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धनुष-बाण से हल तक: रामायण के लक्ष्मण की प्रेरक कहानी, जो आज खेतों में लिख रहे नई इबारत छोटी अंग्रेजी हेडिंग

नई दिल्ली। कभी पूरे देश की आस्था और भावनाओं का हिस्सा बने रामायण के लक्ष्मण आज फिर चर्चा में हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि अब उनके हाथों में धनुष-बाण नहीं, बल्कि खेती की जिम्मेदारी है। दूरदर्शन के स्वर्णिम दौर के सुपरहिट कलाकार सुनील लहरी आज 65 वर्ष की उम्र में अपने फार्महाउस में जैविक खेती कर रहे हैं। उनका जीवन बताता है कि असली सफलता केवल शोहरत नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी से जुड़े रहने में भी है।

जब लक्ष्मण को देखने के लिए थम जाता था देश

साल 1987 में रामानंद सागर की रामायण ने भारतीय टेलीविजन का इतिहास बदल दिया। उस दौर में न मोबाइल था, न इंटरनेट और न ही ओटीटी प्लेटफॉर्म। रविवार की सुबह सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था। लोग अपने सारे काम छोड़कर टीवी के सामने बैठ जाते थे।

इसी रामायण में लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता सुनील लहरी रातोंरात देश के सबसे लोकप्रिय चेहरों में शामिल हो गए। उनके संवाद, उनकी निष्ठा और उनका अभिनय दर्शकों के दिलों में बस गया। लाखों लोग उन्हें केवल अभिनेता नहीं, बल्कि लक्ष्मण के रूप में देखने लगे थे।

शोहरत मिली, लेकिन जमीन नहीं छोड़ी

रामायण की ऐतिहासिक सफलता के बाद सुनील लहरी ने कई धारावाहिकों और फिल्मों में काम किया। हालांकि उन्हें फिर वैसी लोकप्रियता नहीं मिली जैसी लक्ष्मण के किरदार से मिली थी। धीरे-धीरे मनोरंजन जगत में नए चेहरे आते गए और वे मीडिया की सुर्खियों से दूर होते चले गए।

लेकिन उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। उन्होंने अपने जीवन को सामान्य तरीके से जीना जारी रखा और अपनी पहचान को केवल स्टारडम तक सीमित नहीं रहने दिया।

अब खेतों में उगा रहे आत्मनिर्भरता की फसल

आज सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सुनील लहरी अपने फार्महाउस में नजर आए। खेतों में घूमते हुए उन्होंने अपनी ऑर्गेनिक खेती दिखाई।

उनके फार्महाउस में पालक, मेथी, टमाटर, हरी मिर्च, फूलगोभी, पत्तागोभी, शिमला मिर्च जैसी सब्जियों के साथ तरबूज, केला, पपीता और काजू की खेती भी की जा रही है।

जिस अभिनेता को कभी कैमरों की चमक घेरे रहती थी, वह आज प्रकृति के बीच सुकून और आत्मनिर्भरता का संदेश देता दिखाई दे रहा है।

तस्वीर की कहानी: तब और अब

एक तरफ रामायण का वह लक्ष्मण है, जिसकी आंखों में मर्यादा, त्याग और साहस दिखाई देता था। दूसरी तरफ खेतों में खड़ा वही कलाकार है, जो मिट्टी से जुड़कर नई पीढ़ी को मेहनत और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ा रहा है।

यह तस्वीर केवल दो अलग-अलग समय की तस्वीर नहीं, बल्कि जीवन के उस सत्य को दर्शाती है कि समय बदलता है, लेकिन अपने संस्कार और अपनी जड़ों से जुड़ा व्यक्ति कभी छोटा नहीं होता।


तब और अब

तब

🔹 रामायण में लक्ष्मण का किरदार

🔹 करोड़ों लोगों के पसंदीदा कलाकार

🔹 घर-घर में पहचान

अब

🔹 ऑर्गेनिक खेती से जुड़े

🔹 फल, सब्जियां और काजू की खेती

🔹 युवाओं को आत्मनिर्भरता का संदेश

संदेश

सुनील लहरी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि लोकप्रियता स्थायी नहीं होती, लेकिन कर्म और सादगी हमेशा याद रखी जाती है। रामायण के लक्ष्मण आज खेतों के किसान बनकर यह बता रहे हैं कि जीवन की सबसे बड़ी सफलता अपनी जड़ों से जुड़े रहने में है।

सारांश

कभी टीवी स्क्रीन पर मर्यादा और त्याग का संदेश देने वाले सुनील लहरी आज खेती के जरिए प्रकृति, आत्मनिर्भरता और सादगी का संदेश दे रहे हैं। रामायण के लक्ष्मण से खेतों के किसान तक का उनका सफर भारतीय समाज के लिए प्रेरणा की एक जीवंत मिसाल बन गया है।

रिपोर्ट: FT News Digital

“सच और… कुछ नहीं”

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