बलिया में विक्रम सिंह की हुंकार- अंतिम साथी के नियमितीकरण तक नहीं थमेगा संघर्ष
अनुदेशकों में भरा जोश, बोले—अंतिम साथी के नियमितीकरण तक नहीं थमेगा संघर्ष; एरियर और सम्मान की लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प
बलिया। परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन की ओर से बलिया की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित स्वागत समारोह में अनुदेशकों का उत्साह देखते ही बना। प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह के आगमन पर सैकड़ों अनुदेशकों ने जोरदार स्वागत और अभिनंदन किया। सभा में वर्षों से चल रहे संघर्ष, सुप्रीम कोर्ट की कानूनी लड़ाई, एरियर और नियमितीकरण को लेकर संगठन की आगामी रणनीति पर चर्चा हुई।
अनुदेशकों को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहाकि यह धरती वीरों की धरती है। उन्होंने चित्तू पांडेय और मंगल पांडे को याद करते हुए उनके संघर्षों को नमन किया। और बलिया को बागी बलिया कहा। संघर्ष को अनुदेशकों की सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि, मुश्किलें जितनी बड़ी होंगी, जीत उतनी ही मजबूत होगी। उन्होंने अनुदेशकों में जोश भरते हुए अपनी कही पंक्तियां दोहराईं—
“लोहा जितना तपता है,
उतनी ही ताकत भरता है।
सोने को जितनी आग लगे,
वो उतना प्रखर निखरता है।
हीरे पर जितनी धार लगे,
वो उतना खूब चमकता है।”
उन्होंने आगे कहा—
“मिट्टी का बर्तन पकता है,
तब धुन पर खूब खनकता है।
सूरज जैसा बनना है तो
सूरज जितना जलना होगा।
नदियों सा आदर पाना है तो
पर्वत छोड़ निकलना होगा।”
और फिर अनुदेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा—
“हम आदम के बेटे हैं, क्यों सोचें राह सरल होगा।
कुछ ज्यादा वक्त लगेगा, पर संघर्ष जरूर सफल होगा।
हर एक संकट का हल होगा,
वो आज नहीं तो कल होगा।”
“अंतिम अनुदेशक के नियमितीकरण तक नहीं बैठूंगा”
विक्रम सिंह ने कहा कि अनुदेशकों की लड़ाई किसी एक व्यक्ति या किसी एक जिले की लड़ाई नहीं है। यह हजारों अनुदेशक परिवारों के अधिकार, सम्मान और भविष्य से जुड़ा संघर्ष है। उन्होंने दोहराया कि “जब तक उत्तर प्रदेश के अंतिम अनुदेशक को नियमित नहीं करा दूंगा, तब तक न खुद चैन से बैठूंगा और न किसी को बैठने दूंगा।”
उन्होंने कहा कि वर्षों के संघर्ष के बाद अनुदेशकों के मानदेय को ₹17 हजार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। अब संगठन का फोकस एरियर और नियमितीकरण पर है।
एरियर के साथ नियमितीकरण पर नजर
संगठन की ओर से कहा गया कि करीब नौ वर्षों से चले आ रहे संघर्ष के बाद अब लड़ाई निर्णायक चरण में है। संगठन का दावा है कि अनुदेशकों के करीब ₹9 लाख तक के एरियर का मुद्दा भी लगातार उठाया जा रहा है। एरियर की वास्तविक राशि संबंधित आदेश और पात्रता के अनुसार निर्धारित होगी।
विक्रम सिंह पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि अनुदेशकों को अपने ही पद पर नियमितीकरण दिलाना संगठन का प्रमुख लक्ष्य है। उनका कहना है कि न्यायालय के साथ शासन और प्रशासन के स्तर पर भी प्रयास जारी हैं।
सुप्रीम कोर्ट की लड़ाई में एक-एक रुपये का योगदान
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अनुदेशकों के सहयोग से सुप्रीम कोर्ट में मजबूत कानूनी पक्ष रखने का प्रयास किया गया। संगठन ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं पी.एस. पटवालिया और आर.के. सिंह के माध्यम से अपनी बात न्यायालय के समक्ष रखी है।
उन्होंने अनुदेशकों से अपील की कि किसी भी अफवाह पर भरोसा करने के बजाय अदालत की कार्यवाही और आदेश को समझकर ही निष्कर्ष निकालें। उनका कहना है कि संगठन की असली ताकत हजारों अनुदेशकों की एकजुटता है।
बलिया से एकजुटता का संदेश
सभा में वक्ताओं ने कहा कि छोटे-छोटे मतभेदों से ऊपर उठकर अनुदेशक हित में एकजुट रहना जरूरी है। कार्यक्रम में प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अभिषेक राय, प्रदेश सचिव वारिश खान, सिद्धार्थनगर से सत्यपाल सिंह कौशिक, अमित बहादुर सिंह, दीक्षा तिवारी, पुष्पा शर्मा, सरदार वर्मा, अरुण पांडेय समेत अन्य पदाधिकारी एवं अनुदेशक साथी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का आयोजन बलिया जिलाध्यक्ष शमशाद खान एवं उनकी टीम के नेतृत्व में किया गया। सैकड़ों अनुदेशकों की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में संघर्ष जारी रखने और संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।
बलिया की सभा से विक्रम सिंह का संदेश साफ था—राह कठिन हो सकती है, समय लग सकता है, लेकिन संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे। लक्ष्य एरियर, सम्मान और नियमितीकरण है और इसके लिए लड़ाई जारी रहेगी।
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सत्यपाल सिंह कौशिक को कंटेंट लेखन, स्क्रिप्ट लेखन का लंबा अनुभव है। वर्तमान में कौशिक जी FT NEWS DIGITAL में डिजिटल मीडिया सह- संपादक के पद पर कार्यरत हैं।
