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आदेश का पालन नहीं किया तो जेल भेज देंगे: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी। अनुदेशकों के नियमितीकरण और एरियर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

नई दिल्ली। परिषदीय अनुदेशकों के नियमितीकरण, एरियर भुगतान और सेवा से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूर्व में दिए गए आदेश का पालन नहीं होने पर कड़ा रुख अपनाया और सरकार के पक्ष से स्पष्ट जवाब मांगा।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि 4 फरवरी 2026 के पूर्व आदेश के बावजूद आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है। याचिकाकर्ताओं के वकील पी.एस. पटवलिया ने आरोप लगाया कि 10 वर्ष से अधिक समय से पार्ट-टाइम या संविदा आधार पर कार्य कर रहे कर्मियों को अभी भी संविदा व्यवस्था में ही रखा जा रहा है और 11 महीने की नई अवधि के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

“आदेश अंतिम है तो पालन करना ही होगा”

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से एएसजी के.एम. नटराज ने कहा कि मामले में आवश्यक निर्देश प्राप्त कर जवाब दाखिल किया जाएगा। इस पर अदालत ने पूछा कि क्या पूर्व आदेश का पालन किया गया है या उसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की गई है।

अदालत को बताया गया कि पूर्व आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज हो चुकी है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब आदेश अंतिम हो चुका है तो उसका पालन करना ही होगा।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी बताया गया कि पूर्व आदेश के अनुसार ₹17,000 की दर से भुगतान किया जाना था और अनुदेशकों पर नई शर्तें थोपने से भी रोक दिया गया था। इसके बावजूद दो कार्यालय आदेश जारी किए जाने की बात अदालत के सामने रखी गई।

“पालन नहीं हुआ तो जेल भेज देंगे”

सुनवाई के दौरान अदालत ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आदेश का पालन किया जाए। अनुपालन नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ सकता है और अवमानना के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं, इसकी जानकारी लेकर उचित जवाब दाखिल किया जाएगा।

27 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई

अदालत द्वारा लिखवाए गए आदेश के अनुसार, यदि 27 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक पूर्व आदेश का अनुपालन नहीं होता है, तो उत्तरदाता संख्या 2 और 3 अर्थात (प्रमुख सचिव) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद नियमितीकरण और बकाया एरियर की मांग कर रहे अनुदेशकों की निगाहें अब अगली सुनवाई पर टिक गई हैं।

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