लखनऊ में 30 मिनट का खूनी सिलसिला: पत्नी, बहन की हत्या के बाद बैंककर्मी ने खुद को भी मारी गोली
एक जरूरी कानूनी सावधानी: ₹1.5 करोड़ की मांग को “संभावित जांच एंगल” के रूप में रखा गया है, हत्या का सिद्ध कारण नहीं। इसी तरह परिवार की ओर से लगाए गए घरेलू हिंसा आदि के आरोपों को आरोप के रूप में ही रखा गया है।
तलाक की सुनवाई के दो दिन बाद सनसनीखेज वारदात; पत्नी की बैंक के बाहर गोली मारकर हत्या, घर पहुंचकर बहन को मारी गोली, फिर खुद दी जान
पूरा मामला एक नजर में
स्थान: गोमतीनगर, लखनऊ
मुख्य मृतका: दिव्या मिश्रा, बैंक कर्मचारी
अन्य मृतक: दिव्या के पति मानस वाजपेयी और उसकी बहन शीबा
घटना: 20 अगस्त 2026
पुलिस के अनुसार: तीनों मौतें करीब 30 मिनट के भीतर
बरामदगी: तीन हथियार
विवाह: करीब 10 वर्ष पहले
अलग रह रहे थे: करीब 3 वर्ष से
तलाक: दिव्या ने पिछले वर्ष फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी
जांच के प्रमुख बिंदु: वैवाहिक विवाद, तलाक, मुआवजा/स्त्रीधन, हथियारों का स्रोत, CCTV और डिजिटल साक्ष्य
18 अगस्त की सुनवाई के बाद क्या बदला?
पुलिस जांच में सामने आए एक अहम एंगल के मुताबिक दिव्या और मानस के बीच तलाक की कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। पुलिस के अनुसार दिव्या ने पिछले वर्ष फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की थी और मुआवजे तथा सामान/स्त्रीधन की वापसी की मांग भी की थी।
ताजा रिपोर्टों में ₹1.5 करोड़ की कथित मुआवजा मांग को भी जांच के संभावित कारणों में शामिल किया गया है। हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और किसी एक वजह को अंतिम कारण नहीं माना गया है।
लखनऊ। गोमतीनगर की एक सामान्य दोपहर अचानक ऐसी सनसनी में बदल गई, जिसका अंत तीन जिंदगियों के खत्म होने के साथ हुआ। बैंक कर्मचारी मानस वाजपेयी पर आरोप है कि उसने अपनी अलग रह रही पत्नी दिव्या मिश्रा को उनके कार्यस्थल के बाहर गोली मारी। इसके बाद वह अपने घर पहुंचा, जहां उसकी बहन शीबा की भी गोली लगने से मौत हुई और फिर मानस ने खुद को गोली मार ली।
पुलिस के मुताबिक पत्नी की हत्या से लेकर बहन और फिर खुद की मौत तक का घटनाक्रम करीब 30 मिनट में पूरा हुआ। घटनास्थल और घर से तीन हथियार बरामद किए गए हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार कहां से आए, वारदात की योजना कब बनी और इसके पीछे वास्तविक वजह क्या थी।
गोमतीनगर के मनोज पांडेय चौराहे के पास स्थित निजी बैंक के बाहर 20 अगस्त की दोपहर दिव्या मिश्रा अपने काम पर थीं। पुलिस के मुताबिक करीब 12:15 बजे उनके पति मानस वाजपेयी वहां पहुंचे।
दिव्या बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के तौर पर काम करती थीं। दोनों के बीच कुछ देर बातचीत और कथित बहस हुई। इसके बाद पुलिस के अनुसार मानस ने हथियार निकालकर दिव्या पर गोली चला दी।
बैंक कर्मचारियों ने घायल दिव्या को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। प्रत्यक्षदर्शियों और CCTV फुटेज की मदद से पुलिस ने घटनाक्रम को जोड़ना शुरू किया।
बैंक से घर तक… और फिर दूसरी मौत
दिव्या को गोली मारने के बाद मानस वहां से अपने घर की ओर चला गया। उसका घर बैंक से करीब तीन किलोमीटर दूर हुसेड़िया क्रॉसिंग के आसपास बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक घर पहुंचने के कुछ ही समय बाद उसकी बहन शीबा को भी गोली लगी। इसके बाद मानस ने खुद को गोली मार ली।
पुलिस के अनुसार तीनों मौतें लगभग 30 मिनट के भीतर हुईं। घटनास्थल से तीन हथियार बरामद होने की बात पुलिस ने कही है।
तीन हथियारों ने बढ़ाया जांच का दायरा
पुलिस को मानस के घर से दो पिस्टल और एक देसी .32 बोर का हथियार मिला है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये हथियार उसके पास कैसे पहुंचे।
पुलिस हथियारों की बैलिस्टिक जांच करा रही है और बरामद कारतूस तथा गोलियों को घटनास्थल से मिले साक्ष्यों से मिलाया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता कर रही हैं कि हथियार एक ही व्यक्ति से मिले या अलग-अलग स्रोतों से।
तलाक की लड़ाई बनी जांच का अहम हिस्सा
दिव्या और मानस की शादी को करीब दस साल हुए थे। पुलिस के अनुसार दोनों पिछले करीब तीन वर्षों से अलग रह रहे थे। दिव्या ने पिछले साल तलाक की याचिका दाखिल की थी। दंपती की कोई संतान नहीं थी।
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक परिवार के कई सदस्यों से बातचीत में यह बात सामने आई कि दोनों के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा था।
ताजा रिपोर्टों में तलाक की कार्यवाही के दौरान मुआवजे की कथित ₹1.5 करोड़ मांग को भी जांच के संभावित एंगल के रूप में बताया गया है। लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यही वारदात की अंतिम वजह थी। पुलिस खुद सभी पहलुओं की जांच की बात कह रही है।
परिवार की ओर से घरेलू विवाद के गंभीर आरोप
दिव्या की बहन प्रज्ञा मिश्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी बहन के साथ कथित घरेलू हिंसा और लंबे समय से चल रहे वैवाहिक तनाव के आरोप लगाए हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि दिव्या अपने पति से अलग होकर तलाक लेना चाहती थीं और पहले भी उनके साथ मारपीट की घटनाएं हुई थीं।
ये आरोप परिवार की ओर से लगाए गए हैं। पुलिस ने इन सभी आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जाने की बात नहीं कही है। इसलिए इन्हें जांच का हिस्सा मानकर ही देखा जाना चाहिए।
ने भी खड़े किए सवाल
पुलिस एक कथित WhatsApp Status की भी जांच कर रही है, जिसे वारदात के बाद मानस से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार उस पोस्ट में पत्नी पर बेवफाई का आरोप लगाने और आगे खुद तथा बहन को मारने की बात कही गई थी।
हालांकि यह कथित पोस्ट मानस का पक्ष/दावा माना जाएगा; इसमें लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जा सकता। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
CCTV और फोरेंसिक से खुलेगा अंतिम सच
पुलिस बैंक के आसपास लगे CCTV कैमरों, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल गतिविधियों और घटनाक्रम से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
फोरेंसिक जांच में दिव्या को सिर के पिछले हिस्से में गोली लगने की जानकारी सामने आई है। शीबा और मानस को भी गोली लगने की बात पुलिस जांच में सामने आई है। अब बैलिस्टिक जांच से यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि किस हथियार का इस्तेमाल किस घटना में हुआ।
30 मिनट में तीन मौतें… लेकिन सवाल अभी बाकी
यह मामला भले ही तीन मौतों के साथ खत्म हो गया हो, लेकिन पुलिस की जांच के सामने कई सवाल अभी भी खड़े हैं—
क्या वारदात अचानक हुई या पहले से योजना बनाई गई थी?
तीन हथियार मानस तक कैसे पहुंचे?
क्या तलाक और मुआवजे का विवाद घटना से जुड़ा था?
कथित WhatsApp Status की वास्तविकता क्या है?
बैंक और घर के बीच उसकी गतिविधियों का पूरा क्रम क्या था?
CCTV और मोबाइल डेटा से क्या नई जानकारी सामने आती है?
बहन शीबा को निशाना बनाने के पीछे क्या वजह थी?
पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
सारांश
लखनऊ के गोमतीनगर में 20 अगस्त को सामने आए सनसनीखेज मामले में बैंक कर्मचारी मानस वाजपेयी पर अपनी अलग रह रही पत्नी दिव्या मिश्रा को बैंक के बाहर गोली मारने का आरोप है। इसके बाद उसकी बहन शीबा की भी गोली लगने से मौत हुई और मानस ने खुद को गोली मार ली। पुलिस के मुताबिक करीब 30 मिनट के भीतर तीनों मौतें हुईं और घर से तीन हथियार बरामद किए गए। तलाक की कार्यवाही, कथित मुआवजा मांग, वैवाहिक विवाद, हथियारों का स्रोत, CCTV और डिजिटल साक्ष्य जांच का हिस्सा हैं। पुलिस ने कहा है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।
संपादकीय टिप्पणी
यह सिर्फ एक सनसनीखेज अपराध की कहानी नहीं है। इसके पीछे एक टूटते वैवाहिक रिश्ते, अदालत में चल रही कानूनी लड़ाई और तीन जिंदगियों के अचानक खत्म हो जाने की बेहद पीड़ादायक तस्वीर है।
लेकिन ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि भावना और तथ्य के बीच की सीमा न टूटे। पुलिस जांच में सामने आया हर तथ्य अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं होता। परिवार के आरोप अपनी जगह हैं, पुलिस की विवेचना अपनी जगह और अदालत में साबित होने वाले साक्ष्य अपनी जगह।
FT News Digital का उद्देश्य सनसनी फैलाना नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पाठकों तक पूरी तस्वीर पहुंचाना है। इस मामले में अंतिम सच जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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