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अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हलचल का असर: देश में LPG सिलेंडर ₹60 महंगा

नई दिल्ली।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगभग 60 रुपये तक की बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार इस बदलाव के बाद देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर तेल और गैस बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर कई देशों की ऊर्जा लागत पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का प्रभाव घरेलू कीमतों पर भी देखा जा सकता है।
इस बीच पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक परिस्थितियों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं पर भी वैश्विक बाजार की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थितियों में ऊर्जा कीमतों में समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार ईंधन की कीमतों में बदलाव का असर परिवहन लागत, घरेलू बजट और महंगाई के अन्य पहलुओं पर भी पड़ सकता है। हालांकि संबंधित एजेंसियां और नीति विशेषज्ञ ऊर्जा आपूर्ति और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल ऊर्जा बाजार से जुड़े संकेतों और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुसार कीमतों में बदलाव संभव है।

नेपाल की राजनीति में फिर गूंजा शाह परिवार का नाम — अभिषेक प्रताप शाह की जीत से सीमा क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल

नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया है। कपिलवस्तु क्षेत्र से नेता अभिषेक प्रताप शाह ने चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत किया है। उनकी जीत को नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि यह क्षेत्र भारत-नेपाल सीमा से जुड़ा हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कपिलवस्तु और उससे जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों में होने वाले चुनावों का प्रभाव केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर भारत और नेपाल के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों पर भी देखा जाता है।
अभिषेक प्रताप शाह लंबे समय से नेपाल की राजनीति में सक्रिय माने जाते हैं और उनका परिवार भी राजनीतिक परंपरा से जुड़ा रहा है। इसी कारण उनकी जीत को अनुभव और जनसमर्थन की जीत के रूप में भी देखा जा रहा है।
नेपाल के राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस क्षेत्र में चुनावी परिणाम अक्सर सीमा पार रहने वाले लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन जाते हैं। कारण यह है कि भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के चलते दोनों देशों के लोगों के बीच व्यापार, रिश्तेदारी और सांस्कृतिक संपर्क काफी गहरा है।
इसी संदर्भ में भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस जीत पर प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यदि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाती है, तो इससे दोनों देशों के लोगों को लाभ मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में नेपाल की नई राजनीतिक परिस्थितियों के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीमा क्षेत्रों के विकास, व्यापारिक गतिविधियों और बुनियादी ढांचे को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है।
नेपाल के इस चुनावी परिणाम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि दक्षिण एशिया की राजनीति में स्थानीय चुनाव भी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन सकते हैं।

नेपाल आम चुनाव 2026 – लोकतंत्र की नई दिशा

नेपाल में लोकतंत्र का महापर्व: भारी उत्साह के साथ मतदान, नई राजनीतिक दिशा की ओर बढ़ता देश


काठमांडू/नेपाल।
भारत के पड़ोसी और मित्र राष्ट्र नेपाल में हाल ही में हुए आम चुनावों ने देश की राजनीति को एक नई दिशा देने का संकेत दिया है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत लाखों नेपाली नागरिकों ने उत्साह के साथ मतदान में हिस्सा लिया और शांतिपूर्ण माहौल में मतदान सम्पन्न हुआ।
नेपाल में यह चुनाव उस समय हुआ जब पिछले वर्ष भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों और युवाओं के बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। उसी राजनीतिक बदलाव के बाद 5 मार्च 2026 को नए संसद के गठन के लिए चुनाव कराए गए।
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चुनाव आयोग के अनुसार पूरे देश में मतदान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से कराया गया। पर्वतीय और दुर्गम इलाकों में भी मतपेटियों को हेलीकॉप्टर और विशेष सुरक्षा व्यवस्था के माध्यम से मतदान केंद्रों तक पहुंचाया गया।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार इस चुनाव में करीब 60 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया, जिसमें युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
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मतदान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या हिंसा की स्थिति न बने।
चुनाव क्यों बना खास
इस बार का चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है:
यह चुनाव 2025 के जनआंदोलनों के बाद पहली बार कराया गया।
युवाओं और नए नेतृत्व के प्रति लोगों का रुझान बढ़ता दिखाई दिया।
पारंपरिक दलों के साथ-साथ नए राजनीतिक दलों को भी जनता का समर्थन मिलता नजर आया।
रिपोर्टों के अनुसार नई राजनीतिक ताकतें और युवा नेतृत्व भी इस चुनाव में मजबूती से उभरते दिखाई दे रहे हैं। �
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चुनाव परिणाम की स्थिति
चुनाव के शुरुआती रुझानों में कुछ नए राजनीतिक दलों को बड़ी बढ़त मिलती दिखाई दी, जिससे नेपाल की राजनीति में संभावित बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव नेपाल के लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि जनता अब पारदर्शिता, सुशासन और नई नीतियों की अपेक्षा कर रही है।
🇳🇵 भारत-नेपाल संबंधों पर असर
भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं।
ऐसे में नेपाल में स्थिर और मजबूत सरकार बनने से दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और विकास सहयोग को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


नेपाल में हाल ही में हुए संसदीय चुनाव शांतिपूर्ण और व्यापक भागीदारी के साथ सम्पन्न हुए। लगभग 60% मतदान के साथ जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उत्साह दिखाया और नई राजनीतिक दिशा की उम्मीद जताई है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, अमेरिकी दूतावासों की सुरक्षा कड़ी

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इंटरनेशनल डेस्क
मिडिल ईस्ट क्षेत्र में एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती खींचतान के बीच खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी दूतावासों के आसपास संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों की खबरों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

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सूत्रों के अनुसार कुछ स्थानों पर ड्रोन देखे जाने की घटनाओं के बाद अमेरिकी प्रशासन ने तत्काल सतर्कता बढ़ा दी है। इसके साथ ही अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा परामर्श जारी करते हुए उन्हें भीड़भाड़ वाले स्थानों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है।
बताया जा रहा है कि क्षेत्र में अमेरिकी दूतावासों और सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरे को देखते हुए लगातार निगरानी कर रही हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव आगे और बढ़ता है तो इसका असर न केवल मिडिल ईस्ट बल्कि वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है। तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर भी कई देश स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।

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फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय मिडिल ईस्ट में विकसित हो रही परिस्थितियों को लेकर चिंतित है और कई देश कूटनीतिक स्तर पर हालात को शांत करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

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संक्षेप में
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा
खाड़ी देशों में अमेरिकी दूतावासों की सुरक्षा बढ़ाई गई
अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह
वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर असर की आशंका

मिसाइलों की गूंज के बीच इजरायल में फंसा सिद्धार्थनगर का बेटा, परिवार की सांसें अटकीं

उत्तर प्रदेश, सिद्धार्थनगर।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और लगातार हो रहे मिसाइल हमलों के बीच Israel में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले का एक युवक फंसा हुआ है। युवक की सुरक्षा को लेकर उसके परिवार में गहरी चिंता और दहशत का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, नौगढ़ तहसील व लोटन थाना क्षेत्र के खीरी डीहा गांव निवासी शिवा सिंह वर्तमान में इजरायल में मौजूद हैं। वहां हालात युद्ध जैसे बने हुए हैं। इजरायल और Iran के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई स्थानों पर सायरन बज रहे हैं और सुरक्षा अलर्ट जारी है।
बताया जाता है कि शिवा सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ वीडियो साझा किए हैं, जिनमें उन्होंने बताया कि वह और उनके साथ मौजूद अन्य भारतीय नागरिक फिलहाल सुरक्षित हैं। हालांकि क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
FT NEWS DIGITAL की टीम ने जब खीरी डीहा गांव पहुंचकर परिवार से बातचीत की, तो परिजनों की चिंता साफ झलक रही थी। युवक की मां ने भावुक होते हुए कहा कि वह अपने बेटे की सलामती के लिए लगातार ईश्वर से प्रार्थना कर रही हैं। भाई ने बताया कि परिवार हर दिन फोन के माध्यम से हालचाल ले रहा है, लेकिन समाचार चैनलों पर दिख रही तस्वीरें मन में भय पैदा कर रही हैं।
परिजनों ने भारत सरकार से अपील की है कि इजरायल में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की जाए।
युद्ध भले ही हजारों किलोमीटर दूर हो, लेकिन उसकी चिंता सिद्धार्थनगर के इस छोटे से गांव तक महसूस की जा रही है। पूरे गांव की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि उनका बेटा सुरक्षित घर लौट आए।
FT NEWS DIGITAL इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।

मध्य पूर्व में महाविस्फोट! इज़रायल–ईरान टकराव ने रचा नया इतिहास?

200 फाइटर जेट्स की चर्चा, सैकड़ों ठिकाने निशाने पर — मौतों के दावे, आधिकारिक पुष्टि शेष
मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इज़रायल ने ईरान के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में 200 लड़ाकू विमानों और सैकड़ों ठिकानों को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है, साथ ही 201 मौतों का दावा भी सामने आया है।

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हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।


आखिर यह टकराव क्यों?
इज़रायल और ईरान के बीच सीधा युद्ध भले ही दुर्लभ रहा हो, लेकिन “शैडो वॉर” यानी परोक्ष संघर्ष वर्षों से जारी है।
परमाणु कार्यक्रम विवाद
इज़रायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता रहा है।
गाजा और हमास फैक्टर
हमास को ईरान का समर्थन इज़रायल के लिए बड़ी चिंता का विषय रहा है, खासकर गाज़ा पट्टी में संघर्ष के दौरान।
हिज़्बुल्लाह और लेबनान सीमा
ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह के जरिए उत्तरी सीमा पर दबाव बढ़ता रहा है।
सीरिया और आईआरजीसी
सीरिया में ईरानी प्रभाव और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की गतिविधियों को लेकर इज़रायल समय-समय पर एयरस्ट्राइक करता रहा है।

Screenshot 20260301 150614 अब तक क्या-क्या हुआ?
हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच ड्रोन और मिसाइल हमलों के आरोप-प्रत्यारोप
क्षेत्र में अमेरिकी और अन्य पश्चिमी देशों की सैन्य सतर्कता बढ़ी

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इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने “राष्ट्रीय सुरक्षा” को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया
ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई ने कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी

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 क्या यह पूर्ण युद्ध की ओर संकेत है?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सीधा सैन्य संघर्ष लंबा चला तो यह केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है।
अभी तक उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर स्थिति अत्यंत संवेदनशील और गतिशील है। आधिकारिक पुष्टि और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

नेपाल में दर्दनाक बस हादसा: त्रिशूली नदी में समाई यात्रियों से भरी बस, 18 की मौत

काठमांडू/पोखरा (नेपाल)।
नेपाल में एक बड़ा सड़क हादसा सामने आया है। नेपाल के पोखरा-काठमांडू मार्ग पर चल रही एक यात्री बस काठमांडू के पास स्थित त्रिशूली नदी में गिर गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 27 अन्य यात्री घायल बताए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बस पोखरा से काठमांडू की ओर जा रही थी। दुर्घटना के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, हालांकि स्थानीय प्रशासन के अनुसार हादसा तीखे मोड़ पर बस के अनियंत्रित होने की वजह से हुआ हो सकता है। राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर नदी में गिरी बस से यात्रियों को बाहर निकाला।
घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। मृतकों में महिला और पुरुष यात्री शामिल हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार एक विदेशी पर्यटक, जो स्विट्जरलैंड से था, उसके भी हादसे में प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। आधिकारिक पहचान और विस्तृत सूची जारी की जानी बाकी है।
नेपाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना के सटीक कारणों—चालक की लापरवाही, ब्रेक फेल या सड़क की स्थिति—की पड़ताल की जा रही है।
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में संकरे और घुमावदार रास्तों के कारण सड़क हादसों की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। प्रशासन ने यात्रियों से सावधानी बरतने और परिवहन कंपनियों से सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील की है।
स्थिति अपडेट:
मृतक: 18 (प्रारंभिक जानकारी)
घायल: 27
राहत-बचाव कार्य: जारी
जांच: प्रारंभ
(नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन और प्रारंभिक आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है। अंतिम आंकड़ों में परिवर्तन संभव है।)

नेपाल के 75वें प्रजातंत्र दिवस पर भारत की निर्णायक भूमिका का स्मरण

काठमांडू/विशेष रिपोर्ट।
नेपाल आज अपना 75वाँ प्रजातंत्र दिवस अत्यंत गौरव, श्रद्धा और लोकतांत्रिक उत्साह के साथ मना रहा है। फागुन 7, 2007 साल को निरंकुश राणा शासन के अंत और लोकतंत्र की स्थापना की ऐतिहासिक स्मृति में पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।
इस ऐतिहासिक परिवर्तन में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक रही है। 1950-51 में जब नेपाल राणा शासन की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, तब भारत की मध्यस्थता से हुए ‘दिल्ली समझौते’ ने संवैधानिक राजशाही और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव रखी।
जब नेपाल के राजा त्रिभुवन ने राणा शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए नेपाल छोड़ा, तब तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें शरण दी। इसके बाद भारत की सक्रिय पहल से हुआ दिल्ली समझौता नेपाल में प्रजातंत्र की स्थापना का आधार बना।
शहीदों के बलिदान को नमन
नेपाल के महान शहीद —
दशरथ चन्द
धर्मभक्त माथेमा
गंगाला श्रेष्ठ
शुक्रराज शास्त्री
ने हँसते-हँसते राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनके त्याग और जनता के जनआन्दोलन ने निरंकुश शासन को समाप्त कर लोकतंत्र की नींव रखी।
राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति में राष्ट्रीय समारोह
आज प्रातः काठमांडू के टुंडिखेल सैनिक मंच पर राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल की उपस्थिति में मुख्य राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया जा रहा है।
राष्ट्रपति पौडेल ने अपने संदेश में कहा कि 2007 साल की क्रांति ने मानवाधिकार, नागरिक स्वतंत्रता और जनता की संप्रभुता की आधारशिला रखी। उन्होंने सभी ज्ञात-अज्ञात वीरों को नमन करते हुए स्थायी शांति, सुशासन और विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
भारत-नेपाल संबंध: लोकतंत्र से विकास तक
भारत नेपाल का प्रमुख विकास साझेदार रहा है।
नेपाल का बड़ा विदेशी व्यापार भारत के साथ होता है।
तराई क्षेत्र में सड़क निर्माण, रेल संपर्क और आधारभूत संरचना विकास में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
नेपाली सेना को प्रशिक्षण और सैन्य सहयोग भी भारत-नेपाल संबंधों का अहम स्तंभ है।
1951 में राणा शासन के अंत से लेकर संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना तक, भारत ने हर चरण में नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा को मजबूती देने में सहयोग दिया है।
क्यों है यह दिन ऐतिहासिक?
फागुन 7 केवल एक तिथि नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक चेतना, जनसंकल्प और बलिदान की अमर गाथा है।
इसी क्रांति की पृष्ठभूमि में आज का संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य और वर्तमान संविधान स्थापित हुआ।
नेपाल का 75वाँ प्रजातंत्र दिवस सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनःप्रतिबद्धता का प्रतीक है।

नेपाल तराई में बदलती सियासी हवा: क्या परंपरागत दलों का गढ़ ढह रहा है?

नेपाल के तराई क्षेत्र में इस बार चुनावी माहौल कुछ अलग नजर आ रहा है। रवि लामिछाने की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) और पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार बालेन शाह के रोड शो में उमड़ी भीड़ ने परंपरागत राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।

भारत सीमा से सटे कपिलवस्तु जिला और रूपन्देही जिला में हुए इन रोड शो में भारी जनसमर्थन देखने को मिला। दोनों नेताओं के कार्यक्रम अलग-अलग समय पर हुए, लेकिन भीड़ का उत्साह लगभग समान रहा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि तराई क्षेत्र की राजनीति किसी नए मोड़ की ओर बढ़ रही है।

तराई: परंपरागत दलों का गढ़, अब नई चुनौती

नेपाल के तराई क्षेत्र में लगभग 23 जिले आते हैं और यहां की आबादी करीब 90 लाख मानी जाती है। यह इलाका लंबे समय से नेपाली कांग्रेस, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) और विभिन्न मधेशी दलों का मजबूत आधार रहा है।

हिंदू बहुल इस क्षेत्र में सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भारत से गहरा जुड़ाव महसूस किया जाता है। ऐसे में मतदाताओं का परंपरागत दलों से हटकर नई पार्टी की ओर झुकाव राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका रहा है।

लोकप्रियता और विवाद: रवि लामिछाने फैक्टर

पूर्व गृहमंत्री रह चुके रवि लामिछाने अपनी टीवी एंकरिंग और जनसरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों के कारण व्यापक लोकप्रियता रखते हैं। हालांकि वे अमेरिकी नागरिकता विवाद और धोखाधड़ी के एक मामले में जेल जाने को लेकर सुर्खियों में भी रहे।

अपने संबोधनों में वे धर्म आधारित राजनीति से दूरी बनाने की अपील करते नजर आते हैं। इससे शहरी और युवा मतदाताओं के बीच उनकी छवि एक वैकल्पिक नेतृत्व के रूप में उभर रही है।

बालेन शाह की शैली और प्रतीकात्मक संदेश

काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह अपने रोड शो के दौरान स्थानीय मंदिरों में दर्शन करते दिखाई दिए। रूपन्देही और कपिलवस्तु में उन्होंने प्रसिद्ध मरचाई माता मंदिर से अपना कार्यक्रम शुरू किया।

उनका आत्मविश्वास और समर्थकों का उत्साह ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो चुनावी परिणाम उनके पक्ष में तय हों। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रैलियों की भीड़ हमेशा चुनावी जीत की गारंटी नहीं होती।

क्या बदलेगा चुनावी गणित?

राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि इस बार तराई में समीकरण बदल सकते हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को कम आंकना वास्तविकता से आंखें मूंदने जैसा होगा।

हालांकि अंतिम फैसला मतपेटियों में बंद है। अक्सर मतदान के दिन मतदाताओं का रुझान बदल जाता है और नतीजे चौंकाने वाले आते हैं। फिर भी इस बार तराई में दिख रही हलचल पारंपरिक दलों के लिए चेतावनी संकेत जरूर है।

नेपाल के तराई क्षेत्र में उभरता जनसमर्थन यह संकेत दे रहा है कि मतदाता विकल्प तलाश रहे हैं। क्या यह बदलाव सत्ता परिवर्तन का कारण बनेगा या पारंपरिक दल वापसी करेंगे—यह आने वाला चुनाव तय करेगा। फिलहाल इतना तय है कि तराई की राजनीति नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है।

भारत के बाहर जन्मे नागरिकों के लिए मतदाता पंजीकरण में नई व्यवस्था लागू..भारत-नेपाल में खुशी की लहर

भारत के बाहर जन्मे नागरिकों को वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने संबंधी पुरानी समस्या का समाधान किया गया है, जिससे भारत और नेपाल दोनों में खुशी का माहौल है।

समस्या का समाधान: अब बाहर जन्मे भारतीय भी कर सकते हैं नामांकन 

पिछले समय में भारत के बाहर जन्मे भारतीय नागरिक फॉर्म-6 या फॉर्म-6A के माध्यम से मतदाता के रूप में आवेदन नहीं कर पा रहे थे। इसका कारण यह था कि सिस्टम में ‘भारत के बाहर’ जन्म स्थान दर्ज करने का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं था।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुसार, अब यह समस्या पूरी तरह से हल कर दी गई है।

 नई तकनीकी व्यवस्था: ‘Outside India’ विकल्प उपलब्ध

निर्वाचन आयोग ने तकनीकी कठिनाई को दूर करते हुए एक ऑफलाइन व्यवस्था लागू की है। अब:

ईआरओ-नेट और बीएलओ ऐप के डेटा एंट्री मॉड्यूल में

जन्म स्थान के रूप में ‘Outside India’ चुनने का विकल्प है।

साथ में देश का नाम दर्ज करने के लिए Text Box भी उपलब्ध है।

इससे अब भारत के बाहर जन्मे भारतीय पात्र नागरिक अपने वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन कैसे करें: फॉर्म-6 / फॉर्म-6A भरें और जमा करें 

नई व्यवस्था के तहत:

आवेदनकर्ता फॉर्म-6 या फॉर्म-6A को भौतिक रूप में भरें।

उसे अपने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी / बूथ लेवल अधिकारी के पास जमा कराएँ।

इससे अब विदेश में जन्मे पात्र नागरिक भी अपने मताधिकार का पूरा लाभ उठा सकेंगे।

भारत-नेपाल में खुशी का माहौल

इस नई व्यवस्था की घोषणा से भारत में तो लोग ख़ुश हैं ही, साथ ही नेपाल में बहुएं और वधू पक्ष के लोग भी इसे स्वागत योग्य बता रहे हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देश 

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे:

इस व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

व्यापक प्रचार-प्रसार भी करें, ताकि अधिक से अधिक पात्र नागरिक इसका लाभ उठाएँ।

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