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पत्नी की हत्या के आरोप में पति गिरफ्तार, न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया

आर्थिक तनाव और आपसी विवाद बना घटना का कारण, पुलिस जांच जारी

Meerut, उत्तर प्रदेश।
मेरठ जिले के धनवाली गांव में एक विवाहिता की हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, महिला की मौत के मामले में उसके पति को आरोपी बनाया गया है। घटना के बाद आरोपी स्वयं थाने पहुंचा, जहां उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। बाद में उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच पिछले कुछ समय से पारिवारिक कलह चल रही थी। प्रारंभिक जांच में आर्थिक तंगी, कर्ज और आपसी अविश्वास को विवाद की वजह बताया जा रहा है। घटना वाले दिन दोनों के बीच कहासुनी हुई, जो हिंसक रूप ले बैठी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
थाना प्रभारी का कहना है कि मोबाइल कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के सटीक कारण स्पष्ट होंगे।

नाली विवाद बना खूनी संग्राम, अधिवक्ता की पीट-पीटकर हत्या से दहला बांसगांव

गोरखपुर (बांसगांव)। नाली के पानी की निकासी को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद शुक्रवार सुबह खूनी संघर्ष में बदल गया। बांसगांव कस्बे के वार्ड नंबर नौ में दो पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प में अधिवक्ता अग्निवेश सिंह की कथित तौर पर लोहे की रॉड और धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया है।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक पक्ष अपने घर की नाली का पानी मुख्य नाले में बहाने के लिए पाइप डाल रहा था। इसी दौरान रास्ते को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। आरोप है कि विवाद के दौरान एक पक्ष ने अधिवक्ता अग्निवेश सिंह पर रॉड, धारदार हथियार और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
बचाव में पहुंचे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी मारपीट की बात सामने आई है। झड़प में दूसरे पक्ष का एक युवक भी घायल हुआ है, जिसका उपचार चल रहा है।
पुलिस की कार्रवाई
परिजनों की तहरीर पर बांसगांव थाना पुलिस ने पांच नामजद लोगों के विरुद्ध हत्या व मारपीट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। एहतियातन क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
शोक में डूबा इलाका
घटना के बाद परिवार और मोहल्ले में गहरा शोक है। अंतिम संस्कार स्थानीय नदी तट पर संपन्न हुआ।

पार्किंग विवाद में इंटर छात्र की मौत, परीक्षा केंद्र बना रणभूमि

गोरखपुर: परीक्षा के बाद हिंसा, ईंट से वार में छात्र की मौत
जनपद गोरखपुर के एक इंटर कॉलेज परिसर में बुधवार को परीक्षा के बाद हुई मारपीट ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। साइकिल खड़ी करने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद इतना बढ़ गया कि एक छात्र को सिर पर ईंट से गंभीर चोट लगी और बाद में इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
यह घटना शहर के चर्चित शिक्षण संस्थान दुनमुन दास बालमुकुंद दास इंटर कालेज (डीबी इंटर कॉलेज) में हुई, जहां रसायन विज्ञान की परीक्षा संपन्न होने के बाद छात्र पार्किंग क्षेत्र में पहुंचे थे।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, परीक्षा समाप्त होने के बाद पार्किंग में साइकिल खड़ी करने को लेकर दो छात्रों के बीच कहासुनी हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले मामूली धक्का-मुक्की हुई, लेकिन बाद में मामला दोबारा भड़क गया। इसी दौरान एक छात्र ने ईंट उठाकर दूसरे छात्र के सिर पर वार कर दिया।
घायल छात्र को तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। बाद में परिजन बेहतर इलाज के लिए लखनऊ ले गए, जहां देर रात उसकी मौत हो गई।
आरोपी छात्र गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस सक्रिय हुई। कोतवाली थाना पुलिस ने पीड़ित पक्ष की तहरीर पर पहले मारपीट और जानलेवा हमले की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। छात्र की मृत्यु के बाद मामले में हत्या की धारा जोड़ते हुए आरोपित छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों छात्र एक-दूसरे को पहले से नहीं जानते थे और विवाद अचानक पार्किंग में शुरू हुआ।
परिवार में मातम, स्कूल परिसर में सन्नाटा
मृतक छात्र के परिवार में गहरा शोक व्याप्त है। घटना के बाद से स्कूल परिसर और आसपास के क्षेत्र में भी तनावपूर्ण शांति देखी गई। पुलिस ने एहतियातन क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल: क्या स्कूल परिसरों में सुरक्षा पर्याप्त है?
परीक्षा केंद्र जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के दौरान और बाद में भी पर्याप्त निगरानी और अनुशासन जरूरी है, ताकि छोटी कहासुनी बड़ी वारदात में न बदले।

मदद चाहिए? कृपया पहले मरने का कष्ट करें

भारत में लोकतंत्र पूरी तरह जीवित है, बस नागरिक का जीवित रहना थोड़ा असुविधाजनक माना जाने लगा है। यदि आपकी पेंशन अटकी है, इलाज के पैसे नहीं हैं, सड़क टूटी पड़ी है या न्याय वर्षों से लंबित है, तो सबसे बड़ी गलती यही है कि आप अभी तक ज़िंदा हैं। जीवित व्यक्ति आवेदन देता है, दफ्तरों के चक्कर काटता है, निवेदन करता है और बदले में “कल आइए”, “साहब मीटिंग में हैं”, “फाइल ऊपर गई है” या “कुछ व्यवस्था करनी पड़ेगी” जैसे अमर वाक्य प्राप्त करता है। व्यवस्था भी क्या करे, जीवित आदमी में इमरजेंसी वाली चमक नहीं होती, न मीडिया की ब्रेकिंग बनता है, न ट्वीट योग्य संवेदना जगाता है।

लेकिन जैसे ही कोई हादसा होता है, एक मौत, एक आत्महत्या, एक वायरल वीडियो और व्यवस्था में करंट दौड़ जाता है। जहां फाइल महीनों से धूल खा रही थी, वहां एम्बुलेंस से तेज़ फैसले दौड़ने लगते हैं। नेता संवेदना व्यक्त करते हैं, अधिकारी दौरा करते हैं, जांच बैठती है, मुआवजा घोषित होता है और नौकरी का आश्वासन भी मिल जाता है। जो काम जीवित व्यक्ति वर्षों में नहीं करा पाया, वह मृतक कुछ घंटों में कर दिखाता है। जीते जी इलाज के लिए पचास हजार नहीं मिलते, मरने के बाद पांच लाख का मुआवजा मिल जाता है। जीते जी सड़क नहीं बनती, हादसे के बाद रातों-रात डामर बिछ जाता है; जीते जी सुनवाई नहीं होती, मौत के बाद विशेष जांच दल बैठ जाता है। मानो प्रशासन का मौन सूत्र हो, रोकथाम महंगी है, मुआवजा सस्ता पड़ता है।

संवेदनाएं भी अब मानो सरकारी कैलेंडर से संचालित होती हैं। घटना के दो घंटे बाद ट्वीट, छह घंटे बाद दौरा, चौबीस घंटे बाद मुआवजा, अड़तालिस घंटे बाद नई खबर और पुरानी फाइल बंद। धीरे-धीरे नागरिकों के बीच यह धारणा घर करती जा रही है कि जीवित इंसान समस्या है और मृत इंसान “मामला” बन जाता है। यह व्यंग्य जरूर है, पर यदि इसे पढ़कर हँसी नहीं आती तो शायद इसलिए कि सच इसके बहुत करीब खड़ा है।

विद्युत विभाग के पूर्व कर्मी द्वारा किया गया जालसाजी, अब जबरन धन उगाही पर ऊतारु

कुशीनगर। जनपद के पश्चिमी छोर पर स्थित खोठ्ठा बाजार में एक विद्युत कर्मी द्वारा पहले जालसाजी करके फंसाया और अब जबरन धन उगाही कर ऊतारु है।

कनेक्शन के नाम पर 2500 रुपए हड़पे 

प्राप्त जानकारी के अनुसार कुशीनगर जनपद के मोतीचक खंड अन्तर्गत स्थित ग्राम सभा बरवा बावन निवासी ब्यासमुनी उपाध्याय की पत्नी ज्योति उपाध्याय को 2016 में विद्युत विभाग कर्मी सदानंद यादव द्वारा यह बताया गया कि आपके राशनकार्ड पर मात्र 2500 रुपये के पंजीकरण खर्च पर विद्युत कनेक्शन हो जाएगा और आपका बिल भी नहीं आएगा. महिला ने विद्युत कर्मी की बातों पर विश्वास करके 2500 रुपये दे दिया गया. विद्युत कर्मी सदानंद ने महिला के घर में मीटर लगा दिया और बताया कि यह कनेक्शन गरीब परिवार के लिए है इसलिए इसके कागजात नहीं दिए जाते।

9 वर्षों बाद ठगी का पता चला

9 वर्षों बाद इस फरवरी माह में विभागीय जांच के दौरान महिला को ज्ञात हुआ कि विद्युत कर्मी सदानंद यादव ने धोखा देकर 2500 रुपये ऐंठ लिए और विश्वास दिलाने के लिए फर्जी तरीके से बिजली मीटर लगा दिया।

20 हजार में बिल माफ कराने का दावा

धोखाधड़ी का खुलासा होने पर ज्योति ने विद्युत कर्मी से नाराजगी व्यक्त की तो वह कहा कि जेई साहब से बात करके मामले को खत्म करवा देगा.

दूसरे दिन सदानंद ने ज्योति को बताया कि विभागीय गड़बड़ी के कारण ऐसा हो गया. आपका बिल सवा लाख के लगभग है. साहब 20000 रुपये में पूरा बिल माफ करके नया कनेक्शन दे देंगे. इस बात का विश्वास दिलाने के लिए कर्मी द्वारा 15 फरवरी को एक आनलाइन विद्युत कनेक्शन का मैसेज महिला के ह्वाट्सएप पर भेज कर बताया कि साहब कनेक्शन कर दिए हैं, अब आप फ़ौरन बीस हजार रुपये दे दिजिए ताकि आपका दूसरा मीटर लग जाए. महिला द्वारा धन की व्यवस्था करके देने का आश्वासन दिया गया. जब महिला द्वारा धन की व्यवस्था ना होने की बात कही गई तो उक्त कर्मी बिगड़ गया और घर पहुंच कर कहा कि आप 500 रुपये दीजिए नहीं तो बिजली का कनेक्शन काट देंगे. स्थिति को देखते हुए महिला ने सदानंद को आनलाइन 500 रुपये दे दिए।

विद्युतकर्मी स्थाई कर्मचारी नहीं है 

स्थानीय विद्युत केंद्र पर जाने के बाद महिला को ज्ञात हुआ कि उक्त विद्युत कर्मी सदानंद यादव अब विभाग का नियमित कर्मचारी नहीं है फिर भी विभाग के कर्मियों से जान पहचान बना कर अपना उल्लू सीधा करता रहता है।

विद्युत अभियंता से की गई शिकायत 

 इस सम्बन्ध में बात करने के लिए जब स्थानीय विद्युत अभियंता महेंद्र प्रसाद से उनके मोबाइल पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि विभागीय व्यस्तता के कारण वह अभी नहीं मिल सकते।

रिपोर्ट: अजीत प्रताप सिंह 

गोरखपुर में मोतियाबिंद ऑपरेशन बना त्रासदी 30 मरीजों में 18 को गंभीर संक्रमण, 9 की आंखें निकालनी पड़ीं; अस्पताल सील, मजिस्ट्रियल जांच शुरू

गोरखपुर/सिकरीगंज | रिपोर्ट: धनेश कुमार
गोरखपुर के सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाइटेक हॉस्पिटल में आयोजित आई कैंप के बाद बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया है। 1 फरवरी को लगाए गए कैंप में 30 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया था। आरोप है कि ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर ही कई मरीजों की आंखों में तेज दर्द, सूजन, खून और मवाद की शिकायत शुरू हो गई।
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच और कल्चर रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है। जानकारी के अनुसार 18 मरीजों में गंभीर इंफेक्शन पाया गया, जबकि 9 मरीजों की हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें आंख निकालनी पड़ी। कई मरीजों का इलाज लखनऊ, वाराणसी और दिल्ली के सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में जारी है।
पीड़ित परिवारों का दर्द
इन्दारी निवासी संजय सिंह ने बताया कि उनके पिता का ऑपरेशन इसी अस्पताल में हुआ था। ऑपरेशन के बाद आंख से लगातार खून बहने लगा। पहले वाराणसी और फिर दिल्ली ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर बताते हुए आंख निकालने की सलाह दी।
एक अन्य पीड़िता की बहू रेखा ने बताया कि ऑपरेशन के बाद आंख में असहनीय दर्द और मवाद की समस्या शुरू हो गई। अब दवाइयों के सहारे इलाज चल रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई
मामला सामने आते ही गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा ने अस्पताल को सील करने और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ी तो रजिस्ट्रेशन भी निरस्त किया जाएगा।
वहीं सीएमओ डॉ राजेश झा ने बताया कि 4 फरवरी को जानकारी मिलने के बाद जिला स्तरीय जांच कमेटी गठित की गई। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी टीम द्वारा भी जांच की गई है। प्रथम दृष्टया मामला संक्रमण का प्रतीत होता है। एहतियातन अस्पताल के नेत्र विभाग को सील कर दिया गया है।
सियासी प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि गोरखपुर में लोगों की आंखों की रोशनी चली गई और जिम्मेदार लोग मौन हैं।
बड़े सवाल
क्या ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण नियंत्रण के मानकों का पालन नहीं हुआ?
क्या उपकरण या दवाएं संक्रमित थीं?
क्या आई कैंप की निगरानी में चूक हुई?
यह घटना प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल जांच जारी है और पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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अवैध हथियार की नुमाइश बनी मौत की वजह, गोरखपुर में दोस्ती का दर्दनाक अंत

गोरखपुर | थाना: चिलुआताल
गोरखपुर के चिलुआताल क्षेत्र में दोस्तों के बीच बैठकी उस समय मातम में बदल गई, जब अवैध पिस्टल का प्रदर्शन एक युवक की जान ले बैठा। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना में इस्तेमाल की गई 32 बोर पिस्टल, आठ जिंदा कारतूस, तीन मोटरसाइकिल और एक अर्टिगा कार बरामद की गई है।
क्या हुआ था उस रात?
पुलिस के अनुसार मृतक अरुण अपने करीबी दोस्तों के साथ बैठा था। बातचीत के दौरान विशाल सिंह ने अपने पास मौजूद अवैध पिस्टल निकालकर दोस्तों को दिखाना शुरू किया।
बताया जा रहा है कि सभी युवक पिस्टल को घेरे में खड़े होकर देख रहे थे। इसी दौरान अचानक ट्रिगर दब गया और गोली सीधे अरुण को जा लगी।
गोली लगते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायल युवक को बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर टीम गठित की गई।
तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर सभी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में बीएनएस की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और आर्म्स एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
प्रेस वार्ता में खुलासा
मामले का खुलासा पुलिस लाइन स्थित सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में किया गया।
इस दौरान ज्ञानेंद्र (पुलिस अधीक्षक उत्तरी),
दिनेश कुमार पुरी (पुलिस अधीक्षक दक्षिणी)
और अनुराग सिंह (क्षेत्राधिकारी कैंपियरगंज) मौजूद रहे।
अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि अवैध हथियार रखना और उसका प्रदर्शन करना गंभीर अपराध है।
कानूनी स्थिति
हत्या से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज
आर्म्स एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं
सभी आरोपी न्यायालय में पेश किए जा रहे हैं
आपराधिक इतिहास की जांच जारी
युवाओं के लिए चेतावनी
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि
“एक पल की लापरवाही ने एक युवक की जान ले ली और कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।”
यह घटना युवाओं के लिए सबक है कि अवैध हथियारों का शौक जानलेवा साबित हो सकता है।

मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान- अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कर्मियों का मानदेय बढ़ेगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बजट सत्र में विधान परिषद को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बजट में अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय वृद्धि की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित कर्मियों का मानदेय जल्द ही बढ़ाया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू करने की घोषणा करते हुए बताया कि यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगी।

बजट सत्र में कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार प्रदेश के शिक्षा और पोषण से जुड़े कर्मचारियों के योगदान को भली-भांति समझती है। उन्होंने कहा कि अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सरकार ने बजट में इनके मानदेय बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रावधान कर दिए हैं, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

1 अप्रैल से लागू होगी कैशलेस व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू की जा रही है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगी। इस कदम का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों को सुविधाजनक भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराना है।

सरकार का दावा है कि इससे भुगतान प्रक्रिया तेज और सुगम होगी।

उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ ने जताया आभार

इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ के अध्यक्ष विक्रम सिंह ने सरकार और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, “हमारा 25,000 अनुदेशकों का परिवार सरकार का धन्यवाद ज्ञापित करता है। मुख्यमंत्री जी ने हमारे लंबे समय से लंबित मुद्दे को गंभीरता से लिया है। यह निर्णय अनुदेशक परिवार के लिए राहत भरा है।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा मानदेय वृद्धि का निर्णय प्रदेश के शिक्षा तंत्र को और सशक्त बनाएगा।

शिक्षा और पोषण व्यवस्था को मिलेगा मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि मानदेय वृद्धि से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और शिक्षा तथा आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

प्रदेश में बड़ी संख्या में अनुदेशक, शिक्षामित्र और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यह फैसला व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

दबिश से लौट रही पुलिस की स्कॉर्पियो दुर्घटनाग्रस्त, दारोगा की हुई मौत; कई घायल

गोरखपुर। महराजगंज से दबिश देकर लौट रही गोरखपुर पुलिस की टीम की स्कॉर्पियो श्यामदेउरवा क्षेत्र में दर्दनाक हादसे का शिकार हो गई। वाहन अनियंत्रित होकर पहले डिवाइडर से टकराया और फिर सड़क किनारे पेड़ से जा भिड़ा। इस दुर्घटना में दारोगा संतोष कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एसएसआई रमेश चंद्र कुशवाहा, महिला दारोगा गीता समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस टीम महराजगंज में एक मामले में दबिश देकर वापस गोरखपुर लौट रही थी। देर रात श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र में अचानक वाहन अनियंत्रित हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कॉर्पियो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। आसपास के लोगों की सूचना पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल अस्पताल भिजवाया।

सभी घायलों का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, जहां उनकी हालत पर चिकित्सकों की निगरानी रखी जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल लिया।

पुलिस द्वारा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्राथमिक तौर पर वाहन के अनियंत्रित होने को हादसे की वजह माना जा रहा है। मृतक दारोगा के परिजनों को सूचना दे दी गई है और आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

गोरखपुर में संघ शताब्दी वर्ष पर सामाजिक सद्भाव बैठक, सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने दिया एकता का संदेश

गोरखपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्ष प्रांत की ओर से संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत रविवार को तारामंडल स्थित बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में विभिन्न जाति, समाज और पंथ के प्रमुख प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सामाजिक एकता और समरसता पर जोर दिया।

स्वार्थ का अपनापन टिकता नहीं है

अपने उद्बोधन में डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज वही है, जिसका परस्पर जुड़ाव हो। स्वार्थ पर आधारित संबंध स्थायी नहीं होते। उन्होंने कहा कि अन्य देशों में मनुष्य-मनुष्य का संबंध सौदे की तरह देखा जाता है, लेकिन भारत में संबंध अपनेपन पर आधारित हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में विविधताएं हैं, अनेक रीति-रिवाज हैं, फिर भी समाज एक सूत्र में बंधा है। यही भारतीय संस्कृति की विशेषता है।

जीवन का सत्य भगवान हैं

सरसंघचालक ने कहा कि भारत विविधता में एकता का देश है क्योंकि यहां एक चैतन्य सबमें समान रूप से विद्यमान है, जिसे हम भगवान कहते हैं। भारत को हम माता मानते हैं।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग वेशभूषा, भाषा और रंग-रूप कभी अलगाव का कारण नहीं बनते। हमारी संस्कृति में नारी को वात्सल्य और सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। समाज का लक्ष्य जीवन के सत्य को जानना है और जीवन का सत्य भगवान हैं।

समान लक्ष्य और समान संस्कृति पर जोर

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज सद्भाव से चलता है। केवल कानून और पुलिस से समाज नहीं चल सकता। यदि समाज में सद्भावना नहीं होगी तो व्यवस्था टिक नहीं पाएगी।

उन्होंने कहा कि संघ के 100 वर्ष पूरे होना उत्सव का विषय नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। ब्लॉक स्तर पर वर्ष में दो-तीन बार बैठकर समाज के विषयों पर चर्चा होनी चाहिए।

हिन्दू समाज में पूर्ण स्वतंत्रता

सरसंघचालक ने कहा कि हिन्दू समाज में पूर्ण स्वतंत्रता है। हमें यह विचार करना चाहिए कि हम समाज के लिए क्या कर रहे हैं और क्या कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अपनी जाति-समाज की चिंता करना अच्छी बात है, लेकिन हमें बड़े समाज के हित को ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए। भारत स्वार्थ नहीं देखता, बल्कि विश्व के संकट में सहायता के लिए आगे आता है।

समाज स्वयं आगे बढ़े, संघ करेगा सहयोग

कार्यक्रम में विभिन्न समाजों और पंथों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए। जिज्ञासाओं के उत्तर देते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि समाज स्तर पर कार्य स्वयं करना होगा, केवल संघ के भरोसे नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि खंड स्तर पर समाज के प्रमुख लोग मिलकर जिम्मेदारी लें और किसी भी समस्या का समाधान सामूहिक रूप से करें। देश ठीक रहेगा तो हम भी ठीक रहेंगे।

पंगत में किया सहभोज, भारत माता की आरती के साथ समापन

बैठक के बाद सरसंघचालक ने विभिन्न जाति और पंथ के प्रतिनिधियों के साथ पंगत में भोजन किया। मंच पर प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की प्रस्तावना सह प्रांत सद्भाव प्रमुख शिवाजी राय ने रखी तथा सामाजिक सद्भाव प्रमुख डॉ. राकेश कुमार सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ।

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