्मानित हुए गोरखपुर के अनुदेशक देवेंद्र लाल

लखनऊ के लोक भवन में आयोजित हुआ भव्य सम्मान समारोह

गोरखपुर। लखनऊ स्थित लोक भवन में आयोजित अंशकालिक अनुदेशक सम्मान समारोह में गोरखपुर के अनुदेशक देवेंद्र लाल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, शिक्षामंत्री संदीप सिंह हाथों सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान प्रदेश भर से आए अनुदेशकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित होने के बाद देवेंद्र लाल ने सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे अनुदेशकों के सम्मान और संघर्ष की बड़ी जीत बताया।

17 हजार मानदेय से मिली राहत

सम्मान समारोह के बाद देवेंद्र लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अनुदेशकों का मानदेय 17 हजार रुपये किया जाना सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि पहले 7 हजार रुपये मानदेय में परिवार चलाना बेहद मुश्किल होता था, लेकिन अब 8 हजार रुपये की बढ़ोतरी से अनुदेशकों को बड़ी राहत मिली है।

उन्होंने कहा,“पहले सीमित मानदेय में घर का खर्च चलाना काफी कठिन था। सरकार ने हमारी समस्याओं को समझा और मानदेय बढ़ाकर हमें सम्मान देने का काम किया है। इससे प्रदेश के हजारों अनुदेशकों में नई ऊर्जा आई है।”

नियमितीकरण की भी जताई उम्मीद

देवेंद्र लाल ने मुख्यमंत्री से उम्मीद जताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार भविष्य में अनुदेशकों को नियमित करने की दिशा में भी सकारात्मक निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि अनुदेशक लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं और सरकार को उनकी सेवाओं का स्थायी समाधान करना चाहिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा,

“हमें पूरा भरोसा है कि मुख्यमंत्री जी जल्द ही हमें हमारे ही पद पर नियमित करने का कार्य भी करेंगे।”

शिक्षा विभाग और संगठन पदाधिकारियों का जताया आभार

देवेंद्र लाल ने इस अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग और संगठन के पदाधिकारियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने गोरखपुर के एडी बेसिक शिक्षा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा तथा महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी का विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।

अनुदेशकों में दिखा उत्साह का माहौल

लोक भवन में आयोजित इस सम्मान समारोह को लेकर प्रदेश भर के अनुदेशकों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में सरकार की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले अनुदेशकों को सम्मानित कर उनका मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया गया। समारोह के बाद कई अनुदेशकों ने इसे ऐतिहासिक पहल बताते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

मुख्यमंत्री योगी के हाथों सम्मानित हुए गोरखपुर के अनुदेशक देवेंद्र लाल

लखनऊ के लोक भवन में आयोजित हुआ भव्य सम्मान समारोह

गोरखपुर। लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित अंशकालिक अनुदेशक सम्मान समारोह में गोरखपुर के अनुदेशक देवेंद्र लाल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान प्रदेश भर से आए अनुदेशकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित होने के बाद देवेंद्र लाल ने सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे अनुदेशकों के सम्मान और संघर्ष की बड़ी जीत बताया।

“17 हजार मानदेय से मिली राहत”

सम्मान समारोह के बाद देवेंद्र लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अनुदेशकों का मानदेय 17 हजार रुपये किया जाना सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि पहले 7 हजार रुपये मानदेय में परिवार चलाना बेहद मुश्किल होता था, लेकिन अब 8 हजार रुपये की बढ़ोतरी से अनुदेशकों को बड़ी राहत मिली है।

उन्होंने कहा,“पहले सीमित मानदेय में घर का खर्च चलाना काफी कठिन था। सरकार ने हमारी समस्याओं को समझा और मानदेय बढ़ाकर हमें सम्मान देने का काम किया है। इससे प्रदेश के हजारों अनुदेशकों में नई ऊर्जा आई है।”

नियमितीकरण की भी जताई उम्मीद

देवेंद्र लाल ने मुख्यमंत्री से उम्मीद जताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार भविष्य में अनुदेशकों को नियमित करने की दिशा में भी सकारात्मक निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि अनुदेशक लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं और सरकार को उनकी सेवाओं का स्थायी समाधान करना चाहिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा,

“हमें पूरा भरोसा है कि मुख्यमंत्री जी जल्द ही हमें हमारे ही पद पर नियमित करने का कार्य भी करेंगे।”

शिक्षा विभाग और संगठन पदाधिकारियों का जताया आभार

देवेंद्र लाल ने इस अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग और संगठन के पदाधिकारियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने गोरखपुर के एडी बेसिक शिक्षा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा तथा महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी का विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।

अनुदेशकों में दिखा उत्साह का माहौल

लोक भवन में आयोजित इस सम्मान समारोह को लेकर प्रदेश भर के अनुदेशकों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में सरकार की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले अनुदेशकों को सम्मानित कर उनका मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया गया। समारोह के बाद कई अनुदेशकों ने इसे ऐतिहासिक पहल बताते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

अनुदेशकों के लिए बड़ी सौगात: 17 हजार मानदेय कैबिनेट से मंजूर, विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

लखनऊ/उत्तर प्रदेश: प्रदेश सरकार द्वारा अनुदेशकों के मानदेय को बढ़ाकर 17 हजार रुपये किए जाने के कैबिनेट फैसले के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से मानदेय वृद्धि की मांग कर रहे अनुदेशकों के लिए यह फैसला किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।

विक्रम सिंह ने जताया आभार, कहा,सरकार ने समझी हमारी पीड़ा

इस महत्वपूर्ण निर्णय पर अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, शिक्षामंत्री संदीप सिंह और शिक्षक विधायक श्रीचंद शर्मा का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रदेश के करीब 25 हजार अनुदेशकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उनके सम्मान को भी बढ़ाएगा।

“यह सिर्फ मानदेय नहीं, सम्मान की जीत” – विक्रम सिंह

विक्रम सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह सिर्फ मानदेय वृद्धि नहीं बल्कि अनुदेशकों के संघर्ष और आत्मसम्मान की जीत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने हमेशा शिक्षा और शिक्षकों के हितों को प्राथमिकता दी है, जिसका यह परिणाम है।

शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा मजबूती का आधार

विक्रम सिंह ने कहा कि, मानदेय में वृद्धि से अनुदेशकों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। यह कदम प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।

प्रदेशभर में जश्न का माहौल

फैसले के बाद कई जिलों में अनुदेशकों ने खुशी जताई और सरकार के प्रति आभार प्रकट किया। सोशल मीडिया पर भी इस निर्णय की सराहना हो रही है।

मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान- अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कर्मियों का मानदेय बढ़ेगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बजट सत्र में विधान परिषद को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बजट में अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय वृद्धि की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित कर्मियों का मानदेय जल्द ही बढ़ाया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू करने की घोषणा करते हुए बताया कि यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगी।

बजट सत्र में कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार प्रदेश के शिक्षा और पोषण से जुड़े कर्मचारियों के योगदान को भली-भांति समझती है। उन्होंने कहा कि अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सरकार ने बजट में इनके मानदेय बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रावधान कर दिए हैं, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

1 अप्रैल से लागू होगी कैशलेस व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू की जा रही है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगी। इस कदम का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों को सुविधाजनक भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराना है।

सरकार का दावा है कि इससे भुगतान प्रक्रिया तेज और सुगम होगी।

उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ ने जताया आभार

इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ के अध्यक्ष विक्रम सिंह ने सरकार और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, “हमारा 25,000 अनुदेशकों का परिवार सरकार का धन्यवाद ज्ञापित करता है। मुख्यमंत्री जी ने हमारे लंबे समय से लंबित मुद्दे को गंभीरता से लिया है। यह निर्णय अनुदेशक परिवार के लिए राहत भरा है।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा मानदेय वृद्धि का निर्णय प्रदेश के शिक्षा तंत्र को और सशक्त बनाएगा।

शिक्षा और पोषण व्यवस्था को मिलेगा मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि मानदेय वृद्धि से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और शिक्षा तथा आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

प्रदेश में बड़ी संख्या में अनुदेशक, शिक्षामित्र और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यह फैसला व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में अनुदेशकों की जीत पर खुशी की लहर..प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि…

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुदेशक शिक्षकों का मानदेय ₹17,000 प्रतिमाह किए जाने के न्यायपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय के बाद प्रदेश भर के अनुदेशक शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई। वर्षों से चल रहे संघर्ष, धरना-प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले को शिक्षकों ने अपने सम्मान और अधिकार की जीत बताया है।

वर्षों के संघर्ष का मिला परिणाम: विक्रम सिंह 

परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि, “यह फैसला अनुदेशक शिक्षकों के धैर्य, एकजुटता और निरंतर संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका ने शिक्षा से जुड़े हजारों परिवारों को राहत दी है।”

सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

विक्रम सिंह ने कहा कि, “यह सिर्फ मानदेय वृद्धि नहीं बल्कि सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है।” 

“यह निर्णय अनुदेशक शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला है और इससे शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।”

बेसिक शिक्षा विभाग में भी खुशी का माहौल

प्रदेश के कई जनपदों के बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और अनुदेशक शिक्षकों ने भी मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की। विद्यालयों में इस फैसले को लेकर उत्साह का माहौल देखने को मिला।

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