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सिद्धार्थनगर की ‘रामकटोरी’ को मिलेगी नई उड़ान, जिले की मिठास को ब्रांड बनाने में जुटे स्थानीय कारोबारी

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ODOC में चयन के बाद बढ़ा उत्साह, युवा कंटेंट क्रिएटर्स ने संभाली डिजिटल प्रचार की कमान
सिद्धार्थनगर। काला नमक चावल के बाद अब सिद्धार्थनगर की पारंपरिक मिठाई ‘रामकटोरी’ जिले की नई पहचान बनने की राह पर है। एक जिला, एक उत्पाद (ODOC) योजना में रामकटोरी को स्थान मिलने के बाद स्थानीय मिष्ठान कारोबारियों में उत्साह बढ़ा है। इसी कड़ी में स्थानीय व्यवसायी कृष्णा कुमार गुप्ता की ओर से रामकटोरी को जिले की सीमाओं से बाहर प्रदेश और देश तक पहुंचाने की मुहिम शुरू की गई है।
इस पहल को डिजिटल मंच से गति देने के लिए रविवार, 9 अगस्त को सिद्धार्थनगर में क्रिएटर मीटअप आयोजित किया गया, जिसमें जिले के साथ-साथ आसपास के जनपदों से आए युवा कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का फोकस साफ था—स्थानीय मिठाई को स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय उसकी कहानी, स्वाद और पहचान को सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना।
लीड | परंपरा से ब्रांड तक का सफर
सिद्धार्थनगर की पहचान लंबे समय से काला नमक चावल से जुड़ी रही है। अब रामकटोरी को भी जिले की पहचान के रूप में स्थापित करने की कोशिश शुरू हुई है। ODOC में चयन के बाद स्थानीय कारोबारियों ने इसे अवसर के रूप में लिया है।
कृष्णा स्वीट्स से जुड़े कृष्णा कुमार गुप्ता के अनुसार, उनका प्रतिष्ठान लंबे समय से रामकटोरी तैयार कर रहा है और अब इसे बड़े स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इनसेट | 40 साल पुराना कारोबार, अब नई सोच
आयोजकों के मुताबिक कृष्णा कुमार गुप्ता करीब चार दशक से मिष्ठान कारोबार से जुड़े हैं। उनका कहना है कि रामकटोरी को सिर्फ एक मिठाई के रूप में नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर की स्थानीय पहचान के रूप में लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है।
इसी उद्देश्य से युवा डिजिटल क्रिएटर्स को कार्यक्रम में जोड़ा गया, ताकि स्थानीय उत्पाद की कहानी सोशल मीडिया के माध्यम से दूर-दराज के लोगों तक पहुंच सके।
क्रिएटर मीटअप में जुटे आसपास के जिलों के युवा
कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर के अलावा महाराजगंज, बलरामपुर, गोरखपुर और संत कबीर नगर समेत आसपास के जिलों से करीब दो दर्जन कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के शामिल होने की जानकारी दी गई।
क्रिएटर्स को रामकटोरी के इतिहास, इसकी विशेषताओं और तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद लाइव सेटअप के माध्यम से देशी घी से तैयार रामकटोरी का स्वाद भी चखाया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मिठाई खिलाना नहीं, बल्कि क्रिएटर्स को उत्पाद की पूरी कहानी से जोड़ना था, ताकि वे इसे अपनी डिजिटल सामग्री के माध्यम से लोगों तक पहुंचा सकें।
इनबॉक्स | रामकटोरी के कितने फ्लेवर?
आयोजक कृष्णा कुमार की ओर से दावा किया गया कि उनके प्रतिष्ठान पर देशी घी से तैयार रामकटोरी करीब 10 अलग-अलग फ्लेवर में उपलब्ध है।
उनका कहना है कि अलग-अलग स्वाद और उम्र के लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए इसके विभिन्न फ्लेवर तैयार किए गए हैं।
महिला क्रिएटर्स की भी रही भागीदारी
कार्यक्रम में महिला कंटेंट क्रिएटर्स की भी अच्छी भागीदारी रही। क्रिएटर्स ने स्थानीय उत्पादों को डिजिटल माध्यम से बढ़ावा देने की पहल को जिले के युवाओं के लिए उपयोगी बताया।
उनका कहना था कि किसी क्षेत्र की पहचान केवल बड़े उद्योगों से नहीं बनती, बल्कि स्थानीय उत्पाद, स्थानीय हुनर और उसकी कहानी भी उस क्षेत्र को अलग पहचान दिला सकती है।
कार्यक्रम में कई प्रमुख लोग हुए शामिल
कार्यक्रम में गोरखपुर से इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर डॉ. सैफ असलम और भोजपुरी गायिका आस्था त्रिपाठी के शामिल होने की जानकारी दी गई।
इसके अलावा समाजसेवी, व्यापारी और अन्य स्थानीय लोग भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज के प्रबंधक राजेश चंद्र शर्मा, टीम यशोभूमि के प्रबंधक संतोष श्रीवास्तव, व्यवसायी राजन कसौधन, रवि अग्रहरि, शुभम पैराडाइस के शुभम श्रीवास्तव और उज्जवल श्रीवास्तव, जावेद अख्तर, जेन कंप्यूटर के वामिक सर तथा श्री कृष्णा आयुर्वेदिक चिकित्सालय के वैद्य डॉ. सौरभ गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन पर शामिल कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित भी किया गया।
स्थानीय मिठाई से जिले की पहचान तक की कोशिश
रामकटोरी को ODOC में स्थान मिलने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इसे केवल सरकारी सूची तक सीमित न रहने देने की है। इसके लिए स्थानीय कारोबारियों के साथ-साथ डिजिटल क्रिएटर्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
यदि रामकटोरी की पारंपरिक पहचान, स्वाद, निर्माण प्रक्रिया और स्थानीय जुड़ाव को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाया जाता है तो यह सिद्धार्थनगर के लिए एक नए स्थानीय ब्रांड की संभावनाएं पैदा कर सकती है।
आयोजकों की उम्मीद है कि जिस तरह काला नमक चावल ने सिद्धार्थनगर को अलग पहचान दिलाई, उसी तरह रामकटोरी भी जिले की ‘मिठास’ को प्रदेश और देश तक पहुंचाने में कामयाब होगी।
सारांश | खबर की 5 बड़ी बातें
• सिद्धार्थनगर की पारंपरिक मिठाई रामकटोरी का ODOC में चयन।
• स्थानीय कारोबारियों में बढ़ा उत्साह।
• डिजिटल प्रचार के लिए क्रिएटर मीटअप आयोजित।
• आसपास के जिलों से करीब दो दर्जन कंटेंट क्रिएटर्स की भागीदारी।
• रामकटोरी को सिद्धार्थनगर की नई पहचान और बड़े ब्रांड के रूप में स्थापित करने की कोशिश।
फैक्ट बॉक्स | ODOC क्या है?
एक जिला, एक उत्पाद (One District One Product) पहल का उद्देश्य किसी क्षेत्र के विशिष्ट स्थानीय उत्पादों को पहचान, बाजार और व्यापक पहुंच दिलाने के लिए प्रोत्साहित करना है। सिद्धार्थनगर में काला नमक चावल के बाद रामकटोरी को लेकर भी स्थानीय स्तर पर इसी तरह की पहचान बनाने की कोशिश सामने आई है।
फोटो कैप्शन
सिद्धार्थनगर में आयोजित क्रिएटर मीटअप में स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स एवं अतिथियों के साथ आयोजक।
छोटी दमदार हेडिंग
रामकटोरी बनेगी सिद्धार्थनगर की नई पहचान!

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