ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक की मांग, दवा दुकानों की बंदी का UWPA ने किया विरोध
सिद्धार्थनगर/लखनऊ। यूनाइटेड वेलफेयर फार्मासिस्ट एसोसिएशन (UWPA) ने ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध करते हुए दवा दुकानों की बंदी का समर्थन न करने का ऐलान किया है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि मरीजों को दवाओं की उपलब्धता बनाए रखना फार्मासिस्टों की पहली जिम्मेदारी है, इसलिए सभी दवा दुकानों को नियमित रूप से खुला रखने का निर्देश दिया गया है।
संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रदीप कुमार शुक्ला ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि ऑनलाइन माध्यम से दवाओं की बिक्री मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उनका कहना है कि ऑनलाइन दवा विक्रय में दवाओं की गुणवत्ता, स्टोरेज, उपयोग की सावधानियां तथा संभावित एडवर्स ड्रग रिएक्शन की सही जानकारी मरीजों तक पहुंचाना संभव नहीं हो पाता, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते हैं।
उन्होंने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने की मांग की। साथ ही कहा कि दवाएं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत आती हैं, इसलिए आम जनता तक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना सभी फार्मासिस्टों का दायित्व है।
UWPA की ओर से यह भी कहा गया कि संगठन के फार्मासिस्ट साथी हाथों में काली पट्टी बांधकर ऑनलाइन दवा विक्रय का विरोध दर्ज करा रहे हैं, लेकिन मरीजों की सुविधा को देखते हुए दवा दुकानों को बंद नहीं किया जाएगा।
प्रदीप कुमार शुक्ला ने कहा कि कोविड काल में भी फार्मासिस्टों ने लगातार अपनी सेवाएं जारी रखीं और कठिन परिस्थितियों में जनता तक दवाएं पहुंचाने का कार्य किया। ऐसे में वर्तमान समय में भी मरीजों के हित को सर्वोपरि रखते हुए सभी दवा दुकानों को नियमित समय तक खुला रखने का आह्वान किया गया है।
फार्मासिस्ट संगठन ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा, समय पर दवा उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना है।
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