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सुप्रीम कोर्ट से अनुदेशकों को बड़ी राहत: यूपी सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज, एरियर पर फैसला बरकरार

लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों के लिए आज एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल पुनर्विचार याचिका (Review Petition) को खारिज कर दिया है, जिससे 4 फरवरी को सुनाया गया ऐतिहासिक निर्णय यथावत बना हुआ है।

गौरतलब है कि 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अनुदेशकों के 17000 रुपए मानदेय, लगभग 9 वर्षों के एरियर, नियमितीकरण तथा अन्य सेवा संबंधी लाभों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। 17000 तो सरकार ने दे दिया लेकिन एरियर के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया है।

इस निर्णय के बाद प्रदेशभर के हजारों अनुदेशकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। विभिन्न जिलों में अनुदेशकों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह का बयान

अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा—

“हम सर्वोच्च न्यायालय का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं, जिसने न्याय और संविधान की भावना के अनुरूप अनुदेशकों के अधिकारों की रक्षा की है। सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज होना हजारों अनुदेशकों के संघर्ष की बड़ी जीत है। अब हम प्रदेश सरकार से अपेक्षा करते हैं कि वह बिना किसी विलंब के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करे और सभी पात्र अनुदेशकों  9 वर्षों का एरियर, नियमितीकरण तथा न्यायालय द्वारा निर्धारित अन्य सभी लाभ शीघ्र उपलब्ध कराए।”

उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल आर्थिक लाभ का विषय नहीं, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे अनुदेशकों के सम्मान और अधिकारों की भी जीत है।

अब सरकार पर बढ़ा अनुपालन का दबाव

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुनर्विचार याचिका खारिज किए जाने के बाद अब प्रदेश सरकार पर न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने का दबाव बढ़ गया है। प्रदेशभर के अनुदेशक अब आदेश के क्रियान्वयन और बकाया भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।

Big Breaking News: यूपी में अब शिक्षामित्र को मिलेंगे 18 हजार तो अनुदेशकों को 17 हजार..योगी सरकार की बड़ी घोषणा

लखनऊ। विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज एक बड़ी घोषणा कर दी। उन्होंने सदन को बताया कि, अब से शिक्षामित्रों को 18 हजार तो अनुदेशकों को 17000 रुपए का मानदेय मिलेगा।

2 दिन पहले बोले थे मुख्यमंत्री

अभी 2 दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधान परिषद में बोलते हुए कहे थे कि, हम जल्द ही अनुदेशक, शिक्षामित्र का मानदेय बढ़ाएंगे।

अब इसकी पुष्टि उन्होंने खुद विधान सभा को संबोधित करते हुए की है।

सुप्रीम कोर्ट में अनुदेशकों की जीत पर खुशी की लहर..प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि…

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुदेशक शिक्षकों का मानदेय ₹17,000 प्रतिमाह किए जाने के न्यायपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय के बाद प्रदेश भर के अनुदेशक शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई। वर्षों से चल रहे संघर्ष, धरना-प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले को शिक्षकों ने अपने सम्मान और अधिकार की जीत बताया है।

वर्षों के संघर्ष का मिला परिणाम: विक्रम सिंह 

परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि, “यह फैसला अनुदेशक शिक्षकों के धैर्य, एकजुटता और निरंतर संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका ने शिक्षा से जुड़े हजारों परिवारों को राहत दी है।”

सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

विक्रम सिंह ने कहा कि, “यह सिर्फ मानदेय वृद्धि नहीं बल्कि सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है।” 

“यह निर्णय अनुदेशक शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला है और इससे शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।”

बेसिक शिक्षा विभाग में भी खुशी का माहौल

प्रदेश के कई जनपदों के बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और अनुदेशक शिक्षकों ने भी मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की। विद्यालयों में इस फैसले को लेकर उत्साह का माहौल देखने को मिला।

कैशलैस इलाज मिलने पर अनुदेशकों में खुशी की लहर..सिद्धार्थनगर के अनुदेशकों ने सरकार का जताया आभार

सिद्धार्थनगर: जनपद के अनुदेशकों में उस समय उत्साह की लहर दौड़ गई जब उन्हें कैशलैस चिकित्सा सुविधा प्रदान किए जाने की घोषणा पर अमल शुरू हुआ। लंबे समय से स्वास्थ्य सुरक्षा की मांग कर रहे अनुदेशकों ने सरकार के इस निर्णय को ऐतिहासिक, राहतभरा और मानवीय बताया।

जिलाध्यक्ष अनिल पांडेय ने कहा कि,

“अनुदेशकों की स्वास्थ्य संबंधी चिंता दूर होने से वे अब पूरी ऊर्जा के साथ विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में योगदान दे सकेंगे। यह कदम शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगा क्योंकि सुरक्षित और निश्चिंत शिक्षक ही बेहतर शिक्षा दे सकते हैं।”

जिलाध्यक्ष ने कहा कि,” यह फैसला सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि सम्मान का प्रतीक है। इससे यह संदेश जाता है कि सरकार जमीनी स्तर पर कार्यरत शिक्षा कर्मियों के हितों के प्रति गंभीर है।”

प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने-

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह तथा एमएलसी श्रीचंद शर्मा का आभार जताते हुए कहाकि, “सरकार की संवेदनशील सोच के कारण ही यह सुविधा संभव हो पाई है, जिससे हजारों अनुदेशक परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।”

 

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