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कलम ऐसी चली कि सदियां बदल गईं, लेकिन शब्द आज भी जीवित हैं

तुलसीदास जयंती विशेष: रामचरितमानस के रचयिता ने भक्ति, लोकभाषा और साहित्य को दी ऐसी विरासत, जो आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा है


सदियां गुजर गईं, राज-पाट बदल गए, भाषाएं बदलीं, लेकिन एक कवि की लेखनी आज भी घर-घर में सुनाई देती है।

वह नाम है—गोस्वामी तुलसीदास।

आज, 19 अगस्त 2026, श्रावण शुक्ल सप्तमी के अवसर पर तुलसीदास जयंती मनाई जा रही है। परंपरा के अनुसार इसी तिथि को गोस्वामी तुलसीदास का जन्म माना जाता है।

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तुलसीदास केवल एक कवि नहीं थे। उनकी सबसे बड़ी ताकत यह थी कि उन्होंने रामकथा को ऐसी लोकभाषा में लिखा, जिसे आम आदमी समझ सके, गा सके और अपने जीवन से जोड़ सके।

उनकी रामचरितमानस ने भक्ति साहित्य के साथ-साथ भारतीय लोकजीवन, रामलीला, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं पर गहरा प्रभाव डाला।


आज क्यों याद किए जा रहे हैं तुलसीदास?

19 अगस्त — तुलसीदास जयंती

श्रावण शुक्ल सप्तमी को परंपरागत रूप से तुलसीदास जयंती मनाई जाती है।

प्रमुख रचनाएं:

रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली सहित अनेक कृतियां।

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जन्म को लेकर इतिहास में अलग-अलग मत

तुलसीदास के जन्म-वर्ष और जन्मस्थान को लेकर इतिहास और परंपराओं में मतभेद मिलते हैं। विभिन्न स्रोत अलग-अलग विवरण देते हैं। इसलिए उनके जन्म को लेकर किसी एक ईसवी वर्ष को निर्विवाद तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

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इतिहास संबंधी स्रोतों में 16वीं शताब्दी का समय प्रमुख रूप से सामने आता है और उनकी जन्म-जयंती श्रावण शुक्ल सप्तमी को मनाने की परंपरा है।

यही कारण है कि तुलसीदास जयंती का महत्व केवल एक जन्मदिन मनाने तक सीमित नहीं है। यह उस साहित्यिक विरासत को याद करने का अवसर है, जिसने भारतीय समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

वह रचना जिसने रामकथा को जन-जन की भाषा बना दिया

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तुलसीदास की सबसे प्रसिद्ध कृति है—रामचरितमानस।

यह अवधी भाषा में रचित महाकाव्यात्मक ग्रंथ है, जिसमें भगवान राम के जीवन और आदर्शों को केंद्र में रखा गया है। तुलसीदास ने संस्कृत की विद्वत परंपरा से बाहर निकलकर लोकभाषा में रामकथा को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाया।

यही उनकी लेखनी की सबसे बड़ी ताकत बनी।

भाषा सरल हुई, कथा जन-जन तक पहुंची और साहित्य लोकजीवन का हिस्सा बन गया।

लेखनी में भक्ति थी, लेकिन प्रभाव साहित्य से कहीं आगे गया

तुलसीदास की रचनाओं का प्रभाव केवल धार्मिक पाठ तक सीमित नहीं रहा।

रामचरितमानस और उनकी अन्य रचनाओं का प्रभाव लोकनाट्य, रामलीला, संगीत, लोकभाषा और भारतीय सांस्कृतिक जीवन में दिखाई देता है। तुलसीदास को रामभक्ति की परंपरा के प्रमुख कवियों में गिना जाता है।

उनकी लेखनी ने भगवान राम के चरित्र के माध्यम से मर्यादा, करुणा, कर्तव्य, त्याग और आदर्श जीवन जैसे मूल्यों को साहित्यिक अभिव्यक्ति दी।

हनुमान चालीसा से घर-घर तक पहुंचा नाम

तुलसीदास की पहचान केवल रामचरितमानस तक सीमित नहीं है।

हनुमान चालीसा भी उनकी सबसे लोकप्रिय रचनाओं में मानी जाती है। आज भी देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका पाठ व्यापक रूप से किया जाता है।

यही वजह है कि तुलसीदास का नाम केवल साहित्य के इतिहास में दर्ज नहीं है, बल्कि आज भी लोगों की दैनिक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में सुनाई देता है।

कहा जाता है, एक घटना ने बदल दी जीवन की दिशा

तुलसीदास के जीवन से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथाओं में उनकी पत्नी रत्नावली से जुड़ा प्रसंग आता है।

लोकप्रिय परंपरा के अनुसार, पत्नी के प्रति अत्यधिक आसक्ति को लेकर रत्नावली ने उन्हें भगवान राम की भक्ति की ओर प्रेरित करने वाली बात कही। इसके बाद तुलसीदास के जीवन की दिशा बदलने की कथा प्रचलित है।

हालांकि यह प्रसंग जीवनी-परंपरा और लोककथाओं में मिलता है, इसलिए इसे निर्विवाद ऐतिहासिक घटना की तरह नहीं बल्कि प्रचलित कथा के रूप में प्रस्तुत करना उचित है।

तुलसीदास की सबसे बड़ी ताकत—लोकभाषा

जिस समय धार्मिक और साहित्यिक ज्ञान का बड़ा हिस्सा संस्कृत जैसी शास्त्रीय भाषाओं में उपलब्ध था, उस दौर में तुलसीदास ने अवधी और ब्रज जैसी लोकभाषाओं में रचनाएं कीं।

यही वजह है कि उनकी कविता सिर्फ विद्वानों तक सीमित नहीं रही।

वह गांव तक पहुंची, शहर तक पहुंची, घर तक पहुंची और पीढ़ियों तक पहुंचती चली गई।

यही किसी रचनाकार की सबसे बड़ी सफलता होती है—कि उसका लिखा हुआ समय के साथ पुराना न हो, बल्कि हर पीढ़ी उसे अपने तरीके से पढ़े।


तुलसीदास को पढ़ना क्यों जरूरी है?

तुलसीदास को केवल धार्मिक दृष्टि से पढ़ना उनके साहित्यिक महत्व को छोटा कर देना होगा।

उनकी भाषा, कथ्य, चरित्र-निर्माण और लोकभाषा के प्रयोग ने हिंदी साहित्य और उत्तर भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को गहराई से प्रभावित किया।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यही कही जा सकती है कि उन्होंने एक विशाल कथा को ऐसी भाषा और शैली में प्रस्तुत किया, जो सदियों बाद भी लोगों के बीच जीवित है।

सारांश

आज तुलसीदास जयंती है।

एक ऐसे कवि को याद करने का दिन, जिसकी कलम ने रामकथा को जनभाषा में नई पहचान दी।

एक ऐसे रचनाकार को याद करने का दिन, जिसकी रामचरितमानस आज भी भारतीय सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

एक ऐसे साहित्यकार को याद करने का दिन, जिसकी हनुमान चालीसा आज भी घर-घर में सुनाई देती है।

और सबसे बढ़कर—

एक ऐसे कवि को याद करने का दिन, जिसने यह साबित किया कि जब शब्द लोक की भाषा में उतरते हैं, तो वे केवल पुस्तक में नहीं रहते—वे पीढ़ियों की स्मृति बन जाते हैं।

टिप्पणी

तुलसीदास का जीवन और साहित्य आज भी इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि उनके शब्दों ने समय की सीमाओं को पार किया।

उनकी लेखनी ने केवल कथा नहीं कही, बल्कि समाज के सामने आदर्शों और जीवन-मूल्यों की एक साहित्यिक दुनिया रखी।

आज तुलसीदास जयंती पर उन्हें याद करने का सबसे सार्थक तरीका यही है कि हम उनकी रचनाओं को केवल श्रद्धा से न देखें, बल्कि साहित्य, भाषा और भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में उनके योगदान को भी समझें।

सदियां बीत गईं, लेकिन तुलसी की लेखनी आज भी बोल रही है।

और शायद यही किसी रचनाकार की अमरता है।

FT News Digital — विशेष प्रस्तुति

9 साल से झोपड़ी में परिवार, आवास सूची से नाम हटने का दावा

 

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बर्डपुर नंबर-14 के खैरहवा टोले का मामला, दंपती ने वीडियो वायरल कर मांगा न्याय; पंचायत स्तर पर लगाए गंभीर आरोप

सिद्धार्थनगर। विकास खंड नौगढ़ की ग्राम पंचायत बर्डपुर नंबर-14 के टोला खैरहवा से प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक मामला सामने आया है। जयप्रकाश पुत्र गजाधर का परिवार करीब नौ वर्षों से छप्परनुमा मकान में रहने का दावा कर रहा है। परिवार की ओर से जारी तस्वीरों और वीडियो में घास-फूस से बने मकान में परिवार के रहने की स्थिति दिखाई गई है।

जयप्रकाश का कहना है कि वह अपनी पत्नी आशा और दो बच्चों के साथ इसी मकान में रह रहे हैं। परिवार के मुताबिक बारिश के दौरान छप्पर से पानी टपकने की समस्या रहती है और ऐसे मौसम में परिवार को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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आवास योजना की सूची से नाम हटाने का दावा

जयप्रकाश की पत्नी आशा का दावा है कि उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में शामिल था, लेकिन बाद में सूची से उनका नाम हटा दिया गया। महिला का आरोप है कि इसके बाद परिवार को आवास योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ा।

आशा के अनुसार, कुछ समय पहले अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिवार की स्थिति का निरीक्षण भी किया था। महिला का कहना है कि निरीक्षण के दौरान उन्हें योजना के लिए पात्र बताए जाने की बात कही गई थी। हालांकि इन दावों की पुष्टि सरकारी अभिलेखों से होना बाकी है।

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यही वजह है कि पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि परिवार का नाम वास्तव में सूची में था तो उसे किस आधार पर हटाया गया और यदि परिवार अपात्र था तो अपात्रता का आधिकारिक कारण क्या है?

वायरल वीडियो में न्याय की गुहार

मामले को लेकर जयप्रकाश और उनकी पत्नी आशा ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है। वीडियो में दंपती अपनी आवासीय स्थिति बताते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते और आवास उपलब्ध कराने की मांग करते दिखाई दे रहे हैं।

वीडियो में महिला की ओर से पंचायत स्तर के जिम्मेदारों पर पैसे मांगने और मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि FT News Digital द्वारा नहीं की गई है। इसलिए इन आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि संबंधित महिला द्वारा लगाए गए आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।

प्रधान-सचिव पर लगाए आरोप, जांच से साफ होगी तस्वीर

महिला की ओर से ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि आवास को लेकर पैसे की मांग की गई और बाद में उनका नाम सूची से हटा दिया गया।

हालांकि इन आरोपों पर संबंधित ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव का पक्ष इस रिपोर्ट के समय उपलब्ध नहीं है। इसलिए निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए उनका पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।

यदि संबंधित पक्ष अपना स्पष्टीकरण देता है तो उसे भी समाचार में उचित स्थान दिया जाएगा।

जातिगत भेदभाव के आरोप भी जांच का विषय

परिवार की ओर से सूची से नाम हटाए जाने के पीछे जातिगत भेदभाव की आशंका भी व्यक्त की गई है। लेकिन इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में किसी व्यक्ति या पंचायत प्रतिनिधि को जातिगत भेदभाव का दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा। इस आरोप की सच्चाई भी संबंधित रिकॉर्ड, पात्रता सूची, जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक सत्यापन से ही सामने आ सकती है।

पहले आवास मिलने के दावे पर भी रिकॉर्ड जरूरी

मामले में महिला के पूर्व पारिवारिक जीवन और किसी अन्य स्थान पर पहले आवास योजना का लाभ मिलने से संबंधित दावे भी सामने रखे गए हैं।

लेकिन इस संबंध में बिना सरकारी दस्तावेज देखे कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। यदि पूर्व में किसी स्थान पर आवास योजना का लाभ मिला था, तो वर्तमान मामले में उसकी प्रासंगिकता क्या है, यह संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और योजना के नियमों के आधार पर ही तय किया जा सकता है।

इसलिए इस बिंदु की भी प्रशासनिक जांच आवश्यक है।

अब प्रशासन के सामने ये सवाल

1. क्या जयप्रकाश के परिवार का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में था?

2. यदि नाम था तो उसे कब और किस आधार पर हटाया गया?

3. क्या परिवार का आधिकारिक स्थलीय सत्यापन हुआ था?

4. परिवार की वर्तमान पात्रता क्या है?

5. क्या परिवार के किसी सदस्य को पहले आवास योजना का लाभ मिला है?

6. प्रधान और सचिव पर लगाए गए पैसे मांगने के आरोपों की कोई आधिकारिक शिकायत हुई है या नहीं?

7. यदि परिवार पात्र है तो उसे योजना का लाभ क्यों नहीं मिला?

इन सभी सवालों का जवाब सरकारी रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।

ग्रामीणों ने भी बताई परिवार की स्थिति

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जयप्रकाश का परिवार लंबे समय से इसी झोपड़ीनुमा मकान में रह रहा है और उनके पास रहने के लिए दूसरा पक्का मकान नहीं है।

ग्रामीणों के इस दावे की भी प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि की जा सकती है। यदि प्रशासन मौके पर पहुंचकर स्थलीय सत्यापन करता है तो परिवार की वास्तविक आवासीय स्थिति और योजना की पात्रता दोनों स्पष्ट हो सकती हैं।


मामला आखिर जांच तक क्यों पहुंचे?

एक परिवार का दावा है कि वह करीब नौ वर्षों से झोपड़ी में रह रहा है। आवास योजना की सूची से नाम हटाए जाने का आरोप है। दंपती ने वीडियो वायरल कर प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। पंचायत स्तर पर पैसे मांगने और मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं। अब पूरा मामला सरकारी रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

सारांश

नौ साल से झोपड़ी में रहने का दावा।

आवास सूची से नाम हटने का आरोप।

दंपती का वायरल वीडियो।

प्रधान-सचिव पर गंभीर आरोप।

ग्रामीणों ने भी उठाए सवाल।

अब प्रशासनिक जांच का इंतजार।

टिप्पणी

सरकारी आवास योजना जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जाती है। इसलिए किसी परिवार की पात्रता को लेकर शिकायत सामने आए तो उसका निष्पक्ष सत्यापन होना जरूरी है।

इस मामले में परिवार ने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति रखी है और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। दूसरी तरफ पंचायत स्तर के जिम्मेदारों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

ऐसे में इस पूरे मामले का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि रिकॉर्ड की जांच और मौके के सत्यापन से होना चाहिए।

यदि परिवार पात्र पाया जाता है तो नियमानुसार उसे योजना का लाभ मिलने का रास्ता साफ होना चाहिए। वहीं यदि वह किसी नियम के कारण पात्र नहीं है तो प्रशासन को कारण स्पष्ट करना चाहिए।

सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि यह जानने का है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस परिवार की वास्तविक स्थिति क्या है और योजना के नियमों के अनुसार इसका हक बनता है या नहीं।

FT News Digital की स्पष्टता

यह समाचार परिवार एवं ग्रामीणों द्वारा बताए गए तथ्यों, उपलब्ध फोटो/वीडियो और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक नहीं हुई है। किसी व्यक्ति को दोषी या भ्रष्ट घोषित करना इस समाचार का उद्देश्य नहीं है।

संबंधित ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव अथवा किसी अन्य पक्ष का जवाब या स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाएगा।


FT News Digital — सच और कुछ नहीं


एक जरूरी संपादकीय सावधानी: आपकी दी हुई तस्वीरों में परिवार और बच्चों के चेहरे स्पष्ट हैं। बच्चों की पहचान/चेहरा प्रकाशित करने से पहले विशेष सावधानी रखें। और अगर वीडियो में किसी व्यक्ति पर पैसे मांगने का आरोप है, तो “प्रधान ने पैसे मांगे” न लिखें; “महिला ने वीडियो में प्रधान पर पैसे मांगने का आरोप लगाया” लिखना कहीं अधिक सुरक्षित है। प्रेस काउंसिल भी बिना पर्याप्त आधार के किसी व्यक्ति को बदनाम करने वाली सामग्री और संदर्भ से बाहर/अनावश्यक आरोपों से बचने पर जोर देता है। �

 

छह दिन से लापता कक्षा 10 के छात्र का पोखरे में मिला शव

चिल्हिया थाना क्षेत्र के राम-जानकी मंदिर कुटिया के पास मिला शव, पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा

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सिद्धार्थनगर। जनपद सिद्धार्थनगर के चिल्हिया थाना क्षेत्र के ग्राम गोहनिया निवासी 15 वर्षीय शनि गुप्ता, पुत्र लौटन गुप्ता, का शव मंगलवार सुबह रेलवे क्रॉसिंग से सटे राम-जानकी मंदिर कुटिया के पास स्थित पोखरे में उतराता हुआ मिला। शनि कक्षा 10 का छात्र बताया गया है और वह बीते 13 अगस्त से घर से लापता था। शव मिलने की सूचना के बाद इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई।


13 अगस्त से लापता था छात्र

परिजनों के अनुसार शनि गुप्ता 13 अगस्त को घर से चला गया था। देर रात तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। काफी प्रयास के बाद भी जानकारी नहीं मिलने पर मामले की सूचना चिल्हिया पुलिस को दी गई।


पुलिस ने दर्ज किया था मुकदमा

पुलिस के अनुसार छात्र की तलाश के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही थी। इसी बीच 18 अगस्त की सुबह पोखरे में एक शव मिलने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव की पहचान शनि गुप्ता के रूप में कराई।


सिद्धार्थनगर के चिल्हिया थाना क्षेत्र में छह दिन से लापता कक्षा 10 के छात्र का शव मंगलवार सुबह पोखरे में मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा की कार्रवाई की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच और अन्य विधिक कार्रवाई में जुटी है।

पूरी खबर

सिद्धार्थनगर। चिल्हिया थाना क्षेत्र के ग्राम गोहनिया निवासी 15 वर्षीय शनि गुप्ता, पुत्र लौटन गुप्ता, कक्षा 10 का छात्र था। परिजनों के मुताबिक शनि 13 अगस्त को घर से लापता हो गया था। रात तक उसके घर नहीं लौटने पर परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका।

परिजनों द्वारा मामले की जानकारी चिल्हिया थाने को दी गई। पुलिस ने मामले में आवश्यक कार्रवाई करते हुए छात्र की तलाश शुरू की। परिजन भी अपने स्तर से शनि की तलाश में जुटे रहे।

इसी बीच 18 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे रेलवे क्रॉसिंग से सटे राम-जानकी मंदिर कुटिया के पास स्थित पोखरे में एक शव उतराता हुआ दिखाई दिया। शव मिलने की जानकारी क्षेत्र में फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी।

सूचना मिलने पर चिल्हिया थाना प्रभारी राजेश गुप्ता पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाकर उसकी पहचान कराई। पुलिस के अनुसार शव की पहचान शनि गुप्ता पुत्र लौटन गुप्ता, निवासी गोहनिया, थाना चिल्हिया, सिद्धार्थनगर के रूप में हुई।

पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मृत्यु के कारणों के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस मामले में विधिक कार्रवाई कर रही है।

परिजनों ने बताई यह बात

परिजनों के अनुसार शनि कक्षा 10 का छात्र था और उसकी बोर्ड परीक्षा नजदीक थी। परिवार के लोगों के मुताबिक पढ़ाई पर ध्यान देने को लेकर घर में उसे मोबाइल फोन से दूर रहने के लिए कहा गया था और मोबाइल उसके पिता को दे दिया गया था। परिजनों का कहना है कि इसी बात से वह नाराज होकर घर से चला गया था।

हालांकि, शनि की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, वह पोखरे तक कैसे पहुंचा और पानी में डूबने की वास्तविक वजह क्या रही—इन सभी बिंदुओं की पुष्टि पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस जांच के अहम बिंदु

पुलिस द्वारा छात्र के घर से निकलने के समय, उसके बाद की गतिविधियों, घटनास्थल और अन्य परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सारांश

चिल्हिया थाना क्षेत्र में 13 अगस्त से लापता 15 वर्षीय कक्षा 10 के छात्र शनि गुप्ता का शव 18 अगस्त की सुबह राम-जानकी मंदिर कुटिया के पास स्थित पोखरे में मिला। पुलिस ने शव की पहचान कराकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही चल सकेगा।

टिप्पणी

छह दिन से लापता छात्र का शव मिलना निश्चित रूप से परिवार और क्षेत्र के लिए बेहद दुखद घटना है। ऐसे मामलों में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने या किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने के बजाय पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करना आवश्यक है। FT News Digital की ओर से घटना से जुड़े तथ्यों को पुलिस और परिजनों के बताए अनुसार ही प्रस्तुत किया जा रहा है। मृत्यु के कारण अथवा किसी आपराधिक घटना की पुष्टि के संबंध में कोई निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले नहीं निकाला जा रहा है।

सिद्धार्थनगर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न, हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने पर फूटा उत्साह

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सिद्धार्थनगर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न, हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने पर फूटा उत्साह

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सिद्धार्थनगर। पूर्व सांसद बस्ती एवं भाजपा असम प्रदेश प्रभारी हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने की खबर के बाद सिद्धार्थनगर में भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। जिला मुख्यालय स्थित साड़ी तिराहा पर निवर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष कन्हैया पासवान के नेतृत्व में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पटाखे जलाकर खुशी जताई तथा एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी।


| साड़ी तिराहा पर दिखा कार्यकर्ताओं का जोश

जश्न के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी के झंडे लेकर नारेबाजी की। मौके पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्रित हुए और हरीश द्विवेदी को नई संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलने पर खुशी का इजहार किया। तस्वीरों में कार्यकर्ता मिठाई बांटते और एक-दूसरे को बधाई देते नजर आए।


संगठन में नई जिम्मेदारी से कार्यकर्ताओं में उत्साह

कार्यकर्ताओं ने हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने को संगठन के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने संगठन की मजबूती, अनुशासन और जनसेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की बात कही।

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कार्यकर्ताओं का कहना रहा कि संगठन में किसी कार्यकर्ता को नई जिम्मेदारी मिलना पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए भी उत्साह का विषय होता है। इसी भावना के साथ सिद्धार्थनगर में कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से खुशी मनाई।

प्रमुख रूप से रहे मौजूद

कार्यक्रम में पूर्व जिलाध्यक्ष लाल जी त्रिपाठी, पूर्व जिला उपाध्यक्ष घनश्याम मिश्रा, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष श्यामबिहारी जायसवाल, पूर्व जिला महामंत्री विपिन सिंह, पूर्व जिला मीडिया प्रभारी निशांत पांडेय, अरविंद उपाध्याय, पूर्व कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश यादव, भाजपा नेता संतोष पासवान, मयंक श्रीवास्तव, संतोष शुक्ला, ज्ञानेंद्र मिश्रा, मंगल चौरसिया, मंडल अध्यक्ष जोगिया राजेश दूबे, जिला महामंत्री फूलचंद जायसवाल, महेश वर्मा, मंडल अध्यक्ष उसका राकेश आर्य, डॉ. अरविंद पांडे, शिवशक्ति शर्मा, रवि जायसवाल, बृजेश उपाध्याय सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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सारांश

हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिलने की खुशी में सिद्धार्थनगर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न। साड़ी तिराहा पर पटाखे फोड़े गए, मिठाइयां बांटी गईं और कार्यकर्ताओं ने संगठन के प्रति उत्साह का प्रदर्शन किया।

टिप्पणी

सिद्धार्थनगर में आयोजित यह कार्यक्रम पार्टी कार्यकर्ताओं के संगठनात्मक उत्साह और सामूहिक सहभागिता की तस्वीर पेश करता है। राजनीतिक दलों के ऐसे कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी संगठन के जमीनी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं का अनुशासन, शांतिपूर्ण आयोजन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक सहभागिता लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करती है।

 

नाग पंचमी पर सिमटती गई गुड़िया पीटने की परंपरा, मोबाइल युग में फीकी पड़ी पुराने उत्सव की रौनक

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सिद्धार्थनगर। नाग पंचमी के अवसर पर सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय स्थित पेट्रोल पंप तिराहे पर वर्षों पुरानी गुड़िया पीटने की परंपरा इस बार भी निभाई गई। बच्चों ने गुड़िया पीटकर अपनी परंपरा को आगे बढ़ाया, लेकिन स्थानीय लोगों की यादों में बसे पुराने दौर की तुलना में आयोजन में भीड़ और उत्साह कम नजर आया।

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स्थानीय लोगों के मुताबिक कभी नाग पंचमी के दिन पेट्रोल पंप तिराहे पर बड़ा आयोजन हुआ करता था। दूर-दराज से पहलवान पहुंचते थे, कुश्ती-दंगल आयोजित होते थे और आल्हा गायकों की प्रस्तुतियां भी आयोजन का हिस्सा हुआ करती थीं। लोगों का कहना है कि उस समय इतनी भीड़ जुटती थी कि तिराहे पर लोगों के खड़े होने तक की जगह मुश्किल से मिलती थी।


गुड़िया पीटने की परंपरा क्यों?

नाग पंचमी पर गुड़िया पीटने की परंपरा को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग लोककथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। एक प्रचलित लोककथा में भगवान शिव के भक्त एक युवक और उसकी बहन का उल्लेख मिलता है। लोकमान्यता के अनुसार, बहन ने भाई को नाग से बचाने के प्रयास में नाग पर प्रहार कर दिया था। इसी घटना की प्रतीकात्मक स्मृति से गुड़िया पीटने की परंपरा जुड़ी होने की बात कही जाती है।

हालांकि इस कथा का स्वरूप लोकमान्यता पर आधारित है, इसे प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। नाग पंचमी का धार्मिक महत्व मुख्य रूप से नाग देवता की पूजा और प्रकृति तथा जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना से जुड़ा माना जाता है।


| कभी दंगल और आल्हा हुआ करते थे आकर्षण

स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक नाग पंचमी के दिन पेट्रोल पंप तिराहा सिर्फ गुड़िया पीटने का स्थान नहीं था, बल्कि लोक मनोरंजन और सामाजिक मेलजोल का भी प्रमुख केंद्र हुआ करता था।

दूर-दराज से पहलवान आते थे और कुश्ती-दंगल देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते थे। इसके अलावा आल्हा गायकों का आयोजन भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता था।

आल्हा की वीरगाथाओं से वातावरण गूंजता था और लोग घंटों तक कार्यक्रम का आनंद लेते थे।

इस बार क्या दिखा?

इस बार बच्चों ने गुड़िया पीटने की परंपरा निभाई, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक पहले जैसी भीड़ और उत्साह दिखाई नहीं दिया।

दंगल और पहलवानों की मौजूदगी की पुरानी तस्वीर भी नजर नहीं आई। इसी तरह आल्हा गायकों के आयोजन की कमी भी लोगों को महसूस हुई।

एक ओर छोटे बच्चे परंपरा में शामिल दिखाई दिए, तो दूसरी ओर उनसे बड़े बच्चे और युवा मोबाइल फोन में व्यस्त नजर आए। कहीं सेल्फी ली जा रही थी तो कहीं मोबाइल पर बातचीत चल रही थी।

स्थानीय महिला ने बताई पुरानी तस्वीर

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आयोजन के दौरान एक स्थानीय महिला से जब पूछा गया कि वह कब से गुड़िया पीटने का उत्सव देख रही हैं, तो उन्होंने बताया कि वह बचपन से इस आयोजन को देखती आ रही हैं।

महिला के मुताबिक पहले यहां बहुत ज्यादा भीड़ होती थी, लेकिन अब धीरे-धीरे लोगों की संख्या सिमटती जा रही है।

उनकी बात में एक पीढ़ी के सामने बदलती हुई लोक परंपरा की तस्वीर साफ दिखाई देती है।

सारांश

सिद्धार्थनगर के पेट्रोल पंप तिराहे पर नाग पंचमी के दिन गुड़िया पीटने की परंपरा आज भी जारी है, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक समय के साथ इस आयोजन की पुरानी रौनक कम होती गई है।

कभी जहां कुश्ती-दंगल, दूर-दराज से आने वाले पहलवान, आल्हा गायन और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी आयोजन की पहचान हुआ करती थी, वहीं अब आयोजन अपेक्षाकृत सीमित नजर आता है।

मोबाइल और डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच यह सवाल भी सामने आता है कि आने वाली पीढ़ी को स्थानीय लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से किस तरह जोड़ा जाए।

टिप्पणी

नाग पंचमी पर गुड़िया पीटने की परंपरा अपने आप में सिद्धार्थनगर की स्थानीय सांस्कृतिक पहचान का एक हिस्सा है। समय के साथ त्योहारों को मनाने के तरीके बदलना स्वाभाविक है, लेकिन किसी परंपरा का जीवित रहना तभी संभव है जब उसकी कहानी और सांस्कृतिक महत्व भी अगली पीढ़ी तक पहुंचे।

आज मोबाइल और सोशल मीडिया बच्चों और युवाओं की जिंदगी का हिस्सा हैं। तकनीक से दूरी बनाना समाधान नहीं है, लेकिन उसके साथ अपनी लोक संस्कृति, खेल, लोकगीत और पारंपरिक आयोजनों के लिए जगह बनाना भी जरूरी है।

सिद्धार्थनगर की यह तस्वीर शायद यही सवाल पूछ रही है—क्या गुड़िया पीटने की रस्म तो बची रहेगी, लेकिन उसके पीछे की पूरी लोक संस्कृति धीरे-धीरे यादों में सिमट जाएगी?

 

सिद्धार्थनगर में शौर्य, श्रद्धा और इतिहास का अद्भुत संगम, बारिश में भी नहीं थमा वीरांगना अवन्तीबाई के अनुयायियों का उत्साह

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घोड़े पर सवार तलवार लिए वीरांगना की मनमोहक झांकी बनी आकर्षण का केंद्र, ढोल-नगाड़ों के बीच नगर भ्रमण करती रही शोभायात्रा

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सिद्धार्थनगर।

सिद्धार्थनगर में रविवार को वीरांगना महारानी अवन्तीबाई लोधी की जयंती पर शौर्य, श्रद्धा, इतिहास और सामाजिक एकजुटता की ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने शहरवासियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा, जनपद सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में आयोजित जयंती समारोह में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

Screenshot 20260816 174204

कार्यक्रम में डुमरियागंज सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री जगदंबिका पाल, सदर विधायक श्यामधनी राही तथा उनके प्रतिनिधि सत्य प्रकाश राही की मौजूदगी रही। मंच से वक्ताओं ने वीरांगना अवन्तीबाई लोधी के जीवन, उनके संघर्ष, साहस और बलिदान को याद करते हुए उनके ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला।

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प्रतिमा स्थापित करने का उठा प्रस्ताव

कार्यक्रम के दौरान वीरांगना महारानी अवन्तीबाई लोधी की स्मृति को स्थायी रूप से संजोने के लिए उनके अनुयायियों की ओर से प्रतिमा स्थापित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के अनुसार सांसद जगदंबिका पाल और विधायक श्यामधनी राही ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति एवं समर्थन की बात कही।

Screenshot 20260816 174054

इस प्रस्ताव के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच उत्साह और बढ़ गया।

महासभा के पदाधिकारियों की रही मौजूदगी

आयोजन में अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा, जनपद सिद्धार्थनगर के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद लोधी, जिला उपाध्यक्ष ओम प्रकाश लोधी, उपाध्यक्ष रामप्रकाश लोधी, उपाध्यक्ष सुनील लोधी, उपाध्यक्ष अमरीश लोधी, महामंत्री दुर्गेश लोधी, मंत्री राजेश लोधी, महामंत्री श्यामनंदन लोधी, वरिष्ठ सलाहकार एवं सभासद राजाराम लोधी, राम उचित लोधी, पूर्व ब्लॉक प्रमुख दयाराम लोधी, युवा जिला अध्यक्ष सोनू लोधी तथा जिला अध्यक्ष अर्जुन लोधी शामिल रहे।

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बारिश आई, लेकिन लोगों का उत्साह नहीं टूटा

जनसभा के दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश बढ़ती गई, लेकिन मंच से वक्ताओं का संबोधन जारी रहा। सबसे खास तस्वीर यह रही कि बारिश के बावजूद कार्यक्रम में मौजूद लोगों की भीड़ डटी रही।

लोग बारिश में भी वक्ताओं को सुनते रहे। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों का उत्साह कम होता नहीं दिखाई दिया। बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में लोगों का टिके रहना आयोजन की खास तस्वीर बन गया।

घोड़े पर सवार वीरांगना की झांकी ने मोहा मन

जनसभा के बाद जब वीरांगना की झांकी के साथ शोभायात्रा निकली तो नजारा देखते ही बन रहा था।

घोड़े पर सवार वीरांगना, हाथ में तलवार और आकर्षक वेशभूषा में सजी झांकी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। झांकी इतनी मनमोहक थी कि शहर में जहां से भी यह गुजरी, लोगों की निगाहें उस पर टिकती चली गईं।

महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे—हर वर्ग के लोग इस झांकी को देखने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। सड़क किनारे खड़े लोग वीरांगना की झांकी को एकटक निहारते नजर आए।

झांकी के साथ बजते ढोल, नगाड़े और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज ने पूरे वातावरण को उत्साह से भर दिया।

तलवारबाजी के प्रदर्शन ने भी खींचा ध्यान

शोभायात्रा के दौरान तलवारबाजी का प्रदर्शन भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। तलवारों की चमक, ढोल-नगाड़ों की गूंज और घोड़े पर सवार वीरांगना की झांकी ने शोभायात्रा को खास बना दिया।

लोग इस पूरे दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद करते दिखाई दिए।

भीमापार रेलवे क्रॉसिंग से शुरू हुई शोभायात्रा

बैनर में दिए गए कार्यक्रम विवरण के अनुसार भीमापार रेलवे क्रॉसिंग से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होकर आगे बढ़ी।

झांकी के आगे बढ़ने के साथ पीछे लोगों की भीड़ चलती रही। रास्ते में मौजूद लोग शोभायात्रा को देखने के लिए रुकते रहे। पूरा वातावरण ढोल-नगाड़ों की आवाज और वीरांगना की झांकी से जीवंत नजर आया।

इसके बाद शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए सिद्धार्थनगर के बेसिक शिक्षा कार्यालय परिसर, जेल के सामने स्थित बीएसए ग्राउंड पहुंची, जहां शोभायात्रा का समापन हुआ। बैनर में भी शोभायात्रा और समापन का यही कार्यक्रम विवरण अंकित है।

1857 के संग्राम की वीरांगना हैं अवन्तीबाई

वीरांगना अवन्तीबाई लोधी का जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में साहस और संघर्ष की मिसाल के रूप में याद किया जाता है।

मध्य प्रदेश सरकार के आधिकारिक विवरण के अनुसार रानी अवन्तीबाई लोधी का जन्म 16 अगस्त 1831 को सिवनी जिले के मनकेहणी गांव में हुआ था। बचपन से ही उनमें वीरता और साहस के गुण थे तथा उन्होंने तलवारबाजी और घुड़सवारी सीखी। बाद में रामगढ़ रियासत के शासन की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली।

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व किया। 23 नवंबर 1857 को खैरी के युद्ध में उनके नेतृत्व वाली सेना ने अंग्रेजी सेना का सामना किया। मार्च 1858 में अंग्रेजी सेना के साथ संघर्ष के दौरान उन्होंने आत्मबलिदान किया।

इसी साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की स्मृति में उनके अनुयायी आज भी उनकी जयंती को श्रद्धा और गौरव के साथ मनाते हैं।

इनसेट | बारिश में भी अडिग रहा उत्साह

बारिश ने रोका आसमान, लोगों का हौसला नहीं।

जनसभा के दौरान तेज बारिश होने के बावजूद मंच से वक्ताओं का संबोधन जारी रहा और बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पर बने रहे। बारिश के बीच लोगों का इस तरह डटे रहना आयोजन की सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल रहा।

इनबॉक्स | झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

घोड़े पर सवार वीरांगना, हाथ में तलवार और पीछे ढोल-नगाड़ों की गूंज।

शोभायात्रा में वीरांगना अवन्तीबाई लोधी की झांकी ने शहरवासियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सभी झांकी को देखने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। तलवारबाजी के प्रदर्शन ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

लीड

सिद्धार्थनगर में वीरांगना महारानी अवन्तीबाई लोधी की जयंती पर आयोजित समारोह शौर्य, श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्साह का केंद्र बन गया। सांसद जगदंबिका पाल और विधायक श्यामधनी राही की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम में वीरांगना की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। तेज बारिश के बावजूद जनसभा में लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। इसके बाद भीमापार रेलवे क्रॉसिंग से निकली घोड़े पर सवार वीरांगना की मनमोहक झांकी वाली शोभायात्रा ढोल-नगाड़ों और तलवारबाजी के प्रदर्शन के साथ नगर भ्रमण करते हुए बीएसए ग्राउंड, जेल के सामने पहुंची, जहां इसका समापन हुआ।

सारांश

अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा जनपद सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में आयोजित जयंती समारोह में सांसद जगदंबिका पाल, विधायक श्यामधनी राही और प्रतिनिधि सत्य प्रकाश राही समेत महासभा के पदाधिकारी व बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में वीरांगना की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। तेज बारिश के बावजूद जनसभा में लोगों का उत्साह बना रहा। इसके बाद भीमापार रेलवे क्रॉसिंग से निकली भव्य शोभायात्रा में घोड़े पर सवार वीरांगना की झांकी, ढोल-नगाड़े और तलवारबाजी का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। नगर भ्रमण के बाद शोभायात्रा का समापन बीएसए ग्राउंड, बेसिक शिक्षा कार्यालय परिसर, जेल के सामने हुआ।

टिप्पणी | इतिहास जब सड़क पर उतरता है

रानी अवन्तीबाई लोधी का इतिहास केवल किसी एक समुदाय की स्मृति तक सीमित न रहकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के व्यापक इतिहास का हिस्सा है। उनकी जयंती के अवसर पर आयोजित इस तरह के कार्यक्रम इतिहास की उस वीरगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन सकते हैं।

सिद्धार्थनगर के आयोजन में खास बात यह रही कि मंचीय कार्यक्रम के साथ झांकी, पारंपरिक वाद्ययंत्र, तलवारबाजी और नगर भ्रमण ने इतिहास को दृश्य रूप में लोगों के सामने रखा। तेज बारिश के बावजूद लोगों का कार्यक्रम में बने रहना भी आयोजन के प्रति उनकी रुचि और उत्साह को दर्शाता है।

छोटी English Headline

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सिद्धार्थनगर।

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महासभा के पदाधिकारियों की रही मौजूदगी

आयोजन में अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा, जनपद सिद्धार्थनगर के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद लोधी, जिला उपाध्यक्ष ओम प्रकाश लोधी, उपाध्यक्ष रामप्रकाश लोधी, उपाध्यक्ष सुनील लोधी, उपाध्यक्ष अमरीश लोधी, महामंत्री दुर्गेश लोधी, मंत्री राजेश लोधी, महामंत्री श्यामनंदन लोधी, वरिष्ठ सलाहकार एवं सभासद राजाराम लोधी, राम उचित लोधी, पूर्व ब्लॉक प्रमुख दयाराम लोधी, युवा जिला अध्यक्ष सोनू लोधी तथा जिला अध्यक्ष अर्जुन लोधी शामिल रहे।

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बारिश आई, लेकिन लोगों का उत्साह नहीं टूटा

जनसभा के दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश बढ़ती गई, लेकिन मंच से वक्ताओं का संबोधन जारी रहा। सबसे खास तस्वीर यह रही कि बारिश के बावजूद कार्यक्रम में मौजूद लोगों की भीड़ डटी रही।

लोग बारिश में भी वक्ताओं को सुनते रहे। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों का उत्साह कम होता नहीं दिखाई दिया। बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में लोगों का टिके रहना आयोजन की खास तस्वीर बन गया।

घोड़े पर सवार वीरांगना की झांकी ने मोहा मन

जनसभा के बाद जब वीरांगना की झांकी के साथ शोभायात्रा निकली तो नजारा देखते ही बन रहा था।

घोड़े पर सवार वीरांगना, हाथ में तलवार और आकर्षक वेशभूषा में सजी झांकी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। झांकी इतनी मनमोहक थी कि शहर में जहां से भी यह गुजरी, लोगों की निगाहें उस पर टिकती चली गईं।

महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे—हर वर्ग के लोग इस झांकी को देखने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। सड़क किनारे खड़े लोग वीरांगना की झांकी को एकटक निहारते नजर आए।

झांकी के साथ बजते ढोल, नगाड़े और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज ने पूरे वातावरण को उत्साह से भर दिया।

तलवारबाजी के प्रदर्शन ने भी खींचा ध्यान

शोभायात्रा के दौरान तलवारबाजी का प्रदर्शन भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। तलवारों की चमक, ढोल-नगाड़ों की गूंज और घोड़े पर सवार वीरांगना की झांकी ने शोभायात्रा को खास बना दिया।

लोग इस पूरे दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद करते दिखाई दिए।

भीमापार रेलवे क्रॉसिंग से शुरू हुई शोभायात्रा

बैनर में दिए गए कार्यक्रम विवरण के अनुसार भीमापार रेलवे क्रॉसिंग से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होकर आगे बढ़ी।

झांकी के आगे बढ़ने के साथ पीछे लोगों की भीड़ चलती रही। रास्ते में मौजूद लोग शोभायात्रा को देखने के लिए रुकते रहे। पूरा वातावरण ढोल-नगाड़ों की आवाज और वीरांगना की झांकी से जीवंत नजर आया।

इसके बाद शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए सिद्धार्थनगर के बेसिक शिक्षा कार्यालय परिसर, जेल के सामने स्थित बीएसए ग्राउंड पहुंची, जहां शोभायात्रा का समापन हुआ। बैनर में भी शोभायात्रा और समापन का यही कार्यक्रम विवरण अंकित है।

1857 के संग्राम की वीरांगना हैं अवन्तीबाई

वीरांगना अवन्तीबाई लोधी का जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में साहस और संघर्ष की मिसाल के रूप में याद किया जाता है।

मध्य प्रदेश सरकार के आधिकारिक विवरण के अनुसार रानी अवन्तीबाई लोधी का जन्म 16 अगस्त 1831 को सिवनी जिले के मनकेहणी गांव में हुआ था। बचपन से ही उनमें वीरता और साहस के गुण थे तथा उन्होंने तलवारबाजी और घुड़सवारी सीखी। बाद में रामगढ़ रियासत के शासन की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली।

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व किया। 23 नवंबर 1857 को खैरी के युद्ध में उनके नेतृत्व वाली सेना ने अंग्रेजी सेना का सामना किया। मार्च 1858 में अंग्रेजी सेना के साथ संघर्ष के दौरान उन्होंने आत्मबलिदान किया।

इसी साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की स्मृति में उनके अनुयायी आज भी उनकी जयंती को श्रद्धा और गौरव के साथ मनाते हैं।

इनसेट | बारिश में भी अडिग रहा उत्साह

बारिश ने रोका आसमान, लोगों का हौसला नहीं।

जनसभा के दौरान तेज बारिश होने के बावजूद मंच से वक्ताओं का संबोधन जारी रहा और बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पर बने रहे। बारिश के बीच लोगों का इस तरह डटे रहना आयोजन की सबसे चर्चित तस्वीरों में शामिल रहा।

इनबॉक्स | झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

घोड़े पर सवार वीरांगना, हाथ में तलवार और पीछे ढोल-नगाड़ों की गूंज।

शोभायात्रा में वीरांगना अवन्तीबाई लोधी की झांकी ने शहरवासियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सभी झांकी को देखने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। तलवारबाजी के प्रदर्शन ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

लीड

सिद्धार्थनगर में वीरांगना महारानी अवन्तीबाई लोधी की जयंती पर आयोजित समारोह शौर्य, श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्साह का केंद्र बन गया। सांसद जगदंबिका पाल और विधायक श्यामधनी राही की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम में वीरांगना की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। तेज बारिश के बावजूद जनसभा में लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। इसके बाद भीमापार रेलवे क्रॉसिंग से निकली घोड़े पर सवार वीरांगना की मनमोहक झांकी वाली शोभायात्रा ढोल-नगाड़ों और तलवारबाजी के प्रदर्शन के साथ नगर भ्रमण करते हुए बीएसए ग्राउंड, जेल के सामने पहुंची, जहां इसका समापन हुआ।

सारांश

अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा जनपद सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में आयोजित जयंती समारोह में सांसद जगदंबिका पाल, विधायक श्यामधनी राही और प्रतिनिधि सत्य प्रकाश राही समेत महासभा के पदाधिकारी व बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में वीरांगना की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। तेज बारिश के बावजूद जनसभा में लोगों का उत्साह बना रहा। इसके बाद भीमापार रेलवे क्रॉसिंग से निकली भव्य शोभायात्रा में घोड़े पर सवार वीरांगना की झांकी, ढोल-नगाड़े और तलवारबाजी का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। नगर भ्रमण के बाद शोभायात्रा का समापन बीएसए ग्राउंड, बेसिक शिक्षा कार्यालय परिसर, जेल के सामने हुआ।

टिप्पणी | इतिहास जब सड़क पर उतरता है

रानी अवन्तीबाई लोधी का इतिहास केवल किसी एक समुदाय की स्मृति तक सीमित न रहकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के व्यापक इतिहास का हिस्सा है। उनकी जयंती के अवसर पर आयोजित इस तरह के कार्यक्रम इतिहास की उस वीरगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन सकते हैं।

सिद्धार्थनगर के आयोजन में खास बात यह रही कि मंचीय कार्यक्रम के साथ झांकी, पारंपरिक वाद्ययंत्र, तलवारबाजी और नगर भ्रमण ने इतिहास को दृश्य रूप में लोगों के सामने रखा। तेज बारिश के बावजूद लोगों का कार्यक्रम में बने रहना भी आयोजन के प्रति उनकी रुचि और उत्साह को दर्शाता है।

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लक्ष्मी मेमोरियल पब्लिक स्कूल में धूमधाम से मना 80वां स्वतंत्रता दिवस

IMG 20260816 WA0184

ध्वजारोहण के साथ गूंजा राष्ट्रगान, विद्यार्थियों को राष्ट्रप्रेम और जिम्मेदारी का दिया संदेश

सिद्धार्थनगर। शहर के पकड़ी-दुमदुमवा मार्ग स्थित लक्ष्मी मेमोरियल पब्लिक स्कूल में 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को उत्साह और देशभक्ति के माहौल में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में MLC शिक्षक संघ ध्रुव कुमार त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान हुआ और विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति के भाव से ओत-प्रोत नजर आया।

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▪️ इनसेट

आजादी का पर्व, नई पीढ़ी के नाम

स्वतंत्रता दिवस समारोह में विद्यार्थियों को देश की स्वतंत्रता के महत्व के साथ अपने कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने का संदेश दिया गया।

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▪️ इनबॉक्स

शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्रप्रेम पर जोर

मुख्य अतिथि ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने विद्यालय परिवार एवं विद्यार्थियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने बच्चों को स्वतंत्रता दिवस के वास्तविक उद्देश्य को समझने तथा देश के प्रति जिम्मेदारी, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

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▪️ लीड

विद्यार्थियों को बेहतर नागरिक बनने की प्रेरणा

विद्यालय के प्रबंधक आनंद अग्रहरि ने छात्र-छात्राओं को शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व को समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने कार्यों और उपलब्धियों के माध्यम से परिवार, विद्यालय तथा समाज का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।

▪️ समारोह में ये रहे मौजूद

ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की अध्यक्ष सुनीता अग्रहरि, प्रमुख व्यवसायी एवं समाजसेवी ओमप्रकाश अग्रहरि, संयोजक प्रदीप ठकुराई, मुरलीधर अग्रहरि, संजय अग्रहरि और ओम पांडेय समेत विद्यालय परिवार के सदस्य मौजूद रहे।

वहीं छात्र-छात्राओं में प्रियांशी कसौधन, अंशुमान त्रिपाठी, लक्ष्मी, अनुज, हर्षित और प्राशी समेत अन्य विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

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▪️ सारांश

लक्ष्मी मेमोरियल पब्लिक स्कूल में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह ने विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह और देशभक्ति का वातावरण देखने को मिला।

▪️ टिप्पणी

स्वतंत्रता दिवस केवल तिरंगा फहराने का अवसर नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग को याद करने और नई पीढ़ी को देश के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराने का दिन भी है। विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम इसी भावना को विद्यार्थियों तक पहुंचाने का माध्यम बना।

— FT News Digital, सिद्धार्थनगर

नवज्योति सिद्धार्थ इंटर कॉलेज में देशभक्ति का दिखा जज्बा, 80वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मना

Uttar Pradesh Siddharth Nagar

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बर्डपुर, सिद्धार्थनगर। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नवज्योति सिद्धार्थ इंटर कॉलेज, बर्डपुर में राष्ट्रीय पर्व पूरे उत्साह, उमंग और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। ध्वजारोहण से लेकर राष्ट्रगान, देशभक्ति गीतों, भाषणों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक विद्यालय परिसर में दिनभर राष्ट्रप्रेम का माहौल बना रहा।

ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ समारोह

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कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य ओम प्रकाश यादव ने ध्वजारोहण कर किया। राष्ट्रध्वज फहराते ही विद्यालय परिसर राष्ट्रगान से गूंज उठा। शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने तिरंगे को सलामी दी और स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

इस दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। हाथों में तिरंगा लिए छात्र-छात्राओं की कतारें और राष्ट्रध्वज को सलामी देते बच्चों का दृश्य समारोह की गरिमा को और बढ़ाता नजर आया।

प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को दिलाया कर्तव्य का अहसास

समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य ओम प्रकाश यादव ने कहा कि देश की आजादी महान स्वतंत्रता सेनानियों और वीर शहीदों के संघर्ष एवं बलिदान का परिणाम है। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर शिक्षा ग्रहण करने, अनुशासन का पालन करने और अपने विद्यालय, परिवार, समाज तथा देश का नाम रोशन करने के लिए निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया।

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उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ही देश का भविष्य हैं। देश को मजबूत और विकसित बनाने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रत्येक छात्र-छात्रा को शिक्षा के साथ अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए।

बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

स्वतंत्रता दिवस समारोह में छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति गीतों, भाषणों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। जानवी, साधन, रितिका, नंदिनी, काजल, नमन वर्मा और ऋषभ साहनी सहित अन्य विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

बच्चों की प्रस्तुतियों के दौरान विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। देशभक्ति गीतों और नारों ने समारोह में मौजूद लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना को और मजबूत किया।

शिक्षकों और कर्मचारियों का रहा सहयोग

कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिक्षक रवि कुमार, धनराज चौधरी, उमेश कुमार मौर्य, हीरालाल यादव और असलम की सहभागिता रही।

वहीं शिक्षिकाओं में रोशनी वर्मा, काजल, कौशल, ज्योति बिंदु और सफिया ने कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई। विद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयास से स्वतंत्रता दिवस समारोह व्यवस्थित और उत्साहपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

मिष्ठान वितरण के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में छात्र-छात्राओं के बीच मिष्ठान वितरित किया गया। विद्यालय परिवार की ओर से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। पूरे समारोह के दौरान विद्यालय परिसर में देशभक्ति और उत्सव का माहौल बना रहा।

संपादकीय टिप्पणी

तिरंगे को सलामी देते नन्हे कदम और देशभक्ति के गीतों से गूंजता विद्यालय परिसर—यही तस्वीर किसी भी राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत झलक है। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को देश के प्रति जिम्मेदारी, अनुशासन और कर्तव्य का बोध कराने का भी माध्यम हैं।

नवज्योति सिद्धार्थ इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी यह संदेश देती नजर आई कि देश का भविष्य केवल किताबों में नहीं, बल्कि संस्कार, शिक्षा और राष्ट्रप्रेम के साथ तैयार होता है। यदि विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा के साथ अपने कर्तव्यों का एहसास कराया जाए, तो यही पीढ़ी आने वाले भारत की मजबूत नींव बन सकती है।

 

कंपोजिट विद्यालय महली में गूंजे भारत माता के जयकारे, तिरंगे की शान में दिखा ग्रामीण अंचल का उत्साह

Siddharth Nagar Uttar Pradesh

महली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कंपोजिट विद्यालय महली में राष्ट्रीय पर्व हर्षोल्लास, उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। ग्रामीण परिवेश में आयोजित इस समारोह में बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विद्यालय परिसर में सुबह से ही देशभक्ति का माहौल नजर आया और तिरंगे के सम्मान में लोगों ने एकजुट होकर राष्ट्र के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

ध्वजारोहण के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ग्राम प्रधान बृजेश कुमार चौधरी द्वारा ध्वजारोहण के साथ किया गया। राष्ट्रध्वज फहराते ही विद्यालय परिसर राष्ट्रगान से गूंज उठा। इसके बाद उपस्थित लोगों ने तिरंगे को सलामी दी और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम के जयघोष से वातावरण देशभक्ति से भर गया।

बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

ध्वजारोहण के बाद विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं देशभक्ति कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बच्चों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन और उनके बलिदान पर आधारित झांकियां प्रस्तुत कर लोगों को देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया।

देशभक्ति गीतों पर बच्चों की प्रस्तुतियों और उनके प्रभावी भाषणों ने उपस्थित लोगों की खूब सराहना बटोरी। हाथों में तिरंगा लिए बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। ग्रामीण क्षेत्र के इस विद्यालय में बच्चों की शानदार प्रस्तुतियों ने समारोह को खास बना दिया।

ग्रामीण अंचल में दिखी राष्ट्रभक्ति की मजबूत तस्वीर

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर ही नहीं, बल्कि आसपास का ग्रामीण वातावरण भी देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और अभिभावक बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए कार्यक्रम में पहुंचे।

तिरंगा हाथों में लेकर मौजूद बच्चों की तस्वीरें इस बात को बयां कर रही थीं कि देशभक्ति की भावना शहरों तक सीमित नहीं है। गांव के विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे भी राष्ट्रीय पर्व को लेकर उतने ही उत्साहित और जागरूक हैं।

ग्राम प्रधान ने बच्चों को दिया आगे बढ़ने का संदेश

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ग्राम प्रधान बृजेश कुमार चौधरी ने सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बच्चों को देश का भविष्य बताते हुए मन लगाकर पढ़ाई करने तथा शिक्षा के माध्यम से अपने परिवार, समाज और देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।

पूर्व ग्राम प्रधान सोल्हू यादव सहित अन्य वरिष्ठ अतिथियों ने भी स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद किया तथा बच्चों से उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

प्रधानाध्यापक ने जताया आभार

विद्यालय के प्रधानाध्यापक कवलभान सिंह पटेल ने अतिथियों और ग्रामीणों का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही मजबूत और जागरूक समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले विद्यालय परिवार, अभिभावकों और ग्रामवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहायक अध्यापक अनुपम राठौर, सुनील यादव और राजेश चौधरी सहित रसोईया सुधरा देवी, प्रेम कुमारी, रामरती तथा सफाई कर्मी अदालत का सहयोग रहा।

इस अवसर पर राममिलन प्रजापति, रफीक, नारद प्रजापति, महेन्द्र कुमार, नन्द किशोर, राजेश, राम केश, प्रभु दयाल, गोलू, संजय, अजय और दिनेश कुमार प्रजापति सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, अभिभावक एवं स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

मिष्ठान वितरण के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में बच्चों और उपस्थित ग्रामीणों के बीच मिष्ठान का वितरण किया गया। प्रधानाध्यापक ने सभी अतिथियों एवं ग्रामवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही स्वतंत्रता दिवस समारोह का समापन हुआ।

संपादकीय टिप्पणी

गांव के विद्यालयों में तिरंगे की शान और बच्चों के चेहरों पर देशभक्ति का उत्साह वास्तव में राष्ट्र की मजबूत नींव की तस्वीर है। कंपोजिट विद्यालय महली में आयोजित कार्यक्रम यह संदेश देता है कि देशप्रेम किसी स्थान या संसाधन का मोहताज नहीं होता। सीमित संसाधनों के बीच भी यदि शिक्षक, बच्चे, अभिभावक और ग्रामीण एकजुट होकर राष्ट्रीय पर्व मनाएं, तो यही भावना आने वाली पीढ़ी में देश के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की भावना को मजबूत करती है।

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आजादी का पर्व केवल झंडा फहराने तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों की शिक्षा, संस्कार और बेहतर भविष्य के संकल्प से जुड़े—यही ऐसे आयोजनों की वास्तविक सार्थकता है।

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