कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हुआ गंडक नहर का RCC पैनल, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

किमी 73 के पास करीब 75 मीटर हिस्से में नुकसान, शुरुआती दरारों के बाद तकनीकी जांच को लेकर उठे सवाल
कुशीनगर। किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने वाली मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के किमी 73 के आसपास आरसीसी पैनल का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि क्षतिग्रस्त हिस्सा करीब 75 मीटर का है।
मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर नया बना नहर पैनल कुछ ही महीनों में किस वजह से क्षतिग्रस्त हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार नहर में पानी छोड़े जाने के बाद पैनल के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई देने लगी थीं। हालांकि इन दरारों के वास्तविक कारण और निर्माण गुणवत्ता में किसी कमी की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकती है।
दरारों के बाद बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआती दौर में दिखाई देने वाली दरारों को लेकर चिंता जताई गई थी। अब पैनल का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद मामला गंभीर हो गया है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि निर्माण के कुछ समय बाद ही दरारें दिखाई दे रही थीं तो क्या उस समय संबंधित स्तर पर तकनीकी निरीक्षण कराया गया था? क्या निर्माण सामग्री और आरसीसी की गुणवत्ता की जांच की गई थी? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल अस्थायी इंतजाम
क्षतिग्रस्त हिस्से को तत्काल संभालने के लिए मिट्टी भरे बोरों समेत अस्थायी सुरक्षा उपाय किए जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन स्थानीय लोगों की चिंता यह है कि अस्थायी व्यवस्था के बाद स्थायी समाधान कब तक होगा।
नहर किसानों की सिंचाई व्यवस्था से जुड़ी होने के कारण पैनल की स्थिति का असर आसपास के कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। इसलिए ग्रामीण स्थायी और तकनीकी समाधान की मांग कर रहे हैं।
सिर्फ मरम्मत नहीं, तकनीकी जांच की जरूरत
मामले में अब केवल क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत ही नहीं, बल्कि उसके कारणों की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जांच में यह देखा जाना जरूरी होगा कि—
आरसीसी पैनल का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार हुआ था या नहीं।
निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच हुई थी या नहीं।
पैनल की निर्धारित मोटाई और डिजाइन का पालन किया गया था या नहीं।
निर्माण के बाद तकनीकी निरीक्षण किया गया था या नहीं।
दरारें सामने आने के बाद उनकी गंभीरता का आकलन किया गया था या नहीं।
यदि तकनीकी जांच में किसी प्रकार की कमी सामने आती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि निर्माण मानकों के अनुरूप पाया जाता है तो पैनल क्षतिग्रस्त होने के वास्तविक तकनीकी कारण भी सामने आने चाहिए।
किसानों की निगाह अब विभाग की कार्रवाई पर
मुख्य पश्चिमी गंडक नहर किसानों के लिए महत्वपूर्ण सिंचाई संसाधन है। ऐसे में नहर के नए निर्माण का कुछ ही समय में क्षतिग्रस्त होना स्वाभाविक रूप से चिंता का विषय है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और क्षतिग्रस्त हिस्से का स्थायी समाधान कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
FTकुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हुआ गंडक नहर का RCC पैनल, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल NEWS DIGITAL का सीधा सवाल
नया बना नहर पैनल आखिर कुछ ही महीनों में क्यों क्षतिग्रस्त हुआ?
इसका जवाब केवल मरम्मत से नहीं, बल्कि तकनीकी जांच और गुणवत्ता परीक्षण से मिलना चाहिए।
यह मामला किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि सरकारी निर्माण की गुणवत्ता और किसानों से जुड़ी सिंचाई व्यवस्था को सुरक्षित रखने का है।
रिपोर्टिंग सुरक्षा नोट
यह समाचार उपलब्ध जानकारी, सामने आई तस्वीरों/वीडियो तथा स्थानीय स्तर पर प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। किसी व्यक्ति, अधिकारी या विभाग पर भ्रष्टाचार अथवा जानबूझकर लापरवाही का आरोप तथ्य के रूप में नहीं लगाया गया है। निर्माण की गुणवत्ता अथवा क्षति के वास्तविक कारण का अंतिम निर्धारण सक्षम तकनीकी जांच के बाद ही किया जा सकता है। संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना उचित होगा।
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