सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में गूंजा ‘विकसित भारत’ का संकल्प, 37 में 28 स्वर्ण पदकों पर बेटियों का शानदार कब्ज़ा
बेटियों ने फिर लहराया परचम, 37 स्वर्ण पदकों में 28 छात्राओं ने बनाई शानदार पहचान

कपिलवस्तु की पावन धरती पर आयोजित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण का संकल्प दिलाते हुए कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि विकसित भारत की आधारशिला है। समारोह में छात्राओं का दबदबा रहा और 37 स्वर्ण पदकों में 28 पदक छात्राओं ने अपने नाम किए।

मुख्य बिंदु
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया 10वें दीक्षांत समारोह का शुभारंभ।
37 स्वर्ण पदक एवं प्रशस्ति-पत्र वितरित।
28 छात्राओं और 9 छात्रों को मिला स्वर्ण पदक।
पीएचडी शोधार्थियों को भी प्रदान की गई उपाधियां।
डिजिटल लाइब्रेरी एवं “किलकारी” बालगृह का लोकार्पण।
डीजी पोर्टल पर वर्ष 2026 की डिग्रियां और अंकपत्र ऑनलाइन अपलोड।
700 आंगनबाड़ी किट का वितरण।
एचपीवी टीकाकरण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों का सम्मान।

राज्यपाल ने भगवान गौतम बुद्ध की पावन भूमि कपिलवस्तु को नमन करते हुए विद्यार्थियों से नवाचार, संस्कार, जल संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही वर्ष 2047 के विकसित भारत के निर्माण स्तंभ हैं।

सिद्धार्थनगर, 29 जून।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु में सोमवार को आयोजित 10वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने समारोह का शुभारंभ मां शारदा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया तथा विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान गौतम बुद्ध की यह पावन धरती पूरे विश्व को शांति, करुणा और मानवता का संदेश देती रही है। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देना है। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, नवाचार अपनाने, पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन और सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आज का युवा केवल अपने भविष्य का निर्माता नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का भी निर्माणकर्ता है।
समारोह में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर मधुलिका अग्रवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच, शोध और नवाचार को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है और यहां से निकलने वाले विद्यार्थी देश-दुनिया में विश्वविद्यालय का नाम रोशन करेंगे।

विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों एवं शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि ज्ञान, अनुशासन और परिश्रम ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं।

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर कविता शाह ने विश्वविद्यालय की प्रगति का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय से 265 महाविद्यालय संबद्ध हैं। परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाया गया है तथा डिजिटल व्यवस्था, शोध, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, मिशन शक्ति और गुणवत्ता आधारित शिक्षा को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।
दीक्षांत समारोह में कुल 37 स्वर्ण पदक एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए, जिनमें 28 छात्राओं तथा 9 छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सम्मान प्राप्त किया। साथ ही पीएचडी शोधार्थियों को भी उपाधियां प्रदान की गईं।
इस अवसर पर डिजिटलाइज्ड लाइब्रेरी एवं नवनिर्मित ‘किलकारी’ बालगृह का लोकार्पण किया गया। वर्ष 2026 की डिग्रियों एवं अंकपत्रों को डीजी पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड करने की प्रक्रिया का शुभारंभ भी राज्यपाल द्वारा किया गया।

समारोह के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग की विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया गया। इसके अलावा 700 आंगनबाड़ी किटों का वितरण किया गया तथा एचपीवी टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं अन्य अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक माता प्रसाद पाण्डेय, विधायक श्यामधनी राही, विधायक विनय वर्मा, पूर्व विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन, मुख्य विकास अधिकारी, विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राचार्य, शिक्षक, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

राष्ट्रगान के साथ समारोह का गरिमामय समापन हुआ।

