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सिद्धार्थनगर में स्कूलों का समय बदला, 9 बजे से चलेंगी कक्षाएं

सिद्धार्थनगर में कक्षा 1 से लेकर 8वीं तक के विद्यालयों का समय बदल गया है। अब स्कूल 9 बजे से लेकर 3 बजे तक खुलेंगे। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी. एन. ने कहा है कि यदि कोई स्कूल आदेश का पालन न किया तो होगी कड़ी कार्रवाई।

ठंडी की वजह से स्कूलों का समय 10 से 3 बजे तक था। जिसे 18 फरवरी से बदल दिया गया है।

परोई में गाजे-बाजे के साथ निकली भव्य कलश यात्रा, सात दिवसीय श्री श्री शतचंडी महायज्ञ का हुआ शुभारंभ

परोई (ख़ेसरहा), सिद्धार्थनगर। परोई गांव में सात दिवसीय श्री श्री शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। गाजे-बाजे और जयघोष के बीच निकली यह कलश यात्रा पूरे गांव का भ्रमण करते हुए भुवही घाट पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पवित्र राप्ती नदी से जल भरकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

भुवही घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जल भराई

भुवही घाट पर पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महिलाओं और बच्चों ने श्रद्धा भाव से कलश में जल भरा। इसके बाद महिलाएं और बच्चे सिर पर कलश रखकर पुनः ग्राम परोई की ओर प्रस्थान किए। पूरे मार्ग में “जय माता दी” और धार्मिक भजनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

सात दिनों तक चलेगा धार्मिक अनुष्ठान

आयोजकों के अनुसार, यह श्री श्री शतचंडी महायज्ञ सात दिनों तक चलेगा। प्रतिदिन प्रातःकाल यज्ञ और पूजन का कार्यक्रम होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे।

दिन में कथा, रात में रामलीला का मंचन

महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन दिन में पंडित हेमंत तिवारी जी द्वारा धार्मिक कथा का वाचन किया जाएगा, जिसमें देवी महिमा और सनातन धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला जाएगा।

वहीं रात्रि में भव्य रामलीला का मंचन होगा, जिससे क्षेत्र का धार्मिक वातावरण और अधिक सजीव हो उठेगा।

सामाजिक एकता और आस्था का संगम

ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन से न केवल आध्यात्मिक वातावरण बनता है, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता भी मजबूत होती है। सात दिवसीय इस महायज्ञ को लेकर गांव और आसपास के क्षेत्रों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

इस अवसर पर ग्राम प्रधान सुरेंद्र पांडेय, आनंद पाण्डेय, कमलेश्वर पांडेय, हिमांशु पांडेय, बबलू पाण्डेय, रणजीत सिंह, भोला सिंह , परमहंस पाण्डेय, राजकुमार पाण्डेय तथा अन्य ग्रामीण शामिल रहें।

अयोध्या में अरबों की लागत से होगा सड़कों का विस्तार और विकास

अयोध्या। लोक निर्माण विभाग (PWD) अयोध्या प्रखंड की ओर से अयोध्या धाम के चार प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों के लिए ई-निविदा जारी की गई है। अधीक्षण अभियंता कार्यालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार इच्छुक ठेकेदार 16 फरवरी 2026 से 24 फरवरी 2026 दोपहर 12 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। निविदाएं 24 फरवरी को अपराह्न 12:30 बजे खोली जाएंगी।PWD द्वारा जारी निविदा के अनुसार टेढ़ी बाजार से अशर्फी भवन मार्ग से राजघाट तक 230 लाख से मार्ग का चौड़ी करण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा, इसके अलावा 315 लाख से छोटी छावनी से पोस्ट ऑफिस मार्ग का दो लेन लेने चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। रानोपाली विद्या कुंड मार्ग से बाग बिगेसी होते हुए अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन तक 315 लाख से दो लेन मार्ग चौड़ीकरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त दीनबंधु नेत्र चिकित्सालय से जानकी महल होते हुए रामपथ तक के मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण करने के लिए निविदा निकाली गई है।

सहारनपुर SSP द्वारा आयोजित हुई जनसुनवाई, समस्याओं का हुआ निस्तारण

सहारनपुर। पुलिस कार्यालय में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सहारनपुर द्वारा जनसुनवाई आयोजित की गई। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपनी समस्याएँ, शिकायतें व आवेदन प्रस्तुत किए, जिन्हें अधिकारियों द्वारा पूरी गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ सुना गया सभी प्रकरणों में समयबद्ध, पारदर्शी एवं निष्पक्ष कार्यवाही सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जाए। प्रत्येक शिकायतकर्ता को निस्तारण की समुचित सूचना उपलब्ध कराई जाए, जिससे जनता का भरोसा और मजबूत हो। जनसुनवाई का मुख्य उद्देश्य पुलिस-जनता के बीच संवाद को सुदृढ़ करना और जनपद में सुशासन एवं बेहतर कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

नेपाल तराई में बदलती सियासी हवा: क्या परंपरागत दलों का गढ़ ढह रहा है?

नेपाल के तराई क्षेत्र में इस बार चुनावी माहौल कुछ अलग नजर आ रहा है। रवि लामिछाने की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) और पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार बालेन शाह के रोड शो में उमड़ी भीड़ ने परंपरागत राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।

भारत सीमा से सटे कपिलवस्तु जिला और रूपन्देही जिला में हुए इन रोड शो में भारी जनसमर्थन देखने को मिला। दोनों नेताओं के कार्यक्रम अलग-अलग समय पर हुए, लेकिन भीड़ का उत्साह लगभग समान रहा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि तराई क्षेत्र की राजनीति किसी नए मोड़ की ओर बढ़ रही है।

तराई: परंपरागत दलों का गढ़, अब नई चुनौती

नेपाल के तराई क्षेत्र में लगभग 23 जिले आते हैं और यहां की आबादी करीब 90 लाख मानी जाती है। यह इलाका लंबे समय से नेपाली कांग्रेस, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) और विभिन्न मधेशी दलों का मजबूत आधार रहा है।

हिंदू बहुल इस क्षेत्र में सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भारत से गहरा जुड़ाव महसूस किया जाता है। ऐसे में मतदाताओं का परंपरागत दलों से हटकर नई पार्टी की ओर झुकाव राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका रहा है।

लोकप्रियता और विवाद: रवि लामिछाने फैक्टर

पूर्व गृहमंत्री रह चुके रवि लामिछाने अपनी टीवी एंकरिंग और जनसरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों के कारण व्यापक लोकप्रियता रखते हैं। हालांकि वे अमेरिकी नागरिकता विवाद और धोखाधड़ी के एक मामले में जेल जाने को लेकर सुर्खियों में भी रहे।

अपने संबोधनों में वे धर्म आधारित राजनीति से दूरी बनाने की अपील करते नजर आते हैं। इससे शहरी और युवा मतदाताओं के बीच उनकी छवि एक वैकल्पिक नेतृत्व के रूप में उभर रही है।

बालेन शाह की शैली और प्रतीकात्मक संदेश

काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह अपने रोड शो के दौरान स्थानीय मंदिरों में दर्शन करते दिखाई दिए। रूपन्देही और कपिलवस्तु में उन्होंने प्रसिद्ध मरचाई माता मंदिर से अपना कार्यक्रम शुरू किया।

उनका आत्मविश्वास और समर्थकों का उत्साह ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो चुनावी परिणाम उनके पक्ष में तय हों। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रैलियों की भीड़ हमेशा चुनावी जीत की गारंटी नहीं होती।

क्या बदलेगा चुनावी गणित?

राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि इस बार तराई में समीकरण बदल सकते हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को कम आंकना वास्तविकता से आंखें मूंदने जैसा होगा।

हालांकि अंतिम फैसला मतपेटियों में बंद है। अक्सर मतदान के दिन मतदाताओं का रुझान बदल जाता है और नतीजे चौंकाने वाले आते हैं। फिर भी इस बार तराई में दिख रही हलचल पारंपरिक दलों के लिए चेतावनी संकेत जरूर है।

नेपाल के तराई क्षेत्र में उभरता जनसमर्थन यह संकेत दे रहा है कि मतदाता विकल्प तलाश रहे हैं। क्या यह बदलाव सत्ता परिवर्तन का कारण बनेगा या पारंपरिक दल वापसी करेंगे—यह आने वाला चुनाव तय करेगा। फिलहाल इतना तय है कि तराई की राजनीति नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है।

उसका बाजार में समेकित शिक्षा प्रशिक्षण संपन्न, दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर

उसका बाजार में समेकित शिक्षा पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न
उसका बाजार : समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत संचालित समेकित शिक्षा योजना के तहत शिक्षकों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम मंगलवार को संपन्न हो गया। यह प्रशिक्षण ब्लॉक संसाधन केंद्र, उसका बाजार में आयोजित किया गया।


समापन सत्र को संबोधित करते हुए जिला समन्वयक (समेकित शिक्षा) करुणापति त्रिपाठी ने कहा कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना तथा शिक्षकों को समावेशी शिक्षा के लिए सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि समावेशी वातावरण तैयार कर ही दिव्यांग बच्चों के शैक्षिक विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि समावेशी शिक्षा का मूल उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को सामान्य बच्चों के साथ जोड़ते हुए उनकी विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए शिक्षकों में संवेदनशीलता, धैर्य और विशेष शिक्षण तकनीकों का समुचित प्रयोग आवश्यक है।
प्रशिक्षण के दौरान स्पेशल एजुकेटर प्रद्युमन सिंह, अखिलेश्वर मिश्र, अजय भारती, अरुण कुमार भारती तथा सुनील यादव ने सहायक अध्यापकों को दिव्यांग बच्चों के शिक्षण से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं। प्रशिक्षकों ने बच्चों की सीखने की क्षमता के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों, व्यवहारिक गतिविधियों और कक्षा में समावेशी माहौल तैयार करने के व्यावहारिक उपायों पर विशेष जोर दिया।
जिला समन्वयक आशीष मिश्र ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी शैक्षिक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए ऐसे प्रशिक्षण शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि सहायक अध्यापकों को व्यवहारिक सहयोग एवं समग्र विकास से संबंधित विषयों पर व्यापक जानकारी मिल सके।

भवानीगंज पुलिस ने 25 हजार के इनामिया बदमाश को गिरफ्तार कर जेल भेजा

सिद्धार्थनगर। डॉ.अभिषेक महाजन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर के आदेशा के क्रम में अपराध एवं अपराधियो के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियान के तहत, प्रशान्त कुमार प्रसाद अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर के कुशल पर्यवेक्षण व बृजेश कुमार वर्मा क्षेत्राधिकारी डुमरियागजं के निर्देशन में बृजेश सिंह थानाध्यक्ष भवानीगंज व मय टीम द्वारा थाना स्थानीय पर पंजीकृत मु0अ0सं0 09/2026 धारा 2(ख)(17) व 3(1) यू0पी0 गैंगेस्टर एक्ट-1986 से सम्बन्धित ₹25,000/- का इनामिया वांछित अभियुक्त को दिनांक 16/17.02.2026 की रात्रि को सरयू नहर पुल बिथरिया के पास से गिरफ्तार कर आवश्यक विधिक कार्यवाही पूर्ण कर माननीय न्यायालय भेजा गया ।

*गिरफ्तार अभियुक्त का विवरणः-*

01.रफीउल्लाह कुरैशी उर्फ अतीकुल्लाह कुरैशी पुत्र कल्लू कुरैशी निवासी ग्राम जबजौआ थाना डुमरियागंज जनपद सिद्धार्थनगर ।

गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम का विवरण-

1.बृजेश सिंह थानाध्यक्ष भवानीगंज जनपद सिद्धार्थनगर ।

2.उ0नि0 राजेन्द्र प्रसाद थाना भवानीगंज जनपद सिद्धार्थनगर ।

3.हे0का0 विजय गुप्ता थाना भवानीगंज जनपद सिद्धार्थनगर ।

4.का0 सिद्धार्थ सिंह, का0 अनीत वर्मा थाना भवानीगंज जनपद सिद्धार्थनगर ।

मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान- अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कर्मियों का मानदेय बढ़ेगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बजट सत्र में विधान परिषद को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बजट में अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय वृद्धि की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित कर्मियों का मानदेय जल्द ही बढ़ाया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू करने की घोषणा करते हुए बताया कि यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगी।

बजट सत्र में कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार प्रदेश के शिक्षा और पोषण से जुड़े कर्मचारियों के योगदान को भली-भांति समझती है। उन्होंने कहा कि अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सरकार ने बजट में इनके मानदेय बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रावधान कर दिए हैं, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

1 अप्रैल से लागू होगी कैशलेस व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू की जा रही है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगी। इस कदम का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों को सुविधाजनक भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराना है।

सरकार का दावा है कि इससे भुगतान प्रक्रिया तेज और सुगम होगी।

उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ ने जताया आभार

इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ के अध्यक्ष विक्रम सिंह ने सरकार और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, “हमारा 25,000 अनुदेशकों का परिवार सरकार का धन्यवाद ज्ञापित करता है। मुख्यमंत्री जी ने हमारे लंबे समय से लंबित मुद्दे को गंभीरता से लिया है। यह निर्णय अनुदेशक परिवार के लिए राहत भरा है।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा मानदेय वृद्धि का निर्णय प्रदेश के शिक्षा तंत्र को और सशक्त बनाएगा।

शिक्षा और पोषण व्यवस्था को मिलेगा मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि मानदेय वृद्धि से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और शिक्षा तथा आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

प्रदेश में बड़ी संख्या में अनुदेशक, शिक्षामित्र और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यह फैसला व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

दबिश से लौट रही पुलिस की स्कॉर्पियो दुर्घटनाग्रस्त, दारोगा की हुई मौत; कई घायल

गोरखपुर। महराजगंज से दबिश देकर लौट रही गोरखपुर पुलिस की टीम की स्कॉर्पियो श्यामदेउरवा क्षेत्र में दर्दनाक हादसे का शिकार हो गई। वाहन अनियंत्रित होकर पहले डिवाइडर से टकराया और फिर सड़क किनारे पेड़ से जा भिड़ा। इस दुर्घटना में दारोगा संतोष कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एसएसआई रमेश चंद्र कुशवाहा, महिला दारोगा गीता समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस टीम महराजगंज में एक मामले में दबिश देकर वापस गोरखपुर लौट रही थी। देर रात श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र में अचानक वाहन अनियंत्रित हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कॉर्पियो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। आसपास के लोगों की सूचना पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल अस्पताल भिजवाया।

सभी घायलों का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, जहां उनकी हालत पर चिकित्सकों की निगरानी रखी जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल लिया।

पुलिस द्वारा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्राथमिक तौर पर वाहन के अनियंत्रित होने को हादसे की वजह माना जा रहा है। मृतक दारोगा के परिजनों को सूचना दे दी गई है और आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

घूसखोर पंडत:: विवादों से प्रचार पातीं फिल्में: अरविंद जयतिलक

अरविंद जयतिलक

(वरिष्ठ स्तंभकार)

फिल्मों का एक सुनियोजित रणनीति के तहत विवादों में परोसना और फिर उस पर वितंडा खड़ा करके प्रचार पाना अब कोई नयी बात नहीं रह गई है। दरअसल फिल्मकारों ने आस्था, भावना और मूल्यों के खिलाफ फिल्में बनाकर बेशुमार धन इकठ्ठा करने का एक चलन बना लिया है। भले ही इससे किसी जाति, धर्म आस्था और भावना को चोट क्यों न पहुंचती हो। ऐसी ही एक फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ भी रुपहले पर्दे पर चढ़ने को तैयार है जिसके टाईटल को लेकर वितंडा उठ खड़ा हुआ है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस फिल्म के टाईटल को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी है। खुद फिल्म निर्माता संघ (एफएमसी) ने इस फिल्म को लेकर निर्माता नीरज पांडेय को नोटिस जारी किया है और कहा है कि फिल्म निर्माता ने नियमों के अनुसार शीर्षक के लिए अनिवार्य अनुमति प्राप्त नहीं की है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि फिल्म निर्माता ने जानबुझकर फिल्म को विवादों की परिधि में लाकर प्रचार पाने के लिए यह सारा उपक्रम किया था। अब जब विवाद चरम पर पहुंच गया है और फिल्म भी खूब प्रचार पा ली है तो फिल्म निर्माता नीरज पांडेय और अभिनेता मनोज वाजपेई द्वारा सफाई दी जा रही है कि उनका मकसद किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था। वे अब विवादित प्रचार सामग्री को हटाने की भी दुहाई दे रहे हैं। लेकिन सच तो यह है कि फिल्म निर्माता ने अपनी फिल्म को विवादों के जरिए जितना प्रचार पाना चाहा था उतना पा लिया। उसका मकसद पूरा हुआ। अब सवाल यह है कि क्या ऐसे फिल्म निर्माताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी जो धन कमाने के निमित्त इस किस्म का घिनौने हथकंडा अपनाते हैं। कहना मुश्किल है। इसलिए कि इस तरह के हथकंडे बार-बार अपनाए जा रहे हैं। याद होगा गत वर्ष पहले ओम राउत निर्देशित फिल्म आदिपुरुष भी आई थी जिसमें अमर्यादित और फूहड़ संवादों और बेतुकी कल्पनाओं के जरिए भगवान श्रीराम और उनके भक्त हनुमान के अपमान के साथ-साथ महाकाव्य रामायण की प्रमाणिकता, ऐतिहासिकता, संदर्भ, गरिमा और आस्था से जमकर खिलवाड़ किया गया था। इसी तरह तमिल फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई ने अपनी फिल्म काली के पोस्टर में हिंदू देवी का रुप धरे महिला किरदार को सिगरेट पीते दिखाया था। इस किरदार के एक हाथ में एलजीबीटीक्यू समुदाय के 6 रंगे झंडे को भी दिखाया गया था। तब भी विरोध हुआ था लेकिन लीना मणिमेकलाई हिंदू संवेदनाओं को समझने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं दिखी। तब उन्होंने कहा था कि वह जीवित रहने तक निडर होकर अपनी आवाज का इस्तेमाल करती रहेंगी। विडंबना यह है कि तब भी कुछ सेलिब्रेटी राजनीतिक हस्तियां लीना मणिमेकलाई के समर्थन में आवाज बुलंद करती दिखी थी जैसा कि आज ‘घुसखोर पंडित’ टाईटल के समर्थन में खड़े दिख रहे हैं। मौंजू सवाल यह कि क्या नीरज पांडेय, ओम राउत और लीना मणिमेकलाई सरीखे फिल्म मेकर्स हिंदू जातियों, हिंदू धर्म, हिंदू आस्था की तरह अन्य धर्मों की जातियों, उनके आराध्यों और उन्हें असहज करने वाली भावनाओं को अपनी फिल्मों में अमर्यादित तरीके से दिखाने का साहस कर सकते हैं? शायद नहीं। तब फतवा जारी हो जाएगा और उन्हें जान बचाने के लाले पड़ जाएंगे। याद होगा गत वर्ष पहले देश के जाने-माने फिल्मकार संजय लीला भंसाली ने फिल्म ‘पद्मावती’ के जरिए रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच प्रेम संबंधों का निरुपण कर वितंडा खड़ा किया था। इसे लेकर देश में भारी बवाल हुआ था। मार्च 2015 में फिल्म ‘डर्टी पॉलिटिक्स’ भी विवादों से घिरी जब फिल्म का फर्स्टलुक जारी हुआ। इस पोस्टर में अभिनेत्री मल्लिका तीन रंगों वाले राष्ट्रीय ध्वजों में लिपटी नजर आयी। हैदराबाद उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर मल्लिका और सरकार को नोटिस भी जारी किया। जनवरी 2016 में हंसल मेहता की फिल्म ‘अलीगढ़’ में समलैंगिक शब्द के इस्तेमाल पर सेंसर बोर्ड ने ऐतराज जताया। उल्लेखनीय है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर श्रीनिवास रामचंद्र सीरस के जीवन से जुड़ी सत्य घटना पर आधारित इस फिल्म में मनोज वाजपेयी और राजकुमार राव ने प्रमुख भूमिका निभायी थी। अभी गत वर्ष पहले अनुराग कश्यप निर्देशित फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ विवादों के केंद्र में रहा। इस फिल्म का कथानक पंजाब में नशाखोरी के इर्द-गिर्द गढ़ा-बुना गया था। इसके कुछ दृश्यों और डॉयलाग को लेकर बवाल मचा। बेशक एक फिल्मकार को अधिकार है कि वह फिल्मों का निर्माण करे। लेकिन उसका उत्तरदायित्व भी है कि वह धर्म, संस्कृति और इतिहास को पढ़े-समझे और उसकी वास्तविकताओं एवं भावनाओं का ख्याल रखकर फिल्मों का निर्माण करे। उसे ध्यान रखना चाहिए कि फिल्मों के जरिए समाज के नैसर्गिक स्वभाव और आस्था पर बुरा असर न पड़े। यह उचित नहीं कि चंद पैसों के लालच में या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ लेकर हिंदू धर्म, संस्कृति और इतिहास पर हमला किया जाए। देखा जा रहा है कि विगत कई दशकों से भारत में हिंदू देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति को टारगेट कर फिल्में बनायी जा रही हैं। यह सोच न सिर्फ विघटनकारी और नफरतपूर्ण है बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता, धर्म, संस्कृति और इतिहास पर प्रहार भी है। दरअसल इसके दो मकसद हैं। एक, हिंदू धर्म को बदनाम करना और दूसरा विवादों के जरिए अकूत संपदा इकठ्ठा करना। विश्वरुपम, हैदर, एमएसजी, पीके, मद्रास कैफे, सिंघम, आरक्षण, माई नेम इज खान, जोधा-अकबर, वाटर, जो बोले सो निहाल और फायर इत्यादि फिल्में इसी तरह का उदाहरण हैं। फिल्मकारों ने यह धारणा पाल रखी है कि फिल्मों पर जितना अधिक बवाल होगा उनकी कमाई में उतना ही इजाफा होगा। बेशक एक स्वस्थ लोकतांत्रिक समाज में कहने-सुनने, लिखने-पढ़ने और दिखने-दिखाने की आजादी होनी चाहिए। विशेष रुप से कला के क्षेत्र में तो और भी अधिक। क्योंकि समाज में जो कुछ भी घटित होता है, उसे कला के जरिए पर्दे पर उकेरा जाता है। लेकिन कला और अभिव्यक्ति की आड़ लेकर अरबों कमाने की लालच में किसी धर्म और आस्था पर प्रहार कहां तक उचित है? एक वक्त था जब फिल्मों का कथानक समाज और राष्ट्र के जीवन में चेतना का संचार करता था। युवाओं को प्रेरणा देता था। आजादी की लड़ाई को धार देने से लेकर समाज के गुणसूत्र को बदलने-रचने में फिल्मों की अहम भूमिका रही है। आज भी कुछ फिल्में सामाजिक व राष्ट्रीय सरोकारों को उकेरती दिख जाती हैं। लेकिन अधिकांश फिल्में वास्तविकताओं से दूर अतिरंजित और फूहड़पन से लैस होती हैं। नतीजा उन्हें विवादों का विषय बनते देर नहीं लगती। इसमें किसी को आपत्ति नहीं कि फिल्मों का शीर्षक क्या हो अथवा उसका कथानक कैसा हो यह तय करने का अधिकार फिल्म के प्रोड्यूसर और निर्देशक का है। एक फिल्मकार को अधिकार और आजादी है कि वह ऐतिहासिक और धार्मिक कथानकों को फिल्मों के जरिए दुनिया के सामने लाए। लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं कि वह धार्मिकता, ऐतिहासिकता और प्रमाणिकता के साथ छेड़छाड़ कर आस्था लहूलुहान करे। अगर किसी फिल्म के शीर्षक, कथानक या डॉयलाग से समाज का कोई वर्ग आहत होता है तो इसकी जिम्मेदारी सेंसर बोर्ड की है कि वह इसे पास न करे। याद होगा दिसंबर 2015 में ‘क्या कूल हैं हम’ और ‘मस्तीजादे’ पर सेंसर बोर्ड ने कैंची चलायी थी। ‘क्या कूल हैं हम’ में 107 सीन प्रोड्यूसर ने, जबकि 32 सीन सेंसर बोर्ड ने काटे थे। इसी तरह ‘मस्तीजादे’ में 349 सीन प्रोड्यूसर ने जबकि 32 सीन सेंसर बोर्ड ने काटे थे। इसके बाद भी इन फिल्मों को ‘ए’ सर्टिफिकेट के साथ रिलीज की अनुमति दी गयी। नवंबर 2015 में जेम्स बांड की सीरिज की 24 वीं फिल्म ‘स्पेक्टर’ के एक दृश्य पर भी सेंसर बोर्ड ने कैंची चलायी गयी थी। सवाल लाजिमी है कि फिर किसी फिल्म का नाम ‘घुसखोर पंडित’ कैसे रख दिया गया। इस अनुचित और अविवेकपूर्ण टाईटल पर कैंची क्यों नहीं चलायी गई? उचित होगा कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड अथवा भारतीय सेंसर बोर्ड फिल्मों के अनुचित टाईटल, दृश्यों और अनर्गल संवादों पर तत्काल कैंची चलाए ताकि देश-समाज का माहौल विषाक्त न बने और न ही किसी की भावना को ठेस पहुंचे।

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