उत्तराखंड में मानसून का कहर: 173 सड़कें बंद, सात जिलों में येलो अलर्ट
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार सक्रिय मानसून ने जनजीवन पर व्यापक असर डाला है। राज्य के कई पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार वर्षा के चलते भूस्खलन और मलबा आने की घटनाएं बढ़ी हैं। भारतीय मौसम विभाग द्वारा शनिवार को सात जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही आगामी तीन दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई गई है।
लगातार हो रही बारिश से उत्तराखंड में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। भूस्खलन और मलबा आने के कारण प्रदेश की 173 सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे कई क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम को देखते हुए ही यात्रा करने की अपील की है।
एक नजर में
7 जिलों में येलो अलर्ट जारी
173 सड़कें यातायात के लिए बंद
कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा
नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर बढ़ा
अगले तीन दिन तक बारिश के आसार
प्रशासन ने अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी
सारांश
मानसून की सक्रियता के कारण उत्तराखंड में लगातार बारिश हो रही है। सड़कें बंद होने से कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने तथा प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।
पूरी खबर
राज्य के पर्वतीय जिलों में लगातार हो रही वर्षा के कारण अनेक स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। मलबा आने से कई सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संबंधित विभाग बंद मार्गों को खोलने के लिए मशीनों और कर्मचारियों की मदद से लगातार कार्य कर रहे हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
प्रशासन ने आपदा प्रबंधन, पुलिस और अन्य राहत एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा है। नदी-नालों के किनारे न जाने, पहाड़ी ढलानों के आसपास सावधानी बरतने और खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है।
चारधाम यात्रा मार्गों सहित पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से भी मौसम की ताज़ा जानकारी प्राप्त करने के बाद ही यात्रा शुरू करने का अनुरोध किया गया है। प्रशासन का कहना है कि मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य किए जाएंगे।

