फ्रेंड्स टाइम्स
Breaking News
MBBS छात्र हादसे की सुर्खियों में दब गया विपिन जायसवाल के परिवार का दर्द– होली के दिन धर्मशाला ओवरब्रिज पर तेज रफ्तार कार की टक्कर से गई थी जान

गोरखपुर : रंगों का पर्व होली आपसी भाईचारे और खुशियों का त्योहार माना जाता है, लेकिन कभी-कभी यही उत्सव लापरवाही और हुड़दंग की वजह से दर्दनाक हादसों में बदल जाता है। ऐसा ही एक हादसा 4 मार्च 2026 को गोरखपुर में हुआ, जिसमें एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छिन गईं।

होली के दिन कार की टक्कर से हुए थे घायल

4 मार्च 1996 को जन्मे विपिन कुमार जायसवाल को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि 4 मार्च 2026 का दिन उनकी जिंदगी का आखिरी दिन बन जाएगा। होली के दिन दोपहर करीब 2:30 बजे वह अपने दोस्त सुमित श्रीवास्तव के साथ स्कूटी से धर्मशाला ओवरब्रिज से गुजर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार मारुति वेगनर कार ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि विपिन ओवरब्रिज से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उनके साथी सुमित श्रीवास्तव भी बुरी तरह घायल हो गए।

इलाज के दौरान चली गई विपिन की जान 

दोनों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान विपिन कुमार जायसवाल ने दम तोड़ दिया। उनकी मौत से परिवार में मातम छा गया, जबकि घायल सुमित श्रीवास्तव का अभी भी इलाज चल रहा है।

उसी रात एमबीबीएस छात्र आकाश पांडे की हुई थी मौत 

उसी दिन रात में चारफाटक मोहद्दीपुर इलाके में हुए एक अन्य सड़क हादसे में एमबीबीएस छात्र आकाश पांडे और उमेश शर्मा की मौत हो गई थी। आरोपी के एक राजनीतिक दल से जुड़े होने की वजह से यह मामला मीडिया में सुर्खियों में छाया रहा। लेकिन उसी दिन दोपहर धर्मशाला ओवरब्रिज पर हुए हादसे में जान गंवाने वाले विपिन जायसवाल के परिवार की पीड़ा कहीं दबकर रह गई।

MBBS छात्र हादसे में दब गई विपिन की मौत

परिजनों का कहना है कि चारफाटक हादसे में मृतकों के परिवारों के घर जनप्रतिनिधि और अधिकारी पहुंचे तथा सरकार की ओर से मुआवजे की घोषणा भी की गई, लेकिन विपिन जायसवाल के परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं पहुंचा। परिजनों के मुताबिक विपिन एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे, शायद यही वजह रही कि उनकी मौत को लेकर न तो किसी अधिकारी ने संज्ञान लिया और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने परिवार से मिलकर सांत्वना दी।

घटना की निष्पक्ष जांच की मांग 

घटना के अगले दिन मृतक के पिता राजेंद्र कुमार जायसवाल की तहरीर पर शाहपुर थाने में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि परिवार का आरोप है कि हादसे के बाद कार चालक और उसके साथियों को मौके पर पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया और अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से न्याय दिलाने की गुहार लगाई है, ताकि विपिन की मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा मिल सके।

कार की टक्कर से बाइक सवार सिपाही की मौत

गोरखपुर : कुसम्ही जंगल स्थित तुर्रा नाला के पास बुधवार दोपहर एक कार की टक्कर से बाइक सवार सिपाही की मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल सिपाही को एम्स थाना पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने कार चालक को गिरफ्तार कर लिया है।

मृतक सिपाही की पहचान देवरिया जिले के तरकुलवा स्थित सोहनरिया गांव निवासी विवेक कुमार सिंह (29) के रूप में हुई है। वह उत्तर प्रदेश पुलिस में आरक्षी के पद पर तैनात थे। उनकी मूल नियुक्ति संतकबीरनगर में थी और वर्तमान में वह गोरखपुर स्थित एडीजी जोन कार्यालय में अटैच थे। बुधवार दोपहर करीब एक बजे विवेक कुमार सिंह अपनी बाइक से गोरखपुर से घर जा रहे थे। कुसम्ही जंगल के पास तुर्रा नाला के समीप सामने से आ रही एक कार ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि विवेक गंभीर रूप से घायल हो गए और कार भी अनियंत्रित होकर पलट गई।

सूचना मिलने पर एम्स थाना प्रभारी चंद्रप्रकाश पांडेय मौके पर पहुंचे। घायल सिपाही को तत्काल एम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार को कब्जे में ले लिया है और कार चालक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई।

गोरखपुर में भव्य होली: CM योगी आदित्यनाथ ने नरसिंह शोभायात्रा में लिया भाग

गोरखपुर।
रंगों के पर्व होली पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नगरी गोरखपुर में इस बार भी उत्साह और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर के ऐतिहासिक घंटाघर से निकलने वाली पारंपरिक भगवान नरसिंह शोभायात्रा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शामिल होकर कार्यक्रम की शुरुआत की।
बताया जाता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वर्ष 1996 से लगातार इस शोभायात्रा में शामिल होते आ रहे हैं। इस बार भी शोभायात्रा को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के कारण इस बार का आयोजन और भी विशेष माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की होली की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर में होलिका भस्म लगाने की परंपरा के साथ हुई। मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ और अन्य साधु-संतों की मौजूदगी में धार्मिक विधि-विधान के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ।
इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और होलिका उत्सव समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सबसे पहले ध्वज प्रणाम और प्रार्थना की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान नरसिंह की विधिवत आरती उतारी, जिसके बाद रंग-गुलाल और भक्ति के माहौल के बीच भव्य शोभायात्रा की शुरुआत हुई।
शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरती इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और नागरिक शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और गुलाल के रंगों के बीच पूरा गोरखपुर उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।
कार्यक्रम को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी गई।
इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश भारत की आत्मा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पावन धरती पर अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थल भारतीय संस्कृति और आस्था की महान परंपरा का प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि अयोध्या मर्यादा का संदेश देती है, काशी जीवन की चेतना का प्रतीक है और मथुरा-वृंदावन भक्ति का आनंद प्रदान करते हैं। वहीं प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती की त्रिवेणी समाज में समरसता का संदेश देती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को मजबूत बनाने और “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना को आगे बढ़ाने के लिए समाज को एकजुट होकर कार्य करना होगा।

होली की खुशियों के बीच दर्दनाक हादसा: सड़क दुर्घटनाओं ने छीनी कई घरों की खुशियां

गोरखपुर।
रंग, उमंग और खुशियों का पर्व होली जहां पूरे जिले में उत्साह के साथ मनाया जा रहा था, वहीं गोरखपुर में कुछ दर्दनाक हादसों ने कई परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया। अलग-अलग स्थानों पर हुए सड़क हादसों में एक पुलिसकर्मी समेत कई लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
मिली जानकारी के अनुसार होली के दिन ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहे एक पुलिसकर्मी की बाइक को तेज रफ्तार वाहन ने टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना से पुलिस विभाग में भी शोक की लहर दौड़ गई।
इसी बीच सहजनवा क्षेत्र में एक और दर्दनाक हादसा सामने आया। बताया जाता है कि होली का त्योहार मनाकर लौट रहे युवकों की बाइक अचानक सामने आए जंगली पशु से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीन युवक सड़क पर जा गिरे। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान एक युवक ने दम तोड़ दिया, जबकि अन्य घायल युवकों का इलाज जारी है।
कैम्पियरगंज क्षेत्र में भी होली के दौरान अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में कई लोग घायल हुए। कुछ घायलों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया और अस्पताल परिसर में शोक व आक्रोश का माहौल देखने को मिला।
होली जैसे उल्लास के पर्व पर हुए इन हादसों ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। जहां एक ओर लोग रंगों में सराबोर होकर खुशियां मना रहे थे, वहीं कई घरों में मातम पसरा हुआ है।
फिलहाल पुलिस ने सभी घटनाओं में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है और दुर्घटनाओं के कारणों की जांच की जा रही है।

नाली विवाद बना खूनी संग्राम, अधिवक्ता की पीट-पीटकर हत्या से दहला बांसगांव

गोरखपुर (बांसगांव)। नाली के पानी की निकासी को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद शुक्रवार सुबह खूनी संघर्ष में बदल गया। बांसगांव कस्बे के वार्ड नंबर नौ में दो पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प में अधिवक्ता अग्निवेश सिंह की कथित तौर पर लोहे की रॉड और धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया है।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक पक्ष अपने घर की नाली का पानी मुख्य नाले में बहाने के लिए पाइप डाल रहा था। इसी दौरान रास्ते को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। आरोप है कि विवाद के दौरान एक पक्ष ने अधिवक्ता अग्निवेश सिंह पर रॉड, धारदार हथियार और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
बचाव में पहुंचे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी मारपीट की बात सामने आई है। झड़प में दूसरे पक्ष का एक युवक भी घायल हुआ है, जिसका उपचार चल रहा है।
पुलिस की कार्रवाई
परिजनों की तहरीर पर बांसगांव थाना पुलिस ने पांच नामजद लोगों के विरुद्ध हत्या व मारपीट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। एहतियातन क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
शोक में डूबा इलाका
घटना के बाद परिवार और मोहल्ले में गहरा शोक है। अंतिम संस्कार स्थानीय नदी तट पर संपन्न हुआ।

पार्किंग विवाद में इंटर छात्र की मौत, परीक्षा केंद्र बना रणभूमि

गोरखपुर: परीक्षा के बाद हिंसा, ईंट से वार में छात्र की मौत
जनपद गोरखपुर के एक इंटर कॉलेज परिसर में बुधवार को परीक्षा के बाद हुई मारपीट ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। साइकिल खड़ी करने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद इतना बढ़ गया कि एक छात्र को सिर पर ईंट से गंभीर चोट लगी और बाद में इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
यह घटना शहर के चर्चित शिक्षण संस्थान दुनमुन दास बालमुकुंद दास इंटर कालेज (डीबी इंटर कॉलेज) में हुई, जहां रसायन विज्ञान की परीक्षा संपन्न होने के बाद छात्र पार्किंग क्षेत्र में पहुंचे थे।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, परीक्षा समाप्त होने के बाद पार्किंग में साइकिल खड़ी करने को लेकर दो छात्रों के बीच कहासुनी हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले मामूली धक्का-मुक्की हुई, लेकिन बाद में मामला दोबारा भड़क गया। इसी दौरान एक छात्र ने ईंट उठाकर दूसरे छात्र के सिर पर वार कर दिया।
घायल छात्र को तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। बाद में परिजन बेहतर इलाज के लिए लखनऊ ले गए, जहां देर रात उसकी मौत हो गई।
आरोपी छात्र गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस सक्रिय हुई। कोतवाली थाना पुलिस ने पीड़ित पक्ष की तहरीर पर पहले मारपीट और जानलेवा हमले की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। छात्र की मृत्यु के बाद मामले में हत्या की धारा जोड़ते हुए आरोपित छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों छात्र एक-दूसरे को पहले से नहीं जानते थे और विवाद अचानक पार्किंग में शुरू हुआ।
परिवार में मातम, स्कूल परिसर में सन्नाटा
मृतक छात्र के परिवार में गहरा शोक व्याप्त है। घटना के बाद से स्कूल परिसर और आसपास के क्षेत्र में भी तनावपूर्ण शांति देखी गई। पुलिस ने एहतियातन क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल: क्या स्कूल परिसरों में सुरक्षा पर्याप्त है?
परीक्षा केंद्र जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के दौरान और बाद में भी पर्याप्त निगरानी और अनुशासन जरूरी है, ताकि छोटी कहासुनी बड़ी वारदात में न बदले।

मदद चाहिए? कृपया पहले मरने का कष्ट करें

भारत में लोकतंत्र पूरी तरह जीवित है, बस नागरिक का जीवित रहना थोड़ा असुविधाजनक माना जाने लगा है। यदि आपकी पेंशन अटकी है, इलाज के पैसे नहीं हैं, सड़क टूटी पड़ी है या न्याय वर्षों से लंबित है, तो सबसे बड़ी गलती यही है कि आप अभी तक ज़िंदा हैं। जीवित व्यक्ति आवेदन देता है, दफ्तरों के चक्कर काटता है, निवेदन करता है और बदले में “कल आइए”, “साहब मीटिंग में हैं”, “फाइल ऊपर गई है” या “कुछ व्यवस्था करनी पड़ेगी” जैसे अमर वाक्य प्राप्त करता है। व्यवस्था भी क्या करे, जीवित आदमी में इमरजेंसी वाली चमक नहीं होती, न मीडिया की ब्रेकिंग बनता है, न ट्वीट योग्य संवेदना जगाता है।

लेकिन जैसे ही कोई हादसा होता है, एक मौत, एक आत्महत्या, एक वायरल वीडियो और व्यवस्था में करंट दौड़ जाता है। जहां फाइल महीनों से धूल खा रही थी, वहां एम्बुलेंस से तेज़ फैसले दौड़ने लगते हैं। नेता संवेदना व्यक्त करते हैं, अधिकारी दौरा करते हैं, जांच बैठती है, मुआवजा घोषित होता है और नौकरी का आश्वासन भी मिल जाता है। जो काम जीवित व्यक्ति वर्षों में नहीं करा पाया, वह मृतक कुछ घंटों में कर दिखाता है। जीते जी इलाज के लिए पचास हजार नहीं मिलते, मरने के बाद पांच लाख का मुआवजा मिल जाता है। जीते जी सड़क नहीं बनती, हादसे के बाद रातों-रात डामर बिछ जाता है; जीते जी सुनवाई नहीं होती, मौत के बाद विशेष जांच दल बैठ जाता है। मानो प्रशासन का मौन सूत्र हो, रोकथाम महंगी है, मुआवजा सस्ता पड़ता है।

संवेदनाएं भी अब मानो सरकारी कैलेंडर से संचालित होती हैं। घटना के दो घंटे बाद ट्वीट, छह घंटे बाद दौरा, चौबीस घंटे बाद मुआवजा, अड़तालिस घंटे बाद नई खबर और पुरानी फाइल बंद। धीरे-धीरे नागरिकों के बीच यह धारणा घर करती जा रही है कि जीवित इंसान समस्या है और मृत इंसान “मामला” बन जाता है। यह व्यंग्य जरूर है, पर यदि इसे पढ़कर हँसी नहीं आती तो शायद इसलिए कि सच इसके बहुत करीब खड़ा है।

गोरखपुर में मोतियाबिंद ऑपरेशन बना त्रासदी 30 मरीजों में 18 को गंभीर संक्रमण, 9 की आंखें निकालनी पड़ीं; अस्पताल सील, मजिस्ट्रियल जांच शुरू

गोरखपुर/सिकरीगंज | रिपोर्ट: धनेश कुमार
गोरखपुर के सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाइटेक हॉस्पिटल में आयोजित आई कैंप के बाद बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया है। 1 फरवरी को लगाए गए कैंप में 30 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया था। आरोप है कि ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर ही कई मरीजों की आंखों में तेज दर्द, सूजन, खून और मवाद की शिकायत शुरू हो गई।
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच और कल्चर रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है। जानकारी के अनुसार 18 मरीजों में गंभीर इंफेक्शन पाया गया, जबकि 9 मरीजों की हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें आंख निकालनी पड़ी। कई मरीजों का इलाज लखनऊ, वाराणसी और दिल्ली के सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में जारी है।
पीड़ित परिवारों का दर्द
इन्दारी निवासी संजय सिंह ने बताया कि उनके पिता का ऑपरेशन इसी अस्पताल में हुआ था। ऑपरेशन के बाद आंख से लगातार खून बहने लगा। पहले वाराणसी और फिर दिल्ली ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर बताते हुए आंख निकालने की सलाह दी।
एक अन्य पीड़िता की बहू रेखा ने बताया कि ऑपरेशन के बाद आंख में असहनीय दर्द और मवाद की समस्या शुरू हो गई। अब दवाइयों के सहारे इलाज चल रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई
मामला सामने आते ही गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा ने अस्पताल को सील करने और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ी तो रजिस्ट्रेशन भी निरस्त किया जाएगा।
वहीं सीएमओ डॉ राजेश झा ने बताया कि 4 फरवरी को जानकारी मिलने के बाद जिला स्तरीय जांच कमेटी गठित की गई। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी टीम द्वारा भी जांच की गई है। प्रथम दृष्टया मामला संक्रमण का प्रतीत होता है। एहतियातन अस्पताल के नेत्र विभाग को सील कर दिया गया है।
सियासी प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि गोरखपुर में लोगों की आंखों की रोशनी चली गई और जिम्मेदार लोग मौन हैं।
बड़े सवाल
क्या ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण नियंत्रण के मानकों का पालन नहीं हुआ?
क्या उपकरण या दवाएं संक्रमित थीं?
क्या आई कैंप की निगरानी में चूक हुई?
यह घटना प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल जांच जारी है और पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
FT News Digital
अपडेट के लिए जुड़े रहें — friendtimes.in

अवैध हथियार की नुमाइश बनी मौत की वजह, गोरखपुर में दोस्ती का दर्दनाक अंत

गोरखपुर | थाना: चिलुआताल
गोरखपुर के चिलुआताल क्षेत्र में दोस्तों के बीच बैठकी उस समय मातम में बदल गई, जब अवैध पिस्टल का प्रदर्शन एक युवक की जान ले बैठा। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना में इस्तेमाल की गई 32 बोर पिस्टल, आठ जिंदा कारतूस, तीन मोटरसाइकिल और एक अर्टिगा कार बरामद की गई है।
क्या हुआ था उस रात?
पुलिस के अनुसार मृतक अरुण अपने करीबी दोस्तों के साथ बैठा था। बातचीत के दौरान विशाल सिंह ने अपने पास मौजूद अवैध पिस्टल निकालकर दोस्तों को दिखाना शुरू किया।
बताया जा रहा है कि सभी युवक पिस्टल को घेरे में खड़े होकर देख रहे थे। इसी दौरान अचानक ट्रिगर दब गया और गोली सीधे अरुण को जा लगी।
गोली लगते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायल युवक को बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर टीम गठित की गई।
तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर सभी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में बीएनएस की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और आर्म्स एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
प्रेस वार्ता में खुलासा
मामले का खुलासा पुलिस लाइन स्थित सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में किया गया।
इस दौरान ज्ञानेंद्र (पुलिस अधीक्षक उत्तरी),
दिनेश कुमार पुरी (पुलिस अधीक्षक दक्षिणी)
और अनुराग सिंह (क्षेत्राधिकारी कैंपियरगंज) मौजूद रहे।
अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि अवैध हथियार रखना और उसका प्रदर्शन करना गंभीर अपराध है।
कानूनी स्थिति
हत्या से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज
आर्म्स एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं
सभी आरोपी न्यायालय में पेश किए जा रहे हैं
आपराधिक इतिहास की जांच जारी
युवाओं के लिए चेतावनी
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि
“एक पल की लापरवाही ने एक युवक की जान ले ली और कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।”
यह घटना युवाओं के लिए सबक है कि अवैध हथियारों का शौक जानलेवा साबित हो सकता है।

मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान- अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कर्मियों का मानदेय बढ़ेगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बजट सत्र में विधान परिषद को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बजट में अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय वृद्धि की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित कर्मियों का मानदेय जल्द ही बढ़ाया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू करने की घोषणा करते हुए बताया कि यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगी।

बजट सत्र में कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार प्रदेश के शिक्षा और पोषण से जुड़े कर्मचारियों के योगदान को भली-भांति समझती है। उन्होंने कहा कि अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सरकार ने बजट में इनके मानदेय बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रावधान कर दिए हैं, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

1 अप्रैल से लागू होगी कैशलेस व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू की जा रही है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगी। इस कदम का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों को सुविधाजनक भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराना है।

सरकार का दावा है कि इससे भुगतान प्रक्रिया तेज और सुगम होगी।

उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ ने जताया आभार

इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ के अध्यक्ष विक्रम सिंह ने सरकार और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, “हमारा 25,000 अनुदेशकों का परिवार सरकार का धन्यवाद ज्ञापित करता है। मुख्यमंत्री जी ने हमारे लंबे समय से लंबित मुद्दे को गंभीरता से लिया है। यह निर्णय अनुदेशक परिवार के लिए राहत भरा है।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा मानदेय वृद्धि का निर्णय प्रदेश के शिक्षा तंत्र को और सशक्त बनाएगा।

शिक्षा और पोषण व्यवस्था को मिलेगा मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि मानदेय वृद्धि से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और शिक्षा तथा आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

प्रदेश में बड़ी संख्या में अनुदेशक, शिक्षामित्र और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यह फैसला व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

error: कोई भी कंटेंट कॉपी न करें, नहीं तो आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।