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“गिरे आम के पेड़ की कटान-बिक्री का आरोप, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
  1. वन विभाग पर उठे सवाल: गिरे आम के पेड़ की कथित कटान-बिक्री की शिकायत, जांच की मांग
    महादेवा नानकार में आंधी से गिरे पेड़ के निस्तारण को लेकर विवाद, जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज
    सिद्धार्थनगर, संवाददाता। नौगढ़ वन रेंज के महादेवा नानकार क्षेत्र में आंधी-तूफान के दौरान गिरे एक आम के पेड़ के निस्तारण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले में एक स्थानीय निवासी ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि संरक्षित वन भूमि के निकट स्थित उक्त पेड़ को बिना निर्धारित प्रक्रिया और वैध अनुमति के कटवाकर बेच दिया गया। शिकायत फिलहाल संबंधित विभाग के स्तर पर लंबित बताई जा रही है।

 

जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था।

शिकायत में क्या कहा गया है?
शिकायतकर्ता का दावा है कि महादेवा नानकार क्षेत्र में आंधी से गिरा आम का पेड़ कई दिनों तक मौके पर पड़ा रहा। बाद में उसे काटकर हटाया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पेड़ के निस्तारण में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। शिकायत में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
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जांच में सामने आ सकते हैं ये सवाल
क्या पेड़ के निस्तारण की विधिवत अनुमति ली गई थी?
क्या विभागीय अभिलेखों में इसकी प्रविष्टि दर्ज है?
पेड़ कटान और हटाने की प्रक्रिया किसके आदेश पर हुई?
क्या निस्तारण नियमानुसार किया गया?
शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है?

महादेवा नानकार क्षेत्र में स्थित एक आम का पेड़ हाल ही में आए आंधी-तूफान में गिर गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार पेड़ संरक्षित वन क्षेत्र के निकट स्थित था। जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बाद में उक्त पेड़ को काटकर हटाया गया तथा उसकी बिक्री कर दी गई।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में पूरे प्रकरण की जांच कर संबंधित अभिलेखों और अनुमति संबंधी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी संपत्ति के निस्तारण संबंधी नियमों के उल्लंघन का मामला हो सकता है।
उधर, समाचार लिखे जाने तक वन विभाग अथवा संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी थी। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
मामला अब जांच के दायरे में है। जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत लंबित होने के कारण क्षेत्र के लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और विभागीय जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
(अस्वीकरण : यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराए गए आरोपों एवं उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है। समाचार पत्र/चैनल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

महादेवा नानकार का मामला, जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज; जांच रिपोर्ट का इंतजार

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