रोडवेज कर्मचारियों का उबाल: 9 सूत्रीय मांगों पर सरकार को अल्टीमेटम, आंदोलन होगा और तेज
19 सितंबर तक समाधान नहीं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी, कर्मचारियों ने उठाई अपनी पीड़ा
सिद्धार्थनगर।
उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद की सिद्धार्थनगर डिपो शाखा के तत्वावधान में आयोजित धरना-प्रदर्शन ने कर्मचारियों की बढ़ती बेचैनी और असंतोष को खुलकर सामने ला दिया। प्रदेश स्तरीय आह्वान पर हुए इस प्रदर्शन में कर्मचारियों की एकजुटता और अपनी मांगों को लेकर गंभीरता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वाई पी यादव (अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश) उपस्थित रहे। उनके साथ शिवाकांत पांडे (जिला मंत्री), गोविंद ओझा (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), रत्नेश दुबे (कोषाध्यक्ष) भी मौजूद रहे, जिन्होंने कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता दिनेश चंद्र मिश्र ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन अष्टभुजा पांडे (शाखा मंत्री) द्वारा किया गया।

धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित समस्याओं पर यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका असर न केवल कर्मचारियों बल्कि परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से अपेक्षा जताई कि कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक विजय शंकर गंगवार को सौंपा और जल्द समाधान की मांग की।
कार्यक्रम में बृजेश पांडे (फार्मासिस्ट), विजय मिश्रा, सुरेश चंद्र, गणेश शंकर मिश्रा, गोरखनाथ पांडे, मोहम्मद अशरफ, अमित मिश्रा, दीपक गौड़ सहित अन्य कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी रही। वहीं राजकुमार यादव, रिजवान मुल्ला, मनोज सिंह, रामायण उपाध्याय, अल्लाह हुसैन, विनोद मिश्रा, लवकुश शुक्ला, जितेंद्र उपाध्याय, सत्य प्रताप सिंह समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।

धरना-प्रदर्शन में यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं, लेकिन उन्होंने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का रास्ता चुना है।

संतुलित निष्कर्ष (चैनल सुरक्षा)
कर्मचारियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया गया है। शासन-प्रशासन से अपेक्षा जताई गई है कि वह कर्मचारियों की समस्याओं पर संवेदनशीलता के साथ विचार करे। इस संबंध में संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सकी है।

