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होली की खुशियां मातम में बदलीं, यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा

उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद में यमुना एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने छह परिवारों की खुशियां छीन लीं। जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 4:20 बजे नोएडा से गोरखपुर की ओर जा रही एक डबल डेकर स्लीपर बस ने आगे चल रही वैन को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी भयावह थी कि वैन के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार यात्रियों में से छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
बताया जा रहा है कि वैन में सवार लोग दिल्ली क्षेत्र से अपने घर होली मनाने जा रहे थे। त्योहार की उमंग लेकर निकले ये लोग कभी नहीं सोच सकते थे कि सफर ही उनकी आखिरी यात्रा बन जाएगा।
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और यमुना एक्सप्रेसवे की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल भिजवाया गया। कई घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है।
प्राथमिक जांच में ओवरस्पीडिंग को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है। पुलिस ने बस चालक को हिरासत में लेकर मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
त्योहार के ठीक पहले हुए इस भीषण हादसे ने एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

महाराजगंज में पत्नी ने बुजुर्ग पति को पेट्रोल/डीजल डालकर जिंदा जला दिया

महाराजगंज (UP)। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र में मंगलवार तड़के एक बेहद हिंसक और सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहाँ एक 60 वर्षीय पत्नी ने अपने 62 वर्षीय पति पर पेट्रोल/डीजल डालकर आग लगा दी, जिससे बुजुर्ग की मौत हो गई। इस वारदात से इलाके में भारी आक्रोश और बढ़ती घरेलू हिंसा की चिंताजनक तस्वीर उभर रही है।

घटना का क्रम
श्यामदेउरवा थाना अंतर्गत बासपार कोठी टोला पिपरा निवासी रामपत (62) और उसकी पत्नी सुमित्रा (60) के बीच सोमवार देर शाम विवाद हुआ। 

रात में रामपत सो रहे थे, तब सुमित्रा ने उनके ऊपर पेट्रोल/डीजल डालकर आग लगा दी। 

आग लगने के बाद आरोपी महिला ने कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर ताला लगा दिया।

कमरे में धुआँ उठता देख ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस को बुलाया गया।

जब पुलिस और ग्रामीणों ने दरवाजा खोला, तो रामपत का जलता हुआ शव मिला — वह बाहर निकलने में असफल रहे। 

पुलिस कार्रवाई
मौके पर पहुँची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य एकत्र किए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। �

आरोपी पत्नी सुमित्रा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और उसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। 

पृष्ठभूमि व जांच
जानकारी के मुताबिक सुमित्रा के खिलाफ पहले भी उसके पति पर जानलेवा हमला करने का मामला दर्ज हो चुका है और वह जेल से अब कुछ समय पहले ही बाहर आई थी। �
Patrika News
पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की आश्वासन दी है। �
ऑपइंडिया
📰 संक्षिप्त समाचार (स्क्रॉल/हेडलाइन वाक्य)
महाराजगंज में पत्नी ने पति को पेट्रोल/डीजल डालकर आग लगाई, मौत।
पुलिस ने आरोपी पत्नी को हिरासत में लिया, जांच जारी।
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घर में पेट्रोल डालकर पति को जिंदा जलाया, हत्या मामला उभरता घरेलू विवाद
महाराजगंज में घरेलू हिंसा का रोंगटे खड़े कर देने वाला केस
पति को मौत के घाट उतारा, पत्नी गिरफ्तार — फॉरेंसिक जांच जारी

फेस हाजिरी के पहले ही दिन मनरेगा की रफ्तार थमी, आंकड़ों ने उठाए कई सवाल

ब्यूरो रिपोर्ट अर्जुन सिंह

 संत कबीर नगर

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डिजिटल निगरानी की नई व्यवस्था लागू होते ही जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जमीनी हकीकत सामने आ गई। सोमवार से फेस अटेंडेंस लागू होते ही काम की रफ्तार में अचानक आई गिरावट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिले भर में जहां रविवार तक सैकड़ों परियोजनाओं पर हजारों मजदूरों की मौजूदगी दर्ज की जा रही थी, वहीं सोमवार को फेस हाजिरी शुरू होते ही आंकड़े सिमटकर बेहद कम रह गए। प्रथम पाली में केवल 11 ग्राम पंचायतों की 12 परियोजनाएं ही शुरू हो सकीं और ऑन रिकॉर्ड मात्र 76 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज हुई।
रविवार और सोमवार के आंकड़ों में बड़ा अंतर
बताया जाता है कि रविवार तक 230 ग्राम पंचायतों में 243 परियोजनाएं संचालित थीं। 802 मस्टररोल पर 6,757 मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई थी। लेकिन फेस स्कैनिंग आधारित उपस्थिति व्यवस्था लागू होने के बाद कई ब्लॉकों में कार्य नगण्य या शून्य स्तर पर पहुंच गया।
कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार रहे—
सांथा ब्लॉक: पूर्व में 1,000 से अधिक मजदूर, फेस हाजिरी के पहले दिन कार्य शून्य।
नाथनगर ब्लॉक: पहले 1,100 से अधिक मजदूर, अब 47 मजदूर।
बघौली: 600+ से घटकर 2 मजदूर।
सेमरियावां: 700+ से घटकर 1 मजदूर।
खलीलाबाद और पौली ब्लॉक में भी उपस्थिति बेहद सीमित रही।
इन आंकड़ों ने जमीनी क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर इसे तकनीकी संक्रमण काल की चुनौती भी बताया जा रहा है।
क्या है फेस हाजिरी व्यवस्था?
फेस हाजिरी, केंद्र सरकार द्वारा लागू डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का हिस्सा है। इसमें NMMS App (एनएमएमएस ऐप) के माध्यम से मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जाती है।
कार्यस्थल पर मजदूर का लाइव फोटो लिया जाता है
चेहरे की स्कैनिंग आधार डाटा से मिलान करती है
जॉब कार्ड की ई-केवाईसी अनिवार्य होती है
निर्धारित समय सीमा में उपस्थिति दर्ज करनी होती है
इस व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और वास्तविक मजदूरों की उपस्थिति सुनिश्चित करना बताया गया है।
सवाल और संभावनाएं
डिजिटल तकनीक का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, लेकिन पहले ही दिन आए आंकड़े प्रशासनिक तैयारी, तकनीकी समझ और जमीनी समन्वय पर भी प्रश्न खड़े कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती दिनों में नेटवर्क, प्रशिक्षण और तकनीकी दिक्कतों के कारण उपस्थिति प्रभावित हो सकती है। आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होती है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी।
(यह रिपोर्ट उपलब्ध आंकड़ों और स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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रिश्तों का कत्ल: जमीन के 14 बिस्वा विवाद में एक ही परिवार के चार की निर्मम हत्या

बाबागंज (बहराइच)
रुपईडीहा थाना क्षेत्र के बसंतपुर ऊदल गांव के मजरा रामनगर में सोमवार आधी रात रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। जमीन बिक्री के पैसों के बंटवारे को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि एक ही परिवार के चार सदस्यों की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई।
मृतकों में 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला सिताला, उनके पुत्र बदलूराम (60), पुत्रवधू संजू देवी (56) और परिवार की बेटी शामिल हैं। घटना के बाद गांव में मातम और दहशत का माहौल है।
 क्या है पूरा मामला?
परिवार के बड़े बेटे गुरुदेव की तहरीर के आधार पर छोटे भाई निरंकार के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि जमीन के 14 बिस्वा हिस्से की बिक्री से मिले पैसों के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था।
बताया जा रहा है कि सोमवार रात करीब 12:30 बजे कहासुनी हिंसक रूप ले बैठी। आरोप है कि कुल्हाड़ी से हमला कर चार लोगों की जान ले ली गई। घटना के बाद आरोपी ने स्वयं को भी गंभीर रूप से घायल कर लिया। उसे लखनऊ ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है।
दो भाइयों के आरोप आमने-सामने
जहां बड़े भाई ने छोटे पर हत्या का आरोप लगाया है, वहीं परिवार की एक अन्य बहन ने बड़े भाई पर ही हत्या का आरोप लगाया है। इस कारण पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
पुलिस का कहना है कि प्राथमिक जांच में जमीन के पैसों को लेकर विवाद सामने आया है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष विस्तृत विवेचना के बाद ही स्पष्ट होगा।
गांव में भारी पुलिस बल तैनात
घटना के बाद तनाव की आशंका को देखते हुए गांव में पीएसी समेत भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। ग्रामीणों में भय और शोक का माहौल है। बताया जाता है कि रात से दूसरे दिन तक गांव में कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला।
एक मासूम बालक, जो घटना के समय मौजूद था, पुलिस की निगरानी में है।
आध्यात्मिक परिवार में खूनखराबा
परिवार जय गुरुदेव आध्यात्मिक संगठन से जुड़ा बताया जाता है। बावजूद इसके पारिवारिक विवाद वर्षों से चल रहा था।
(नोट: यह खबर पुलिस द्वारा दर्ज तहरीर और स्थानीय सूत्रों पर आधारित है। मामले की जांच जारी है। अंतिम सत्य पुलिस विवेचना के बाद ही स्पष्ट होगा।)

स्कूल बस की टूटी फर्श बनी मौत का कारण, आरटीओ प्रवर्तन और आरआई निलंबित

लखनऊ/अलीगढ़/सिद्धार्थनगर।
स्कूल बस की लापरवाही ने एक मासूम छात्रा की जान ले ली और अब परिवहन विभाग में बड़ी कार्रवाई हुई है। अलीगढ़ में स्कूल बस की फर्श टूटने से छात्रा के सड़क पर गिरकर बस के पहिए के नीचे आने से हुई दर्दनाक मौत के मामले में शासन ने सख्त कदम उठाए हैं।
परिवहन विभाग ने अलीगढ़ की आरटीओ प्रवर्तन वंदना सिंह और तत्कालीन सम्भागीय निरीक्षक (प्राविधिक) इति चंपालाल को निलंबित कर दिया है। इति चंपालाल की वर्तमान तैनाती सिद्धार्थनगर में बताई जा रही है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
 क्या था पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार 28 फरवरी को अलीगढ़ सीमा से सटे क्षेत्र में संचालित एक स्कूल बस (UP-81 BT-8873) का फर्श अचानक टूट गया। बस में बैठी एक छात्रा सड़क पर गिर गई और पीछे से आ रहे पहिए की चपेट में आ गई। गंभीर रूप से घायल बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई।
जांच में सामने आया कि बस का परमिट समाप्त हो चुका था और बीमा भी वैध नहीं था। यह बस अलीगढ़ दादो स्थित Mount Deva International School में संचालित हो रही थी।
मंत्री ने लिया संज्ञान
मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने अधिकारियों से जवाब तलब किया।
परिवहन आयुक्त किंजल सिंह के निर्देश पर उप परिवहन आयुक्त (आगरा परिक्षेत्र), एआरटीओ प्रशासन/प्रवर्तन अलीगढ़, एआरटीओ कासगंज और संबंधित यात्रीकर अधिकारी को नोटिस जारी किया गया है। तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब के आधार पर आगे की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
स्कूल प्रबंधन पर भी शिकंजा
सूत्रों के मुताबिक स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तहरीर भी दी गई है। अगर परमिट और बीमा समाप्त होने के बावजूद बस का संचालन पाया गया, तो यह सीधी आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आएगा।
बड़ा सवाल
बिना वैध परमिट और बीमा के बस सड़कों पर कैसे दौड़ रही थी?
फिटनेस और सुरक्षा मानकों की जांच किस स्तर पर हुई?
बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल प्रशासन कितना जिम्मेदार है?
एक मासूम की मौत ने परिवहन व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल सिर्फ एक बस का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है।
(नोट: यह खबर प्रकाशित तथ्यों और विभागीय जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। जांच जारी है। आगे आने वाले आधिकारिक अपडेट के अनुसार स्थिति स्पष्ट होगी।)

पत्नी की हत्या के आरोप में पति गिरफ्तार, न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया

आर्थिक तनाव और आपसी विवाद बना घटना का कारण, पुलिस जांच जारी

Meerut, उत्तर प्रदेश।
मेरठ जिले के धनवाली गांव में एक विवाहिता की हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, महिला की मौत के मामले में उसके पति को आरोपी बनाया गया है। घटना के बाद आरोपी स्वयं थाने पहुंचा, जहां उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। बाद में उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच पिछले कुछ समय से पारिवारिक कलह चल रही थी। प्रारंभिक जांच में आर्थिक तंगी, कर्ज और आपसी अविश्वास को विवाद की वजह बताया जा रहा है। घटना वाले दिन दोनों के बीच कहासुनी हुई, जो हिंसक रूप ले बैठी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
थाना प्रभारी का कहना है कि मोबाइल कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के सटीक कारण स्पष्ट होंगे।

पत्नी की हत्या के आरोप में पति गिरफ्तार, न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया

आर्थिक तनाव और आपसी विवाद बना घटना का कारण, पुलिस जांच जारी

Meerut, उत्तर प्रदेश।
मेरठ जिले के धनवाली गांव में एक विवाहिता की हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, महिला की मौत के मामले में उसके पति को आरोपी बनाया गया है। घटना के बाद आरोपी स्वयं थाने पहुंचा, जहां उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। बाद में उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच पिछले कुछ समय से पारिवारिक कलह चल रही थी। प्रारंभिक जांच में आर्थिक तंगी, कर्ज और आपसी अविश्वास को विवाद की वजह बताया जा रहा है। घटना वाले दिन दोनों के बीच कहासुनी हुई, जो हिंसक रूप ले बैठी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
थाना प्रभारी का कहना है कि मोबाइल कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के सटीक कारण स्पष्ट होंगे।

नाली विवाद बना खूनी संग्राम, अधिवक्ता की पीट-पीटकर हत्या से दहला बांसगांव

गोरखपुर (बांसगांव)। नाली के पानी की निकासी को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद शुक्रवार सुबह खूनी संघर्ष में बदल गया। बांसगांव कस्बे के वार्ड नंबर नौ में दो पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प में अधिवक्ता अग्निवेश सिंह की कथित तौर पर लोहे की रॉड और धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया है।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक पक्ष अपने घर की नाली का पानी मुख्य नाले में बहाने के लिए पाइप डाल रहा था। इसी दौरान रास्ते को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। आरोप है कि विवाद के दौरान एक पक्ष ने अधिवक्ता अग्निवेश सिंह पर रॉड, धारदार हथियार और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
बचाव में पहुंचे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी मारपीट की बात सामने आई है। झड़प में दूसरे पक्ष का एक युवक भी घायल हुआ है, जिसका उपचार चल रहा है।
पुलिस की कार्रवाई
परिजनों की तहरीर पर बांसगांव थाना पुलिस ने पांच नामजद लोगों के विरुद्ध हत्या व मारपीट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। एहतियातन क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
शोक में डूबा इलाका
घटना के बाद परिवार और मोहल्ले में गहरा शोक है। अंतिम संस्कार स्थानीय नदी तट पर संपन्न हुआ।

पार्किंग विवाद में इंटर छात्र की मौत, परीक्षा केंद्र बना रणभूमि

गोरखपुर: परीक्षा के बाद हिंसा, ईंट से वार में छात्र की मौत
जनपद गोरखपुर के एक इंटर कॉलेज परिसर में बुधवार को परीक्षा के बाद हुई मारपीट ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। साइकिल खड़ी करने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद इतना बढ़ गया कि एक छात्र को सिर पर ईंट से गंभीर चोट लगी और बाद में इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
यह घटना शहर के चर्चित शिक्षण संस्थान दुनमुन दास बालमुकुंद दास इंटर कालेज (डीबी इंटर कॉलेज) में हुई, जहां रसायन विज्ञान की परीक्षा संपन्न होने के बाद छात्र पार्किंग क्षेत्र में पहुंचे थे।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, परीक्षा समाप्त होने के बाद पार्किंग में साइकिल खड़ी करने को लेकर दो छात्रों के बीच कहासुनी हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले मामूली धक्का-मुक्की हुई, लेकिन बाद में मामला दोबारा भड़क गया। इसी दौरान एक छात्र ने ईंट उठाकर दूसरे छात्र के सिर पर वार कर दिया।
घायल छात्र को तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। बाद में परिजन बेहतर इलाज के लिए लखनऊ ले गए, जहां देर रात उसकी मौत हो गई।
आरोपी छात्र गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस सक्रिय हुई। कोतवाली थाना पुलिस ने पीड़ित पक्ष की तहरीर पर पहले मारपीट और जानलेवा हमले की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। छात्र की मृत्यु के बाद मामले में हत्या की धारा जोड़ते हुए आरोपित छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों छात्र एक-दूसरे को पहले से नहीं जानते थे और विवाद अचानक पार्किंग में शुरू हुआ।
परिवार में मातम, स्कूल परिसर में सन्नाटा
मृतक छात्र के परिवार में गहरा शोक व्याप्त है। घटना के बाद से स्कूल परिसर और आसपास के क्षेत्र में भी तनावपूर्ण शांति देखी गई। पुलिस ने एहतियातन क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल: क्या स्कूल परिसरों में सुरक्षा पर्याप्त है?
परीक्षा केंद्र जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के दौरान और बाद में भी पर्याप्त निगरानी और अनुशासन जरूरी है, ताकि छोटी कहासुनी बड़ी वारदात में न बदले।

मदद चाहिए? कृपया पहले मरने का कष्ट करें

भारत में लोकतंत्र पूरी तरह जीवित है, बस नागरिक का जीवित रहना थोड़ा असुविधाजनक माना जाने लगा है। यदि आपकी पेंशन अटकी है, इलाज के पैसे नहीं हैं, सड़क टूटी पड़ी है या न्याय वर्षों से लंबित है, तो सबसे बड़ी गलती यही है कि आप अभी तक ज़िंदा हैं। जीवित व्यक्ति आवेदन देता है, दफ्तरों के चक्कर काटता है, निवेदन करता है और बदले में “कल आइए”, “साहब मीटिंग में हैं”, “फाइल ऊपर गई है” या “कुछ व्यवस्था करनी पड़ेगी” जैसे अमर वाक्य प्राप्त करता है। व्यवस्था भी क्या करे, जीवित आदमी में इमरजेंसी वाली चमक नहीं होती, न मीडिया की ब्रेकिंग बनता है, न ट्वीट योग्य संवेदना जगाता है।

लेकिन जैसे ही कोई हादसा होता है, एक मौत, एक आत्महत्या, एक वायरल वीडियो और व्यवस्था में करंट दौड़ जाता है। जहां फाइल महीनों से धूल खा रही थी, वहां एम्बुलेंस से तेज़ फैसले दौड़ने लगते हैं। नेता संवेदना व्यक्त करते हैं, अधिकारी दौरा करते हैं, जांच बैठती है, मुआवजा घोषित होता है और नौकरी का आश्वासन भी मिल जाता है। जो काम जीवित व्यक्ति वर्षों में नहीं करा पाया, वह मृतक कुछ घंटों में कर दिखाता है। जीते जी इलाज के लिए पचास हजार नहीं मिलते, मरने के बाद पांच लाख का मुआवजा मिल जाता है। जीते जी सड़क नहीं बनती, हादसे के बाद रातों-रात डामर बिछ जाता है; जीते जी सुनवाई नहीं होती, मौत के बाद विशेष जांच दल बैठ जाता है। मानो प्रशासन का मौन सूत्र हो, रोकथाम महंगी है, मुआवजा सस्ता पड़ता है।

संवेदनाएं भी अब मानो सरकारी कैलेंडर से संचालित होती हैं। घटना के दो घंटे बाद ट्वीट, छह घंटे बाद दौरा, चौबीस घंटे बाद मुआवजा, अड़तालिस घंटे बाद नई खबर और पुरानी फाइल बंद। धीरे-धीरे नागरिकों के बीच यह धारणा घर करती जा रही है कि जीवित इंसान समस्या है और मृत इंसान “मामला” बन जाता है। यह व्यंग्य जरूर है, पर यदि इसे पढ़कर हँसी नहीं आती तो शायद इसलिए कि सच इसके बहुत करीब खड़ा है।

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