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लखनऊ में फिर गरजी अनुदेशकों की आवाज: एरियर भुगतान और नियमितीकरण को लेकर शासन के शीर्ष अधिकारियों से मैराथन वार्ता

प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह के नेतृत्व में चौथी बार राजधानी पहुंचा प्रतिनिधिमंडल, अंतरजनपदीय तबादले और CCL पर भी मिला जल्द कार्रवाई का आश्वासन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय अनुदेशकों के एरियर भुगतान, नियमितीकरण, अंतरजनपदीय स्थानांतरण और अन्य मांगों को लेकर परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन ने एक बार फिर राजधानी लखनऊ में अपनी आवाज बुलंद की। संगठन के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार, 14 सितंबर 2026 को प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह के नेतृत्व में प्रांतीय प्रतिनिधिमंडल ने बेसिक शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा की।

संगठन के अनुसार यह राजधानी में प्रतिनिधिमंडल की लगातार चौथी बड़ी उपस्थिति रही। इस दौरान अधिकारियों के समक्ष अनुदेशकों की लंबित समस्याओं को बिंदुवार रखा गया और मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की गई।

एरियर भुगतान पर मिला निर्णायक दौर का संकेत

प्रतिनिधिमंडल ने अनुदेशकों के लंबित एरियर भुगतान को प्रमुखता से उठाया। संगठन का कहना है कि अधिकारियों ने वार्ता के दौरान बताया कि एरियर से संबंधित प्रक्रिया निर्णायक दौर में है और जल्द ही भुगतान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही महिला अनुदेशकों से जुड़े अंतरजनपदीय स्थानांतरण और बाल देखभाल अवकाश (CCL) के मुद्दे पर भी विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने दोनों मामलों में शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया।

शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों से हुई वार्ता

प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी, अपर राज्य परियोजना निदेशक (स्कूल शिक्षा) प्रेम रंजन सिंह और अपर शिक्षा निदेशक गणेश कुमार से मुलाकात की। संगठन ने अधिकारियों को भगवान श्रीरामलला का चित्र स्मृतिचिह्न के रूप में भेंट किया।

संगठन के मुताबिक, अधिकारियों ने मांग-पत्र के प्रत्येक बिंदु को गंभीरता से सुना और अनुदेशकों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए समस्याओं के शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया। वहीं, डीजी के बाहर प्रवास पर होने के कारण उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।

नियमितीकरण तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान

प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि अनुदेशकों के अधिकारों की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक प्रदेश के अंतिम अनुदेशक का नियमितीकरण नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि संगठन कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधायिका और मीडिया—चारों स्तरों पर अपनी मांगों की मजबूती से पैरवी कर रहा है।

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अभिषेक राय, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं लखनऊ जिलाध्यक्ष सुशील यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष जितेंद्र यादव, प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं लखनऊ जिला महासचिव सुमित पाल, जिला सचिव राजेश पाठक और जिला संगठन मंत्री जे.पी. सिंह शामिल रहे।

संगठन ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल 15 सितंबर को भी लखनऊ में मौजूद रहकर मंत्रीगण और शासन स्तर पर अनुदेशकों की मांगों की पैरवी जारी रखेगा।

भारी बारिश के चलते सिद्धार्थनगर में 7 सितंबर को कक्षा 1 से 8 तक के स्कूल बंद
  • सिद्धार्थनगर। जनपद में लगातार हो रही भारी वर्षा को देखते हुए जिलाधिकारी के आदेश के अनुपालन में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार ने जिले के कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यालयों में 7 सितंबर 2026 को अवकाश घोषित किया है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, यह अवकाश परिषदीय विद्यालयों के साथ-साथ सीबीएसई, आईसीएसई, मान्यता प्राप्त विद्यालय, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर भी लागू होगा।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भारी बारिश के दृष्टिगत विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 7 सितंबर को कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों का संचालन नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित विद्यालयों को आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बीएसए ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन होने की स्थिति में संबंधित विद्यालय के प्रबंधक, प्रधानाचार्य अथवा प्रधानाध्यापक स्वयं उत्तरदायी होंगे।

जिला प्रशासन के इस निर्णय से अभिभावकों और विद्यार्थियों को राहत मिली है। लगातार बारिश के बीच बच्चों को विद्यालय भेजने को लेकर अभिभावकों की चिंता भी कम हुई है।

भारी बारिश के चलते सिद्धार्थनगर में 7 सितंबर को कक्षा 1 से 8 तक के स्कूल बंद

सिद्धार्थनगर। जनपद में लगातार हो रही भारी वर्षा को देखते हुए जिलाधिकारी के आदेश के अनुपालन में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार ने जिले के कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यालयों में 7 सितंबर 2026 को अवकाश घोषित किया है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, यह अवकाश परिषदीय विद्यालयों के साथ-साथ सीबीएसई, आईसीएसई, मान्यता प्राप्त विद्यालय, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर भी लागू होगा।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भारी बारिश के दृष्टिगत विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 7 सितंबर को कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों का संचालन नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित विद्यालयों को आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बीएसए ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन होने की स्थिति में संबंधित विद्यालय के प्रबंधक, प्रधानाचार्य अथवा प्रधानाध्यापक स्वयं उत्तरदायी होंगे।

जिला प्रशासन के इस निर्णय से अभिभावकों और विद्यार्थियों को राहत मिली है। लगातार बारिश के बीच बच्चों को विद्यालय भेजने को लेकर अभिभावकों की चिंता भी कम हुई है।

आजमगढ़ और मऊ में अनुदेशक संघ प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह का जबरदस्त स्वागत

मऊ/आजमगढ़। परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह के मऊ और आजमगढ़ दौरे में अनुदेशकों का उत्साह चरम पर दिखाई दिया। दोनों जनपदों में सैकड़ों अनुदेशकों ने उनका भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में संगठन की जिला और ब्लॉक कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में अनुदेशक मौजूद रहे।

प्रदेश अध्यक्ष के साथ प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं कोर कमेटी सदस्य अभिषेक राय सहित कई प्रांतीय पदाधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम को संगठन ने अनुदेशकों की एकजुटता और अधिकारों की लड़ाई का नया संदेश बताया।

सुप्रीम कोर्ट की जीत को बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

कार्यक्रम के दौरान सुप्रीम कोर्ट से मिले 17 हजार रुपये मानदेय, मार्च 2017 से एरियर के अधिकार तथा नियमितीकरण की लड़ाई को प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि संगठन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने के लिए लगातार प्रयास करेगा।

“नियमितीकरण तक चैन से नहीं बैठूंगा” : विक्रम सिंह 

अनुदेशकों को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि एक समय ऐसा था जब 17 हजार रुपये मानदेय मिलना भी असंभव माना जा रहा था, लेकिन संगठन के संघर्ष ने इसे संभव कर दिखाया।

उन्होंने कहा, “जब तक प्रदेश के अंतिम अनुदेशक का नियमितीकरण नहीं हो जाता, तब तक मेरा संघर्ष जारी रहेगा। संगठन की एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”

उन्होंने सभी अनुदेशकों से संगठन को मजबूत बनाने और एकजुट रहने की अपील की।

आयोजकों का किया सम्मान

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मऊ के जिलाध्यक्ष इंद्र प्रताप राव, आजमगढ़ के जिलाध्यक्ष गणेश यादव तथा दोनों जनपदों की जिला और ब्लॉक कार्यकारिणी की सराहना की गई। संगठन ने कहा कि प्रदेशभर में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से अनुदेशकों को एकजुट किया जाएगा।

संगठन का कहना है कि अब उसका मुख्य लक्ष्य सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूर्ण क्रियान्वयन और अनुदेशकों का नियमितीकरण सुनिश्चित कराना है।

जनगणना ड्यूटी में मनमानी का आरोप, कर्मियों को 20 किलोमीटर दूर भेजे जाने पर फूटा गुस्सा

विकल्प मांगे गए, लेकिन आवंटन में नहीं दिखी पारदर्शिता।

बांसी, सिद्धार्थनगर। बांसी तहसील क्षेत्र में जनगणना कार्य के लिए लगाए गए प्रगणकों और कर्मचारियों में ड्यूटी आवंटन को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग ने उनसे एचएलबी (हाउस लिस्टिंग ब्लॉक) के लिए विकल्प तो मांगे, लेकिन अंतिम आवंटन में उनकी पसंद और सुविधा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। कई कर्मचारियों की ड्यूटी उनके घर से 20 से 25 किलोमीटर दूर लगा दी गई है, जबकि कुछ कर्मियों का पहले से आवंटित एचएलबी अचानक निरस्त कर दिया गया।

खासकर ऐसी महिला कर्मियों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, जिनके छोटे बच्चे हैं या जिनको कोई ले आने-जाने वाला नहीं है। महिला कर्मियों का कहना है कि, मनचाहा विकल्प चुनने के बाद भी इतनी दूर ड्यूटी लग जाने से हम परेशान हैं, कि इतनी दूर हम ड्यूटी कैसे कर पाएंगे।

“पहले एलॉट किया, फिर निरस्त कर दिया गया।”

प्रगणक सत्यपाल सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पहले एक एचएलबी (HLB) आवंटित किया गया था, लेकिन बाद में बिना किसी सूचना के उसे हटा दिया गया और अब उनकी स्थिति पेंडिंग में दिखाई जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि अब उन्हें किसी दूरस्थ क्षेत्र में ड्यूटी दी जा सकती है।

वहीं विष्णु वरुण, रबीकांत, संजय चौधरी, निर्मल मौर्या समेत अन्य कर्मियों ने भी कहा कि उन्होंने अपने गांव या आसपास के क्षेत्रों का विकल्प चुना था, लेकिन विभाग ने उन्हें काफी दूर तैनात कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि इससे न सिर्फ आने-जाने में परेशानी होगी, बल्कि समय और आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा।

कर्मचारियों ने लगाया मनमानी का आरोप

जनगणना कर्मियों का आरोप है कि बांसी तहसील स्तर पर ड्यूटी निर्धारण में पारदर्शिता नहीं बरती गई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि विकल्प लेने की प्रक्रिया अपनाई गई थी, तो उसी के अनुरूप एचएलबी (HLB)आवंटन किया जाना चाहिए था।

कई कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जिनकी ड्यूटी पहले उनके क्षेत्र या नजदीक लगी थी, उनकी ड्यूटी काटकर दूर स्थानों पर भेज दिया गया या फिर सूची से नाम ही हटा दिया गया।

तहसीलदार से लगाई न्याय की गुहार

नाराज कर्मचारियों ने तहसीलदार बांसी से मांग की है कि ड्यूटी आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। कर्मचारियों ने कहा कि जिनका एचएलबी निरस्त किया गया है, उन्हें पुनः वही एचएलबी आवंटित किया जाए और जिन कर्मियों को दूरस्थ क्षेत्रों में भेजा गया है, उन्हें उनके द्वारा चुने गए विकल्पों में से ही क्षेत्र दिया जाए।

कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इसका असर जनगणना कार्य की गति और गुणवत्ता दोनों पर पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान- अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कर्मियों का मानदेय बढ़ेगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बजट सत्र में विधान परिषद को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बजट में अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय वृद्धि की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित कर्मियों का मानदेय जल्द ही बढ़ाया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू करने की घोषणा करते हुए बताया कि यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगी।

बजट सत्र में कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार प्रदेश के शिक्षा और पोषण से जुड़े कर्मचारियों के योगदान को भली-भांति समझती है। उन्होंने कहा कि अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सरकार ने बजट में इनके मानदेय बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रावधान कर दिए हैं, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

1 अप्रैल से लागू होगी कैशलेस व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू की जा रही है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगी। इस कदम का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों को सुविधाजनक भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराना है।

सरकार का दावा है कि इससे भुगतान प्रक्रिया तेज और सुगम होगी।

उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ ने जताया आभार

इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ के अध्यक्ष विक्रम सिंह ने सरकार और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, “हमारा 25,000 अनुदेशकों का परिवार सरकार का धन्यवाद ज्ञापित करता है। मुख्यमंत्री जी ने हमारे लंबे समय से लंबित मुद्दे को गंभीरता से लिया है। यह निर्णय अनुदेशक परिवार के लिए राहत भरा है।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा मानदेय वृद्धि का निर्णय प्रदेश के शिक्षा तंत्र को और सशक्त बनाएगा।

शिक्षा और पोषण व्यवस्था को मिलेगा मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि मानदेय वृद्धि से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और शिक्षा तथा आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

प्रदेश में बड़ी संख्या में अनुदेशक, शिक्षामित्र और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यह फैसला व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

लोकसभा में डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल ने उठाए स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा से जुड़े अहम मुद्दे

नईदिल्ली/डुमरियागंज। बजट सत्र के प्रथम चरण के अंतिम दिन जगदंबिका पाल ने लोकसभा में अनस्टार्ड प्रश्नों के माध्यम से उत्तर प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के विषयों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
राष्ट्रीय सिकल सेल मिशन पर सरकार से जवाब
राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के संबंध में पूछे गए प्रश्न के माध्यम से सांसद ने उत्तर प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग, पहचान और उपचार की स्थिति पर विस्तृत जानकारी मांगी। सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 7,64,879 व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें 86 कैरियर तथा 38 मरीज चिन्हित किए गए हैं। साथ ही 4,41,639 जेनेटिक स्टेटस कार्ड वितरित किए गए हैं।
यह आंकड़े राज्य में स्क्रीनिंग अभियान के विस्तार को दर्शाते हैं, लेकिन साथ ही यह भी संकेत देते हैं कि समय पर पहचान, परामर्श और उपचार व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है, ताकि रोग की रोकथाम और नियंत्रण को प्रभावी बनाया जा सके।
मेडिकल सीट वृद्धि और डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात पर चर्चा
एक अन्य अनस्टार्ड प्रश्न में सांसद ने MBBS तथा MD/MS सीटों में हुई वृद्धि का उत्तर प्रदेश के जिलावार डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात पर पड़े प्रभाव के संबंध में जानकारी मांगी। सरकार के अनुसार वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच देशभर में 48,563 MBBS सीटों और 29,080 PG सीटों की वृद्धि हुई है।
वर्षवार MBBS सीट वृद्धि इस प्रकार रही —
#2020_21 : 2,963
#2021_22 : 8,790
#2022_23 : 7,398
#2023_24 : 9,652
#2024_25 : 8,641
#2025_26 : 11,119
इसी अवधि में PG सीटों की वृद्धि —
#2020_21 : 4,983
#2021_22 : 4,705
#2022_23 : 2,874
#2023_24 : 4,713
#2024_25 : 4,186
#2025_26 : 7,619
सरकार का कहना है कि मेडिकल सीटों के विस्तार से देश में स्वास्थ्य मानव संसाधन की कमी को दूर करने में मदद मिली है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और जनसंख्या बहुल राज्यों के अविकसित एवं ग्रामीण क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिला है। साथ ही भारतीय छात्रों की विदेशों में मेडिकल शिक्षा पर निर्भरता में भी कमी आने की संभावना जताई गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर जोर
सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का लाभ प्रदेश के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंचे। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता और चिकित्सा मानव संसाधन को और सुदृढ़ करने पर बल दिया।

लोकसभा में डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल ने उठाए स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा से जुड़े अहम मुद्दे

नईदिल्ली/डुमरियागंज। बजट सत्र के प्रथम चरण के अंतिम दिन जगदंबिका पाल ने लोकसभा में अनस्टार्ड प्रश्नों के माध्यम से उत्तर प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के विषयों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
राष्ट्रीय सिकल सेल मिशन पर सरकार से जवाब
राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के संबंध में पूछे गए प्रश्न के माध्यम से सांसद ने उत्तर प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग, पहचान और उपचार की स्थिति पर विस्तृत जानकारी मांगी। सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 7,64,879 व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें 86 कैरियर तथा 38 मरीज चिन्हित किए गए हैं। साथ ही 4,41,639 जेनेटिक स्टेटस कार्ड वितरित किए गए हैं।
यह आंकड़े राज्य में स्क्रीनिंग अभियान के विस्तार को दर्शाते हैं, लेकिन साथ ही यह भी संकेत देते हैं कि समय पर पहचान, परामर्श और उपचार व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है, ताकि रोग की रोकथाम और नियंत्रण को प्रभावी बनाया जा सके।
मेडिकल सीट वृद्धि और डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात पर चर्चा
एक अन्य अनस्टार्ड प्रश्न में सांसद ने MBBS तथा MD/MS सीटों में हुई वृद्धि का उत्तर प्रदेश के जिलावार डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात पर पड़े प्रभाव के संबंध में जानकारी मांगी। सरकार के अनुसार वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच देशभर में 48,563 MBBS सीटों और 29,080 PG सीटों की वृद्धि हुई है।
वर्षवार MBBS सीट वृद्धि इस प्रकार रही —
#2020_21 : 2,963
#2021_22 : 8,790
#2022_23 : 7,398
#2023_24 : 9,652
#2024_25 : 8,641
#2025_26 : 11,119
इसी अवधि में PG सीटों की वृद्धि —
#2020_21 : 4,983
#2021_22 : 4,705
#2022_23 : 2,874
#2023_24 : 4,713
#2024_25 : 4,186
#2025_26 : 7,619
सरकार का कहना है कि मेडिकल सीटों के विस्तार से देश में स्वास्थ्य मानव संसाधन की कमी को दूर करने में मदद मिली है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और जनसंख्या बहुल राज्यों के अविकसित एवं ग्रामीण क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिला है। साथ ही भारतीय छात्रों की विदेशों में मेडिकल शिक्षा पर निर्भरता में भी कमी आने की संभावना जताई गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर जोर
सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का लाभ प्रदेश के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंचे। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता और चिकित्सा मानव संसाधन को और सुदृढ़ करने पर बल दिया।

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