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हर बारिश में मौत का इंतजार! जर्जर काशीराम आवासों में सहमे गरीब परिवार, आखिर कब मिलेगी सुरक्षित छत?

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स्थान: सिद्धार्थनगर, काशीराम आवास परिसर

मामला: दो आवासों की छत ध्वस्त, जलभराव और जर्जर भवनों से बढ़ी चिंता

राहत: घटना में कोई जनहानि नहीं

मांग: तकनीकी जांच, मरम्मत और सुरक्षित वैकल्पिक आवास की व्यवस्था

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सिद्धार्थनगर। जिन काशीराम आवासों को आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सुरक्षित आशियाने के रूप में बनाया गया था, आज वही आवास कई गरीब परिवारों के लिए चिंता और भय का कारण बनते दिखाई दे रहे हैं। लगातार बारिश के बीच दो आवासीय भवनों की छत गिरने की घटना ने पूरे परिसर को दहला दिया है। राहत की बात यह रही कि घटना के समय संबंधित आवासों में कोई मौजूद नहीं था, लेकिन अब यहां रहने वाले परिवारों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगला हादसा कहीं उनके घर में न हो जाए।

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🔹 दो आवासीय भवनों की छत गिरने से मचा हड़कंप

🔹 ऊपर से जर्जर छतें, नीचे जलभराव की गंभीर समस्या

🔹 गरीब परिवारों का दावा—वर्षों से नियमित रखरखाव नहीं हुआ

🔹 बारिश के मौसम में बढ़ा खतरा, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर चिंता

🔹 स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच और स्थायी समाधान की मांग उठाई

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मुख्य खबर

सिद्धार्थनगर। काशीराम आवास परिसर की तस्वीरें और मौके से सामने आए दृश्य कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। परिसर के कुछ भवनों की छतें जर्जर दिखाई दे रही हैं। हाल ही में दो आवासीय ब्लॉकों की छत का हिस्सा गिरने की घटना सामने आई। गनीमत रही कि हादसे के समय संबंधित आवास खाली थे, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।

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मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ लगातार बारिश से छतों में रिसाव और जर्जरता बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ परिसर में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण लंबे समय तक जलभराव बना रहता है। उनका कहना है कि भवनों के आसपास जमा पानी और नियमित रखरखाव के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

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एफटी न्यूज़ डिजिटल की टीम जब मौके पर पहुंची तो कई स्थानों पर जलभराव, दीवारों पर सीलन, उखड़ता प्लास्टर और जर्जर होती इमारतें दिखाई दीं। परिसर में रहने वाले लोगों ने बताया कि बरसात के दिनों में उन्हें सबसे अधिक डर अपने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर रहता है।

यहां रहने वाले अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं। दिहाड़ी मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके जीवन यापन करने वाले इन लोगों के लिए यही आवास उनकी पूरी पूंजी है। ऐसे में वे न तो आसानी से कहीं और जा सकते हैं और न ही अपने स्तर पर भवनों की मरम्मत करा सकते हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय-समय पर भवनों का निरीक्षण, आवश्यक मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था पर प्रभावी काम होता, तो शायद आज हालात इतने गंभीर नहीं होते। हालांकि इस संबंध में संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना अभी शेष है।

घटना के बाद लोगों ने मांग की है कि पूरे काशीराम आवास परिसर का स्वतंत्र तकनीकी सर्वे (Structural Safety Audit) कराया जाए। जिन भवनों में खतरा अधिक है, वहां रहने वाले परिवारों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए तथा स्थायी मरम्मत या पुनर्निर्माण की कार्ययोजना बनाई जाए।

सारांश

यह खबर किसी व्यक्ति या विभाग पर आरोप लगाने के लिए नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों की आवाज़ शासन और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास है, जो हर बारिश में भय के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते हैं तो किसी संभावित बड़े हादसे को रोका जा सकता है।

एफटी न्यूज़ डिजिटल की अपील

गरीब परिवारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि किसी भवन के जर्जर होने की आशंका है तो संबंधित विभाग तत्काल तकनीकी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि कोई भी परिवार किसी अप्रिय घटना का शिकार न बने।


यह खबर दृश्य साक्ष्यों, मौके के निरीक्षण और स्थानीय निवासियों के बयानों के आधार पर संतुलित पत्रकारिता शैली में तैयार की गई है। जहां स्थानीय लोगों के दावे हैं, उन्हें उसी रूप में प्रस्तुत किया गया है। संबंधित विभाग का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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