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मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का निधन, अखिलेश और सीएम योगी ने जताया शोक

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav के बेटे Prateek Yadav का बुधवार (13 मई) सुबह अचानक निधन हो गया। प्रतीक यादव महज 38 वर्ष के थे। उनके असामयिक निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई।

सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव के शव को पोस्टमार्टम के लिए King George’s Medical University (KGMU) भेजा गया है, जहां चार डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम करेगी। पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी।

अखिलेश यादव पहुंचे KGMU, सोशल मीडिया पर दी श्रद्धांजलि

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav अपने छोटे भाई के निधन की सूचना मिलते ही KGMU पहुंच गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतीक यादव की तस्वीर साझा करते हुए भावुक श्रद्धांजलि दी।

अखिलेश यादव ने लिखा,

“प्रतीक यादव जी का निधन अत्यंत दुखद! ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे। विनम्र श्रद्धांजलि!”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताई संवेदना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी प्रतीक यादव के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री पद्म विभूषण स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव जी के पुत्र और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष Aparna Yadav के पति प्रतीक यादव का अचानक निधन अत्यंत दुखद है।

मुख्यमंत्री ने शोक संदेश में कहा कि उनकी हार्दिक श्रद्धांजलि दिवंगत आत्मा के साथ है और ईश्वर शोक संतप्त परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद साफ होगी मौत की वजह

फिलहाल प्रतीक यादव की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है। KGMU में मेडिकल बोर्ड की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा।

राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक

प्रतीक यादव के निधन से समाजवादी परिवार को बड़ा झटका लगा है। राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और समर्थकों द्वारा लगातार शोक संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

बंगाल के हाईप्रोफाइल मर्डर केस में यूपी-बिहार कनेक्शन, तीन गिरफ्तार

शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में खुलासों से मचा सियासी और प्रशासनिक हलचल


लखनऊ/कोलकाता/अयोध्या। पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में अब उत्तर प्रदेश और बिहार का कनेक्शन सामने आने के बाद मामला और भी हाईप्रोफाइल हो गया है। Suvendu Adhikari (शुभेंदु अधिकारी) के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में कोलकाता पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों में यूपी के बलिया निवासी राज सिंह और बिहार के बक्सर निवासी मयंक राज मिश्रा व विक्की मौर्या शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, यह पूरी साजिश बेहद प्रोफेशनल तरीके से रची गई थी और वारदात को अंजाम देने से पहले मृतक की गतिविधियों की रेकी भी की गई थी।

यूपीआई पेमेंट से खुला हत्याकांड का राज

जांच एजेंसियों को बड़ा सुराग उस वक्त मिला जब हत्या के बाद फरार आरोपियों द्वारा एक टोल प्लाजा पर यूपीआई से भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई। डिजिटल ट्रेल के जरिए पुलिस आरोपियों तक पहुंची और घेराबंदी कर उन्हें हिरासत में लिया गया।

सूत्रों के अनुसार, बलिया निवासी राज सिंह पर शूटरों को लॉजिस्टिक सपोर्ट और संसाधन उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि आरोपियों के संपर्क किन-किन प्रभावशाली लोगों और नेटवर्क से थे।

डेढ़ महीने पहले रची गई थी साजिश

कोलकाता पुलिस को शक है कि हत्या की प्लानिंग करीब एक से डेढ़ महीने पहले शुरू हो चुकी थी। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि पूरे ऑपरेशन में कई लोग शामिल थे और उनमें से एक पेशेवर शूटर भी हो सकता है।

राजनीतिक संपर्कों की भी जांच

जांच एजेंसियां आरोपी राज सिंह के कथित राजनीतिक और बाहुबली संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं। सोशल मीडिया पर कई प्रभावशाली लोगों के साथ उसकी तस्वीरें भी वायरल बताई जा रही हैं। हालांकि परिवार ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सोमवार को तीनों आरोपियों को पश्चिम बंगाल के बारासात कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 13 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। फिलहाल SIT पूरे नेटवर्क, फंडिंग और हत्या की साजिश के पीछे मौजूद मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हुई है।

Disclaimer: यह समाचार विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, पुलिस सूत्रों एवं उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच जारी है और दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानूनन संदिग्ध माने जाएंगे।

 

बंगाल के हाईप्रोफाइल मर्डर केस में यूपी-बिहार कनेक्शन, तीन गिरफ्तार

शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में खुलासों से मचा सियासी और प्रशासनिक हलचल


लखनऊ/कोलकाता/अयोध्या। पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में अब उत्तर प्रदेश और बिहार का कनेक्शन सामने आने के बाद मामला और भी हाईप्रोफाइल हो गया है। Suvendu Adhikari (शुभेंदु अधिकारी) के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में कोलकाता पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों में यूपी के बलिया निवासी राज सिंह और बिहार के बक्सर निवासी मयंक राज मिश्रा व विक्की मौर्या शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, यह पूरी साजिश बेहद प्रोफेशनल तरीके से रची गई थी और वारदात को अंजाम देने से पहले मृतक की गतिविधियों की रेकी भी की गई थी।

यूपीआई पेमेंट से खुला हत्याकांड का राज

जांच एजेंसियों को बड़ा सुराग उस वक्त मिला जब हत्या के बाद फरार आरोपियों द्वारा एक टोल प्लाजा पर यूपीआई से भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई। डिजिटल ट्रेल के जरिए पुलिस आरोपियों तक पहुंची और घेराबंदी कर उन्हें हिरासत में लिया गया।

सूत्रों के अनुसार, बलिया निवासी राज सिंह पर शूटरों को लॉजिस्टिक सपोर्ट और संसाधन उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि आरोपियों के संपर्क किन-किन प्रभावशाली लोगों और नेटवर्क से थे।

डेढ़ महीने पहले रची गई थी साजिश

कोलकाता पुलिस को शक है कि हत्या की प्लानिंग करीब एक से डेढ़ महीने पहले शुरू हो चुकी थी। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि पूरे ऑपरेशन में कई लोग शामिल थे और उनमें से एक पेशेवर शूटर भी हो सकता है।

राजनीतिक संपर्कों की भी जांच

जांच एजेंसियां आरोपी राज सिंह के कथित राजनीतिक और बाहुबली संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं। सोशल मीडिया पर कई प्रभावशाली लोगों के साथ उसकी तस्वीरें भी वायरल बताई जा रही हैं। हालांकि परिवार ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सोमवार को तीनों आरोपियों को पश्चिम बंगाल के बारासात कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 13 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। फिलहाल SIT पूरे नेटवर्क, फंडिंग और हत्या की साजिश के पीछे मौजूद मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हुई है।

Disclaimer: यह समाचार विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, पुलिस सूत्रों एवं उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच जारी है और दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानूनन संदिग्ध माने जाएंगे।

 

बिहार में सियासत का नया अध्याय: सम्राट चौधरी होंगे मुख्यमंत्री, एनडीए ने सौंपा नेतृत्व

Samrat Chaudhary is the new CM: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। बीजेपी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से नेता चुने जाने के बाद एनडीए गठबंधन ने भी उन्हें अपना नेता घोषित कर दिया है। इसके साथ ही यह साफ हो गया है कि वे बिहार के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

यह फैसला उस समय लिया गया जब मंगलवार को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद पटना में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं।

सम्राट चौधरी का पहला बयान

नेतृत्व मिलने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के अनुरूप काम करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” और नीतीश कुमार के “समृद्ध बिहार” के सपनों को मिलकर साकार किया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नीतीश कुमार से उन्हें प्रशासन चलाने की महत्वपूर्ण सीख मिली है।

बदलता बिहार का सियासी समीकरण

करीब तीन दशकों तक बिहार की राजनीति लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमती रही। लेकिन अब राज्य को एक नया चेहरा मिलने जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि पहली बार बीजेपी को बिहार जैसे बड़े हिन्दी भाषी राज्य में मुख्यमंत्री पद मिला है, जहां वह अब तक सहयोगी भूमिका में ही रही थी।

राजनीतिक विरासत और मजबूत पकड़

सम्राट चौधरी एक मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे और कुशवाहा समाज के प्रभावशाली नेता माने जाते थे।

यही विरासत सम्राट चौधरी को बिहार की राजनीति में एक अलग पहचान देती है।

सियासी सफर: आरजेडी से बीजेपी तक

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है—

1990 के दशक में सक्रिय राजनीति में प्रवेश

2000 में आरजेडी से विधायक बने

बाद में जेडीयू और फिर बीजेपी का दामन थामा

2023 में बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने

2024 में उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली

उनका यह लंबा अनुभव अब मुख्यमंत्री के रूप में नई भूमिका में नजर आएगा।

नई जिम्मेदारी, बड़ी चुनौती

सम्राट चौधरी के सामने अब बिहार को विकास की नई दिशा देने की चुनौती होगी। गठबंधन राजनीति, सामाजिक संतुलन और विकास के वादों को जमीन पर उतारना उनकी प्राथमिकता होगी।

नीतीश कुमार के 20 साल की सत्ता का अंत 

करीब 20 वर्षों तक शासन करने के बाद अब नीतीश कुमार की सत्ता का अंत हो गया है। वह अब राज्यसभा सांसद की कमान संभालेंगे। बिहार की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ चेहरे का नहीं, बल्कि एक नई दिशा का संकेत माना जा रहा है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में अब राज्य की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

डीजीपी ने कहा, दहेज उत्पीड़न समेत 31 मामलों में एफआईआर न करें दर्ज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब पुलिस 31 मामलों में थानों में एफआईआर दर्ज नहीं करेगी। इसमें दहेज और घरेलू हिंसा से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इस प्रकार के मामलों के सामने आने के बाद थाने केवल परिवाद यानी शिकायत लेंगे। इसके बाद इन्हें कोर्ट के भेजा जाएगा। कोर्ट के आदेश पर ही इन मामलों में केस दर्ज किया जाएगा। यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण ने पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किया है। डीजीपी ने साफ तौर पर कहा है कि जिन मामलों में कानून के तहत केवल परिवाद का प्रावधान है, उनमें एफआईआर दर्ज करना पूरी तरह गलत है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की ओर इस संबंध में आपत्ति के बाद डीजीपी की ओर से आदेश जारी किया गया है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा ?

हाई कोर्ट लखनऊ पीठ ने 25 फरवरी को अनिरुद्ध तिवारी बनाम यूप सरकार एवं अन्य मामले की सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने बीएनएस की धारा 82 में एफआईआर दर्ज किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 219 यह प्रावधान करती है कि कोई भी कोर्ट भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 81 से 84 के तहत दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा, जब तक कि उस अपराध से पीड़ित किसी व्यक्ति की ओर से शिकायत न की गई हो।

हाई कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में केस क्राइम संख्या 0014/2025 में एफआईआर दर्ज करते समय भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 82 का प्रयोग किया गया है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 115(2), 352, 351(3), 85 एवं 82(1) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत श्रावस्ती महिला थाना में दर्ज की गई है।

हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के क्रम में टिप्पणी में कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 220, 221 और 222 आगे यह प्रावधान करती हैं कि बीएनएस के तहत कुछ अन्य अपराधों की परिकल्पना है। इस प्रकार के मामलों में कोर्ट तब तक संज्ञान नहीं लेगा, जब तक मामले के आधार पर पीड़ित व्यक्ति, राज्य, या किसी लोक सेवक की ओर से शिकायत दर्ज न की गई हो। इसलिए, यहां एक विशिष्ट रोक है कि कोर्ट उन अपराधों का संज्ञान नहीं लेगा, जिनका उल्लेख भारतीय न्याय संहिता, 2023 में किया गया है।

यूपी डीजीपी का सभी पुलिस अधिकारियों को जारी आदेश

कोर्ट की टिप्पणी पर आदेश जारी

हाई कोर्ट की टिप्पणी और इस प्रकार के मामलों में आपत्ति जताए जाने के बाद डीजीपी की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं। डीजीपी ने इसमें स्पष्ट किया है कि कई बार पुलिस नियमों के विपरीत एफआईआर दर्ज कर लेती है। इससे आरोपित को कोर्ट में लाभ मिल जाता है। साथ ही, पूरी जांच प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए डीजीपी ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज करने से पहले अनिवार्य रूप से इस संबंध में जांच कर लें। मामलों में देखा जाए कि इसमें एफआईआर दर्ज करने का कानूनी प्रविधान है या नहीं।

31 मामलों में कोर्ट में परिवाद का प्रावधान

डीजीपी राजीव कृष्ण ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मानहानि, घरेलू हिंसा, निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट (चेक बाउंस), माइंस एंड मिनरल एक्ट, कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट और पशुओं के साथ क्रूरता जैसे मामले शामिल हैं। साथ ही, दहेज के साथ-साथ 31 अलग-अलग कानूनों में केवल अदालत में परिवाद दाखिल करने का ही प्रविधान है। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों को निर्देशित किया कि वे कानून के प्रविधानों का गंभीरता से अध्ययन करें। इसी के आधार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इन मामलों में कोर्ट में परिवाद का प्रावधान:

घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881

खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957

गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम, 1994

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1950

बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986

वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986

आयात और निर्यात (नियंत्रण) अधिनियम, 1947

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013

ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999

मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994

कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013

जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974

केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999

कीटनाशक अधिनियम, 1968

नोटरी अधिनियम, 1952

बीमा अधिनियम, 1938

पुरावशेष और आर्ट ट्रेजर अधिनियम, 1972

औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019

उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति और खरीद का विनियमन) अधिनियम, 1953

अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा अधिनियम, 2005

दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 (धारा: 07-1(b)(i) पीड़ित व्यक्ति द्वारा शिकायत) अपराध से प्रभावित व्यक्ति, या ऐसे व्यक्ति के माता-पिता या अन्य रिश्तेदार, अथवा किसी मान्यता प्राप्त कल्याण संस्था या संगठन की ओर से)

बाट और माप मानक अधिनियम, 1976

यूपी में रामनवमी पर दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित, अब 26 व 27 दो दिन रहेगी छुट्टी

उत्तर प्रदेश। रामनवमी पर योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। पहले से घोषित 26 मार्च के सार्वजनिक अवकाश के साथ अब 27 मार्च को भी छुट्टी घोषित कर दी गई है। मंदिरों में रामनवमी के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

हर साल इस पर्व पर बड़ी संख्या में लोग पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंचते हैं, जिससे व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में अतिरिक्त अवकाश से लोगों को सुविधा मिलेगी और भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस निर्णय के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि सरकार आस्था और परंपराओं के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। लगातार दो दिन की छुट्टी से श्रद्धालुओं को न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, बल्कि यात्रा और दर्शन भी अधिक सहज हो सकेंगे।

देश में राज्यपालों और उपराज्यपालों का बड़ा फेरबदल, कई राज्यों में नई नियुक्तियां

केंद्र सरकार ने देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों (उपराज्यपालों) की नियुक्ति एवं स्थानांतरण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल के तहत कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

दिल्ली से लद्दाख भेजे गए विनय कुमार सक्सेना

विनय कुमार सक्सेना को दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर पद से हटाकर लद्दाख का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया गया है। इस बदलाव को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तरनजीत सिंह संधू बने दिल्ली के नए एलजी

पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया गया है। उनके प्रशासनिक और कूटनीतिक अनुभव को राजधानी के लिए अहम माना जा रहा है।

शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना की जिम्मेदारी

शिव प्रताप शुक्ला को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल पद से स्थानांतरित कर तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है।

जिष्णु देव वर्मा अब महाराष्ट्र के राज्यपाल

जिष्णु देव वर्मा, जो पहले तेलंगाना के राज्यपाल थे, अब महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

नंद किशोर यादव को नागालैंड की कमान

वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव को नागालैंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन बने बिहार के राज्यपाल

सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है। उनके सैन्य अनुभव को प्रशासनिक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।

आर.एन. रवि अब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल

आर.एन. रवि को तमिलनाडु से स्थानांतरित कर पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर संभालेंगे तमिलनाडु का कार्यभार

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, जो वर्तमान में केरल के राज्यपाल हैं, अब तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगे।

कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश भेजा गया

कविंदर गुप्ता, जो लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे, अब हिमाचल प्रदेश के नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अहम फैसला

केंद्र सरकार द्वारा किया गया यह फेरबदल प्रशासनिक संतुलन और राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इन नियुक्तियों का संबंधित राज्यों की प्रशासनिक कार्यशैली और नीतिगत फैसलों पर प्रभाव देखने को मिल सकता है।

देश में राज्यपालों और उपराज्यपालों का बड़ा फेरबदल, कई राज्यों में नई नियुक्तियां

केंद्र सरकार ने देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों (उपराज्यपालों) की नियुक्ति एवं स्थानांतरण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल के तहत कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

दिल्ली से लद्दाख भेजे गए विनय कुमार सक्सेना

विनय कुमार सक्सेना को दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर पद से हटाकर लद्दाख का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया गया है। इस बदलाव को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तरनजीत सिंह संधू बने दिल्ली के नए एलजी

पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया गया है। उनके प्रशासनिक और कूटनीतिक अनुभव को राजधानी के लिए अहम माना जा रहा है।

शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना की जिम्मेदारी

शिव प्रताप शुक्ला को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल पद से स्थानांतरित कर तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है।

जिष्णु देव वर्मा अब महाराष्ट्र के राज्यपाल

जिष्णु देव वर्मा, जो पहले तेलंगाना के राज्यपाल थे, अब महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

नंद किशोर यादव को नागालैंड की कमान

वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव को नागालैंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन बने बिहार के राज्यपाल

सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है। उनके सैन्य अनुभव को प्रशासनिक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।

आर.एन. रवि अब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल

आर.एन. रवि को तमिलनाडु से स्थानांतरित कर पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर संभालेंगे तमिलनाडु का कार्यभार

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, जो वर्तमान में केरल के राज्यपाल हैं, अब तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगे।

कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश भेजा गया

कविंदर गुप्ता, जो लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे, अब हिमाचल प्रदेश के नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अहम फैसला

केंद्र सरकार द्वारा किया गया यह फेरबदल प्रशासनिक संतुलन और राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इन नियुक्तियों का संबंधित राज्यों की प्रशासनिक कार्यशैली और नीतिगत फैसलों पर प्रभाव देखने को मिल सकता है।

दहेज की दहलीज़ पर बुझी ज़िंदगी: दो माह के मासूम से छिना मां का साया, गोल्हौरा में पंचायत सहायक की संदिग्ध मौत

Dowry Death Shock in Golhaura
सिद्धार्थनगर।
जनपद सिद्धार्थनगर के गोल्हौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत जोगीकुंड गांव में शनिवार को उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक विवाहिता का शव कमरे के पंखे से लटका मिला। मृतका की पहचान चंद्रकला यादव के रूप में हुई है, जो पंचायत सहायक के पद पर कार्यरत थीं। इस हृदय विदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
परिवार की ओर से दी गई तहरीर में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मृतका के पिता बजरंगी यादव, निवासी सौरहवा ग्रांट, ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2020 में उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह अजय यादव, निवासी कोटखास जोगीकुंड, के साथ किया था। शुरुआती समय सामान्य रहा, लेकिन कुछ वर्षों बाद कथित रूप से अतिरिक्त धन की मांग को लेकर ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ना शुरू कर दी गई।
तहरीर में आरोप है कि घटना के दिन चंद्रकला की गला दबाकर हत्या की गई और बाद में उसे आत्महत्या का रूप देने के लिए पंखे से लटका दिया गया। पिता ने सास, पति और अन्य परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 व 80 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 व 4 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। क्षेत्राधिकारी इटवा, थाना पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य संकलित किए। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
सबसे मार्मिक पहलू…
चंद्रकला यादव पंचायत सहायक के रूप में चौराहा ग्रांट में तैनात थीं। वे शिक्षित, आत्मनिर्भर और अपने परिवार की जिम्मेदार बेटी थीं। लेकिन अब उनके पीछे रह गया है दो माह का मासूम बच्चा — जिसने अभी दुनिया को देखना शुरू ही किया था कि उसकी मां का साया उठ गया।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के सामने एक कड़वा सवाल भी है — क्या दहेज की मानसिकता आज भी बेटियों की जान ले रही है? क्या कानून की सख्ती के बावजूद लालच का अंत नहीं हो पा रहा?
जांच जारी, न्याय की प्रतीक्षा
पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होना आवश्यक है।
समाज के नाम संदेश:
दहेज लेना और देना दोनों अपराध हैं। एक शिक्षित और कामकाजी महिला की संदिग्ध मौत यह संकेत देती है कि सामाजिक जागरूकता और कानूनी सख्ती दोनों को और मजबूत करने की जरूरत है।
FT NEWS DIGITAL इस मामले की हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।

Breaking News: यूपी में SIR की तारीख एक माह बढ़ी, अब 6 मार्च तक कर सकेंगे दावा-आपत्ति

उत्तर प्रदेश में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में दावा और आपत्ति दर्ज कराने की समय-सीमा को एक माह के लिए बढ़ा दिया गया है। अब मतदाता 6 मार्च 2026 तक नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए आवेदन कर सकेंगे।

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने यह जानकारी देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में फॉर्म-6 प्राप्त होने के कारण यह निर्णय लिया गया है।

अब 6 मार्च तक मिलेगा मतदाताओं को मौका

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि

मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, कटवाने और संशोधन के लिए अब 6 मार्च तक समय मिलेगा

नोटिसों का निराकरण 27 मार्च 2026 तक किया जाएगा

अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित की जाएगी

हर बूथ पर रोज दो घंटे मौजूद रहेंगे बीएलओ

मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिए हैं कि

बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) हर दिन

सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक

अपने-अपने पोलिंग स्टेशनों पर मौजूद रहेंगे

फॉर्म भरने में मतदाताओं की सहायता करेंगे और जरूरी प्रपत्र उपलब्ध कराएंगे

राज्यभर में 8,990 एईआरओ करेंगे सुनवाई

सीईओ नवदीप रिणवा ने बताया कि

पूरे प्रदेश में 8,990 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO)

दावे और आपत्तियों की सुनवाई करेंगे

आंकड़ों में SIR की स्थिति

मतदाता सूची से 2.89 करोड़ नाम हटाए गए

12.55 करोड़ मतदाताओं की ड्राफ्ट सूची जारी

प्रतिदिन 2.5 से 3 लाख लोग फॉर्म-6 भर रहे हैं

कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी होनी है

अब तक 2.37 करोड़ नोटिस जारी

86.27 लाख को नोटिस मिल चुकी

30.30 लाख मतदाताओं की सुनवाई पूरी

महिला और युवा मतदाता अभी भी पीछे

चुनाव आयोग के अनुसार

6 जनवरी तक 16.18 लाख लोगों ने फॉर्म-6 भरा

6 जनवरी से 4 फरवरी के बीच 37.80 लाख आवेदन

5 फरवरी को एक ही दिन में 3.51 लाख फॉर्म-6 जमा

अभी भी बड़ी संख्या में महिला और युवा मतदाता सूची से बाहर हैं

उन्हें शामिल करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं

नोटिस पाने वाले सिर्फ 13% मतदाताओं की हो सकी सुनवाई

वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान न हो पाने वाले और तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं को नोटिस भेजी जा रही है।

कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस दी जानी है

अब तक केवल 13 प्रतिशत की ही सुनवाई हो सकी

अभी 1.53 करोड़ नोटिस जारी होना बाकी

इसी वजह से दावा-आपत्ति और सुनवाई की समय-सीमा बढ़ाई गई है।

चुनाव आयोग की अपील

चुनाव आयोग ने सभी पात्र नागरिकों से अपील की है कि वे तय समय-सीमा के भीतर अपने नाम की जांच कर लें और किसी भी त्रुटि की स्थिति में दावा-आपत्ति जरूर दर्ज कराएं, ताकि कोई भी योग्य मतदाता अंतिम सूची से वंचित न रहे।

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