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नेपाल के नए ₹1 के सिक्के पर फिर छिड़ा सीमा विवाद, जानिए क्या है पूरा इतिहास और क्यों मचा है बवाल?

नेपाल सरकार द्वारा एक रुपये के नए सिक्के के प्रस्तावित डिजाइन को लेकर भारत-नेपाल सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। चर्चा इस बात को लेकर है कि सिक्के पर नेपाल के आधिकारिक मानचित्र का उपयोग किया जाएगा, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे विवादित क्षेत्र भी शामिल हैं। भारत पहले ही इन क्षेत्रों को अपना अभिन्न हिस्सा बता चुका है, जबकि नेपाल इन पर अपना दावा जताता रहा है। ऐसे में नया सिक्का केवल मुद्रा नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद का प्रतीक भी बन गया है।


: एक नजर में

नेपाल एक रुपये के सिक्के का नया डिजाइन तैयार कर रहा है।

डिजाइन में आधिकारिक नेपाली मानचित्र शामिल किए जाने की चर्चा।

कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर भारत और नेपाल के दावे अलग-अलग।

भारत ने पहले भी स्पष्ट किया है कि सीमा विवाद का समाधान केवल द्विपक्षीय वार्ता से संभव है।


क्या है पूरा विवाद?

भारत और नेपाल के बीच लगभग 1,850 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है। अधिकांश सीमा पर दोनों देशों में सहमति है, लेकिन उत्तराखंड के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्र को लेकर कई वर्षों से मतभेद बना हुआ है।

विवाद की जड़ 1816 की सुगौली संधि से जुड़ी मानी जाती है। संधि में महाकाली (काली) नदी को दोनों देशों की सीमा माना गया था, लेकिन नदी का वास्तविक उद्गम कौन-सा है, इसी प्रश्न पर दोनों देशों की व्याख्या अलग-अलग है।

भारत का कहना है कि विवादित क्षेत्र उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा हैं, जबकि नेपाल का दावा है कि ये उसके दार्चुला जिले के अंतर्गत आते हैं।

इतिहास : कब-कब बढ़ा विवाद

1816 : सुगौली संधि

ब्रिटिश शासन और नेपाल के बीच हुई संधि में सीमा तय हुई, लेकिन नदी के उद्गम को लेकर भविष्य का विवाद यहीं से शुरू हुआ।

1962 : भारत-चीन युद्ध

भारत ने सामरिक दृष्टि से कालापानी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की।

2015

भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे से व्यापार एवं आवागमन संबंधी समझौते पर नेपाल ने आपत्ति जताई।

2019

भारत ने नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया, जिसमें कालापानी को भारत का हिस्सा दिखाया गया। नेपाल ने इसका विरोध दर्ज कराया।

2020

भारत द्वारा लिपुलेख सड़क का उद्घाटन किए जाने के बाद नेपाल ने नया आधिकारिक राजनीतिक नक्शा जारी किया। बाद में नेपाल की संसद ने संवैधानिक संशोधन कर उसी नक्शे को आधिकारिक मान्यता दे दी।

2025-26

नेपाल में नोट और सिक्कों के नए डिजाइन को लेकर चर्चाएं तेज हुईं। इसी क्रम में एक रुपये के नए सिक्के के डिजाइन में आधिकारिक नक्शा शामिल किए जाने की खबर सामने आई, जिसने सीमा विवाद को फिर चर्चा में ला दिया।

भारत का आधिकारिक रुख

भारत लगातार यह कहता रहा है कि—

कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा भारत के अभिन्न अंग हैं।

सीमा विवाद का समाधान आपसी संवाद और द्विपक्षीय वार्ता से होना चाहिए।

किसी भी पक्ष द्वारा एकतरफा कदम वास्तविक सीमा की स्थिति को नहीं बदलता।

नेपाल का पक्ष

नेपाल का कहना है कि—

उसके संविधान और आधिकारिक दस्तावेजों में स्वीकृत मानचित्र ही सरकारी अभिलेखों और प्रतीकों में उपयोग किया जाता है।

सिक्के या अन्य सरकारी प्रकाशनों में उसी आधिकारिक मानचित्र का प्रयोग किया जाना उसकी प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

विशेषज्ञों के अनुसार मुद्रा, डाक टिकट और सरकारी दस्तावेज किसी भी देश की संप्रभुता के प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए सिक्के पर प्रयुक्त मानचित्र केवल डिजाइन का विषय नहीं बल्कि कूटनीतिक और राजनीतिक महत्व भी रखता है। हालांकि सीमा का अंतिम निर्धारण दोनों देशों के बीच वार्ता और आपसी सहमति से ही संभव माना जाता है।

सारांश

नेपाल के नए ₹1 के सिक्के को लेकर सीमा विवाद फिर चर्चा में है।

विवाद कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को लेकर है।

भारत और नेपाल दोनों इन क्षेत्रों पर अलग-अलग दावे करते हैं।

दोनों देशों का आधिकारिक रुख वर्षों से यथावत है।

सीमा विवाद का अंतिम समाधान अब भी द्विपक्षीय वार्ता से ही संभव माना जा रहा है।

टिप्पणी

भारत और नेपाल के संबंध केवल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक रिश्ते भी गहरे हैं। ऐसे में सीमा से जुड़े मुद्दों पर संयम, कूटनीतिक संवाद और पारस्परिक सम्मान दोनों देशों के हित में माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील विषयों पर स्थायी समाधान केवल बातचीत और आपसी विश्वास से ही निकल सकता है।


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संपादकीय नोट (प्रकाशन हेतु): यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ऐतिहासिक एवं आधिकारिक बयानों पर आधारित है। सीमा विवाद को लेकर भारत और नेपाल के आधिकारिक रुख अलग-अलग हैं। इस रिपोर्ट का उद्देश्य किसी दावे का समर्थन या खंडन करना नहीं, बल्कि तथ्यों और उपलब्ध जानकारी को संतुलित रूप में प्रस्तुत करना है।

सुप्रीम कोर्ट से अनुदेशकों को बड़ी राहत: यूपी सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज, एरियर पर फैसला बरकरार

लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों के लिए आज एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल पुनर्विचार याचिका (Review Petition) को खारिज कर दिया है, जिससे 4 फरवरी को सुनाया गया ऐतिहासिक निर्णय यथावत बना हुआ है।

गौरतलब है कि 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अनुदेशकों के 17000 रुपए मानदेय, लगभग 9 वर्षों के एरियर, नियमितीकरण तथा अन्य सेवा संबंधी लाभों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। 17000 तो सरकार ने दे दिया लेकिन एरियर के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया है।

इस निर्णय के बाद प्रदेशभर के हजारों अनुदेशकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। विभिन्न जिलों में अनुदेशकों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह का बयान

अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा—

“हम सर्वोच्च न्यायालय का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं, जिसने न्याय और संविधान की भावना के अनुरूप अनुदेशकों के अधिकारों की रक्षा की है। सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज होना हजारों अनुदेशकों के संघर्ष की बड़ी जीत है। अब हम प्रदेश सरकार से अपेक्षा करते हैं कि वह बिना किसी विलंब के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करे और सभी पात्र अनुदेशकों  9 वर्षों का एरियर, नियमितीकरण तथा न्यायालय द्वारा निर्धारित अन्य सभी लाभ शीघ्र उपलब्ध कराए।”

उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल आर्थिक लाभ का विषय नहीं, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे अनुदेशकों के सम्मान और अधिकारों की भी जीत है।

अब सरकार पर बढ़ा अनुपालन का दबाव

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुनर्विचार याचिका खारिज किए जाने के बाद अब प्रदेश सरकार पर न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने का दबाव बढ़ गया है। प्रदेशभर के अनुदेशक अब आदेश के क्रियान्वयन और बकाया भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।

जिंदा बेटी की निकाली अर्थी, प्रेमी संग जाने पर परिवार का बड़ा फैसला

सिंदूरदान से इनकार के बाद युवती के प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार की चर्चा, गढ़वा में मामला बना बहस का विषय


स्थान: गढ़वा (झारखंड)मुख्य बिंदु: विवाह समारोह में युवती द्वारा कथित रूप से सिंदूरदान से इनकार किए जाने के बाद परिजनों ने प्रतीकात्मक शवयात्रा निकालने का कदम उठाया। घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।


सारांश

गढ़वा जिले के रमना क्षेत्र में एक विवाह समारोह से जुड़ा मामला इन दिनों चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विवाह की रस्मों के दौरान युवती ने सिंदूरदान से इनकार कर दिया और बाद में अपने प्रेमी के साथ रहने लगी। इसके बाद परिजनों द्वारा युवती को सामाजिक रूप से मृत मानते हुए प्रतीकात्मक शवयात्रा और अंतिम संस्कार किए जाने की खबरें सामने आई हैं।


झारखंड के गढ़वा जिले में सामाजिक और पारिवारिक भावनाओं से जुड़ा एक मामला सुर्खियों में है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विवाह की अंतिम रस्म के समय युवती द्वारा विवाह से इनकार किए जाने के बाद परिजनों ने नाराजगी और पीड़ा व्यक्त करते हुए प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार का आयोजन किया। घटना के बाद क्षेत्र में सामाजिक मान्यताओं, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक सम्मान को लेकर बहस तेज हो गई है।

विस्तृत खबर

प्राप्त जानकारी के अनुसार रमना थाना क्षेत्र के एक गांव में विवाह की अधिकांश रस्में पूरी हो चुकी थीं। इसी दौरान युवती ने कथित रूप से सिंदूरदान की रस्म से इनकार कर दिया। बाद में उसके अपने प्रेमी के साथ रहने की बात सामने आई।

मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि घटना से आहत परिजनों ने युवती को सामाजिक रूप से मृत मानते हुए प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली। बताया जाता है कि इस दौरान ग्रामीण भी मौजूद रहे और बाद में प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार की रस्में निभाई गईं।

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए घटना से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

सामाजिक जानकारों का मानना है कि यह मामला पारिवारिक सम्मान, सामाजिक परंपराओं और व्यक्तिगत निर्णयों के बीच टकराव को दर्शाता है। वहीं क्षेत्र में यह घटना चर्चा और बहस का प्रमुख विषय बनी हुई है।

“रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, सड़क हादसे में भतीजे प्रभात सिंह की मौत”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भतीजे प्रभात सिंह की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत

इंदौर में तेज रफ्तार बस ने मारी टक्कर, परिवार और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर

इंदौर (मध्य प्रदेश)। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भतीजे प्रभात सिंह की एक दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई। यह हादसा इंदौर के शिप्रा थाना क्षेत्र में उस समय हुआ, जब प्रभात सिंह देवास से इंदौर लौट रहे थे। अचानक हुए इस हादसे ने पूरे परिवार के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में भी शोक की लहर दौड़ा दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रभात सिंह अपनी कार के पास पहुंचे थे और वाहन में बैठने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रही एक यात्री बस ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि प्रभात सिंह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और राहगीरों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण चिकित्सक उन्हें बचा नहीं सके। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बस को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे का कारण माना जा रहा है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर मामले की जांच कर रही है।


कौन थे प्रभात सिंह?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भतीजे थे।

सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते थे।

हादसा इंदौर के शिप्रा थाना क्षेत्र में हुआ।

तेज रफ्तार बस की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हुए।

अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हुई।


देवास से इंदौर लौट रहे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भतीजे प्रभात सिंह को एक तेज रफ्तार बस ने उस समय कुचल दिया, जब वह अपनी कार में बैठने जा रहे थे। हादसा इतना भयावह था कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी जिंदगी की डोर टूट गई।

सारांश

इंदौर के शिप्रा थाना क्षेत्र में हुए भीषण सड़क हादसे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भतीजे प्रभात सिंह की मौत हो गई। तेज रफ्तार बस की टक्कर से गंभीर रूप से घायल प्रभात सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

 

मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का निधन, अखिलेश और सीएम योगी ने जताया शोक

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav के बेटे Prateek Yadav का बुधवार (13 मई) सुबह अचानक निधन हो गया। प्रतीक यादव महज 38 वर्ष के थे। उनके असामयिक निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई।

सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव के शव को पोस्टमार्टम के लिए King George’s Medical University (KGMU) भेजा गया है, जहां चार डॉक्टरों की टीम पोस्टमार्टम करेगी। पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी।

अखिलेश यादव पहुंचे KGMU, सोशल मीडिया पर दी श्रद्धांजलि

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav अपने छोटे भाई के निधन की सूचना मिलते ही KGMU पहुंच गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतीक यादव की तस्वीर साझा करते हुए भावुक श्रद्धांजलि दी।

अखिलेश यादव ने लिखा,

“प्रतीक यादव जी का निधन अत्यंत दुखद! ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे। विनम्र श्रद्धांजलि!”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताई संवेदना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी प्रतीक यादव के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री पद्म विभूषण स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव जी के पुत्र और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष Aparna Yadav के पति प्रतीक यादव का अचानक निधन अत्यंत दुखद है।

मुख्यमंत्री ने शोक संदेश में कहा कि उनकी हार्दिक श्रद्धांजलि दिवंगत आत्मा के साथ है और ईश्वर शोक संतप्त परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद साफ होगी मौत की वजह

फिलहाल प्रतीक यादव की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है। KGMU में मेडिकल बोर्ड की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा।

राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक

प्रतीक यादव के निधन से समाजवादी परिवार को बड़ा झटका लगा है। राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और समर्थकों द्वारा लगातार शोक संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

बंगाल के हाईप्रोफाइल मर्डर केस में यूपी-बिहार कनेक्शन, तीन गिरफ्तार

शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में खुलासों से मचा सियासी और प्रशासनिक हलचल


लखनऊ/कोलकाता/अयोध्या। पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में अब उत्तर प्रदेश और बिहार का कनेक्शन सामने आने के बाद मामला और भी हाईप्रोफाइल हो गया है। Suvendu Adhikari (शुभेंदु अधिकारी) के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में कोलकाता पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों में यूपी के बलिया निवासी राज सिंह और बिहार के बक्सर निवासी मयंक राज मिश्रा व विक्की मौर्या शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, यह पूरी साजिश बेहद प्रोफेशनल तरीके से रची गई थी और वारदात को अंजाम देने से पहले मृतक की गतिविधियों की रेकी भी की गई थी।

यूपीआई पेमेंट से खुला हत्याकांड का राज

जांच एजेंसियों को बड़ा सुराग उस वक्त मिला जब हत्या के बाद फरार आरोपियों द्वारा एक टोल प्लाजा पर यूपीआई से भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई। डिजिटल ट्रेल के जरिए पुलिस आरोपियों तक पहुंची और घेराबंदी कर उन्हें हिरासत में लिया गया।

सूत्रों के अनुसार, बलिया निवासी राज सिंह पर शूटरों को लॉजिस्टिक सपोर्ट और संसाधन उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि आरोपियों के संपर्क किन-किन प्रभावशाली लोगों और नेटवर्क से थे।

डेढ़ महीने पहले रची गई थी साजिश

कोलकाता पुलिस को शक है कि हत्या की प्लानिंग करीब एक से डेढ़ महीने पहले शुरू हो चुकी थी। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि पूरे ऑपरेशन में कई लोग शामिल थे और उनमें से एक पेशेवर शूटर भी हो सकता है।

राजनीतिक संपर्कों की भी जांच

जांच एजेंसियां आरोपी राज सिंह के कथित राजनीतिक और बाहुबली संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं। सोशल मीडिया पर कई प्रभावशाली लोगों के साथ उसकी तस्वीरें भी वायरल बताई जा रही हैं। हालांकि परिवार ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सोमवार को तीनों आरोपियों को पश्चिम बंगाल के बारासात कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 13 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। फिलहाल SIT पूरे नेटवर्क, फंडिंग और हत्या की साजिश के पीछे मौजूद मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हुई है।

Disclaimer: यह समाचार विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, पुलिस सूत्रों एवं उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच जारी है और दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानूनन संदिग्ध माने जाएंगे।

 

बंगाल के हाईप्रोफाइल मर्डर केस में यूपी-बिहार कनेक्शन, तीन गिरफ्तार

शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में खुलासों से मचा सियासी और प्रशासनिक हलचल


लखनऊ/कोलकाता/अयोध्या। पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में अब उत्तर प्रदेश और बिहार का कनेक्शन सामने आने के बाद मामला और भी हाईप्रोफाइल हो गया है। Suvendu Adhikari (शुभेंदु अधिकारी) के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में कोलकाता पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों में यूपी के बलिया निवासी राज सिंह और बिहार के बक्सर निवासी मयंक राज मिश्रा व विक्की मौर्या शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, यह पूरी साजिश बेहद प्रोफेशनल तरीके से रची गई थी और वारदात को अंजाम देने से पहले मृतक की गतिविधियों की रेकी भी की गई थी।

यूपीआई पेमेंट से खुला हत्याकांड का राज

जांच एजेंसियों को बड़ा सुराग उस वक्त मिला जब हत्या के बाद फरार आरोपियों द्वारा एक टोल प्लाजा पर यूपीआई से भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई। डिजिटल ट्रेल के जरिए पुलिस आरोपियों तक पहुंची और घेराबंदी कर उन्हें हिरासत में लिया गया।

सूत्रों के अनुसार, बलिया निवासी राज सिंह पर शूटरों को लॉजिस्टिक सपोर्ट और संसाधन उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि आरोपियों के संपर्क किन-किन प्रभावशाली लोगों और नेटवर्क से थे।

डेढ़ महीने पहले रची गई थी साजिश

कोलकाता पुलिस को शक है कि हत्या की प्लानिंग करीब एक से डेढ़ महीने पहले शुरू हो चुकी थी। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि पूरे ऑपरेशन में कई लोग शामिल थे और उनमें से एक पेशेवर शूटर भी हो सकता है।

राजनीतिक संपर्कों की भी जांच

जांच एजेंसियां आरोपी राज सिंह के कथित राजनीतिक और बाहुबली संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं। सोशल मीडिया पर कई प्रभावशाली लोगों के साथ उसकी तस्वीरें भी वायरल बताई जा रही हैं। हालांकि परिवार ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सोमवार को तीनों आरोपियों को पश्चिम बंगाल के बारासात कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 13 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। फिलहाल SIT पूरे नेटवर्क, फंडिंग और हत्या की साजिश के पीछे मौजूद मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हुई है।

Disclaimer: यह समाचार विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, पुलिस सूत्रों एवं उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच जारी है और दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानूनन संदिग्ध माने जाएंगे।

 

बिहार में सियासत का नया अध्याय: सम्राट चौधरी होंगे मुख्यमंत्री, एनडीए ने सौंपा नेतृत्व

Samrat Chaudhary is the new CM: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। बीजेपी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से नेता चुने जाने के बाद एनडीए गठबंधन ने भी उन्हें अपना नेता घोषित कर दिया है। इसके साथ ही यह साफ हो गया है कि वे बिहार के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

यह फैसला उस समय लिया गया जब मंगलवार को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद पटना में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं।

सम्राट चौधरी का पहला बयान

नेतृत्व मिलने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के अनुरूप काम करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” और नीतीश कुमार के “समृद्ध बिहार” के सपनों को मिलकर साकार किया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नीतीश कुमार से उन्हें प्रशासन चलाने की महत्वपूर्ण सीख मिली है।

बदलता बिहार का सियासी समीकरण

करीब तीन दशकों तक बिहार की राजनीति लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमती रही। लेकिन अब राज्य को एक नया चेहरा मिलने जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि पहली बार बीजेपी को बिहार जैसे बड़े हिन्दी भाषी राज्य में मुख्यमंत्री पद मिला है, जहां वह अब तक सहयोगी भूमिका में ही रही थी।

राजनीतिक विरासत और मजबूत पकड़

सम्राट चौधरी एक मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे और कुशवाहा समाज के प्रभावशाली नेता माने जाते थे।

यही विरासत सम्राट चौधरी को बिहार की राजनीति में एक अलग पहचान देती है।

सियासी सफर: आरजेडी से बीजेपी तक

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है—

1990 के दशक में सक्रिय राजनीति में प्रवेश

2000 में आरजेडी से विधायक बने

बाद में जेडीयू और फिर बीजेपी का दामन थामा

2023 में बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने

2024 में उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली

उनका यह लंबा अनुभव अब मुख्यमंत्री के रूप में नई भूमिका में नजर आएगा।

नई जिम्मेदारी, बड़ी चुनौती

सम्राट चौधरी के सामने अब बिहार को विकास की नई दिशा देने की चुनौती होगी। गठबंधन राजनीति, सामाजिक संतुलन और विकास के वादों को जमीन पर उतारना उनकी प्राथमिकता होगी।

नीतीश कुमार के 20 साल की सत्ता का अंत 

करीब 20 वर्षों तक शासन करने के बाद अब नीतीश कुमार की सत्ता का अंत हो गया है। वह अब राज्यसभा सांसद की कमान संभालेंगे। बिहार की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ चेहरे का नहीं, बल्कि एक नई दिशा का संकेत माना जा रहा है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में अब राज्य की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

डीजीपी ने कहा, दहेज उत्पीड़न समेत 31 मामलों में एफआईआर न करें दर्ज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब पुलिस 31 मामलों में थानों में एफआईआर दर्ज नहीं करेगी। इसमें दहेज और घरेलू हिंसा से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इस प्रकार के मामलों के सामने आने के बाद थाने केवल परिवाद यानी शिकायत लेंगे। इसके बाद इन्हें कोर्ट के भेजा जाएगा। कोर्ट के आदेश पर ही इन मामलों में केस दर्ज किया जाएगा। यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण ने पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किया है। डीजीपी ने साफ तौर पर कहा है कि जिन मामलों में कानून के तहत केवल परिवाद का प्रावधान है, उनमें एफआईआर दर्ज करना पूरी तरह गलत है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की ओर इस संबंध में आपत्ति के बाद डीजीपी की ओर से आदेश जारी किया गया है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा ?

हाई कोर्ट लखनऊ पीठ ने 25 फरवरी को अनिरुद्ध तिवारी बनाम यूप सरकार एवं अन्य मामले की सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने बीएनएस की धारा 82 में एफआईआर दर्ज किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 219 यह प्रावधान करती है कि कोई भी कोर्ट भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 81 से 84 के तहत दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा, जब तक कि उस अपराध से पीड़ित किसी व्यक्ति की ओर से शिकायत न की गई हो।

हाई कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में केस क्राइम संख्या 0014/2025 में एफआईआर दर्ज करते समय भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 82 का प्रयोग किया गया है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 115(2), 352, 351(3), 85 एवं 82(1) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत श्रावस्ती महिला थाना में दर्ज की गई है।

हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के क्रम में टिप्पणी में कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 220, 221 और 222 आगे यह प्रावधान करती हैं कि बीएनएस के तहत कुछ अन्य अपराधों की परिकल्पना है। इस प्रकार के मामलों में कोर्ट तब तक संज्ञान नहीं लेगा, जब तक मामले के आधार पर पीड़ित व्यक्ति, राज्य, या किसी लोक सेवक की ओर से शिकायत दर्ज न की गई हो। इसलिए, यहां एक विशिष्ट रोक है कि कोर्ट उन अपराधों का संज्ञान नहीं लेगा, जिनका उल्लेख भारतीय न्याय संहिता, 2023 में किया गया है।

यूपी डीजीपी का सभी पुलिस अधिकारियों को जारी आदेश

कोर्ट की टिप्पणी पर आदेश जारी

हाई कोर्ट की टिप्पणी और इस प्रकार के मामलों में आपत्ति जताए जाने के बाद डीजीपी की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं। डीजीपी ने इसमें स्पष्ट किया है कि कई बार पुलिस नियमों के विपरीत एफआईआर दर्ज कर लेती है। इससे आरोपित को कोर्ट में लाभ मिल जाता है। साथ ही, पूरी जांच प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए डीजीपी ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज करने से पहले अनिवार्य रूप से इस संबंध में जांच कर लें। मामलों में देखा जाए कि इसमें एफआईआर दर्ज करने का कानूनी प्रविधान है या नहीं।

31 मामलों में कोर्ट में परिवाद का प्रावधान

डीजीपी राजीव कृष्ण ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मानहानि, घरेलू हिंसा, निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट (चेक बाउंस), माइंस एंड मिनरल एक्ट, कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट और पशुओं के साथ क्रूरता जैसे मामले शामिल हैं। साथ ही, दहेज के साथ-साथ 31 अलग-अलग कानूनों में केवल अदालत में परिवाद दाखिल करने का ही प्रविधान है। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों को निर्देशित किया कि वे कानून के प्रविधानों का गंभीरता से अध्ययन करें। इसी के आधार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इन मामलों में कोर्ट में परिवाद का प्रावधान:

घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881

खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957

गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम, 1994

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1950

बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986

वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986

आयात और निर्यात (नियंत्रण) अधिनियम, 1947

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013

ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999

मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994

कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013

जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974

केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999

कीटनाशक अधिनियम, 1968

नोटरी अधिनियम, 1952

बीमा अधिनियम, 1938

पुरावशेष और आर्ट ट्रेजर अधिनियम, 1972

औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019

उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति और खरीद का विनियमन) अधिनियम, 1953

अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा अधिनियम, 2005

दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 (धारा: 07-1(b)(i) पीड़ित व्यक्ति द्वारा शिकायत) अपराध से प्रभावित व्यक्ति, या ऐसे व्यक्ति के माता-पिता या अन्य रिश्तेदार, अथवा किसी मान्यता प्राप्त कल्याण संस्था या संगठन की ओर से)

बाट और माप मानक अधिनियम, 1976

यूपी में रामनवमी पर दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित, अब 26 व 27 दो दिन रहेगी छुट्टी

उत्तर प्रदेश। रामनवमी पर योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। पहले से घोषित 26 मार्च के सार्वजनिक अवकाश के साथ अब 27 मार्च को भी छुट्टी घोषित कर दी गई है। मंदिरों में रामनवमी के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

हर साल इस पर्व पर बड़ी संख्या में लोग पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंचते हैं, जिससे व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में अतिरिक्त अवकाश से लोगों को सुविधा मिलेगी और भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस निर्णय के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि सरकार आस्था और परंपराओं के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। लगातार दो दिन की छुट्टी से श्रद्धालुओं को न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, बल्कि यात्रा और दर्शन भी अधिक सहज हो सकेंगे।

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