“हर घर नल” से नहीं होगी पूरी जल सुरक्षा, पारंपरिक जल स्रोत बचाना होगा जरूरी : श्रीधर पाण्डेय
भीषण गर्मी और गिरते भूजल स्तर पर सामाजिक कार्यकर्ता ने जताई चिंता, कुएं-तालाबों के संरक्षण की उठाई मांग
सिद्धार्थनगर। भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर के बीच जनपद सिद्धार्थनगर समेत प्रदेश के कई क्षेत्रों में संभावित पेयजल संकट को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं गौतम बुद्ध जागृति सोसाइटी के सचिव श्रीधर पाण्डेय ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार की “हर घर नल, हर घर जल” योजना सराहनीय है, लेकिन केवल पाइपलाइन आधारित जलापूर्ति व्यवस्था पर निर्भर रहना भविष्य के लिए जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है।
श्रीधर पाण्डेय ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक जल स्रोत तेजी से समाप्त हो रहे हैं। गांवों के पुराने कुएं पाटे जा चुके हैं, छोटे देसी नल गायब हो गए हैं और बड़ी संख्या में इंडिया मार्क हैंडपंप भी अनुपयोगी पड़े हैं। ऐसे में ग्रामीण आबादी पूरी तरह केंद्रीकृत पेयजल व्यवस्था पर निर्भर होती जा रही है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी कारणवश बिजली आपूर्ति बाधित होती है, तकनीकी खराबी आती है या जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित होती है, तो लोगों के सामने पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
जल सुरक्षा के लिए क्या जरूरी है?
✔ बंद पड़े कुओं का पुनर्जीवन
✔ इंडिया मार्क हैंडपंपों का संरक्षण
✔ तालाबों का जीर्णोद्धार
✔ वर्षा जल संचयन को बढ़ावा
✔ भूजल पुनर्भरण की प्रभावी व्यवस्था
✔ जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना
जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहा खतरा
श्री पाण्डेय ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और बढ़ती गर्मी के कारण आने वाले वर्षों में जल संकट और गहरा सकता है। ऐसे में आधुनिक जलापूर्ति योजनाओं के साथ-साथ वैकल्पिक एवं पारंपरिक जल स्रोतों को जीवित रखना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, ग्राम पंचायतों और आम नागरिकों से अपील की कि जल संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम न समझा जाए, बल्कि इसे जनभागीदारी के साथ जनांदोलन का स्वरूप दिया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ जल प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
गांवों से गायब होते कुएं, सूखते तालाब और बढ़ती गर्मी के बीच सामाजिक कार्यकर्ता श्रीधर पाण्डेय ने चेतावनी दी है कि केवल “हर घर नल” योजना से जल सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी। पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के बिना भविष्य में बड़ा जल संकट खड़ा हो सकता है।
सारांश
सिद्धार्थनगर में सामाजिक कार्यकर्ता श्रीधर पाण्डेय ने कहा कि आधुनिक पेयजल योजनाओं के साथ-साथ कुएं, तालाब, हैंडपंप और वर्षा जल संचयन जैसी पारंपरिक व्यवस्थाओं को भी संरक्षित करना जरूरी है। उन्होंने जल संरक्षण को जनांदोलन बनाने और भूजल पुनर्भरण पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
विशेष कथन
“नल का जल सुविधा है, लेकिन जल सुरक्षा का विकल्प नहीं।” — श्रीधर पाण्डेय, सचिव, गौतम बुद्ध जागृति सोसाइटी

