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प्रेस की आजादी पर दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत बताई

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र की आधारशिला बताते हुए कहा है कि इसके साथ जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है। अदालत ने टिप्पणी की कि डिजिटल दौर में मोबाइल और माइक्रोफोन के सहारे स्वयं को पत्रकार बताने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में सरकार और विधायिका उपयुक्त नियामक व्यवस्था पर विचार कर सकती है, ताकि स्वतंत्र पत्रकारिता सुरक्षित रहे और गैर-जिम्मेदार गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।


देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के दौर में पत्रकारिता की विश्वसनीयता, जवाबदेही और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रेस की स्वतंत्रता संविधान प्रदत्त अधिकार है, लेकिन इसका उपयोग जिम्मेदारी, निष्पक्षता और कानून के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।


प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की ताकत, लेकिन जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी : दिल्ली हाईकोर्ट


नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारिता की जिम्मेदारी पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष प्रेस लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है। न्यायालय ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ नैतिक आचरण, तथ्यपरक रिपोर्टिंग और सार्वजनिक जवाबदेही भी आवश्यक है।

अदालत ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के विस्तार के कारण समाचारों का प्रसार पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज हो गया है। इस दौरान ऐसे कई लोग भी सामने आए हैं जो केवल मोबाइल फोन और माइक्रोफोन के सहारे स्वयं को पत्रकार बताते हैं, जबकि अनेक मामलों में उनके पास पत्रकारिता का प्रशिक्षण, संपादकीय व्यवस्था अथवा संस्थागत जवाबदेही का अभाव दिखाई देता है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी पत्रकार, मीडिया संस्थान या डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं है। अदालत का कहना था कि प्रेस की स्वतंत्रता संविधान के मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसका संरक्षण आवश्यक है, किंतु इसके साथ कानून, पत्रकारिता की नैतिकता तथा नागरिकों के अधिकारों का सम्मान भी सुनिश्चित होना चाहिए।

इसी संदर्भ में हाईकोर्ट ने सरकार और विधायिका से इस दिशा में उपयुक्त नियामक व्यवस्था पर विचार करने की आवश्यकता जताई, जिससे एक ओर निष्पक्ष एवं स्वतंत्र पत्रकारिता को संरक्षण मिले और दूसरी ओर फर्जी, गैर-जिम्मेदार अथवा भय पैदा करने वाली गतिविधियों के मामलों में प्रभावी जवाबदेही तय की जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल पत्रकारिता के बढ़ते प्रभाव के बीच यह टिप्पणी मीडिया की विश्वसनीयता, तथ्यपरकता और पेशेवर मानकों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखी जा रही है। हालांकि किसी भी प्रकार की नियामक व्यवस्था संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा प्रेस की आजादी के अनुरूप ही बनाई जाएगी।

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन इसके साथ जवाबदेही, तथ्यपरकता, निष्पक्षता और कानून का पालन भी अनिवार्य है। अदालत ने सरकार एवं विधायिका को ऐसा संतुलित नियामक ढांचा विकसित करने पर विचार करने की आवश्यकता बताई है, जिससे स्वतंत्र पत्रकारिता सुरक्षित रहे और गैर-जिम्मेदार गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

(अस्वीकरण)यह समाचार न्यायालय की सार्वजनिक टिप्पणियों पर आधारित है। इसमें किसी व्यक्ति, संस्था, मीडिया संगठन अथवा पत्रकार के संबंध में कोई स्वतंत्र आरोप या निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। संबंधित मामले का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा विधि के अनुसार किया जाएगा।

दो माह में उखड़ी लाखों की इंटरलॉकिंग! पहली बारिश में खुली गुणवत्ता की परतें, ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल

तेजगढ़ ग्राम पंचायत में हाल ही में बनी सड़क क्षतिग्रस्त होने का दावा, भुगतान संबंधी दस्तावेज़ों का हवाला देते हुए निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग।


सिद्धार्थनगर। विकासखंड बांसी की ग्राम पंचायत तेजगढ़ में हाल ही में निर्मित इंटरलॉकिंग सड़क पहली ही बरसात के बाद क्षतिग्रस्त होने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। सड़क के कई हिस्सों में इंटरलॉकिंग ईंटें उखड़ने और किनारों के क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की है।


ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये की लागत से निर्मित इंटरलॉकिंग सड़क महज दो महीने के भीतर ही जगह-जगह उखड़ने लगी। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया होता तो सड़क पहली ही बरसात में इस प्रकार क्षतिग्रस्त नहीं होती।

मुख्य समाचार

ग्रामीणों के अनुसार सड़क के कई हिस्सों में इंटरलॉकिंग ईंटें बाहर निकल आई हैं तथा किनारों पर धंसाव और टूट-फूट देखी जा रही है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में मजबूत बेस तैयार करने और निर्धारित गुणवत्ता वाली सामग्री के उपयोग में लापरवाही बरती गई।

ग्रामीणों ने कुछ भुगतान संबंधी दस्तावेज़ों का भी हवाला देते हुए मांग की है कि संबंधित कार्य पर हुए खर्च, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, तकनीकी स्वीकृति तथा भुगतान प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों एवं कार्यदायी संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभाग अथवा जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की मंशा गांवों का समुचित विकास करना है, लेकिन यदि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी नहीं हुई तो योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन शिकायतों को किस स्तर पर जांच के दायरे में लेकर आगे की कार्रवाई करता है।


स्थान: ग्राम पंचायत तेजगढ़, विकासखंड बांसी, जनपद सिद्धार्थनगर

मुख्य बिंदु

पहली बरसात के बाद इंटरलॉकिंग सड़क क्षतिग्रस्त होने का दावा।

ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए।

भुगतान संबंधी दस्तावेज़ों के आधार पर जांच की मांग।

तकनीकी परीक्षण एवं जिम्मेदारी तय करने की मांग।

संबंधित विभाग का पक्ष आना शेष।

सारांश

तेजगढ़ ग्राम पंचायत में हाल ही में बनी इंटरलॉकिंग सड़क के क्षतिग्रस्त होने को लेकर ग्रामीणों ने गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया की निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की है। अब प्रशासनिक जांच और संबंधित विभाग के आधिकारिक पक्ष पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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“तस्वीरों में दिखाई दे रही क्षतिग्रस्त इंटरलॉकिंग सड़क, जबकि ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए तकनीकी जांच की मांग की है।”

 

DM को गुहार, फिर भी नहीं सुनवाई! जलभराव में डूबा ककरही, ग्रामीणों का फूटा आक्रोश

DM को गुहार, फिर भी नहीं मिली राहत!


जलभराव में डूबा ककरही, ग्रामीण बोले— आखिर कब जागेगा प्रशासन?

10 दिन पहले सौंपा गया था शिकायत पत्र, लगातार बारिश के बीच सड़कें बनीं तालाब; महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का निकलना हुआ मुश्किल


ग्रामीणों की पीड़ा

10 दिन पहले जिलाधिकारी को सौंपा गया शिकायत पत्र।

लगातार बारिश से मुख्य मार्ग पर जलभराव।

पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने का दावा।

महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग रोजाना परेशानी झेलने को मजबूर।

जर्जर सड़क और लटकते बिजली के तारों से दुर्घटना का खतरा।


क्या है पूरा मामला?

ग्राम पंचायत: ककरही

विकास खंड: जोगिया

जनपद: सिद्धार्थनगर

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

मुख्य मार्ग से तत्काल जल निकासी।

जर्जर सड़क का निर्माण।

नालियों की स्थायी व्यवस्था।

बिजली के जर्जर तारों की मरम्मत।

बरसात से पहले स्थायी विकास कार्य।


सिद्धार्थनगर जनपद के विकास खंड जोगिया अंतर्गत ग्राम पंचायत ककरही में लगातार हो रही बारिश ने ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। गांव के मुख्य मार्ग पर जलभराव और कीचड़ के कारण आवागमन प्रभावित है। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग दस दिन पहले जिलाधिकारी को लिखित शिकायत देकर समस्या से अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली। इससे नाराज ग्रामीणों ने मीडिया के सामने अपनी समस्याएं रखते हुए प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।

सिद्धार्थनगर से FT News Digital

गांव की गलियां पानी से लबालब हैं। कई स्थानों पर सड़कें तालाब जैसी दिखाई दे रही हैं। ऐसे में स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और रोज कमाने-खाने वाले लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव के कारण गांव में गंदगी बढ़ रही है, जिससे संक्रामक बीमारियों और जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या नई नहीं है। उनका कहना है कि कई बार ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और संबंधित अधिकारियों को मौखिक तथा लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया।

ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में जल निकासी और सड़क निर्माण की मांग की गई थी। शिकायत के बाद भी स्थिति जस की तस रहने से लोगों में नाराजगी है।

मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए ग्रामीणों ने कहा कि बरसात के दौरान गांव का मुख्य मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो जाता है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो जाता है। कई घरों के आसपास भी पानी जमा रहने की बात ग्रामीणों ने कही।

पूर्व ग्राम प्रधान भारत प्रसाद लोधी की अगुवाई में ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव का स्थलीय निरीक्षण कराकर स्थायी समाधान की मांग की। इस दौरान रोहित लोधी, सत्यजीत, वरुण, मन्नू, पप्पू, सोनू, शशिकला, फूलवती, दुर्गावती, रामअवतार यादव, प्रेमलता लोधी, चंदन लोधी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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ग्राउंड रिपोर्ट

मौके पर मौजूद दृश्य बताते हैं कि कई स्थानों पर सड़क पर पानी जमा है और लोगों को उसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों को पानी के बीच आवागमन करते देखा गया। ग्रामीणों ने जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग दोहराई।

जनता की मांग

गांव का तत्काल सर्वे कराया जाए।

जल निकासी की स्थायी व्यवस्था हो।

क्षतिग्रस्त सड़क का निर्माण कराया जाए।

बिजली के जर्जर तार बदले जाएं।

जिम्मेदार विभाग संयुक्त निरीक्षण कर रिपोर्ट सार्वजनिक करे।

प्रशासन का पक्ष

समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभाग अथवा जिला प्रशासन की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। यदि प्रशासन का पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

सारांश

लगातार बारिश के बीच ककरही गांव में जलभराव की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद समस्या बनी हुई है और इससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। अब ग्रामीण जिला प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर शीघ्र समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।

 

फोटो-1: जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत पत्र सौंपते ग्रामीण प्रतिनिधि।

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फोटो-2: ककरही गांव के मुख्य मार्ग पर जलभराव के बीच आवागमन करती महिला।

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फोटो-3: गांव में जलभराव और कीचड़ से प्रभावित सड़क।


“ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बावजूद अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिससे बरसात में सामान्य जनजीवन प्रभावित है।”


ग्रामीणों की जुबानी

“हम चाहते हैं कि अधिकारी गांव में आकर खुद हालात देखें और जल निकासी व सड़क निर्माण का स्थायी समाधान कराएं।”


यह समाचार ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए शिकायत पत्र, मौके के दृश्य और उनके बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में व्यक्त आरोप संबंधित ग्रामीणों के दावे हैं। FT News Digital किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी घोषित नहीं करता। यदि जिला प्रशासन, ग्राम पंचायत या संबंधित विभाग अपना पक्ष उपलब्ध कराता है, तो उसे भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

 

बारिश बनी आफत: जलमग्न हुई सिद्धार्थनगर की नवीन मंडी, किसानों-व्यापारियों ने किया प्रदर्शन

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जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग, प्रशासन से शीघ्र समाधान की अपील


स्थान: नवीन फल एवं सब्जी मंडी, सिद्धार्थनगर

मुद्दा: मूसलाधार बारिश के बाद मंडी परिसर में जलभराव

मुख्य मांग: तत्काल जल निकासी एवं स्थायी समाधान

प्रमुख मौजूदगी: मंडी समिति जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार गुप्ता, आढ़ती उदय प्रताप यादव, रामनयन यादव, फतेह मोहम्मद, घनश्याम सहित बड़ी संख्या में व्यापारी व किसान


सिद्धार्थनगर। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जिला मुख्यालय स्थित कृषि उत्पादन मंडी समिति की नवीन फल एवं सब्जी मंडी की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंडी परिसर में भारी जलभराव होने से किसानों, आढ़तियों और व्यापारियों को अपने दैनिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी में पानी भर जाने से उपज की खरीद-फरोख्त प्रभावित होने की बात भी व्यापारियों ने कही।

व्यापारियों का कहना है कि जल निकासी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण प्रत्येक वर्ष बारिश के दौरान ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। उनका आरोप है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

इसी मुद्दे को लेकर शनिवार को मंडी परिसर में व्यापारियों और किसानों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया तथा शासन-प्रशासन से शीघ्र जल निकासी कराने और भविष्य के लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान मंडी समिति के जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार गुप्ता, आढ़ती उदय प्रताप यादव, रामनयन यादव, फतेह मोहम्मद, घनश्याम सहित सैकड़ों किसान और व्यापारी मौजूद रहे। सभी ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की अपेक्षा जताई।


“सिद्धार्थनगर की नवीन फल एवं सब्जी मंडी लगातार बारिश के बाद जलमग्न हो गई है। जलभराव से परेशान किसानों और व्यापारियों ने मंडी परिसर में प्रदर्शन कर प्रशासन से तत्काल जल निकासी और स्थायी समाधान की मांग की है।”

 

सिद्धार्थनगर में भारी बारिश के चलते कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यालय आज बंद

सिद्धार्थनगर, 18 जुलाई 2026। जनपद में लगातार हो रही भारी बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा के मद्देनज़र बड़ा निर्णय लिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर शनिवार, 18 जुलाई 2026 को जिले के कक्षा 1 से 8 तक के सभी परिषदीय, सहायता प्राप्त एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सिद्धार्थनगर द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जिले में हो रही अतिवृष्टि के कारण बच्चों के विद्यालय आने-जाने में कठिनाई और संभावित खतरे को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। आदेश के अनुसार सभी संबंधित विद्यालय आज पूरी तरह बंद रहेंगे।

बीएसए ने सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, प्रबंधकों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अवकाश संबंधी आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

जिला प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे खराब मौसम को देखते हुए बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने दें तथा मौसम सामान्य होने तक पूरी सावधानी बरतें।

“पॉक्सो व दुष्कर्म मामले में वांछित आरोपी गिरफ्तार, जोगिया उदयपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई”

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पोक्सो व दुष्कर्म मामले का वांछित आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने न्यायालय भेजा


जोगिया उदयपुर पुलिस की कार्रवाई, फरार चल रहे आरोपी को कलानमक ढाबा पुलिया के पास से दबोचा


सिद्धार्थनगर में पॉक्सो एक्ट एवं दुष्कर्म के गंभीर मामले में फरार चल रहे आरोपी को जोगिया उदयपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया। पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध पहले से मुकदमा दर्ज था और उसकी तलाश की जा रही थी।


सिद्धार्थनगर। जनपद में महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई के तहत जोगिया उदयपुर थाना पुलिस ने दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले में वांछित एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया।

पुलिस के अनुसार, थाना जोगिया उदयपुर पर दर्ज मु0अ0सं0 94/2026 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(1), 87, 137(2) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत मुकदमा पंजीकृत है। इसी मामले में वांछित अभियुक्त अजय पुत्र दूधनाथ, निवासी ग्राम गोपालपुर, टोला कैथवलिया, थाना बृजमनगंज, जनपद महराजगंज को पुलिस टीम ने कलानमक ढाबा पुलिया के पास से गिरफ्तार किया।

पुलिस ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए उसे माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से आगे की न्यायिक प्रक्रिया संपन्न की जाएगी।

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन द्वारा चलाए जा रहे अपराध नियंत्रण एवं वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी अभियान के तहत की गई। अभियान का निर्देशन अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद तथा पर्यवेक्षण क्षेत्राधिकारी बांसी शुभेन्दु सिंह द्वारा किया गया। कार्रवाई थाना प्रभारी अभय सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुई।

पुलिस टीम में उपनिरीक्षक अवधेश कुमार यादव, हेड कांस्टेबल श्रीनन्द यादव तथा हेड कांस्टेबल जितेन्द्र सिंह शामिल रहे।

नोट: यह मामला विचाराधीन है। आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे के आधार पर की गई है। आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

 घटना का संक्षिप्त क्रम

पीड़ित की शिकायत पर जोगिया उदयपुर थाने में दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

आरोपी घटना के बाद फरार चल रहा था।

पुलिस ने लगातार तलाश के बाद आरोपी को कलानमक ढाबा पुलिया के पास से गिरफ्तार किया।

गिरफ्तारी के बाद विधिक प्रक्रिया पूरी कर न्यायालय भेज दिया गया।

पुलिस का पक्ष

पुलिस के अनुसार, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत वांछित आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय भेजा गया है।

सारांश

जोगिया उदयपुर पुलिस ने दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट के एक मामले में वांछित आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई है। मामले की आगे की सुनवाई न्यायालय में होगी।

 

सीमा सुरक्षा के साथ जनसेवा का संकल्प: एसएसबी ने लगाया पशु चिकित्सा शिविर, 250 पशुओं का किया उपचार

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सीमा पर सेवा का संकल्प: एसएसबी ने लगाया निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविर, 250 पशुओं का हुआ उपचार


43वीं वाहिनी एसएसबी की जनकल्याणकारी पहल से सीमावर्ती ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत, पशुपालकों को निःशुल्क दवा, उपचार और पशुपालन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

सारांश

फसादीपुर गांव में एसएसबी 43वीं वाहिनी की ओर से निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविर।

लगभग 250 गाय, भैंस, बकरी एवं अन्य पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण।

पशुओं को निःशुल्क दवा वितरित, टीकाकरण एवं देखभाल की दी गई जानकारी।

सीमावर्ती ग्रामीणों ने एसएसबी की जनसेवा पहल की सराहना की।


भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) 43वीं वाहिनी ने एक बार फिर सीमा सुरक्षा के साथ जनसेवा की अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया। कमांडेंट उज्जल दत्ता के निर्देशन में बीओपी ककरहवां द्वारा सीमावर्ती फसादीपुर गांव में निःशुल्क पशु चिकित्सा एवं दवा वितरण शिविर आयोजित किया गया, जिसमें करीब 250 पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया।

शिविर का संचालन असिस्टेंट कमांडेंट निलेश मासुले एवं इंस्पेक्टर सुनील पाण्डेय के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान एसएसबी के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (एस.जी.) डॉ. चन्दन तालुकदार ने स्वयं उपस्थित होकर गाय, भैंस, बकरी सहित अन्य पालतू पशुओं की जांच की तथा आवश्यकतानुसार निःशुल्क दवाओं का वितरण किया।

शिविर में कई पशु सामान्य संक्रमण, त्वचा रोग, बुखार एवं अन्य मौसमी बीमारियों से प्रभावित पाए गए, जिनका मौके पर उपचार किया गया। पशुपालकों को पशुओं के नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार, स्वच्छ रखरखाव तथा मौसमी बीमारियों से बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी भी दी गई।

ग्रामीणों ने एसएसबी की इस जनहितकारी पहल की सराहना करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे शिविर आर्थिक रूप से कमजोर पशुपालकों के लिए अत्यंत लाभदायक हैं। इससे उन्हें दूर-दराज के पशु चिकित्सालयों तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और समय पर उपचार उपलब्ध हो जाता है।

इस अवसर पर व्यापार संगठन अध्यक्ष अमन जायसवाल, प्रहलाद गुप्ता, बृजलाल यादव, अखिलेश कुमार, नंदलाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। एसएसबी के जवानों ने शिविर में आने वाले पशुपालकों को आवश्यक सहयोग प्रदान करते हुए पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराया।

असिस्टेंट कमांडेंट निलेश मासुले ने कहा कि सीमा की सुरक्षा के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की सेवा करना भी एसएसबी की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। उन्होंने बताया कि बल द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और भविष्य में भी इस प्रकार के सेवा कार्य निरंतर जारी रहेंगे।

फसादीपुर में आयोजित यह शिविर न केवल पशुपालकों के लिए लाभकारी सिद्ध हुआ, बल्कि इससे एसएसबी और स्थानीय नागरिकों के बीच विश्वास एवं सहयोग भी और मजबूत हुआ। ग्रामीणों ने भविष्य में भी ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाने की मांग की।

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फोटो: फसादीपुर गांव में आयोजित निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविर में पशुओं का उपचार करते एसएसबी के पशु चिकित्सक एवं मौजूद अधिकारी।

 

संघर्ष की तपिश में तपकर चमका सपना: पिता के अधूरे अरमान को बेटे ऋतुराज शर्मा ने NEET UG-2026 में सफलता से दिया नया जीवन

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लॉकडाउन में पिता का साया उठने के बाद भी नहीं डगमगाए कदम, कठिन हालात को बनाया ताकत; नौगढ़ के होनहार ने सिद्धार्थनगर का बढ़ाया मान, क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल


“जब हौसले ज़िंदा हों तो मुश्किलें रास्ता नहीं रोकतीं…”

दिवंगत समाजसेवी स्वर्गीय भुनेश्वर शर्मा के पुत्र ऋतुराज शर्मा ने NEET UG-2026 में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत से हर सपना साकार किया जा सकता है।


सिद्धार्थनगर। कभी-कभी एक सफलता सिर्फ परीक्षा पास करने की खबर नहीं होती, बल्कि वह संघर्ष, संस्कार, आत्मविश्वास और परिवार के अधूरे सपनों की नई शुरुआत बन जाती है। नौगढ़ के युवा ऋतुराज शर्मा की सफलता भी ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है। लॉकडाउन के दौरान पिता का साया सिर से उठ गया, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लिया। वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति अटूट विश्वास ने उन्हें NEET UG-2026 में सफलता दिलाई। आज पूरा सिद्धार्थनगर इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।

सिद्धार्थनगर | विशेष संवाददाता

नौगढ़ नगर निवासी ऋतुराज शर्मा ने देश की प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG-2026 में सफलता अर्जित कर जनपद सिद्धार्थनगर का नाम गौरवान्वित किया है। उनकी इस उपलब्धि पर नगर सहित पूरे जिले में बधाइयों का सिलसिला जारी है।

ऋतुराज, क्षेत्र के दिवंगत समाजसेवी स्वर्गीय भुनेश्वर शर्मा के पुत्र हैं। सामाजिक जीवन में सक्रिय रहे भुनेश्वर शर्मा को क्षेत्र के लोग आज भी सम्मान के साथ याद करते हैं। लॉकडाउन के दौरान उनके निधन के बाद परिवार पर कठिन समय आया, लेकिन बेटे ऋतुराज ने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया।

कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने नियमित अध्ययन जारी रखा और अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि संकल्प मजबूत हो तो हालात भी रास्ता नहीं रोक पाते।

ऋतुराज ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी माता के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन, परिवार के सहयोग और अपने दिवंगत पिता की प्रेरणा को दिया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल डॉक्टर बनना नहीं, बल्कि समाज की सेवा करना है। यही उनके पिता का भी सपना था।

नगर के लोगों का कहना है कि ऋतुराज ने अपने पिता के सामाजिक मूल्यों और संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उनकी यह सफलता जिले के हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

सोशल मीडिया पर भी ऋतुराज शर्मा को लगातार बधाइयां मिल रही हैं। शिक्षकों, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि सिद्धार्थनगर के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही दिशा और निरंतर प्रयास की है।


ऋतुराज शर्मा एक नजर में

नाम : ऋतुराज शर्मा

निवास : नौगढ़, सिद्धार्थनगर

पिता : स्वर्गीय भुनेश्वर शर्मा

उपलब्धि : NEET UG-2026 में सफलता

लक्ष्य : डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना


संघर्ष से सफलता तक…

✅ लॉकडाउन में पिता का निधन

✅ कठिन परिस्थितियों में भी पढ़ाई जारी रखी

✅ NEET UG-2026 में सफलता हासिल की

✅ पूरे सिद्धार्थनगर का नाम किया रोशन

✅ युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत


ऋतुराज शर्मा की सफलता यह संदेश देती है कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियां लक्ष्य प्राप्ति की राह में बाधा अवश्य बन सकती हैं, लेकिन दृढ़ निश्चय और निरंतर प्रयास उन्हें पार करने की शक्ति भी देते हैं। उनकी उपलब्धि क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।

सारांश

नौगढ़ निवासी ऋतुराज शर्मा ने NEET UG-2026 में सफलता प्राप्त कर सिद्धार्थनगर का नाम रोशन किया है। पिता के निधन के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई जारी रखी। उनकी सफलता को क्षेत्र के लोग संघर्ष, संस्कार और समर्पण की प्रेरक मिसाल के रूप में देख रहे हैं। यह उपलब्धि जनपद के युवाओं को बड़े लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा देती है।

किराना व्यापारी के बेटे ने किया कमाल, NEET-2026 क्वालीफाई कर सिद्धार्थनगर का बढ़ाया मान

सेंट जेवियर्स स्कूल के पूर्व छात्र अंकित जायसवाल ने NEET-2026 में सफलता हासिल कर मेहनत, अनुशासन और पारिवारिक संस्कार की मिसाल पेश की।


साधारण परिवार का होनहार बेटा बना युवाओं के लिए प्रेरणा, क्षेत्र में खुशी का माहौल।


सिद्धार्थनगर। सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने और उन्हें मेहनत के दम पर साकार करने वाले युवा अक्सर समाज के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। जनपद सिद्धार्थनगर के बर्डपुर नंबर-9, टोला हथिहवा निवासी अंकित जायसवाल ने NEET (UG)-2026 परीक्षा उत्तीर्ण कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। उनकी सफलता से क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाई देकर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दे रहे हैं।

सिद्धार्थनगर | विशेष संवाददाता

जनपद सिद्धार्थनगर के बर्डपुर नंबर-9, टोला हथिहवा निवासी अंकित जायसवाल ने देश की प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (UG)-2026 में सफलता हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।

उपलब्ध स्कोर कार्ड के अनुसार अंकित ने 720 में 562 अंक प्राप्त किए हैं तथा ऑल इंडिया रैंक (AIR) 28455 हासिल की है। यह उपलब्धि उनके निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

अंकित के पिता शिवपूजन जायसवाल क्षेत्र में किराना व्यापार करने के साथ-साथ कृषि कार्य भी करते हैं। माता प्रेमा देवी ने बेटे की शिक्षा और संस्कारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त करना क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।

अंकित ने अपनी प्रारंभिक एवं स्कूली शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल से प्राप्त की। परिवार के सहयोग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अपनी निरंतर मेहनत के बल पर उन्होंने यह सफलता अर्जित की।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अंकित की उपलब्धि यह संदेश देती है कि ईमानदार प्रयास, अनुशासित तैयारी और आत्मविश्वास के साथ बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।

परिवार, शुभचिंतकों एवं क्षेत्रवासियों ने अंकित जायसवाल को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनकी सफलता की सराहना कर रहे हैं।


एक नजर में

नाम: अंकित जायसवाल

पिता: शिवपूजन जायसवाल

माता: प्रेमा देवी

निवास: ग्राम बर्डपुर नं. 9, टोला हथिहवा, सिद्धार्थनगर

शिक्षा: सेंट जेवियर्स स्कूल

उपलब्धि: NEET (UG)-2026 क्वालीफाई

ऑल इंडिया रैंक: 28455

प्राप्त अंक: 562/720

सारांश

सिद्धार्थनगर के बर्डपुर नंबर-9 निवासी अंकित जायसवाल ने NEET (UG)-2026 परीक्षा में सफलता प्राप्त कर परिवार और जनपद का नाम रोशन किया है। किराना व्यवसाय और खेती से जुड़े परिवार के इस होनहार छात्र की उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

 

उमस भरी रातों में बिजली का संकट, ढेबरूआ उपकेंद्र से जुड़े गांवों के उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा

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रोस्टरिंग के नाम पर घंटों बिजली कटौती का आरोप, ग्रामीण बोले— दिन में करें कटौती, रात में दें निर्बाध आपूर्ति; विभाग ने बताया निर्धारित रोस्टर के तहत हो रही सप्लाई।


रात 11 बजे के बाद कई बार ठप हुई बिजली, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी।


सिद्धार्थनगर। बरसात के मौसम में जहां लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद थी, वहीं ढेबरूआ विद्युत उपकेंद्र से जुड़े दर्जनों गांवों में रात के समय लगातार हो रही बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रोस्टरिंग के नाम पर कई-कई घंटे बिजली बंद रखी जा रही है, जिससे रात की नींद और दिनचर्या दोनों प्रभावित हो रही हैं। हालांकि बिजली विभाग का कहना है कि उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार निर्धारित रोस्टर के तहत ही विद्युत आपूर्ति की जा रही है।

सिद्धार्थनगर

बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र के ढेबरूआ विद्युत उपकेंद्र से जुड़े गांवों में इन दिनों बिजली की अनियमित आपूर्ति आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई है। उमस भरी रातों में बार-बार बिजली गुल होने से हजारों उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि दिन में किसी तरह बिजली की आपूर्ति बनी रहती है, लेकिन रात होते ही कटौती का सिलसिला शुरू हो जाता है। कई बार रात में दो से तीन बार बिजली चली जाती है और लंबे अंतराल के बाद आपूर्ति बहाल होती है। ऐसे में घरों में रहना मुश्किल हो जाता है।

स्थानीय निवासी अनुज चौधरी, अजय, रामप्रताप चौधरी, मुमताज, अजय आजाद और विशाल रावत ने बताया कि रातभर बिजली की आंख-मिचौली के कारण लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि यदि रोस्टरिंग आवश्यक है तो उसे दिन के समय लागू किया जाए, ताकि रात में लोगों को राहत मिल सके।

ग्रामीणों के मुताबिक बुधवार की रात करीब 11 बजे बिजली आपूर्ति बाधित हुई, जो लगभग दो घंटे बाद बहाल हो सकी। इस दौरान उमस और गर्मी के कारण छोटे बच्चों, बुजुर्गों एवं बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी।

क्या कहता है बिजली विभाग?

इस संबंध में ढेबरूआ विद्युत उपकेंद्र के अवर अभियंता (जेई) सत्येंद्र कुमार ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार निर्धारित रोस्टर के तहत बिजली आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि विभाग की कोशिश है कि उपभोक्ताओं को यथासंभव बेहतर विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए।

ग्रामीणों ने बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि रात के समय होने वाली लंबी बिजली कटौती पर रोक लगाई जाए तथा नियमित एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि उमस भरे मौसम में लोगों को राहत मिल सके।


ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

रात में लंबी बिजली कटौती बंद की जाए।

रोस्टरिंग हो तो दिन के समय की जाए।

उमस के मौसम में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

बार-बार ट्रिपिंग और अनावश्यक कटौती पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए।

सारांश

ढेबरूआ विद्युत उपकेंद्र से जुड़े गांवों में रात के समय लगातार हो रही बिजली कटौती से ग्रामीण परेशान हैं। उपभोक्ताओं ने नियमित बिजली आपूर्ति की मांग उठाई है, जबकि विभाग का कहना है कि निर्धारित रोस्टर के अनुसार ही बिजली आपूर्ति की जा रही है। खबर में दोनों पक्षों का पक्ष शामिल है, जिससे यह संतुलित और पत्रकारिता की दृष्टि से सुरक्षित प्रस्तुति है।

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