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शोहरतगढ़ में महिलाओं के सम्मान में साड़ी वितरण कार्यक्रम, उमड़ी भीड़

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महिलाओं के सम्मान और सामाजिक सहभागिता का संदेश

उत्तर प्रदेश के जनपद सिद्धार्थनगर,शोहरतगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। मंच से महिलाओं को साड़ी एवं अन्य सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों, आयोजकों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी रही।


शोहरतगढ़ | विशेष रिपोर्ट

महिलाओं की बड़ी मौजूदगी के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में सम्मान स्वरूप साड़ी वितरण किया गया। कार्यक्रम स्थल पर महिलाओं के बैठने की व्यवस्था की गई थी और वितरण के दौरान लोगों में उत्साह नजर आया।


शोहरतगढ़ में महिलाओं के सम्मान को लेकर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम में महिलाओं को साड़ी तथा अन्य सामग्री वितरित की गई। मंच और कार्यक्रम स्थल पर मौजूद तस्वीरों में आयोजकों एवं स्थानीय लोगों की सक्रिय सहभागिता दिखाई दी।

पूरी खबर

शोहरतगढ़। आदर्श नगर पंचायत शोहरतगढ़ क्षेत्र में महिलाओं के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी रही। कार्यक्रम स्थल पर काफी संख्या में महिलाएं पहुंचीं, जहां उनके सम्मान के लिए साड़ी एवं अन्य सामग्री का वितरण किया गया।

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कार्यक्रम की तस्वीरों में महिलाओं की बड़ी उपस्थिति के साथ-साथ मंच पर अतिथियों और आयोजकों की मौजूदगी दिखाई दे रही है। वितरण के दौरान महिलाओं को पैकेट एवं अन्य सामग्री प्रदान की गई। कार्यक्रम स्थल पर स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं की भी सहभागिता रही।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के सम्मान, सामाजिक सहभागिता और आपसी जुड़ाव को लेकर संदेश दिया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने कार्यक्रम को महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना से जुड़ा आयोजन बताया।

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बैनर पर “महिलाओं के सम्मान में” कार्यक्रम का उल्लेख दिखाई देता है और उसमें श्याम जायसवाल सहित अन्य लोगों के नाम एवं तस्वीरें दर्ज हैं। उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर कार्यक्रम में महिलाओं को साड़ी वितरण किए जाने की पुष्टि होती है।

कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत भी हुई। FT News Digital के माइक्रोफोन के सामने कार्यक्रम से जुड़े लोगों ने अपनी बात रखी। इससे आयोजन के सामाजिक पक्ष और महिलाओं की भागीदारी को सामने लाने का प्रयास भी नजर आया।

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ग्राउंड रिपोर्ट की खास तस्वीर

कार्यक्रम में महिलाओं की भारी मौजूदगी और साड़ी वितरण की तस्वीरें आयोजन की व्यापक भागीदारी को दर्शाती हैं। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में कार्यक्रम में शामिल महिलाओं की आधिकारिक संख्या अथवा वितरण की कुल संख्या का कोई प्रमाणित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

सारांश

शोहरतगढ़ में महिलाओं के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं जुटीं। साड़ी एवं अन्य सामग्री का वितरण किया गया। कार्यक्रम की तस्वीरों में आयोजकों, स्थानीय लोगों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी दिखाई दी।

टिप्पणी

महिलाओं के सम्मान से जुड़े ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रम सामाजिक सहभागिता और सामुदायिक जुड़ाव का माध्यम बन सकते हैं। आयोजन से जुड़े किसी भी दावे या संख्या की पुष्टि संबंधित आयोजकों अथवा आधिकारिक रिकॉर्ड से किया जाना उचित होगा।

रिपोर्टर — कमलेश मिश्रा

तहसील शोहरतगढ़, जनपद सिद्धार्थनगर

FT News Digital

शोहरतगढ़ गौशाला विवाद: गोवंश ले जाने के आरोप पर सवाल, चेयरमैन प्रतिनिधि ने किया खंडन

FT NEWS DIGITAL | सिद्धार्थनगर, शोहरतगढ़


सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ में नगर पंचायत की गौशाला को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट, एक लिखित शिकायत और सामने आए जवाब ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नगर पंचायत द्वारा पकड़ी गई उसकी गाय को गौशाला में रखने के बाद उसे वापस नहीं किया गया और बाद में उसे दूसरी जगह ले जाने की आशंका जताई गई। सोशल मीडिया पर इसी मामले को लेकर गोवंश को बेचने तक के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि की ओर से इन दावों का खंडन किया गया है। ऐसे में पूरा मामला अब जांच और दस्तावेजी सत्यापन का विषय बन गया है।


| शिकायत में क्या कहा गया?

22 अगस्त 2026 को उपजिलाधिकारी शोहरतगढ़-नौगढ़ को संबोधित एक हस्तलिखित शिकायत में शिकायतकर्ता ने खुद को नगर पंचायत शोहरतगढ़ के वार्ड नंबर 10 का निवासी बताते हुए एक गाय को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत के अनुसार, 6 अगस्त 2026 को नगर पंचायत द्वारा गाय को पकड़कर गौशाला में बंद किया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि से संपर्क कर गाय वापस करने का अनुरोध किया, लेकिन उसके अनुसार उसे गाय वापस नहीं मिली।

शिकायत में आगे कुछ गंभीर आशंकाएं भी व्यक्त की गई हैं और प्रशासन से मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है।

यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि शिकायत में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता का पक्ष हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है।

इनबॉक्स | तस्वीर ने बढ़ाए सवाल

विवाद के बीच एक वाहन की तस्वीर सामने आई है, जिसमें कई गोवंश दिखाई दे रहे हैं। इसी तस्वीर को आधार बनाकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए कि आखिर गोवंश को वाहन में कहां और किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था?

लेकिन केवल तस्वीर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि गोवंश को बेचने या तस्करी के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था।

वाहन की पहचान, चालक, अनुमति, गौशाला रजिस्टर, गोवंश की संख्या और उनके स्थानांतरण का रिकॉर्ड—इन सभी की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

अध्यक्ष प्रतिनिधि का पक्ष भी सामने आया

मामले में नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लगाए गए गंभीर आरोपों का खंडन किया है।

यानी इस समय मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं—एक तरफ शिकायतकर्ता की शिकायत और सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप, जबकि दूसरी तरफ नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि का खंडन।

ऐसे में किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानना पत्रकारिता की दृष्टि से उचित नहीं होगा।

खोजी पड़ताल में सामने आया अहम तथ्य

शोहरतगढ़ की कान्हा गौशाला को लेकर पहले भी सार्वजनिक रूप से व्यवस्थाओं की जानकारी सामने आती रही है। एक प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार नगर पंचायत की ओर से गौशाला में गोवंश के लिए पंखे, चारा-पानी, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया था।

वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में शोहरतगढ़ के लिए कान्हा गौशाला एवं बेसहारा पशु आश्रय योजना के तहत वित्तीय स्वीकृति का उल्लेख मिलता है।

यही वजह है कि मौजूदा विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल केवल आरोप नहीं, बल्कि गौशाला के सरकारी रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान है।

अब जांच में खुलने चाहिए ये सवाल

1. 6 अगस्त को कितने गोवंश पकड़े गए थे?

2. उन्हें गौशाला में दाखिल करने का रिकॉर्ड क्या है?

3. शिकायतकर्ता जिस गाय को अपना बता रहा है, उसका गौशाला रजिस्टर में क्या विवरण है?

4. यदि किसी गोवंश को गौशाला से बाहर ले जाया गया तो किस आदेश के तहत?

5. संबंधित वाहन का नंबर क्या है और वाहन किसके नाम पर पंजीकृत है?

6. वाहन में कितने गोवंश थे और उन्हें कहां ले जाया गया?

7. गौशाला के स्टॉक रजिस्टर और मौके की संख्या में कोई अंतर तो नहीं?

8. शिकायतकर्ता के दावे और नगर पंचायत के जवाब में वास्तविक तथ्य क्या हैं?

सारांश

शोहरतगढ़ की गौशाला को लेकर मामला फिलहाल आरोप और खंडन के बीच है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से जांच की मांग की है, सोशल मीडिया पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं और नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि ने उनका खंडन किया है।

मामले की निष्पक्ष जांच में यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो स्थिति साफ हो जाएगी। वहीं यदि रिकॉर्ड की जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात—गोवंश को लेकर किसी भी गंभीर आरोप की पुष्टि केवल सोशल मीडिया पोस्ट या तस्वीर से नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड, मौके की जांच और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट से होनी चाहिए।

FT NEWS DIGITAL की टिप्पणी

गौशाला केवल एक सरकारी भवन नहीं, बल्कि गोवंश की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए यहां हर गोवंश का प्रवेश, उसकी संख्या, उपचार, स्थानांतरण और बाहर जाने का रिकॉर्ड पारदर्शी होना चाहिए।

अगर व्यवस्था सही है तो रिकॉर्ड सामने आने में किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

और अगर रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी है, तो जांच के बाद जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है।

हमारा सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि व्यवस्था से पारदर्शिता मांगना है।

आरोप अपनी जगह हैं, खंडन अपनी जगह—अब सच जांच के रिकॉर्ड से सामने आना चाहिए।

नोट — कानूनी रूप से सुरक्षित पत्रकारिता

इस खबर में किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी घोषित नहीं किया गया है। गोवंश की बिक्री, तस्करी अथवा अन्य अनियमितता से संबंधित बातें शिकायत/सोशल मीडिया में लगाए गए आरोप के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बिना नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का खंडन भी खबर में शामिल किया गया है।

 

अयोध्या में सादगी से सेवा तक—रामलला के दरबार में आस्था, कथा भवन समर्पण में संस्कार का संदेश

शोहरतगढ़/अयोध्या। प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में झारखंड से राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय मंत्री डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा के आगमन से लेकर रामलला की मंगला आरती और कथा भवन समर्पण तक का पूरा कार्यक्रम सादगी, श्रद्धा और सेवा की भावना से जुड़ा रहा। शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा ने अयोध्या रेलवे स्टेशन पर उनका आत्मीय स्वागत किया, लेकिन इस स्वागत में न दिखा कोई शक्ति प्रदर्शन, न भीड़ जुटाने की होड़।


स्वागत में तामझाम नहीं, संदेश बड़ा!

डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा के निर्देश पर स्वागत कार्यक्रम को सीमित और सादगीपूर्ण रखा गया। विधायक विनय वर्मा ने अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ, मालाओं और प्रभु श्रीराम का चित्र भेंट कर अभिनंदन किया। इस दौरान राष्ट्रसेवा को प्रचार से ऊपर रखने का संदेश भी सामने आया।

सुबह 4 बजे रामलला के दरबार में

अयोध्या प्रवास का सबसे भावपूर्ण क्षण तब आया, जब डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा के साथ विधायक विनय वर्मा एवं उनके सहयोगियों ने प्रातः चार बजे श्रीरामलला की मंगला आरती में शामिल होकर दर्शन-पूजन किया। देशवासियों और शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं मंगल की कामना की गई।

माता-पिता की स्मृति में कथा भवन समर्पित

अयोध्या प्रवास के दौरान डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा एवं रांची निवासी संतोष कुमार वर्मा ने अपने पूजनीय माता-पिता स्व. राम औतार एवं स्व. भगवंती देवी की स्मृति में निर्मित कथा भवन को श्री मुकुंद सेवा सदन, अयोध्या के श्री सीताराम जी को समर्पित किया।

यह समर्पण केवल एक भवन का लोकार्पण नहीं, बल्कि माता-पिता के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सेवा-भाव की भावपूर्ण अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया। उद्देश्य है कि यह भवन धर्म, अध्यात्म और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार का केंद्र बने तथा आने वाली पीढ़ियों को संस्कार और सेवा की प्रेरणा देता रहे।

टिप्पणी |


अयोध्या के इस पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी तस्वीर सियासी तामझाम नहीं, बल्कि सादगी और सेवा रही। स्वागत छोटा रखा गया, लेकिन संदेश बड़ा दिया गया—सम्मान दिखावे से नहीं, कार्य और संस्कार से मिलता है। रामलला के दरबार में प्रातःकालीन दर्शन और माता-पिता की स्मृति में कथा भवन समर्पण ने इस यात्रा को राजनीतिक कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर आस्था, संस्कृति और सामाजिक सेवा से जोड़ दिया।

रिपोर्टर | शोहरतगढ़–अयोध्या डेस्क

रिपोर्टर चैनल | जनहित में निर्भीक और जिम्मेदार पत्रकारिता

 

लखनऊ में 30 मिनट का खूनी सिलसिला: पत्नी, बहन की हत्या के बाद बैंककर्मी ने खुद को भी मारी गोली

 

एक जरूरी कानूनी सावधानी: ₹1.5 करोड़ की मांग को “संभावित जांच एंगल” के रूप में रखा गया है, हत्या का सिद्ध कारण नहीं। इसी तरह परिवार की ओर से लगाए गए घरेलू हिंसा आदि के आरोपों को आरोप के रूप में ही रखा गया है।

तलाक की सुनवाई के दो दिन बाद सनसनीखेज वारदात; पत्नी की बैंक के बाहर गोली मारकर हत्या, घर पहुंचकर बहन को मारी गोली, फिर खुद दी जान


पूरा मामला एक नजर में

स्थान: गोमतीनगर, लखनऊ

मुख्य मृतका: दिव्या मिश्रा, बैंक कर्मचारी

अन्य मृतक: दिव्या के पति मानस वाजपेयी और उसकी बहन शीबा

घटना: 20 अगस्त 2026

पुलिस के अनुसार: तीनों मौतें करीब 30 मिनट के भीतर

बरामदगी: तीन हथियार

विवाह: करीब 10 वर्ष पहले

अलग रह रहे थे: करीब 3 वर्ष से

तलाक: दिव्या ने पिछले वर्ष फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी

जांच के प्रमुख बिंदु: वैवाहिक विवाद, तलाक, मुआवजा/स्त्रीधन, हथियारों का स्रोत, CCTV और डिजिटल साक्ष्य


18 अगस्त की सुनवाई के बाद क्या बदला?

पुलिस जांच में सामने आए एक अहम एंगल के मुताबिक दिव्या और मानस के बीच तलाक की कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। पुलिस के अनुसार दिव्या ने पिछले वर्ष फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की थी और मुआवजे तथा सामान/स्त्रीधन की वापसी की मांग भी की थी।

ताजा रिपोर्टों में ₹1.5 करोड़ की कथित मुआवजा मांग को भी जांच के संभावित कारणों में शामिल किया गया है। हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और किसी एक वजह को अंतिम कारण नहीं माना गया है।


लखनऊ। गोमतीनगर की एक सामान्य दोपहर अचानक ऐसी सनसनी में बदल गई, जिसका अंत तीन जिंदगियों के खत्म होने के साथ हुआ। बैंक कर्मचारी मानस वाजपेयी पर आरोप है कि उसने अपनी अलग रह रही पत्नी दिव्या मिश्रा को उनके कार्यस्थल के बाहर गोली मारी। इसके बाद वह अपने घर पहुंचा, जहां उसकी बहन शीबा की भी गोली लगने से मौत हुई और फिर मानस ने खुद को गोली मार ली।

पुलिस के मुताबिक पत्नी की हत्या से लेकर बहन और फिर खुद की मौत तक का घटनाक्रम करीब 30 मिनट में पूरा हुआ। घटनास्थल और घर से तीन हथियार बरामद किए गए हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार कहां से आए, वारदात की योजना कब बनी और इसके पीछे वास्तविक वजह क्या थी।


गोमतीनगर के मनोज पांडेय चौराहे के पास स्थित निजी बैंक के बाहर 20 अगस्त की दोपहर दिव्या मिश्रा अपने काम पर थीं। पुलिस के मुताबिक करीब 12:15 बजे उनके पति मानस वाजपेयी वहां पहुंचे।

दिव्या बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के तौर पर काम करती थीं। दोनों के बीच कुछ देर बातचीत और कथित बहस हुई। इसके बाद पुलिस के अनुसार मानस ने हथियार निकालकर दिव्या पर गोली चला दी।

बैंक कर्मचारियों ने घायल दिव्या को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। प्रत्यक्षदर्शियों और CCTV फुटेज की मदद से पुलिस ने घटनाक्रम को जोड़ना शुरू किया।

बैंक से घर तक… और फिर दूसरी मौत

दिव्या को गोली मारने के बाद मानस वहां से अपने घर की ओर चला गया। उसका घर बैंक से करीब तीन किलोमीटर दूर हुसेड़िया क्रॉसिंग के आसपास बताया गया है।

पुलिस के मुताबिक घर पहुंचने के कुछ ही समय बाद उसकी बहन शीबा को भी गोली लगी। इसके बाद मानस ने खुद को गोली मार ली।

पुलिस के अनुसार तीनों मौतें लगभग 30 मिनट के भीतर हुईं। घटनास्थल से तीन हथियार बरामद होने की बात पुलिस ने कही है।

तीन हथियारों ने बढ़ाया जांच का दायरा

पुलिस को मानस के घर से दो पिस्टल और एक देसी .32 बोर का हथियार मिला है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये हथियार उसके पास कैसे पहुंचे।

पुलिस हथियारों की बैलिस्टिक जांच करा रही है और बरामद कारतूस तथा गोलियों को घटनास्थल से मिले साक्ष्यों से मिलाया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता कर रही हैं कि हथियार एक ही व्यक्ति से मिले या अलग-अलग स्रोतों से।

तलाक की लड़ाई बनी जांच का अहम हिस्सा

दिव्या और मानस की शादी को करीब दस साल हुए थे। पुलिस के अनुसार दोनों पिछले करीब तीन वर्षों से अलग रह रहे थे। दिव्या ने पिछले साल तलाक की याचिका दाखिल की थी। दंपती की कोई संतान नहीं थी।

पुलिस कमिश्नर के मुताबिक परिवार के कई सदस्यों से बातचीत में यह बात सामने आई कि दोनों के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा था।

ताजा रिपोर्टों में तलाक की कार्यवाही के दौरान मुआवजे की कथित ₹1.5 करोड़ मांग को भी जांच के संभावित एंगल के रूप में बताया गया है। लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यही वारदात की अंतिम वजह थी। पुलिस खुद सभी पहलुओं की जांच की बात कह रही है।

परिवार की ओर से घरेलू विवाद के गंभीर आरोप

दिव्या की बहन प्रज्ञा मिश्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी बहन के साथ कथित घरेलू हिंसा और लंबे समय से चल रहे वैवाहिक तनाव के आरोप लगाए हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि दिव्या अपने पति से अलग होकर तलाक लेना चाहती थीं और पहले भी उनके साथ मारपीट की घटनाएं हुई थीं।

ये आरोप परिवार की ओर से लगाए गए हैं। पुलिस ने इन सभी आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जाने की बात नहीं कही है। इसलिए इन्हें जांच का हिस्सा मानकर ही देखा जाना चाहिए।


ने भी खड़े किए सवाल

पुलिस एक कथित WhatsApp Status की भी जांच कर रही है, जिसे वारदात के बाद मानस से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार उस पोस्ट में पत्नी पर बेवफाई का आरोप लगाने और आगे खुद तथा बहन को मारने की बात कही गई थी।

हालांकि यह कथित पोस्ट मानस का पक्ष/दावा माना जाएगा; इसमें लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जा सकता। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।

CCTV और फोरेंसिक से खुलेगा अंतिम सच

पुलिस बैंक के आसपास लगे CCTV कैमरों, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल गतिविधियों और घटनाक्रम से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

फोरेंसिक जांच में दिव्या को सिर के पिछले हिस्से में गोली लगने की जानकारी सामने आई है। शीबा और मानस को भी गोली लगने की बात पुलिस जांच में सामने आई है। अब बैलिस्टिक जांच से यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि किस हथियार का इस्तेमाल किस घटना में हुआ।

30 मिनट में तीन मौतें… लेकिन सवाल अभी बाकी

यह मामला भले ही तीन मौतों के साथ खत्म हो गया हो, लेकिन पुलिस की जांच के सामने कई सवाल अभी भी खड़े हैं—

क्या वारदात अचानक हुई या पहले से योजना बनाई गई थी?

तीन हथियार मानस तक कैसे पहुंचे?

क्या तलाक और मुआवजे का विवाद घटना से जुड़ा था?

कथित WhatsApp Status की वास्तविकता क्या है?

बैंक और घर के बीच उसकी गतिविधियों का पूरा क्रम क्या था?

CCTV और मोबाइल डेटा से क्या नई जानकारी सामने आती है?

बहन शीबा को निशाना बनाने के पीछे क्या वजह थी?

पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

सारांश

लखनऊ के गोमतीनगर में 20 अगस्त को सामने आए सनसनीखेज मामले में बैंक कर्मचारी मानस वाजपेयी पर अपनी अलग रह रही पत्नी दिव्या मिश्रा को बैंक के बाहर गोली मारने का आरोप है। इसके बाद उसकी बहन शीबा की भी गोली लगने से मौत हुई और मानस ने खुद को गोली मार ली। पुलिस के मुताबिक करीब 30 मिनट के भीतर तीनों मौतें हुईं और घर से तीन हथियार बरामद किए गए। तलाक की कार्यवाही, कथित मुआवजा मांग, वैवाहिक विवाद, हथियारों का स्रोत, CCTV और डिजिटल साक्ष्य जांच का हिस्सा हैं। पुलिस ने कहा है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।

संपादकीय टिप्पणी

यह सिर्फ एक सनसनीखेज अपराध की कहानी नहीं है। इसके पीछे एक टूटते वैवाहिक रिश्ते, अदालत में चल रही कानूनी लड़ाई और तीन जिंदगियों के अचानक खत्म हो जाने की बेहद पीड़ादायक तस्वीर है।

लेकिन ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि भावना और तथ्य के बीच की सीमा न टूटे। पुलिस जांच में सामने आया हर तथ्य अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं होता। परिवार के आरोप अपनी जगह हैं, पुलिस की विवेचना अपनी जगह और अदालत में साबित होने वाले साक्ष्य अपनी जगह।

FT News Digital का उद्देश्य सनसनी फैलाना नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पाठकों तक पूरी तस्वीर पहुंचाना है। इस मामले में अंतिम सच जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

पेंशन की पुकार से गूंजा सिद्धार्थनगर, तिरंगे के साथ सड़कों पर उतरे शिक्षक-कर्मचारी

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NPS-UPS, निजीकरण और TET अनिवार्यता के मुद्दे पर अटेवा का शक्ति प्रदर्शन; कलेक्ट्रेट तक निकली OPS तिरंगा यात्रा


आंदोलन का संदेश

“एक मिशन—पुरानी पेंशन” के नारों और हाथों में तिरंगा लेकर शिक्षक-कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। आयोजकों के अनुसार जिलेभर से बड़ी संख्या में शिक्षक-कर्मचारी यात्रा में शामिल हुए।

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क्या है पूरा मामला?

अटेवा पुरानी पेंशन बचाओ मंच, सिद्धार्थनगर की ओर से NPS/UPS, सरकारी संस्थानों के निजीकरण और TET अनिवार्यता से जुड़े मुद्दों को लेकर OPS तिरंगा यात्रा निकाली गई। संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक यात्रा जय किसान इंटर कॉलेज, सकतपुर सनई से शुरू होकर जिला कलेक्ट्रेट तक पहुंची।


सिद्धार्थनगर। पुरानी पेंशन की बहाली की मांग ने एक बार फिर शिक्षक-कर्मचारियों को सड़क पर ला दिया। सिद्धार्थनगर में अटेवा और NMOPS के बैनर तले निकली OPS तिरंगा यात्रा में हाथों में तिरंगा, मांगों से जुड़े पोस्टर और पुरानी पेंशन के समर्थन में नारे दिखाई दिए। आयोजकों के मुताबिक जिलेभर से बड़ी संख्या में शिक्षक-कर्मचारी बाइक और अन्य माध्यमों से यात्रा में शामिल होकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे।

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पूरी खबर

पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर सिद्धार्थनगर में शिक्षक-कर्मचारियों का आंदोलनात्मक तेवर देखने को मिला। अटेवा पुरानी पेंशन बचाओ मंच की ओर से 21 अगस्त 2026 को OPS तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यात्रा का उद्देश्य NPS/UPS, निजीकरण और TET अनिवार्यता के मुद्दों पर अपनी मांगों और आपत्तियों को सरकार तक पहुंचाना था।

यात्रा जय किसान इंटर कॉलेज, सकतपुर सनई से शुरू हुई और बाइक रैली के रूप में जिला कलेक्ट्रेट तक पहुंची। यात्रा में शामिल लोगों के हाथों में तिरंगे और विभिन्न मांगों से जुड़े पोस्टर नजर आए। कलेक्ट्रेट परिसर के सामने भी शिक्षक-कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई।


पर संगठन का विरोध

अटेवा के प्रदेश संयुक्त मंत्री जनार्दन शुक्ल ने संगठन के पक्ष को रखते हुए कहा कि शिक्षक और कर्मचारी NPS तथा UPS को स्वीकार नहीं करते और पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सरकारी संस्थाओं के निजीकरण को लेकर भी संगठन की आपत्ति जाहिर की।

वहीं, अटेवा जिलाध्यक्ष बृजेश द्विवेदी ने कहा कि पुरानी पेंशन का मुद्दा किसी एक संगठन तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक यह शिक्षक-कर्मचारियों के हितों से जुड़ा विषय है और संगठन अपनी मांग को लोकतांत्रिक तरीके से आगे भी उठाता रहेगा।

निजीकरण पर भी उठाई आवाज

मंडल अध्यक्ष बलवंत चौधरी ने NPS और UPS को लेकर संगठन की नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अर्धसैनिक बलों समेत सरकारी कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए पुरानी पेंशन बहाली की मांग दोहराई।

तिरंगा यात्रा के दौरान प्रदर्शनकारियों के पोस्टरों पर पुरानी पेंशन और निजीकरण से जुड़े संदेश दिखाई दिए। इससे साफ नजर आया कि संगठन ने इस कार्यक्रम के जरिए अपनी मांगों को व्यापक स्तर पर सामने रखने की कोशिश की।

कलेक्ट्रेट तक पहुंचा आंदोलन

संगठन की ओर से जारी पत्र के मुताबिक यात्रा के बाद जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर संबंधित अधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाने की बात कही गई है। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों ने भाग लिया।

आयोजकों ने कार्यक्रम में हजारों शिक्षक-कर्मचारियों की भागीदारी का दावा किया है। उपलब्ध तस्वीरों में भी बड़ी संख्या में लोगों को तिरंगा लेकर यात्रा और प्रदर्शन में शामिल देखा जा सकता है।

संगठन की प्रमुख मांगें

पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग।

NPS और UPS को लेकर संगठन की आपत्ति।

सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक की मांग।

TET अनिवार्यता से जुड़े मुद्दे पर संगठन की आपत्ति।

शिक्षक-कर्मचारियों के हितों से जुड़े विषयों पर समाधान की मांग।

सारांश

सिद्धार्थनगर में OPS तिरंगा यात्रा के जरिए शिक्षक-कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन की मांग को फिर मजबूती से उठाया। NPS-UPS, निजीकरण और TET अनिवार्यता जैसे मुद्दों को लेकर संगठन ने अपना पक्ष रखा। यात्रा कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां ज्ञापन सौंपे जाने की जानकारी संगठन ने दी। अब इन मांगों पर शासन और प्रशासन की ओर से क्या रुख सामने आता है, इस पर नजर रहेगी।

संपादकीय टिप्पणी

पुरानी पेंशन का मुद्दा लंबे समय से सरकारी कर्मचारियों और शिक्षक संगठनों के बीच चर्चा का विषय रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और प्रशासन के सामने रखना संगठनों का अधिकार है। वहीं, नीति से जुड़े किसी भी मुद्दे पर अंतिम स्थिति संबंधित सरकारी निर्णय और आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट होगी। FT News Digital इस खबर में संगठन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति, पदाधिकारियों के बयानों और उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर तथ्य प्रस्तुत कर रहा है; किसी दावे को स्वतंत्र रूप से अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

 

नहर किनारे डंडा-चप्पल मिले, घंटों तलाश के बाद बुजुर्ग का शव बरामद

उत्तर प्रदेश सिद्धार्थ नगर 

सुबह घर से निकले 75 वर्षीय कनिकराम गौतम वापस नहीं लौटे; परिजनों की सूचना पर पुलिस और गोताखोरों ने शुरू किया तलाश अभियान


एक नजर में

स्थान: भवानीगंज क्षेत्र, सिद्धार्थनगर

उम्र: करीब 75 वर्ष

मामला: नहर में डूबने की आशंका

तलाशी: पुलिस और गोताखोरों की टीम

बरामदगी: नहर से शव मिला

आधिकारिक कारण: अंतिम स्थिति पुलिस जांच/चिकित्सकीय प्रक्रिया से स्पष्ट होगी


सिद्धार्थनगर। भवानीगंज क्षेत्र में एक बुजुर्ग के अचानक लापता होने के बाद शुरू हुई तलाश उस समय गमगीन हो गई, जब उनका शव नहर से बरामद हुआ। करीब 75 वर्षीय कनिकराम गौतम सुबह घर से निकले थे, लेकिन काफी समय बीतने के बाद वापस नहीं लौटे। परिजनों ने खोजबीन शुरू की तो नहर किनारे उनका डंडा, चप्पल और गमछा मिलने की बात सामने आई।

घर से निकले, फिर नहीं लौटे

जानकारी के मुताबिक भवानीगंज थाना क्षेत्र के सेखुइराज गांव निवासी कनिकराम गौतम सुबह करीब छह बजे घर से निकले थे। काफी समय गुजरने के बाद भी जब वह वापस नहीं आए तो परिवार के लोगों ने आसपास तलाश शुरू की।

तलाश के दौरान सेंदरी गांव के पास नहर के किनारे उनका डंडा, चप्पल और गमछा मिलने की बात सामने आई। सामान मिलने के बाद परिजनों को उनके नहर में गिरने की आशंका हुई और इसकी सूचना पुलिस को दी गई।

पुलिस पहुंची, शुरू हुआ तलाश अभियान

सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद नहर में तलाश के लिए गोताखोरों की मदद ली गई। कई घंटे तक चले खोज अभियान के बाद करीब साढ़े 11 बजे बुजुर्ग का शव डुमरियागंज थाना क्षेत्र में गौहनिया ताज के पास नहर से मिलने की जानकारी सामने आई।

शव बरामद होने के बाद परिवार में मातम छा गया। पुलिस ने मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

परिजनों ने बताई यह बात

परिजनों के अनुसार कनिकराम की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और इसी वजह से उनके अचानक घर से निकल जाने की आशंका जताई गई। हालांकि, घटना की वास्तविक परिस्थितियों और मृत्यु के कारण की आधिकारिक पुष्टि संबंधित पुलिस कार्रवाई तथा चिकित्सकीय जांच के बाद ही मानी जानी चाहिए।

सारांश

सुबह घर से निकले करीब 75 वर्षीय कनिकराम गौतम के वापस न लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की। नहर किनारे उनका डंडा, चप्पल और गमछा मिलने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और गोताखोरों की तलाश के बाद नहर से उनका शव बरामद हुआ। घटना के बाद पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू की है।


टिप्पणी

नहर किनारे मिले सामान ने बढ़ाई चिंता, तलाश ने बदल दिया पूरा घटनाक्रम

किसी बुजुर्ग का अचानक लापता होना परिवार के लिए चिंता का विषय बन जाता है। इस मामले में नहर किनारे सामान मिलने के बाद शुरू हुई तलाश ने घटना को गंभीर बना दिया और कुछ घंटे बाद शव बरामद होने से परिवार की आशंका सच साबित हुई।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे नहर में डूबने की आशंका से जुड़ा मामला माना जा रहा है। दुर्घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और मौत का आधिकारिक कारण क्या है, यह पुलिस जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा।

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सच और…

तिरंगे के साये में OPS की हुंकार, पुरानी पेंशन के लिए सड़क पर उतरे सफाई कर्मचारी

 

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विकास भवन से निकली OPS तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में कर्मचारी हुए शामिल, पुरानी पेंशन बहाली को बताया सामाजिक सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा

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एक नजर में

स्थान: विकास भवन, सिद्धार्थनगर

तारीख: 20 अगस्त 2026

आयोजन: उत्तर प्रदेश पंचायतीराज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ

मुख्य मांग: पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली

प्रमुख संदेश: शांतिपूर्ण तरीके से मांग सरकार तक पहुंचाने का दावा


सिद्धार्थनगर। पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग को लेकर ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने 20 अगस्त को सिद्धार्थनगर में OPS तिरंगा यात्रा निकाली। तिरंगे झंडों और OPS बहाली के संदेश वाली टोपियों के साथ कर्मचारी विकास भवन के आसपास एकत्र हुए और अपनी मांग को लेकर नारेबाजी की। यात्रा के दौरान “पुरानी पेंशन अधिकार हमारा है, लेकर के रहेंगे” जैसे संदेश प्रमुखता से दिखाई दिए।



विकास भवन से शुरू हुई इस यात्रा में पुरुषों के साथ महिला कर्मचारी भी शामिल नजर आए। हाथों में तिरंगा लेकर कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल किए जाने की मांग उठाई। कार्यक्रम के बैनर पर उत्तर प्रदेश पंचायतीराज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ का नाम दर्ज था।

आयोजकों के मुताबिक, यह कार्यक्रम कर्मचारियों की पुरानी पेंशन संबंधी मांग को शासन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि पेंशन उनके लिए केवल सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सहायता का विषय नहीं, बल्कि भविष्य की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।

यात्रा के दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम् और OPS बहाली के समर्थन में नारे लगाए गए। तस्वीरों में बड़ी संख्या में कर्मचारी तिरंगे के साथ एकजुट दिखाई दे रहे हैं।

“एक देश में दो व्यवस्था क्यों?”

कार्यक्रम के दौरान संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने अपने संबोधन में पुरानी पेंशन व्यवस्था को लेकर सरकार के समक्ष सवाल उठाए। उनका तर्क था कि लंबे समय तक सरकारी सेवा करने वाले कर्मचारियों को भी सेवानिवृत्ति के बाद मजबूत सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।

संगठन के जिला अध्यक्ष रणजीत कुमार गौतम ने आंदोलन के संबंध में कहा कि संगठन अपनी मांग को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाना चाहता है। उनके अनुसार, पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि मांग पर तत्काल निर्णय नहीं होता है तो संगठन के निर्देश के अनुसार आगे के शांतिपूर्ण कार्यक्रम किए जाएंगे।

तिरंगे के साथ दिखा आंदोलन का संदेश

इस यात्रा की खास बात यह रही कि कर्मचारियों ने अपने मांगपत्र के साथ तिरंगे को भी प्रमुखता दी। आयोजकों ने इसे देश और संविधान के प्रति सम्मान के साथ अपनी लोकतांत्रिक मांग रखने का माध्यम बताया।

यात्रा में शामिल कर्मचारियों के हाथों में तिरंगे के साथ OPS से जुड़े बैनर और संदेश दिखाई दिए। मौके पर कर्मचारियों में काफी उत्साह नजर आया।


| कर्मचारियों की मुख्य मांग

पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली।

आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था से उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद अधिक सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। हालांकि OPS को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी नीति, नियमों और सक्षम स्तर पर लिए जाने वाले फैसले पर निर्भर करेगा।


टिप्पणी

मुद्दा सिर्फ पेंशन का नहीं, भविष्य की सुरक्षा का भी है।

सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन को लेकर मांग लंबे समय से बहस का विषय रही है। एक तरफ कर्मचारी इसे अपने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और सम्मान से जोड़कर देखते हैं, वहीं दूसरी ओर किसी भी पेंशन व्यवस्था पर अंतिम निर्णय सरकार की नीति, वित्तीय स्थिति और लागू नियमों के आधार पर होता है।

सिद्धार्थनगर की OPS तिरंगा यात्रा ने फिलहाल इस बहस को एक बार फिर सड़क से लेकर शासन तक पहुंचाने का प्रयास किया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कर्मचारियों की इस मांग पर सरकार और संबंधित विभाग की ओर से आगे क्या रुख सामने आता है।

नोट: इस खबर में आंदोलनकारियों द्वारा व्यक्त मांग और दावों को उनके पक्ष के रूप में प्रस्तुत किया गया है। किसी व्यक्ति या संस्था पर कोई आरोप तथ्य के रूप में नहीं लगाया गया है।

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सच और कुछ नहीं

मिलेट्स से आधुनिक खेती तक: सिद्धार्थनगर में किसानों को नई तकनीक और बाजार की दिशा

सिद्धार्थनगर। किसानों की आय बढ़ाने, पौष्टिक मिलेट्स की खेती को प्रोत्साहित करने और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से कृषि भवन सभागार, सिद्धार्थनगर में दो दिवसीय कृषि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मिलेट्स बीज उत्पादन से जुड़े एफपीओ सदस्यों का प्रशिक्षण तथा सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन योजना के अंतर्गत किसान-वैज्ञानिक संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों, विषय वस्तु विशेषज्ञों, एफपीओ प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में किसानों की सहभागिता रही।IMG 20260820 WA1120

खबर

कृषि भवन सभागार, सिद्धार्थनगर में 20 अगस्त से 21 अगस्त 2026 तक आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को बदलती कृषि परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना और खेती को अधिक उपयोगी एवं बाजारोन्मुख बनाने की दिशा में जागरूक करना रहा।

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कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश श्री अन्न (मिलेट्स) पुनरोद्धार कार्यक्रम वर्ष 2026-27 के अंतर्गत मिलेट्स बीज उत्पादन से संबंधित एफपीओ सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में मिलेट्स उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण बीज, खेती की उपयोगी तकनीक तथा किसानों और एफपीओ के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर जानकारी दिए जाने पर जोर रहा।

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इसके साथ ही सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन योजना के अंतर्गत किसान-वैज्ञानिक संवाद भी आयोजित हुआ। संवाद का उद्देश्य किसानों को कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों से सीधे अपनी कृषि संबंधी जिज्ञासाओं और समस्याओं पर चर्चा का अवसर उपलब्ध कराना रहा।

कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी राजेश कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के प्रदीप कुमार एवं एसएन सिंह, विषय वस्तु विशेषज्ञ मसूर अली, मृदा परीक्षण प्रयोगशाला सिद्धार्थनगर के अध्यक्ष गौरव सिंह, बर्डपुर के वरुण नंदू, उसका के जनार्दन पाठक, लखनपारा के सुलेमान सहित अन्य संबंधित लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कृषकों के साथ-साथ एफपीओ सदस्यों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि से जुड़े विषयों पर जानकारी देने के साथ-साथ विशेषज्ञों के साथ संवाद और विचार-विमर्श का अवसर मिला। तस्वीरों में कार्यक्रम के दौरान अतिथियों एवं प्रतिभागियों के स्वागत तथा सम्मान का दृश्य भी दिखाई देता है।


मिलेट्स पर फोकस

श्री अन्न की ओर बढ़ता कदम

मिलेट्स यानी मोटे अनाज को लेकर जागरूकता बढ़ाने और इसके उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक खेती और बेहतर बाजार संपर्क मिलेट्स उत्पादन को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


एफपीओ की भूमिका

किसानों को बाजार से जोड़ने की कोशिश

एफपीओ यानी किसान उत्पादक संगठन किसानों को सामूहिक रूप से उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मिलेट्स बीज उत्पादन से जुड़े एफपीओ सदस्यों को प्रशिक्षण दिए जाने से किसानों को संगठित कृषि की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।


किसान-वैज्ञानिक संवाद

सवाल सीधे विशेषज्ञों से, समाधान तकनीक के साथ

किसान-वैज्ञानिक संवाद का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच प्रत्यक्ष संवाद का मंच उपलब्ध हुआ। खेती से जुड़ी स्थानीय जरूरतों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना और तकनीकी जानकारी को खेत तक पहुंचाना कृषि विस्तार व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है।

सारांश

सिद्धार्थनगर में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में मिलेट्स बीज उत्पादन से जुड़े एफपीओ सदस्यों को प्रशिक्षण और किसानों को कृषि वैज्ञानिकों से संवाद का अवसर मिला। कृषि विभाग की पहल से आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों और एफपीओ सदस्यों की सहभागिता रही।

संपादकीय टिप्पणी

खेती अब केवल परंपरागत अनुभव तक सीमित रहने का विषय नहीं है। बदलते मौसम, लागत, बाजार और तकनीक के दौर में किसान तक सही वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है। सिद्धार्थनगर में प्रशिक्षण और किसान-वैज्ञानिक संवाद जैसी पहलें तभी अधिक प्रभावी होंगी, जब इनसे मिली जानकारी वास्तविक रूप से खेतों तक पहुंचे और किसानों को उत्पादन के साथ-साथ बाजार से भी बेहतर जोड़ मिले। मिलेट्स को बढ़ावा देने की दिशा में प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज और एफपीओ आधारित सामूहिक प्रयास निश्चित रूप से

मिलेट्स से आधुनिक खेती तक: सिद्धार्थनगर में किसानों को नई तकनीक और बाजार की दिशा

सिद्धार्थनगर। किसानों की आय बढ़ाने, पौष्टिक मिलेट्स की खेती को प्रोत्साहित करने और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से कृषि भवन सभागार, सिद्धार्थनगर में दो दिवसीय कृषि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मिलेट्स बीज उत्पादन से जुड़े एफपीओ सदस्यों का प्रशिक्षण तथा सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन योजना के अंतर्गत किसान-वैज्ञानिक संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों, विषय वस्तु विशेषज्ञों, एफपीओ प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में किसानों की सहभागिता रही।IMG 20260820 WA1120

खबर

कृषि भवन सभागार, सिद्धार्थनगर में 20 अगस्त से 21 अगस्त 2026 तक आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को बदलती कृषि परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना और खेती को अधिक उपयोगी एवं बाजारोन्मुख बनाने की दिशा में जागरूक करना रहा।

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कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश श्री अन्न (मिलेट्स) पुनरोद्धार कार्यक्रम वर्ष 2026-27 के अंतर्गत मिलेट्स बीज उत्पादन से संबंधित एफपीओ सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में मिलेट्स उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण बीज, खेती की उपयोगी तकनीक तथा किसानों और एफपीओ के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर जानकारी दिए जाने पर जोर रहा।

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इसके साथ ही सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन योजना के अंतर्गत किसान-वैज्ञानिक संवाद भी आयोजित हुआ। संवाद का उद्देश्य किसानों को कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों से सीधे अपनी कृषि संबंधी जिज्ञासाओं और समस्याओं पर चर्चा का अवसर उपलब्ध कराना रहा।

कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी राजेश कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के प्रदीप कुमार एवं एसएन सिंह, विषय वस्तु विशेषज्ञ मसूर अली, मृदा परीक्षण प्रयोगशाला सिद्धार्थनगर के अध्यक्ष गौरव सिंह, बर्डपुर के वरुण नंदू, उसका के जनार्दन पाठक, लखनपारा के सुलेमान सहित अन्य संबंधित लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कृषकों के साथ-साथ एफपीओ सदस्यों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि से जुड़े विषयों पर जानकारी देने के साथ-साथ विशेषज्ञों के साथ संवाद और विचार-विमर्श का अवसर मिला। तस्वीरों में कार्यक्रम के दौरान अतिथियों एवं प्रतिभागियों के स्वागत तथा सम्मान का दृश्य भी दिखाई देता है।


मिलेट्स पर फोकस

श्री अन्न की ओर बढ़ता कदम

मिलेट्स यानी मोटे अनाज को लेकर जागरूकता बढ़ाने और इसके उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक खेती और बेहतर बाजार संपर्क मिलेट्स उत्पादन को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


एफपीओ की भूमिका

किसानों को बाजार से जोड़ने की कोशिश

एफपीओ यानी किसान उत्पादक संगठन किसानों को सामूहिक रूप से उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मिलेट्स बीज उत्पादन से जुड़े एफपीओ सदस्यों को प्रशिक्षण दिए जाने से किसानों को संगठित कृषि की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।


किसान-वैज्ञानिक संवाद

सवाल सीधे विशेषज्ञों से, समाधान तकनीक के साथ

किसान-वैज्ञानिक संवाद का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच प्रत्यक्ष संवाद का मंच उपलब्ध हुआ। खेती से जुड़ी स्थानीय जरूरतों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना और तकनीकी जानकारी को खेत तक पहुंचाना कृषि विस्तार व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है।

सारांश

सिद्धार्थनगर में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में मिलेट्स बीज उत्पादन से जुड़े एफपीओ सदस्यों को प्रशिक्षण और किसानों को कृषि वैज्ञानिकों से संवाद का अवसर मिला। कृषि विभाग की पहल से आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों और एफपीओ सदस्यों की सहभागिता रही।

संपादकीय टिप्पणी

खेती अब केवल परंपरागत अनुभव तक सीमित रहने का विषय नहीं है। बदलते मौसम, लागत, बाजार और तकनीक के दौर में किसान तक सही वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है। सिद्धार्थनगर में प्रशिक्षण और किसान-वैज्ञानिक संवाद जैसी पहलें तभी अधिक प्रभावी होंगी, जब इनसे मिली जानकारी वास्तविक रूप से खेतों तक पहुंचे और किसानों को उत्पादन के साथ-साथ बाजार से भी बेहतर जोड़ मिले। मिलेट्स को बढ़ावा देने की दिशा में प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज और एफपीओ आधारित सामूहिक प्रयास निश्चित रूप से

सुबह घर से निकले बुजुर्ग नहीं लौटे, नहर किनारे मिला सामान और फिर सामने आया दर्दनाक सच

उत्तर प्रदेश सिद्धार्थ नगर 

भवानीगं थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह शौच के लिए घर से निकले 75 वर्षीय कनिकराम गौतम की नहर में डूबने से मौत हो गई। काफी देर तक घर वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की। इसी दौरान नहर किनारे उनका डंडा, चप्पल और डिब्बा मिलने से डूबने की आशंका गहराई। सूचना पर पहुंची पुलिस और गोताखोरों की तलाश के बाद करीब पांच किलोमीटर दूर शव बरामद किया गया।

पूरी खबर

सिद्धार्थनगर। भवानीगंज थाना क्षेत्र के सेखुइताज गांव निवासी कनिकराम गौतम, पुत्र स्व. श्योराम, बुधवार सुबह करीब छह बजे घर से शौच के लिए निकले थे। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब वह वापस नहीं लौटे तो परिजनों को चिंता हुई और उनकी तलाश शुरू की गई।

तलाश के दौरान परिजनों को सेहरी गांव के पास नहर के किनारे कनिकराम का डंडा, चप्पल और डिब्बा मिला। सामान मिलने के बाद नहर में डूबने की आशंका जताई गई और घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के साथ गोताखोरों ने नहर में तलाश शुरू की। काफी प्रयास के बाद करीब साढ़े 11 बजे कनिकराम का शव डुमरियागंज थाना क्षेत्र के गौहनिया ताज के पास नहर से बरामद हुआ।

परिजनों के अनुसार कनिकराम मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जा रहे थे। घटना के बाद परिवार में मातम का माहौल है। पुलिस ने शव बरामद कर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना के वास्तविक कारणों और परिस्थितियों की पुष्टि संबंधित जांच के आधार पर ही हो सकेगी।

सारांश

सुबह घर से निकले 75 वर्षीय कनिकराम गौतम के वापस न लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की। नहर किनारे उनका सामान मिलने के बाद पुलिस और गोताखोरों ने तलाश की, जिसके बाद करीब पांच किलोमीटर दूर शव बरामद हुआ।

टिप्पणी

घटना एक बार फिर नहरों और खुले जलस्रोतों के आसपास बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर सावधानी की जरूरत सामने लाती है। हालांकि, घटना की परिस्थितियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

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