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प्रधानमंत्री को लेकर कथित आपत्तिजनक वीडियो पर सिद्धार्थनगर में बवाल, पुलिस तक पहुंची शिकायत; जांच के बाद खुलेगा वायरल सामग्री का सच

प्रधानमंत्री को लेकर कथित आपत्तिजनक वीडियो पर सिद्धार्थनगर में बवाल, पुलिस तक पहुंची शिकायत; जांच के बाद खुलेगा वायरल सामग्री का सच

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त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के बिस्कोहर पुलिस चौकी इलाके से जुड़ा मामला, शिकायतकर्ता मोहम्मद सईद ने पुलिस को दिया शिकायती पत्र; निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

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सिद्धार्थनगर।

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक और हिंसात्मक तरीके से प्रदर्शित किए गए वीडियो का मामला सिद्धार्थनगर में पुलिस तक पहुंच गया है।

त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र की बिस्कोहर पुलिस चौकी अंतर्गत क्षेत्र से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट पर कथित आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में मोहम्मद सईद नामक व्यक्ति ने पुलिस को लिखित शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कथित तौर पर हिंसात्मक तरीके से प्रदर्शित करने वाला वीडियो प्रसारित किया जा रहा है। शिकायत में अन्य कथित सोशल मीडिया सामग्री का भी उल्लेख किया गया है।

हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोप अभी जांच का विषय हैं। FT News Digital कथित वायरल वीडियो की प्रामाणिकता, उसके मूल स्रोत, उसे बनाने वाले व्यक्ति अथवा उसे पहली बार अपलोड करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।

वीडियो वास्तव में AI तकनीक से बनाया गया है, डिजिटल रूप से एडिट किया गया है या किसी अन्य तरीके से तैयार किया गया है, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।


वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल, अब डिजिटल जांच से सामने आएगा सच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया वीडियो का मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।

वीडियो आखिर किसने बनाया?

इसे सबसे पहले किस सोशल मीडिया अकाउंट से अपलोड किया गया?

क्या वीडियो AI तकनीक से बनाया गया है या किसी वास्तविक वीडियो में डिजिटल छेड़छाड़ की गई है?

जिस व्यक्ति पर वीडियो प्रसारित करने का आरोप लगाया जा रहा है, क्या संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट वास्तव में उसी व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा है?

इन सभी सवालों का जवाब पुलिस जांच और आवश्यक डिजिटल परीक्षण के बाद ही सामने आ सकता है।


क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता मोहम्मद सईद की ओर से पुलिस को दिए गए शिकायती पत्र में सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो को लेकर आपत्ति जताई गई है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित आपत्तिजनक एवं हिंसात्मक दृश्य वाला वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है।

शिकायत में इस तरह की सामग्री से अशांति पैदा होने की आशंका जताते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

फिलहाल यह शिकायतकर्ता का आरोप है। आरोपों की सत्यता का निर्धारण पुलिस जांच और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर होना बाकी है।

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वीडियो असली या AI, जांच का बड़ा सवाल

आज के दौर में AI और डिजिटल एडिटिंग तकनीक के जरिए वास्तविक दिखने वाले वीडियो तैयार करना संभव है।

यही कारण है कि केवल किसी वीडियो के वायरल होने को उसकी सत्यता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

इस मामले में भी यह पता लगाना जरूरी होगा कि वायरल सामग्री का मूल स्रोत क्या है, वीडियो कब और कहां तैयार हुआ, क्या उसमें डिजिटल छेड़छाड़ की गई और उसे सोशल मीडिया पर सबसे पहले किसने प्रसारित किया।

डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद ही इन सवालों का विश्वसनीय जवाब सामने आ सकेगा।


पुलिस ने जांच कर कार्रवाई की कही बात

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक त्रिलोकपुर थाना प्रभारी की ओर से मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि शिकायती पत्र में लगाए गए आरोप सिद्ध हो गए हैं।

पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही यह निर्धारित होगा कि किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं और आगे किस प्रकार की विधिक कार्रवाई आवश्यक है।


FT News Digital नहीं कर रहा कथित आपत्तिजनक वीडियो का पुनः प्रसारण

FT News Digital इस मामले में कथित आपत्तिजनक वीडियो को खबर के नाम पर दोबारा प्रसारित करने से बच रहा है।

खबर का आधार शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस को दिया गया शिकायती पत्र, शिकायतकर्ता का उपलब्ध पक्ष और पुलिस की ओर से जांच कर कार्रवाई किए जाने की जानकारी है।

चैनल कथित वायरल वीडियो की सत्यता अथवा उसे बनाने और प्रसारित करने वाले व्यक्ति के संबंध में कोई स्वतंत्र दावा नहीं कर रहा है।


वायरल होना सबूत नहीं, जांच बताएगी कौन है जिम्मेदार

सोशल मीडिया की दुनिया में कोई सामग्री कुछ ही मिनटों में हजारों लोगों तक पहुंच सकती है, लेकिन वायरल होना किसी वीडियो के वास्तविक होने या किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।

यदि जांच में आपत्तिजनक अथवा कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री जानबूझकर तैयार या प्रसारित किए जाने के साक्ष्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई पुलिस और संबंधित एजेंसियों का विषय होगा।

दूसरी ओर यदि वीडियो के स्रोत या सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर किए गए दावे गलत पाए जाते हैं तो वह तथ्य भी जांच से ही स्पष्ट होगा।

इसीलिए इस मामले में अनुमान के बजाय डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित निष्पक्ष जांच सबसे महत्वपूर्ण है।

टिप्पणी

सोशल मीडिया की आजादी के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और सामग्री साझा करने की ताकत दी है, लेकिन इसके साथ कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी है।

किसी भी व्यक्ति, विशेषकर संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को लेकर कथित हिंसात्मक या आपत्तिजनक सामग्री सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

उतना ही जरूरी यह भी है कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया ट्रायल के जरिए अपराधी घोषित न किया जाए।

सिद्धार्थनगर के इस मामले में पुलिस के सामने अब कथित वीडियो के मूल स्रोत, डिजिटल एडिटिंग या AI के संभावित इस्तेमाल और संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट की वास्तविकता की पड़ताल का सवाल है।

जांच पूरी होने के बाद ही वायरल वीडियो की असली कहानी सामने आ सकेगी।

सारांश

सिद्धार्थनगर के त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र की बिस्कोहर पुलिस चौकी इलाके से जुड़े सोशल मीडिया मामले को लेकर मोहम्मद सईद ने पुलिस को लिखित शिकायती पत्र दिया है।

शिकायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित कथित आपत्तिजनक और हिंसात्मक तरीके से प्रदर्शित वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुलिस ने जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है।

फिलहाल वीडियो की प्रामाणिकता, उसके निर्माता, मूल अपलोडर, संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट के वास्तविक संचालक अथवा AI तकनीक के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

इसलिए जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। अब पुलिस और आवश्यक डिजिटल जांच से सामने आने वाले तथ्यों पर निगाह रहेगी।

सिद्धार्थनगर में स्कूल चोरी का पुलिस ने किया खुलासा, तीन गिरफ्तार; लैपटॉप-टैबलेट से लेकर माइक्रोस्कोप तक बरामद

कपिलवस्तु पुलिस का दावा- कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत से चोरी हुआ था सामान, ऑटो से नेपाल ले जाकर बेचने की थी कथित तैयारी; एक अन्य आरोपी की तलाश जारी

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सिद्धार्थनगर, 3 अगस्त 2026।
सिद्धार्थनगर के कपिलवस्तु थाना क्षेत्र में सरकारी विद्यालय से हुई चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा करने का दावा किया है। बच्चों की पढ़ाई और प्रयोगशाला से जुड़े लैपटॉप, टैबलेट, माइक्रोस्कोप, साइंस किट, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों की चोरी के मामले में कपिलवस्तु पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक चोरी का सामान जिस ऑटो रिक्शा से ले जाया जा रहा था, उसे भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी सामान को खुनवा बॉर्डर के रास्ते नेपाल ले जाकर बेचने की कथित तैयारी में थे। इसी दौरान पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ लिया, जबकि उनका एक अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक लैपटॉप, दो टैबलेट, इनवर्टर-बैटरी, दो माइक्रोस्कोप, प्रिंटर, डेस्कटॉप कंप्यूटर, साइंस किट और साउंड सिस्टम समेत बड़ी संख्या में सामान बरामद करने का दावा किया है।
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31 जुलाई की रात स्कूल का ताला टूटा, 3 अगस्त को पुलिस ने खोली कथित चोरी की परतें
पुलिस के अनुसार पूरी कहानी 31 जुलाई 2026 की रात से शुरू होती है। कपिलवस्तु थाना क्षेत्र के कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत के कमरे का ताला तोड़कर वहां रखे इलेक्ट्रॉनिक और शैक्षणिक उपकरण चोरी किए जाने की घटना सामने आई थी।
स्कूल से सामान गायब होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और थाना कपिलवस्तु में मुकदमा अपराध संख्या 62/2026 के तहत बीएनएस की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं और तीन दिन बाद 3 अगस्त को तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ चोरी के सामान की बरामदगी का दावा किया।
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स्कूल में आखिर क्या-क्या हुआ था चोरी?
पुलिस प्रेस नोट के मुताबिक कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत से सामान्य सामान नहीं बल्कि बच्चों की पढ़ाई, डिजिटल शिक्षा और विज्ञान प्रयोग से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरण चोरी हुए थे।
पुलिस द्वारा घोषित बरामदगी में एक लैपटॉप, दो टैबलेट, एक ट्यूबलर बैटरी, एक इनवर्टर, दो माइक्रोस्कोप, 11 माइक्रो हेडफोन, एक प्रिंटर, दो वायरलेस की-बोर्ड, एक ऑप्टिक फाइबर सेट, एक डेस्कटॉप कंप्यूटर मॉनिटर, सीपीयू एवं बैटरी सहित, चार साउंड सिस्टम और दो साइंस किट शामिल हैं।
इसके अलावा पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किए जाने का दावा करते हुए UP53FT7469 नंबर का एक ऑटो रिक्शा भी बरामद किया है।
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मदरहना उर्फ रामनगर क्षेत्र से तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस प्रेस नोट के अनुसार कपिलवस्तु पुलिस ने 3 अगस्त को ग्राम मदरहना उर्फ रामनगर, टोला मटियरिया राजे डिहवा बाग के पास से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रेमशंकर उर्फ प्रिन्स कन्नौजिया पुत्र चन्द्र प्रकाश कन्नौजिया, निवासी ग्राम बढ़या, थाना व जनपद सिद्धार्थनगर; रोहित चौधरी पुत्र शम्भू चौधरी, निवासी चकईजोत, थाना कपिलवस्तु; तथा रोहित चौधरी उर्फ टकलू पुत्र कोठारी, निवासी चकईजोत, थाना कपिलवस्तु, जनपद सिद्धार्थनगर के रूप में पुलिस ने बताई है।
पुलिस के मुताबिक आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय भेज दिया गया।
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पुलिस का दावा- ऑटो में सामान लेकर नेपाल की ओर जा रहे थे आरोपी
मामले में सबसे महत्वपूर्ण दावा पुलिस की पूछताछ के विवरण में सामने आया है।
प्रेस नोट के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे चार मित्र हैं और 31 जुलाई की रात कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत के कमरे का ताला तोड़कर सामान चोरी किया था।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने यह भी कथित रूप से बताया कि चोरी का सामान इसी ऑटो रिक्शा से विद्यालय से ले जाया गया था और 3 अगस्त को उसे ऑटो में रखकर खुनवा बॉर्डर के रास्ते नेपाल में बेचने के लिए ले जाया जा रहा था।
इसी दौरान पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि पुलिस के अनुसार एक अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया।
यह पूरा विवरण पुलिस प्रेस नोट और पुलिस द्वारा बताई गई पूछताछ पर आधारित है। आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा।


SSP के निर्देश पर चला अभियान, कपिलवस्तु पुलिस को मिली सफलता
पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के आदेश पर अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।
अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष कपिलवस्तु विनय प्रताप सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
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इन पुलिसकर्मियों की रही कार्रवाई में भूमिका
पुलिस प्रेस नोट के अनुसार गिरफ्तारी एवं बरामदगी करने वाली टीम में चौकी प्रभारी बजहा उपनिरीक्षक अनिरुद्ध सिंह, उपनिरीक्षक सदरूल आलमीन, कांस्टेबल प्रदुमन यादव, कांस्टेबल राजकमल यादव और कांस्टेबल राहुल कुमार शर्मा शामिल रहे।


बच्चों की पढ़ाई का सामान भी नहीं छोड़ा!
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि चोरी किसी निजी दुकान या गोदाम से नहीं, बल्कि एक विद्यालय से हुई बताई गई है।
लैपटॉप और टैबलेट डिजिटल पढ़ाई के साधन हैं तो माइक्रोस्कोप और साइंस किट बच्चों को विज्ञान समझाने के उपकरण। कंप्यूटर, प्रिंटर, हेडफोन और अन्य उपकरण भी विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था का हिस्सा होते हैं।
ऐसे में स्कूल से इन उपकरणों की चोरी केवल संपत्ति की चोरी का मामला नहीं रह जाती, बल्कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालय की सुविधाएं भी प्रभावित होती हैं।
पुलिस के दावे के मुताबिक सामान बरामद हो जाना राहत की बात है, लेकिन फरार बताए जा रहे अन्य आरोपी की गिरफ्तारी और पूरे घटनाक्रम की शेष कड़ियों की जांच अभी महत्वपूर्ण है।
टिप्पणी
स्कूल सुरक्षित होंगे तभी बच्चों के संसाधन सुरक्षित रहेंगे
सरकारी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा और विज्ञान की पढ़ाई बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक धन से उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे उपकरणों की चोरी सीधे तौर पर विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है।
कपिलवस्तु पुलिस ने तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और बड़ी मात्रा में सामान की बरामदगी का दावा किया है। अब आवश्यक है कि मामले की विवेचना साक्ष्यों के आधार पर पूरी हो और फरार बताए जा रहे व्यक्ति के संबंध में भी विधिसम्मत कार्रवाई हो।
साथ ही यह घटना विद्यालयों में रखे महंगे इलेक्ट्रॉनिक और शैक्षणिक उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत भी सामने लाती है।
सारांश
कपिलवस्तु पुलिस ने कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत में 31 जुलाई की रात हुई चोरी के मामले का खुलासा करने का दावा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार लोगों में प्रेमशंकर उर्फ प्रिन्स कन्नौजिया, रोहित चौधरी और रोहित चौधरी उर्फ टकलू शामिल हैं।
एक लैपटॉप, दो टैबलेट, दो माइक्रोस्कोप, इनवर्टर-बैटरी, प्रिंटर, डेस्कटॉप कंप्यूटर, 11 माइक्रो हेडफोन, चार साउंड सिस्टम, दो साइंस किट समेत अन्य सामान तथा घटना में कथित रूप से प्रयुक्त ऑटो रिक्शा बरामद किया गया है।
पुलिस का दावा है कि चोरी का सामान खुनवा बॉर्डर के रास्ते नेपाल ले जाकर बेचने की तैयारी थी। एक अन्य साथी के फरार होने की बात भी पुलिस ने कही है।
तीनों गिरफ्तार आरोपियों को आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद न्यायालय भेज दिया गया है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

सिद्धार्थनगर को “बुद्ध रसोई” की सौगात दिलाने की पहल तेज, मरीजों-तीमारदारों के सस्ते भोजन के लिए रेलमंत्री तक पहुंची मांग

राज्यसभा सांसद बृज लाल ने रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से की मुलाकात, माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में CSR सहयोग से “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने का अनुरोध; नो प्रॉफिट-नो लॉस मॉडल पर संचालन की परिकल्पना

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सिद्धार्थनगर/नई दिल्ली, 3 अगस्त 2026।

सिद्धार्थनगर के माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए सस्ती दर पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन की व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है।

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राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृज लाल ने 3 अगस्त को केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से उनके संसद भवन स्थित कार्यालय में मुलाकात कर मेडिकल कॉलेज परिसर में “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने के लिए रेलवे से जुड़े उपक्रम की CSR निधि से आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

बृज लाल की ओर से रेलमंत्री को सौंपे गए पत्र में प्रस्तावित “बुद्ध रसोई” के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार करने, संचालन, रखरखाव और इसे दीर्घकाल तक टिकाऊ बनाने की दिशा में CSR सहयोग का आग्रह किया गया है।

इस पूरी पहल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित “बुद्ध रसोई” को व्यावसायिक लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि “नो प्रॉफिट, नो लॉस” मॉडल पर संचालित करने की परिकल्पना की गई है।

यदि प्रस्ताव को आवश्यक स्वीकृति और वित्तीय सहयोग मिलता है तो मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके साथ रहने वाले तीमारदारों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण सुविधा बन सकती है।


इलाज की चिंता के बीच भोजन का खर्च भी मरीज के परिवार पर अतिरिक्त बोझ बनता है। इसी परेशानी को कम करने की सोच अब सिद्धार्थनगर से दिल्ली तक पहुंची है। राज्यसभा सांसद बृज लाल ने केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने के लिए CSR सहयोग मांगा है। योजना है कि रसोई “नो प्रॉफिट, नो लॉस” पर चले और मरीजों तथा तीमारदारों को सस्ती दर पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन मिल सके। अब इस जनहित प्रस्ताव पर आगे होने वाली कार्रवाई और संभावित CSR स्वीकृति पर निगाहें रहेंगी।


मरीजों की थाली तक पहुंचने की कोशिश

मेडिकल कॉलेज में आने वाला मरीज अक्सर अकेला नहीं होता। उसके साथ परिवार के एक या अधिक सदस्य भी कई दिनों तक अस्पताल में रहते हैं। इलाज और दवाओं के साथ भोजन की व्यवस्था भी उनके लिए बड़ी आवश्यकता बन जाती है।

इसी जरूरत को ध्यान में रखकर “बुद्ध रसोई” का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना बताया गया है जहां मरीजों और तीमारदारों को कम कीमत में अच्छा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो सके। प्रस्ताव की मूल भावना जनसेवा को केंद्र में रखकर रसोई संचालित करने की है।


रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंपा पत्र

3 अगस्त को हुई मुलाकात के दौरान सांसद बृज लाल ने केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को इस संबंध में बाकायदा पत्र सौंपा।

उपलब्ध पत्र के मुताबिक “बुद्ध रसोई” की स्थापना के लिए संबंधित रेलवे उपक्रम के समक्ष प्रस्ताव दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

रेलमंत्री से आग्रह किया गया है कि CSR निधि से बुद्ध रसोई केंद्र की स्थापना में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाए।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध पत्र और जानकारी इस समय CSR निधि की अंतिम स्वीकृति की घोषणा नहीं करते। फिलहाल रेलमंत्री से सहयोग और धन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। अंतिम स्वीकृति संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।


क्यों रखा गया नाम “बुद्ध रसोई”?

सिद्धार्थनगर की पहचान भगवान बुद्ध से जुड़ी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से है। उपलब्ध पत्र में भी सिद्धार्थनगर और भगवान बुद्ध के संबंध का उल्लेख करते हुए प्रस्तावित जनसेवा केंद्र को “बुद्ध रसोई” नाम देने की भावना सामने आती है।

इस तरह प्रस्तावित रसोई को केवल भोजन उपलब्ध कराने वाली सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर की पहचान से जुड़े जनसेवा प्रयास के रूप में विकसित करने की परिकल्पना दिखाई देती है।

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नो प्रॉफिट, नो लॉस का मॉडल

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष इसका प्रस्तावित संचालन मॉडल है।

बृज लाल द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक “बुद्ध रसोई” को “नो प्रॉफिट, नो लॉस” के आधार पर संचालित करने की योजना है।

अर्थात इसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि व्यवस्था को संचालित रखते हुए मरीजों और तीमारदारों को सस्ती दर पर गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना होगा।

हालांकि भोजन की कीमत, संचालन व्यवस्था और अन्य व्यावहारिक विवरण परियोजना को स्वीकृति मिलने तथा संचालन की रूपरेखा तय होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।


अस्पताल में दवा के साथ सस्ती थाली भी बने सहारा

बीमारी किसी परिवार पर केवल शारीरिक संकट नहीं लाती, बल्कि आर्थिक दबाव भी बढ़ाती है। दूरदराज के गांव से मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले परिवार को जांच, दवा, यात्रा और ठहरने के साथ प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था भी करनी पड़ती है।

ऐसे में यदि अस्पताल परिसर में व्यवस्थित तरीके से कम कीमत पर पौष्टिक भोजन मिलने लगे तो मरीज के साथ रहने वाले परिवार को राहत मिल सकती है।

यही वह सामाजिक आवश्यकता है जिसे “बुद्ध रसोई” के प्रस्ताव से संबोधित करने की कोशिश की जा रही है।


पहले किए गए विकास कार्यों का भी पत्र में जिक्र

रेलमंत्री को दिए गए पत्र में बृज लाल ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना की निधि के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में कराए गए कार्यों का उल्लेख भी किया है।

पत्र में पुस्तकालय और पुस्तकों की व्यवस्था, अमृत सरोवर, स्कूल संबंधी आधारभूत सुविधाएं, ग्रामीण सीसी रोड, छात्रावास, स्ट्रीट लाइट तथा अस्पतालों में उपकरण जैसी सुविधाओं के लिए निधि इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।

अब इसी क्रम में सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में “बुद्ध रसोई” के लिए CSR सहयोग जुटाने की पहल की गई है।

टिप्पणी

प्रस्ताव अच्छा, अब धरातल पर उतरने का इंतजार

किसी भी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था केवल डॉक्टर, दवा और बेड तक सीमित नहीं होती। मरीज और उसके तीमारदार की बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखना भी अस्पताल से जुड़ी समग्र व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस नजरिए से “बुद्ध रसोई” की परिकल्पना जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।

लेकिन प्रस्ताव और क्रियान्वयन के बीच की दूरी को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अभी CSR सहयोग का अनुरोध किया गया है। इसलिए इसे स्वीकृत अथवा शुरू हो चुकी परियोजना बताना जल्दबाजी होगी।

यदि आवश्यक स्वीकृति और धन मिलने के बाद इसे पारदर्शी व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता और वास्तविक “नो प्रॉफिट, नो लॉस” मॉडल के साथ धरातल पर उतारा जाता है तो यह मेडिकल कॉलेज आने वाले जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत बन सकती है।

सारांश

राज्यसभा सांसद बृज लाल ने 3 अगस्त 2026 को केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से संसद भवन स्थित कार्यालय में मुलाकात कर सिद्धार्थनगर के माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने के लिए CSR निधि से सहयोग का अनुरोध किया है।

प्रस्तावित रसोई को “नो प्रॉफिट, नो लॉस” आधार पर चलाने की योजना है, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को सस्ती दर पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके।

फिलहाल यह प्रस्ताव और CSR सहयोग के अनुरोध के चरण में है। धनराशि की अंतिम स्वीकृति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। अब प्रस्ताव पर आगे होने वाली कार्रवाई पर निगाह रहेगी।

सिद्धार्थनगर में फिर गूंजा सामाजिक एकजुटता का संदेश: गांव-गांव पहुंच रही लोधी समाज की मुहिम

 

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पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से सिद्धार्थनगर के पुराने जुड़ाव को याद कर रहा समाज; अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में गांव-नगर तक संगठन विस्तार का अभियान

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से सिद्धार्थनगर के पुराने जुड़ाव की स्मृतियों को सहेजते हुए अब जिले में लोधी समाज सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक एकजुटता की नई मुहिम आगे बढ़ा रहा है। अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा, जनपद सिद्धार्थनगर के जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में गांव-गांव और नगर क्षेत्रों में संगठन के जागरूकता बोर्ड लगाए जा रहे हैं।

संगठन से जुड़े लोगों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य केवल जगह-जगह बोर्ड लगाना नहीं, बल्कि समाज को अपने इतिहास और महापुरुषों की विरासत से परिचित कराना, नई पीढ़ी में सामाजिक चेतना जगाना और बिखरे लोगों को एक संगठनात्मक मंच पर जोड़ना है। अभियान के तहत अब तक जिले के दर्जनों गांवों में बोर्ड लगाए जाने की बात कही जा रही है।

इसी कड़ी में विकास खंड उसका बाजार की ग्राम पंचायत सोहांस जनूबी में संगठन का बड़ा जागरूकता एवं स्वागत बोर्ड लगाया गया। बोर्ड पर संगठन के नाम और पदाधिकारियों के साथ समाज से जुड़े ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के चित्र भी प्रदर्शित किए गए हैं।


| सिद्धार्थनगर और कल्याण सिंह के रिश्ते की यादें आज भी जीवंत

इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से सिद्धार्थनगर के जुड़ाव को लेकर स्थानीय समाज की स्मृतियां भी हैं।

स्थानीय संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि कल्याण सिंह का सिद्धार्थनगर से विशेष लगाव रहा और वह अपने राजनीतिक जीवन में सत्ता में रहते हुए भी तथा पद पर नहीं रहने के दौरान भी सिद्धार्थनगर आते रहे। यही वजह रही कि जिले के लोधी समाज में उनके प्रति विशेष सम्मान और आत्मीयता विकसित हुई।

समाज के लोगों का कहना है कि कल्याण सिंह के विचार, सामाजिक एकजुटता और सार्वजनिक जीवन से मिली प्रेरणा आज भी उनके लिए महत्वपूर्ण है। संगठन उसी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और समाज को शिक्षा, जागरूकता, एकता तथा आपसी सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ाने की बात कर रहा है।

कल्याण सिंह की स्मृतियों से नई पीढ़ी को जोड़ने की कोशिश

सिद्धार्थनगर में चल रहे अभियान को संगठन अतीत और वर्तमान के बीच एक सामाजिक सेतु के रूप में भी देख रहा है। एक तरफ बोर्ड पर महापुरुषों और प्रेरक व्यक्तित्वों को स्थान देकर इतिहास की याद दिलाई जा रही है, दूसरी तरफ गांव स्तर के लोगों के नाम जोड़कर संगठन को जमीनी स्वरूप देने की कोशिश हो रही है।

संदेश साफ है—अपनी विरासत को जानिए, समाज को जागरूक कीजिए और एक-दूसरे के सहयोग के लिए संगठित रहिए।


| अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई, लक्ष्य पूरा सिद्धार्थनगर

जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में चल रहे अभियान को संगठन पूरे जनपद तक पहुंचाने की तैयारी में है। गांव, कस्बा और नगर—हर स्तर पर बोर्ड के जरिए संगठन की पहचान और सामाजिक संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

सोहांस जनूबी में लगे बोर्ड पर डॉ. चन्द्रिका प्रसाद लोधी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष) तथा अर्जुन सिंह लोधी (जिलाध्यक्ष) का उल्लेख प्रमुखता से है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर संगठन से जुड़े अनेक लोगों के नाम भी बोर्ड पर अंकित हैं।


| चेहरे स्थानीय, संदेश पूरे समाज के लिए

सोहांस जनूबी में लगाए गए बोर्ड पर सदस्यगण के रूप में रामसमुझ लोधी, अनिल लोधी, पंकज लोधी, राजेश लोधी, राधेश्याम प्रताप लोधी, सुरेश लोधी, हरिशंकर लोधी, वीरयादव लोधी, रामसुभग लोधी, रामवृक्ष लोधी, भूपनरायन, सीताराम लोधी, रामयश लोधी, राजमन लोधी, सुन्दरी लोधी, बिजलेश विश्वकर्मा और पराग लोधी सहित अन्य नाम अंकित दिखाई देते हैं।

स्थानीय लोगों को बोर्ड पर स्थान देने के पीछे संगठन की सोच गांव स्तर तक भागीदारी बढ़ाने की बताई जा रही है। यानी अभियान ऊपर से नीचे तक संगठन खड़ा करने के बजाय गांव के लोगों को साथ लेकर सामाजिक नेटवर्क मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


| एक बोर्ड नहीं, गांव-गांव सामाजिक पहचान खड़ी करने की कोशिश

सिद्धार्थनगर में शुरू हुई यह पहल अब केवल किसी एक गांव में बोर्ड लगाने तक सीमित नहीं दिखाई देती। दर्जनों गांवों तक पहुंचने का दावा कर रही अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा इसे जिलेव्यापी सामाजिक जागरूकता अभियान का स्वरूप दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से सिद्धार्थनगर के पुराने जुड़ाव की स्मृतियां इस अभियान को भावनात्मक आधार देती हैं, जबकि जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में गांव-गांव संगठन विस्तार इसकी वर्तमान दिशा को रेखांकित करता है।

 संपादकीय टिप्पणी

समाज का संगठन तभी सार्थक होता है जब उसका उद्देश्य केवल नाम या पहचान तक सीमित न रहकर शिक्षा, सामाजिक चेतना, आपसी सहयोग और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने तक पहुंचे। सिद्धार्थनगर में बोर्ड के माध्यम से शुरू हुई यह पहल यदि इन उद्देश्यों को गांव-गांव वास्तविक गतिविधियों में बदलती है, तो इसका प्रभाव बोर्ड से कहीं आगे दिखाई दे सकता है।

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के प्रति जिले के लोगों की पुरानी आत्मीयता और सम्मान की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ यदि संगठन शिक्षा, प्रतिभाओं के प्रोत्साहन और सामाजिक सहयोग को प्राथमिकता देता है, तो यह मुहिम अधिक व्यापक सामाजिक महत्व हासिल कर सकती है।

सारांश

अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा, सिद्धार्थनगर जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में जिले के गांव एवं नगर क्षेत्रों में जागरूकता बोर्ड लगाने का अभियान चला रही है। सोहांस जनूबी में भी इसी क्रम में बोर्ड लगाया गया है। संगठन से जुड़े लोगों के मुताबिक अब तक दर्जनों गांवों में अभियान पहुंच चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सिद्धार्थनगर से पुराने जुड़ाव और उनके प्रति स्थानीय लोधी समाज के सम्मान को भी संगठन अपनी सामाजिक विरासत के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखता है।

 

दवा कराने निकली मां-बेटी नहीं लौटीं घर, सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय—दो घंटे में सकुशल बरामद

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सिद्धार्थनगर पुलिस की त्वरित कार्रवाई से परिवार को मिली राहत; सोशल मीडिया समेत अन्य माध्यमों से शुरू हुई तलाश, सकुशल मिलने के बाद परिजनों को किया गया सुपुर्द

सिद्धार्थनगर। दवा और इलाज के लिए घर से निकली मां-बेटी के वापस न लौटने से परेशान एक परिवार को पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बड़ी राहत मिली। परिजन ने सिद्धार्थनगर थाने पहुंचकर मामले की सूचना दी तो पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू की। पुलिस के मुताबिक सूचना मिलने के करीब दो घंटे के भीतर मां और बेटी को सकुशल बरामद कर परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।

पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार इंदिरानगर निवासी ओमप्रकाश सोनकर ने 2 अगस्त को सिद्धार्थनगर थाने में सूचना दी थी कि उनकी 55 वर्षीय पत्नी और 22 वर्षीय पुत्री एक दिन पहले यानी 1 अगस्त की दोपहर दवा-इलाज कराने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं।

लीड | एक रात चिंता में गुजरी, पुलिस तक पहुंचा परिवार

समय गुजरता गया और मां-बेटी घर नहीं पहुंचीं तो परिवार की चिंता बढ़ती चली गई। अपने स्तर से जानकारी करने के बाद परिजन पुलिस के पास पहुंचे।

मामले की सूचना मिलने पर सिद्धार्थनगर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर दोनों की तलाश शुरू की। पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया और अन्य उपलब्ध माध्यमों से जानकारी जुटाई गई।

इसके बाद तलाश का नतीजा जल्द सामने आया और सूचना मिलने के लगभग दो घंटे के भीतर दोनों को सकुशल खोज लिया गया।

सकुशल बरामदगी के बाद पुलिस ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए मां-बेटी को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

| एक नजर में मामला

स्थान: थाना सिद्धार्थनगर, जनपद सिद्धार्थनगर

घर से निकलीं: 1 अगस्त 2026 की दोपहर

उद्देश्य: दवा/इलाज कराने के लिए

पुलिस को सूचना: 2 अगस्त 2026

पुलिस कार्रवाई: गुमशुदगी दर्ज कर तत्काल तलाश

तलाश के माध्यम: सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यम

नतीजा: पुलिस के मुताबिक करीब दो घंटे में सकुशल बरामदगी

आगे की कार्रवाई: मां-बेटी को परिजनों के सुपुर्द किया गया

पुलिस ने तेजी से बढ़ाई तलाश

मामला सामने आने के बाद पुलिस टीम ने उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर मां-बेटी की तलाश शुरू की।

पुलिस का दावा है कि सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों का सहारा लेते हुए जानकारी जुटाई गई और महज दो घंटे के भीतर दोनों तक पहुंचने में सफलता मिली।

पुलिस ने हालांकि अपने प्रेस नोट में यह स्पष्ट नहीं किया है कि मां-बेटी कहां मिलीं और किन परिस्थितियों में घर नहीं लौट पाई थीं। इसलिए इन बिंदुओं को लेकर किसी तरह की अटकल लगाना उचित नहीं होगा।

बरामदगी के बाद परिवार को मिली राहत

मां-बेटी के सकुशल मिलने की सूचना परिवार के लिए राहत लेकर आई। पुलिस के अनुसार दोनों को परिजनों के सुपुर्द किए जाने के बाद परिवार ने पुलिस टीम की कार्रवाई की सराहना की।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि गुमशुदगी की सूचना मिलने के बाद तलाश तेजी से आगे बढ़ाई गई और मामला किसी अप्रिय घटना में बदलने से पहले दोनों सकुशल मिल गईं।


| इन्हें मिली बरामदगी की जिम्मेदारी

पुलिस की ओर से जारी विवरण के मुताबिक कार्रवाई करने वाली टीम में—

वरिष्ठ उपनिरीक्षक अरविंद कुमार राय

आरक्षी साहिल यादव

आरक्षी अंकित कुमार

महिला आरक्षी कीर्ति उपाध्याय

शामिल रहे।


| शिकायत से सकुशल वापसी तक

1 अगस्त को मां-बेटी दवा और इलाज के लिए घर से निकलीं और वापस नहीं पहुंचीं। परिवार ने तलाश की और अगले दिन पुलिस को इसकी सूचना दी।

पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की, उपलब्ध माध्यमों से तलाश शुरू की और अपने आधिकारिक विवरण के मुताबिक सूचना मिलने के करीब दो घंटे के अंदर दोनों को सकुशल बरामद कर लिया।

इसके बाद मां-बेटी को परिवार के सुपुर्द कर दिया गया और चिंता में डूबे परिवार को राहत मिली।


| गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती घंटे महत्वपूर्ण

किसी व्यक्ति के अचानक लापता होने की स्थिति में समय पर सूचना और तेजी से तलाश बेहद महत्वपूर्ण होती है। सिद्धार्थनगर के इस मामले में अच्छी बात यह रही कि पुलिस को जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ी और मां-बेटी सुरक्षित मिल गईं।

यह मामला आम लोगों के लिए भी संदेश देता है कि परिवार का कोई सदस्य असामान्य परिस्थितियों में लापता हो और संपर्क न हो पा रहा हो तो अपने स्तर पर लंबे समय तक इंतजार करने के बजाय पुलिस को समय से जानकारी देना उपयोगी हो सकता है।

 

सिद्धार्थनगर को ₹261.49 करोड़ की बड़ी सौगात, बर्डपुर–पिपरहवा मार्ग बनेगा फोरलेन!

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भारत-नेपाल सीमा से कपिलवस्तु तक बेहतर कनेक्टिविटी की उम्मीद, सांसद जगदंबिका पाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखी परियोजना की तस्वीर; भूमि अधिग्रहण के लिए ₹87 करोड़ जमा होने की जानकारी

सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली एक बड़ी परियोजना आगे बढ़ रही है। बर्डपुर–पिपरहवा मार्ग के करीब 9.400 किलोमीटर हिस्से को चार लेन में चौड़ा और सुदृढ़ किए जाने की तैयारी है। उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक परियोजना की स्वीकृत लागत करीब ₹261.49 करोड़ है।

परियोजना को लेकर सिद्धार्थनगर के PWD रेस्ट हाउस में डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी प्रमुख जानकारियां साझा कीं। इस दौरान भाजपा के नवनिर्वाचित जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता कमल किशोर सहित भाजपा के कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


सीमा, पर्यटन और विकास—तीनों के लिए अहम सड़क

बर्डपुर–पिपरहवा मार्ग महज एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि नेपाल सीमा से लेकर बौद्ध पर्यटन क्षेत्र तक बेहतर संपर्क स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि मार्ग के फोरलेन होने से विश्व प्रसिद्ध कपिलवस्तु स्तूप और कपिलवस्तु विश्वविद्यालय तक आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित होगा। इससे देश-विदेश से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।


एक नजर में परियोजना

परियोजना: बर्डपुर–पिपरहवा मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण

लंबाई: करीब 9.400 किलोमीटर

प्रस्तावित स्वरूप: चार लेन

स्वीकृत लागत: करीब ₹261.49 करोड़

भूमि अधिग्रहण: ₹87 करोड़ जमा किए जाने की जानकारी

प्रमुख लाभ: भारत-नेपाल सीमा संपर्क, कपिलवस्तु कनेक्टिविटी, पर्यटन और परिवहन को बढ़ावा

जमीन पर तैयारी शुरू, भूमि अधिग्रहण पर बढ़े कदम

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग की टीम संयुक्त रूप से भूमि की पैमाइश, अभिलेखों का सत्यापन तथा प्रभावित भवनों के मूल्यांकन का कार्य कर रही है।

सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि प्रेस नोट में भूमि अधिग्रहण के लिए ₹87 करोड़ की धनराशि विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी, सिद्धार्थनगर के खाते में जमा किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में परियोजना अब केवल घोषणा तक सीमित न रहकर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।

कपिलवस्तु तक पहुंच होगी आसान

सिद्धार्थनगर की पहचान भगवान बुद्ध और कपिलवस्तु की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी है। बड़ी संख्या में देश-विदेश से बौद्ध श्रद्धालु और पर्यटक इस क्षेत्र में पहुंचते हैं। बेहतर सड़क संपर्क मिलने पर पर्यटन गतिविधियों के साथ होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार और अन्य सेवा क्षेत्रों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

प्रेस विज्ञप्ति में भी परियोजना को व्यापार, पर्यटन, परिवहन और रोजगार के नए अवसरों से जोड़कर देखा गया है।

शनिवार की सौगातों के बाद विकास पर फिर चर्चा

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई है जब बीते शनिवार केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री के सिद्धार्थनगर दौरे के दौरान भी जिले के विकास से जुड़ी सौगातों और योजनाओं की चर्चा सामने आई थी। इसके बाद अब सांसद जगदंबिका पाल ने सड़क परियोजना को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिले में प्रस्तावित विकास कार्यों की तस्वीर सामने रखी है।

सारांश


₹261.49 करोड़ की लागत और 9.4 किलोमीटर लंबाई वाली बर्डपुर–पिपरहवा फोरलेन परियोजना सिद्धार्थनगर के लिए महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल हो सकती है। खासकर नेपाल सीमा, कपिलवस्तु और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी के लिहाज से इसके दूरगामी प्रभाव की उम्मीद की जा रही है। भूमि अधिग्रहण के लिए ₹87 करोड़ जमा किए जाने की जानकारी इस परियोजना की प्रगति का महत्वपूर्ण पहलू है।


| अब निगाह समयबद्ध क्रियान्वयन पर

किसी भी बड़ी विकास परियोजना की असली सफलता उसकी घोषणा से नहीं, बल्कि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन से तय होती है। बर्डपुर–पिपरहवा मार्ग का फोरलेन निर्माण यदि निर्धारित प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों के साथ पूरा होता है, तो इसका लाभ केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटन, सीमा क्षेत्र की आवाजाही, स्थानीय कारोबार और कपिलवस्तु की अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी इससे मजबूती मिल सकती है।

साथ ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में प्रभावित लोगों के अधिकार, नियमानुसार मुआवजा, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। सिद्धार्थनगर की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कागज पर दिखाई दे रही यह बड़ी परियोजना जमीन पर कितनी तेजी और गुणवत्ता के साथ आकार लेती है।

नोट: परियोजना की लागत, लंबाई और भूमि अधिग्रहण संबंधी आंकड़े उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री के शनिवार के दौरे की विशिष्ट घोषणाओं का विवरण इस खबर में बिना दस्तावेजी पुष्टि के नहीं जोड़ा गया है।

जिले की मेधा ने वैश्विक सिनेमा में बनाई पहचान, सिद्धार्थनगर के युवा फिल्मकार विनीत शुक्ला की डॉक्यूमेंट्री को अंतरराष्ट्रीय मंच

 

बड़े शहर से नहीं, छोटे जिले की मिट्टी से निकला सपना; बेघर लोगों से लेकर प्रवासी मजदूरों के संघर्ष तक को कैमरे में उतारकर बनाई अलग पहचान

सिद्धार्थनगर। प्रतिभा की उड़ान किसी महानगर की मोहताज नहीं होती। मजबूत इरादा, लगातार मेहनत और समाज की अनकही कहानियों को दुनिया के सामने रखने का जुनून हो, तो छोटे शहर से निकला युवा भी अंतरराष्ट्रीय सिनेमा की दुनिया में अपनी जगह बना सकता है। सिद्धार्थनगर से जुड़े युवा फिल्मकार विनीत शुक्ला की यात्रा इसी सोच को सामने रखती है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विनीत ने अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के जरिए समाज के उन हिस्सों को कैमरे के सामने लाने की कोशिश की है, जिनकी आवाज अक्सर मुख्यधारा की चमक-दमक में दब जाती है। बेघर लोगों का जीवन हो या बेहतर भविष्य की तलाश में संघर्ष करते प्रवासी श्रमिक—उनकी फिल्मों में मनोरंजन से अधिक मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकार दिखाई देते हैं।


छोटे शहर से बड़े पर्दे तक

सिद्धार्थनगर में शुरुआती शिक्षा प्राप्त करने वाले विनीत का रुझान आगे चलकर सिनेमा की ओर बढ़ा। उपलब्ध विवरण के मुताबिक उन्होंने दिल्ली में सिनेमा का अध्ययन किया और वर्ष 2022 में उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए। यहीं से उनकी फिल्म निर्माण की यात्रा को अंतरराष्ट्रीय विस्तार मिला।

उनकी कोशिश ऐसी कहानियों को पर्दे पर लाने की रही, जिनके पात्र आम जिंदगी में हमारे आसपास मौजूद तो होते हैं, लेकिन उनकी परेशानियाँ शायद ही कभी बड़े पर्दे की कहानी बन पाती हैं।

बेघर लोगों की जिंदगी पर केंद्रित ‘नो प्लेस लाइक होम’

विनीत की पहली बताई गई डॉक्यूमेंट्री ‘नो प्लेस लाइक होम : इन सर्च ऑफ ए सेफ हेवन’ इंग्लैंड के शेफील्ड शहर में बेघर लोगों के जीवन, कठिनाइयों और पुनर्वास के प्रयासों के इर्द-गिर्द तैयार की गई है।

प्राप्त विवरण के अनुसार फिल्म को जर्मनी में आयोजित एक मानवाधिकार फिल्म समारोह में सम्मान मिला और इसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एवं शैक्षणिक मंचों पर भी प्रदर्शित किया गया। जागरण फिल्म फेस्टिवल-2026 में इसके चयन की जानकारी भी प्रकाशित सामग्री में दी गई है।

इस फिल्म की खासियत केवल बेघर लोगों की समस्या दिखाना नहीं, बल्कि उनके जीवन के पीछे मौजूद परिस्थितियों और दोबारा सामान्य जिंदगी की ओर लौटने की जद्दोजहद को सामने लाना बताया गया है।

दूसरी डॉक्यूमेंट्री में प्रवासी मजदूरों का दर्द

उनकी दूसरी डॉक्यूमेंट्री ‘ए माइल ऑफ साइलेंस : द फाइव पाउंड सीक्रेट’ प्रवासी श्रमिकों के कथित शोषण, संघर्ष और उनके जीवन की कठिन परिस्थितियों पर केंद्रित बताई गई है।

प्रकाशित विवरण के मुताबिक यह फिल्म भी शोध और वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित है तथा इसे जागरण फिल्म फेस्टिवल-2026 में स्थान मिलने की जानकारी दी गई है।

इन दोनों फिल्मों का साझा पहलू यह है कि इनमें ग्लैमर से अधिक इंसान और उसके संघर्ष को केंद्र में रखने की कोशिश दिखाई देती है।


विनीत शुक्ला की यात्रा एक नजर में

जुड़ाव: सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश

क्षेत्र: फिल्म निर्माण एवं डॉक्यूमेंट्री

प्रमुख विषय: बेघर लोगों का जीवन, प्रवासी श्रमिक और सामाजिक सरोकार

उच्च शिक्षा: उपलब्ध विवरण के अनुसार इंग्लैंड में अध्ययन

प्रमुख फिल्में: ‘नो प्लेस लाइक होम : इन सर्च ऑफ ए सेफ हेवन’ और ‘ए माइल ऑफ साइलेंस : द फाइव पाउंड सीक्रेट’

विशेषता: सामाजिक मुद्दों और हाशिये के लोगों की कहानियों को सिनेमा के माध्यम से सामने लाने का प्रयास

अभिनेता राज बब्बर के साथ तस्वीर भी आई सामने

प्रकाशित सामग्री के साथ विनीत शुक्ला की अभिनेता राज बब्बर के साथ एक तस्वीर भी प्रकाशित की गई है। तस्वीर को दिल्ली का बताया गया है। हालांकि किसी व्यक्ति के साथ तस्वीर अपने आप में किसी फिल्मी परियोजना या व्यावसायिक साझेदारी की पुष्टि नहीं करती, इसलिए इसे उसी संदर्भ तक सीमित रखना उचित है।

सिद्धार्थनगर के युवाओं के लिए संदेश

विनीत की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शायद उनकी उपलब्धियों की सूची से भी आगे है। यह उस धारणा को चुनौती देती है कि फिल्म निर्माण जैसे क्षेत्र में पहचान बनाने के लिए शुरुआत किसी बड़े शहर से ही होनी चाहिए।

सिद्धार्थनगर जैसे जिले से शिक्षा की शुरुआत कर सिनेमा की पढ़ाई और फिर विदेश तक पहुँचना यह दिखाता है कि सही प्रशिक्षण, मेहनत और विषय की समझ के सहारे क्षेत्रीय प्रतिभाएँ भी बड़े मंच तक पहुँच सकती हैं।


सिद्धार्थनगर की मिट्टी से निकले युवा फिल्मकार विनीत शुक्ला ने सामाजिक सरोकारों को अपनी फिल्मों की ताकत बनाया है। बेघर लोगों और प्रवासी श्रमिकों के संघर्ष पर केंद्रित उनकी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को विभिन्न फिल्म मंचों पर पहचान मिलने की जानकारी सामने आई है। उनकी यात्रा जिले के उन युवाओं के लिए प्रेरक है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद सिनेमा और रचनात्मक क्षेत्रों में भविष्य तलाश रहे हैं।


छोटे शहर से निकले विनीत शुक्ला की फिल्मी यात्रा सामाजिक मुद्दों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ी है। उनकी डॉक्यूमेंट्री में समाज के हाशिये पर मौजूद लोगों के संघर्ष को प्रमुखता दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी फिल्मों को देश-विदेश के विभिन्न फिल्म मंचों पर प्रदर्शन और पहचान मिली है।

 

परदेस में थम गई सांसें, घर की चौखट पर 45 दिनों से बेटे का इंतजार

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सिद्धार्थनगर के रिजवान की सऊदी अरब में मौत के बाद परिवार बेहाल; पार्थिव शरीर वतन लाने की गुहार, मां की आंखें अंतिम दीदार के लिए तरसीं


सिद्धार्थनगर। घर की चौखट वही है, परिवार वही है और अपनों की आंखों में इंतजार भी वही है… लेकिन जिस रिजवान के लौटने की कभी खुशी से राह देखी जाती थी, आज उसी के पार्थिव शरीर के घर पहुंचने का इंतजार परिवार के लिए हर गुजरते दिन के साथ और भारी होता जा रहा है।

सिद्धार्थनगर जिले के इटवा तहसील क्षेत्र के डोकम अमया गांव निवासी 42 वर्षीय रिजवान अहमद रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। परिवार के अनुसार वहां 22 जून 2026 को उनकी मृत्यु हो गई। मौत की सूचना गांव पहुंची तो घर में मातम छा गया।

परिजनों को उम्मीद थी कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिजवान का पार्थिव शरीर जल्द वतन आएगा और वे अपने बेटे, अपने परिजन को आखिरी बार देख सकेंगे।

लेकिन परिवार के मुताबिक देखते-देखते करीब 45 दिन गुजर गए और उनका इंतजार खत्म नहीं हुआ।

मां की आंखों में बस एक आस—एक बार बेटे को देख लूं

रिजवान के परिवार के लिए यह इंतजार शब्दों में बयान करना आसान नहीं है। बेटे की मौत का दुख एक तरफ है और अंतिम दर्शन न कर पाने की पीड़ा दूसरी तरफ।

घर में बैठे परिजन हर नई सूचना के साथ उम्मीद बांधते हैं कि शायद अब रिजवान का पार्थिव शरीर भारत आने का रास्ता साफ हो जाए।

परिवार की मांग बेहद सीधी है—रिजवान का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाने में सहायता की जाए, ताकि परिवार अंतिम दर्शन कर सके और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम विदाई दे सके।


| 22 जून से शुरू हुआ इंतजार

परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार रिजवान की मृत्यु 22 जून को सऊदी अरब में हुई। उसके बाद से परिवार पार्थिव शरीर स्वदेश आने की प्रतीक्षा कर रहा है।

करीब डेढ़ महीने तक इंतजार लंबा होने के बाद परिवार ने अपनी परेशानी सार्वजनिक रूप से सामने रखी और संबंधित अधिकारियों से मदद की मांग की।


एक परिवार और कई सवाल

रिजवान का पार्थिव शरीर भारत कब पहुंचेगा?

यदि कोई दस्तावेजी प्रक्रिया बाकी है तो वह किस स्तर पर लंबित है? परिवार को उसकी स्पष्ट जानकारी कब मिलेगी? आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराने के लिए संबंधित भारतीय अधिकारी किस स्तर पर सहायता कर सकते हैं?

इन सवालों का अंतिम और प्रमाणिक जवाब संबंधित सरकारी/दूतावास अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी से ही मिल सकेगा।

विदेश गया था कमाने, अब परिवार मांग रहा अंतिम दर्शन

रोजगार के लिए विदेश जाने वाले व्यक्ति के पीछे उसका पूरा परिवार उम्मीदों के साथ जुड़ा रहता है। घर से हजारों किलोमीटर दूर किसी अपने की मृत्यु हो जाना ही परिवार के लिए बहुत बड़ा आघात है। ऐसे में यदि अंतिम दर्शन के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़े तो परिवार की पीड़ा और बढ़ जाती है।

रिजवान के घर की कहानी भी इसी इंतजार के इर्द-गिर्द सिमट गई है।

अब परिवार की नजर इस बात पर है कि आवश्यक प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कब उनका अपना व्यक्ति आखिरी सफर तय करके अपने गांव की मिट्टी तक पहुंचता है।

सबसे जरूरी तथ्य

नाम: रिजवान अहमद

उम्र: 42 वर्ष

निवास: डोकम अमया, तहसील इटवा, सिद्धार्थनगर

स्थान जहां मृत्यु बताई गई: सऊदी अरब

मृत्यु की तारीख: परिवार के अनुसार 22 जून 2026

परिवार का दावा: करीब 45 दिनों से पार्थिव शरीर आने का इंतजार

मांग: पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने में सरकारी सहायता

  मौत के बाद अपनों को इंतजार क्यों?

विदेश में किसी भारतीय की मृत्यु होने पर कई तरह की स्थानीय कानूनी, चिकित्सकीय और दस्तावेजी औपचारिकताएं हो सकती हैं। इसलिए बिना आधिकारिक रिकॉर्ड देखे यह कहना उचित नहीं होगा कि रिजवान का पार्थिव शरीर आने में देरी किसकी वजह से हुई।

लेकिन एक मानवीय सवाल जरूर खड़ा होता है—शोक में डूबे परिवार को प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी और यथासंभव शीघ्र सहायता मिलनी चाहिए।

यदि कोई दस्तावेज लंबित है तो परिवार को बताया जाए, यदि किसी औपचारिकता की जरूरत है तो उसे पूरा कराने में मार्गदर्शन मिले और यदि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो पार्थिव शरीर स्वदेश भेजने की कार्रवाई यथाशीघ्र आगे बढ़े।

क्योंकि इस घर की मांग किसी विवाद की नहीं है। यहां एक परिवार सिर्फ अपने रिजवान को आखिरी बार देखना और सम्मान के साथ अंतिम विदाई देना चाहता है।

सारांश

सिद्धार्थनगर के डोकम अमया गांव निवासी 42 वर्षीय रिजवान अहमद की सऊदी अरब में 22 जून को मृत्यु होने की जानकारी परिवार ने दी है। परिजनों का कहना है कि करीब 45 दिन गुजरने के बाद भी पार्थिव शरीर भारत नहीं पहुंचा। परिवार संबंधित सरकारी अधिकारियों से सहायता की मांग कर रहा है। देरी का वास्तविक कारण आधिकारिक दस्तावेज सामने आए बिना निर्धारित नहीं किया जा सकता।

 

NCC भर्ती में युवाओं का जोश, श्री सिंहेश्वरी इंटर कॉलेज में 73 कैडेट चयनित

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तेतरी बाजार में 46 यूपी बटालियन NCC गोरखपुर के अंतर्गत हुई भर्ती; दौड़, शारीरिक दक्षता, ऊंचाई मापन और लिखित परीक्षा से गुजरे अभ्यर्थी

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सिद्धार्थनगर। अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की भावना से जुड़ने के लिए युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। तेतरी बाजार स्थित श्री सिंहेश्वरी इंटर कॉलेज में 46 यूपी बटालियन NCC गोरखपुर के अंतर्गत आयोजित एनसीसी भर्ती प्रक्रिया में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। निर्धारित चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुल 73 कैडेटों के चयन की जानकारी विद्यालय प्रशासन की ओर से दी गई है।

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25 JD और 48 SD कैडेटों का चयन

विद्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक भर्ती में जूनियर डिवीजन (JD) के 25 और सीनियर डिवीजन (SD) के 48 कैडेट चयनित किए गए। इस तरह कुल चयनित कैडेटों की संख्या 73 रही।

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मैदान से लिखित परीक्षा तक परखी गई क्षमता

भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता, दौड़, ऊंचाई मापन, लिखित परीक्षा एवं अन्य निर्धारित परीक्षणों से गुजरना पड़ा। उपलब्ध तस्वीरों में छात्र-छात्राएं दौड़ और लिखित परीक्षा में हिस्सा लेते तथा अभ्यर्थियों की ऊंचाई मापी जाती दिखाई दे रही है।

सूबेदार अनिल भंडारी ने किया ऊंचाई मापन

विद्यालय की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार भर्ती प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए 46 यूपी बटालियन NCC गोरखपुर से सूबेदार अनिल भंडारी और हवलदार आशीष कुमार पहुंचे थे। ऊंचाई मापन की तस्वीर में दिखाई दे रहे अधिकारी की पहचान विद्यालय की ओर से सूबेदार अनिल भंडारी के रूप में बताई गई है।

विद्यालय के एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट मुकुल कुमार एवं सेकंड ऑफिसर महेंद्र ने चयनित कैडेटों को बधाई देते हुए एनसीसी के जरिए अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, राष्ट्रसेवा और व्यक्तित्व विकास के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानाचार्य विनायक अनमोल ने चयनित कैडेटों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ एनसीसी की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

विद्यालय प्रशासन के अनुसार आयोजन में रणजीत चौधरी, हृदय नारायण मिश्र, मान सिंह, गिरिजेश कुमार सिंह, अंकित और मधुद्रेंद्र सहित विद्यालय परिवार के अन्य सदस्यों ने भी सहयोग किया।


NCC की वर्दी पहन देशसेवा और अनुशासन की राह पर आगे बढ़ने का सपना लेकर मैदान में उतरे छात्र-छात्राओं ने दौड़ से लेकर लिखित परीक्षा तक अपनी क्षमता दिखाई। तेतरी बाजार में हुई इस भर्ती में 73 कैडेटों का चयन युवाओं के उत्साह का केंद्र बना।


स्थान: श्री सिंहेश्वरी इंटर कॉलेज, तेतरी बाजार, सिद्धार्थनगर

इकाई: 46 यूपी बटालियन NCC गोरखपुर

JD चयन: 25 कैडेट

SD चयन: 48 कैडेट

कुल चयन: 73 कैडेट

भर्ती प्रक्रिया: शारीरिक दक्षता, दौड़, ऊंचाई मापन, लिखित एवं अन्य निर्धारित परीक्षण

संपादकीय सुरक्षा नोट: चयन संख्या, अधिकारियों के नाम और भर्ती संबंधी विवरण विद्यालय की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचना पर आधारित हैं।

 

सिद्धार्थनगर: भारत-नेपाल सीमा पर 135 किलो यूरिया बरामद, साइकिल सवार पकड़ा

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धनगढ़वा सीमा चौकी के पास SSB और यूपी पुलिस की संयुक्त गश्ती के दौरान कार्रवाई; तीन बोरी यूरिया और एक साइकिल बरामद, सीमा शुल्क विभाग को सौंपने की प्रक्रिया

सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा पर अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम ने तीन बोरी यूरिया खाद के साथ एक व्यक्ति को पकड़ा है। एसएसबी की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार बरामद यूरिया का कुल वजन करीब 135 किलोग्राम है।

सीमा स्तंभ संख्या 547 के पास कार्रवाई

एसएसबी के मुताबिक, 1 अगस्त 2026 को 43वीं वाहिनी एसएसबी सिद्धार्थनगर की सीमा चौकी धनगढ़वा और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त विशेष गश्ती टीम सीमा क्षेत्र में गश्त कर रही थी। इसी दौरान सीमा स्तंभ संख्या 547 के समीप एक व्यक्ति साइकिल पर यूरिया खाद लेकर भारत से नेपाल की ओर जाता दिखाई दिया।

टीम ने व्यक्ति को रोककर जांच की तो साइकिल पर यूरिया की तीन बोरियां मिलीं। एसएसबी के अनुसार प्रत्येक बोरी का वजन 45 किलोग्राम था, यानी कुल 135 किलोग्राम यूरिया बरामद हुआ।

पूछताछ में क्या बताया?

एसएसबी द्वारा जारी विवरण के अनुसार, पूछताछ में पकड़े गए व्यक्ति ने दावा किया कि उसे यह सामान मोहना बाजार में एक अज्ञात व्यक्ति से मिला था और इसे नेपाल के गिराऊजोत गांव में किसी अज्ञात व्यक्ति तक पहुंचाना था। इस कथन की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और आगे की जांच संबंधित विभाग द्वारा की जाएगी।

एसएसबी के मुताबिक, बरामद तीन बोरी यूरिया और एक साइकिल को जब्ती ज्ञापन एवं आवश्यक दस्तावेजों के साथ अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क विभाग, ककरहवा को सुपुर्द किए जाने की प्रक्रिया है।

सीमा पर लगातार निगरानी

43वीं वाहिनी एसएसबी का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा पर अवैध तस्करी, नशीले पदार्थों, अवैध मुद्रा, मानव तस्करी और वन्यजीवों से जुड़े अपराधों की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी एवं कार्रवाई की जा रही है।

नोट: खबर एसएसबी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना पर आधारित है। पकड़े गए व्यक्ति के संबंध में अंतिम कानूनी निष्कर्ष सक्षम जांच/न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगा।

 

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