रायबरेली में चुनावी मौसम आते ही जागती है भाजपा सरकार की विकास की याद : शशिकांत शर्मा “चार साल बाद फिर ₹879 करोड़ का विकास पैकेज, लेकिन 2021-22 के ₹834 करोड़ का हिसाब कौन देगा?”
रायबरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रायबरेली दौरे और करीब 879 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास को समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव शशिकांत शर्मा ने विकास की गंभीर पहल के बजाय चुनावी घोषणाओं का नया पैकेज करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को रायबरेली की याद विकास के नियमित कामकाज के लिए नहीं, बल्कि चुनावी जरूरतों के समय आती है।
शशिकांत शर्मा ने कहा कि रायबरेली की जनता अब केवल शिलान्यास के पत्थर और मंच से होने वाली घोषणाएं नहीं, बल्कि योजनाओं का वास्तविक परिणाम जानना चाहती है। सवाल यह है कि जिन परियोजनाओं की घोषणाएं पहले की गईं, उनमें कितनी पूरी हुईं, कितनी अधूरी हैं और कितनी आज भी कागजों में चल रही हैं?
उन्होंने कहा कि दिसंबर 2021 और जनवरी 2022 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा सरकार ने रायबरेली के लिए लगभग ₹834 करोड़ की परियोजनाओं का पैकेज पेश किया था। अब अगस्त 2026 में एक बार फिर लगभग ₹879 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया जा रहा है। शशिकांत शर्मा ने सवाल किया कि यदि पिछली घोषणाओं का विकास जमीन पर पूरी तरह दिखाई दे रहा है, तो सरकार को उसी उपलब्धि का विस्तृत हिसाब जनता के सामने रखने में क्या परेशानी है?
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “रायबरेली की जनता को अब यह समझने की जरूरत है कि चुनाव से पहले होने वाला शिलान्यास विकास की शुरुआत है या चुनावी राजनीति का पुराना फार्मूला। भाजपा सरकार अगर वास्तव में विकास को लेकर गंभीर है तो केवल नई योजनाओं की सूची न बताए, बल्कि पिछले वर्षों में घोषित परियोजनाओं की पूर्णता, खर्च और वास्तविक लाभार्थियों का भी सार्वजनिक हिसाब दे।”
महापुरुषों की जयंती भी राजनीतिक कैलेंडर का हिस्सा बन गई?
शशिकांत शर्मा ने अमर शहीद राना बेनी माधव सिंह की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री के रायबरेली आगमन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों का सम्मान किसी एक दिन या चुनावी वर्ष तक सीमित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “2017 से अब तक के मुख्यमंत्री कार्यकाल को देखें तो राना बेनी माधव सिंह की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री का रायबरेली आगमन 24 अगस्त 2022 और 24 अगस्त 2026 को हुआ। सवाल यह नहीं है कि मुख्यमंत्री आज आए क्यों हैं, सवाल यह है कि पिछले वर्षों में इस महान स्वतंत्रता सेनानी की जयंती पर सरकार की निरंतर उपस्थिति और उनके नाम से जुड़ी स्थायी योजनाएं कितनी दिखाई दीं?”
उन्होंने कहा कि महापुरुषों के नाम पर कार्यक्रम आयोजित करना अच्छी बात है, लेकिन उनकी विरासत को शिक्षा, शोध, स्मारक, संग्रहालय, स्थानीय विकास और नई पीढ़ी के बीच जीवित रखना उससे कहीं बड़ा सम्मान है। केवल जयंती पर पुष्पांजलि और मंचीय भाषण से स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती।
“शिलान्यास की राजनीति बंद हो, काम की प्रगति बताई जाए”
सपा प्रदेश सचिव ने कहा कि भाजपा सरकार के सामने अब सबसे बड़ा सवाल नई घोषणाओं का नहीं, पुरानी घोषणाओं की जवाबदेही का है।
उन्होंने कहा कि सरकार को रायबरेली की जनता के सामने एक सार्वजनिक रिपोर्ट रखनी चाहिए कि पिछले वर्षों में जिले के लिए कितनी परियोजनाओं की घोषणा हुई, उनमें कितने काम पूरे हुए, कितने लंबित हैं, कितनी लागत बढ़ी और कितनी परियोजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचा।
“सरकार हर दौरे पर करोड़ों रुपये की नई योजनाओं का आंकड़ा बताती है, लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि उसके गांव की सड़क कब बनी, अस्पताल में व्यवस्था कब सुधरी, युवाओं को रोजगार कब मिला, किसानों की समस्याओं का समाधान कब हुआ और शहर-कस्बों की बुनियादी सुविधाएं कब बेहतर हुईं। करोड़ों के आंकड़े टीवी की सुर्खियां तो बन सकते हैं, लेकिन जनता की जिंदगी तब बदलती है जब परियोजना जमीन पर पूरी होती है।” — शशिकांत शर्मा
रायबरेली को पैकेज नहीं, स्थायी विकास चाहिए
शशिकांत शर्मा ने कहा कि रायबरेली राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिला जरूर है, लेकिन यहां के लोगों को चुनावी पैकेज नहीं, स्थायी और दिखाई देने वाला विकास चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि कुछ बड़े कार्यक्रम, परियोजनाओं की लंबी सूची और करोड़ों रुपये के आंकड़े दिखाकर जनता के मूल सवालों को दबाया जा सकता है।
“रायबरेली की जनता अब आंकड़ों की बाजीगरी और घोषणाओं की राजनीति से आगे बढ़ चुकी है। जनता पूछ रही है—पिछली घोषणा का क्या हुआ? पिछली परियोजना कब पूरी हुई? कितना पैसा खर्च हुआ? किसे लाभ मिला? और जो काम आज शुरू बताया जा रहा है, वह कब पूरा होगा?”
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, बल्कि जनता के प्रति उसकी जिम्मेदारी भी है। इसलिए भाजपा सरकार को सपा के सवालों को राजनीतिक बयान समझकर खारिज करने के बजाय हर परियोजना का समयबद्ध और सार्वजनिक हिसाब देना चाहिए।
“चुनावी मौसम में शिलान्यास, चुनाव के बाद सन्नाटा—यह मॉडल अब नहीं चलेगा”
शशिकांत शर्मा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार की राजनीति का पैटर्न जनता के सामने स्पष्ट है—“चुनाव करीब आए तो महापुरुष याद आते हैं, बड़े-बड़े कार्यक्रम होते हैं, करोड़ों की परियोजनाओं की घोषणा होती है और चुनाव बीतने के बाद वही योजनाएं सरकारी फाइलों में दिखाई देती हैं।”
उन्होंने कहा कि रायबरेली की जनता अब इस राजनीतिक शैली को समझ चुकी है और आने वाले चुनाव में घोषड़ाएं नहीं, काम का मूल्यांकन करेगी।
उन्होंने कहा—
“रायबरेली को चुनावी लॉलीपॉप नहीं चाहिए। रायबरेली को जवाब चाहिए। भाजपा सरकार को पहले 2021-22 के ₹834 करोड़ के विकास पैकेज का हिसाब देना चाहिए और उसके बाद 2026 के ₹879 करोड़ के नए पैकेज की बात करनी चाहिए। जनता अब यह पूछेगी कि पत्थर कितने लगे, बल्कि काम कितने पूरे हुए।”
अंत में शशिकांत शर्मा ने कहा कि समाजवादी पार्टी विकास की विरोधी नहीं है, बल्कि दिखावटी विकास की राजनीति के खिलाफ है। सरकार अगर वास्तव में रायबरेली का विकास चाहती है तो घोषणाओं के साथ उनकी समयसीमा, बजट, प्रगति और पूर्णता की स्थिति सार्वजनिक करे।
“रायबरेली की जनता अब भाषण नहीं, परिणाम देखना चाहती है; शिलान्यास नहीं, निर्माण देखना चाहती है; आंकड़े नहीं, अपने जीवन में बदलाव देखना चाहती है। आने वाले समय में जनता भाजपा सरकार से इन्हीं सवालों का जवाब मांगेगी।”
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