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संविधान-आरक्षण के मुद्दे पर सपा का सियासी दांव, बहुजन समाज से एकजुट होने की अपील

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PDA जन पंचायत में मिठाई लाल भारती का भाजपा पर तीखा हमला; बोले—संविधान और आरक्षण की रक्षा के लिए सपा के साथ आए बहुजन समाज


सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले PDA की सियासत को धार देने की कवायद सिद्धार्थनगर में भी तेज होती दिखाई दे रही है। शनिवार को शहर में समाजवादी पार्टी के तत्वावधान में आयोजित सामाजिक एकता/PDA जन पंचायत सम्मेलन में बाबा साहब आंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिठाई लाल भारती ने संविधान, आरक्षण और निजीकरण को लेकर भाजपा पर कई गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने बहुजन समाज से अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के साथ एकजुट होने की अपील की।


| संविधान और आरक्षण को बनाया बड़ा मुद्दा

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मिठाई लाल भारती ने कहा कि बहुजन समाज के सामने संविधान और आरक्षण की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। उन्होंने कहा कि यदि बहुजन समाज अपने अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखना चाहता है तो उसे राजनीतिक रूप से एकजुट होना होगा।

भारती ने निजीकरण की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए आरक्षण के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने भाजपा की दलित और पिछड़ा वर्ग की राजनीति पर भी तीखा हमला किया।

यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि भाजपा को लेकर कही गई बातें मिठाई लाल भारती के राजनीतिक आरोप और दावे हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

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| “2024 में दलित समाज ने दिया बड़ा संदेश”

मिठाई लाल भारती ने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं के एक हिस्से ने समाजवादी पार्टी के पक्ष में मतदान कर भाजपा को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया।

उन्होंने दावा किया कि संविधान से जुड़े मुद्दों ने लोकसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अब यही मुद्दे 2027 के विधानसभा चुनाव में भी प्रमुखता से उठेंगे।


| बसपा को लेकर भी साधा निशाना

भारती ने अपने संबोधन में बसपा नेतृत्व को लेकर भी राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दलित वोटों के बंटवारे से भाजपा को फायदा पहुंच सकता है।

हालांकि यह भी वक्ता का राजनीतिक दावा है। संबंधित दलों की ओर से इस सम्मेलन में लगाए गए आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना उचित होगा।

2027 को लेकर सैयदा खातून का बड़ा सियासी संदेश

विधायक सैयदा खातून ने कहा कि उनके अनुसार 2027 का विधानसभा चुनाव केवल सरकार बनाने का चुनाव नहीं होगा, बल्कि संविधान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों का भी चुनाव होगा।

उन्होंने दलित और पिछड़े समाज से राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाने की अपील की।

PDA के जरिए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश

सम्मेलन में संविधान, आरक्षण, दलित-पिछड़ा प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। वक्ताओं के संबोधन से साफ संकेत मिला कि समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में PDA—पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—समीकरण को प्रमुख राजनीतिक आधार बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

कार्यक्रम में पूर्व विधायक विजय पासवान, चौधरी अमर सिंह, बेचई यादव, राममिलन भारती, घिसियावन यादव, चंद्रमणि यादव, सुरेश यादव, कमरुज्जमा खान, मोहम्मद इदरीश पटवारी, प्रदीप पथरकट, रामसेवक लोधी, चंद्रभान पहलवान, रिंधू पासवान, चंद्रभूषण आर्य, रामबहार कनौजिया, पुनीत गौतम, वीरेंद्र तिवारी, जुबेदा चौधरी, रामधीरज साहनी, कलाम सिद्दीकी, सोनू यादव, पारसनाथ विश्वकर्मा और जेपी यादव समेत अन्य लोग मौजूद रहे।


| 2027 से पहले तेज हुई सियासी गोलबंदी

सिद्धार्थनगर की PDA जन पंचायत ने साफ कर दिया कि 2027 से पहले संविधान, आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर राजनीतिक मुकाबला और तेज हो सकता है। सपा के मंच से बहुजन समाज को अपने साथ जोड़ने की खुली अपील हुई है। दूसरी ओर भाजपा और बसपा पर लगाए गए आरोप फिलहाल वक्ताओं के राजनीतिक दावे हैं।

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अब बड़ा सवाल यही है—क्या संविधान और आरक्षण का मुद्दा 2027 में PDA को एकजुट कर पाएगा, या भाजपा और अन्य दल इस सियासी रणनीति की नई काट निकालेंगे?

 

कपिलवस्तु की विरासत को मिली नई रोशनी: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लाइट एंड साउंड शो व विपश्यना पार्क का किया उद्घाटन

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बुद्ध की धरती पर पर्यटन को नई रफ्तार देने की पहल; सांसद जगदम्बिका पाल की परियोजनाओं की मांग पर केंद्रीय मंत्री ने शीघ्र कार्य का दिया भरोसा

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सिद्धार्थनगर, 01 अगस्त। भगवान बुद्ध की ऐतिहासिक विरासत से जुड़े कपिलवस्तु को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान देने की दिशा में शनिवार को एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कपिलवस्तु स्तूप पर अत्याधुनिक लाइट एंड साउंड शो तथा विपश्यना पार्क का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में डुमरियागंज सांसद जगदम्बिका पाल, कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह और मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह समेत बड़ी संख्या में अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

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| इतिहास अब रोशनी और आवाज के जरिए होगा जीवंत

कपिलवस्तु की प्राचीन बौद्ध विरासत को पर्यटकों तक आधुनिक और आकर्षक अंदाज में पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया लाइट एंड साउंड शो पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं विपश्यना पार्क की शुरुआत से कपिलवस्तु आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक और सुविधा जुड़ गई है।

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गार्ड ऑफ ऑनर के बाद स्तूप पहुंचे केंद्रीय मंत्री

कपिलवस्तु पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी ली। इसके बाद उन्होंने कपिलवस्तु स्तूप परिसर पहुंचकर विधिवत पूजन किया और शिलापट का अनावरण कर लाइट एंड साउंड शो का उद्घाटन किया।

पुरी ने वहां मौजूद बौद्ध भिक्षुओं से संवाद किया और कपिलवस्तु स्तूप की परिक्रमा भी की।

इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक श्यामधनी राही, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, कुलपति प्रो. कविता शाह और सीडीओ बलराम सिंह की मौजूदगी में विपश्यना पार्क का उद्घाटन किया।

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| कपिलवस्तु पर्यटन के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

गौतम बुद्ध की विरासत से जुड़ा कपिलवस्तु अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यहां लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से आने वाले पर्यटकों को कपिलवस्तु की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से आधुनिक तकनीक के जरिए परिचित कराने का प्रयास किया गया है। विपश्यना पार्क भी पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों के लिए नया आकर्षण बनेगा।

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प्रदर्शनी देखी, गोदभराई और अन्नप्राशन में हुए शामिल

केंद्रीय मंत्री ने पर्यटन सुविधा केंद्र में विभिन्न विभागों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनियों का अवलोकन किया।

कार्यक्रम के दौरान गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और बच्चों का अन्नप्राशन भी कराया गया।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय बर्डपुर की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जबकि शिवपति इंटर कॉलेज की छात्राओं ने कपिलवस्तु गीत की प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर की विशिष्ट पहचान काला नमक चावल तथा गौतम बुद्ध पर आधारित लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया।

पुरी बोकेंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें सिद्धार्थनगर आने का अवसर मिलने पर अत्यंत प्रसन्नता है।

IMG 20260801 WA1019पुरी ने स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना सहित विभिन्न योजनाओं की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर तेल और गैस से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर भी सरकार का पक्ष रखा।

पुरी बोले—सिद्धार्थनगर आकर अत्यंत प्रसन्नता हुई
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें सिद्धार्थनगर आने का अवसर मिलने पर अत्यंत प्रसन्नता है।
उन्होंने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी CSR के माध्यम से होने वाले विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी अपनी बात रखी।
पुरी ने स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना सहित विभिन्न योजनाओं की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर तेल और गैस से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर भी सरकार का पक्ष रखा।IMG 20260801 WA1042


| सांसद की मांग पर केंद्रीय मंत्री का बड़ा भरोसा

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सांसद जगदम्बिका पाल ने जिन परियोजनाओं की मांग की है, उन पर शीघ्र कार्य किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री के इस आश्वासन को सिद्धार्थनगर में भविष्य की विकास परियोजनाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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जगदम्बिका पाल बोले—बुद्ध ने दुनिया को दिया शांति और करुणा का संदेश

डुमरियागंज सांसद जगदम्बिका पाल ने केंद्रीय मंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि गौतम बुद्ध ने पूरी दुनिया को शांति, अहिंसा और करुणा का संदेश दिया।

उन्होंने केंद्र सरकार के ऊर्जा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया और हरदीप सिंह पुरी के सिद्धार्थनगर आगमन के लिए आभार जताया।

सांसद ने कपिलवस्तु और सिद्धार्थनगर के विकास को लेकर विभिन्न परियोजनाओं की आवश्यकता भी केंद्रीय मंत्री के सामने रखी।

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श्यामधनी राही बोले—जिले के विकास को मिलेगी नई दिशा

कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि सिद्धार्थनगर आकांक्षी जनपद है और कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एंड साउंड शो तथा विपश्यना पार्क की शुरुआत से जिले के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने गौतम बुद्ध और कपिलवस्तु के ऐतिहासिक संबंध का उल्लेख करते हुए इसे विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण स्थल बताया।

भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य ने भी दोनों परियोजनाओं को जिले के पर्यटन और विकास के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

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| कपिलवस्तु को क्या मिला?

◆ कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत

◆ विपश्यना पार्क का उद्घाटन

◆ बौद्ध विरासत को आधुनिक तकनीक से प्रस्तुत करने की पहल

◆ पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की दिशा में नया कदम

◆ सांसद की ओर से रखी गई परियोजनाओं पर केंद्रीय मंत्री का सकारात्मक आश्वासन

◆ काला नमक चावल और गौतम बुद्ध पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन

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कार्यक्रम में ये भी रहे मौजूद

कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर के अध्यक्ष गोविंद माधव, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष विक्रम सिंह, सांसद प्रतिनिधि एसपी अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष साधना चौधरी, पीडी अनिल कुमार, डीसी मनरेगा संदीप सिंह समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए.के. सिंह ने केंद्रीय मंत्री सहित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और अन्य अतिथियों का आभार जताया।


| बुद्ध की धरती पर पर्यटन का नया अध्याय

कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एंड साउंड शो और विपश्यना पार्क की शुरुआत केवल दो सुविधाओं का उद्घाटन भर नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर की बौद्ध विरासत को आधुनिक पर्यटन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मौजूदगी और सांसद जगदम्बिका पाल द्वारा रखी गई परियोजनाओं पर शीघ्र कार्य के आश्वासन से जिले में आगे भी विकास परियोजनाओं को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।


| सुविधाओं के साथ प्रचार और रखरखाव भी जरूरी

कपिलवस्तु के पास वह ऐतिहासिक विरासत है जो देश-दुनिया के बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखती है। लाइट एंड साउंड शो और विपश्यना पार्क इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

लेकिन इन परियोजनाओं की वास्तविक सफलता नियमित संचालन, बेहतर रखरखाव, पर्यटकों के लिए सुविधाओं, परिवहन कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कपिलवस्तु के प्रभावी प्रचार पर निर्भर करेगी।

यदि इन पहलुओं पर लगातार काम हुआ तो कपिलवस्तु केवल इतिहास का स्थल नहीं, बल्कि पूर्वांचल के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्रों में अपनी मजबूत जगह बना सकता है।

 

मौत से पहले तहरीर, फिर खेत में संदिग्ध मौत; पोस्टमार्टम के बाद सड़क पर शव रख परिजनों का प्रदर्शन, दो नामजद पर मुकदमा

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गणेश लोधी की मौत ने खड़े किए कई सवाल; परिजनों ने पुरानी शिकायत पर कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल, पत्नी और परिवार के बयानों में विरोधाभास—अब पुलिस विवेचना और पोस्टमार्टम के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें

सिद्धार्थनगर। सदर कोतवाली क्षेत्र के करीब 40 वर्षीय गणेश लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला शुक्रवार शाम उस समय और गरमा गया, जब पोस्टमार्टम के बाद शव बाहर आने पर आक्रोशित परिजनों ने उसे सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजन मृतक द्वारा पूर्व में पुलिस को दी गई बताई जा रही तहरीर का हवाला देते हुए कार्रवाई पर सवाल उठा रहे थे। करीब एक घंटे तक चले घटनाक्रम के दौरान आवागमन प्रभावित होने की बात सामने आई। बाद में पुलिस अधिकारियों के समझाने-बुझाने पर परिजन शांत हुए और शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए। मामले में दो नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि मुकदमा दर्ज होना आरोप सिद्ध होना नहीं है और मौत का वास्तविक कारण तथा किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका पुलिस विवेचना, चिकित्सकीय निष्कर्ष और अन्य साक्ष्यों से ही निर्धारित होगी।

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| मौत से पहले की शिकायत अब जांच के केंद्र में

मृतक की पहचान गणेश लोधी पुत्र स्वर्गीय दशरथ लोधी, उम्र करीब 40 वर्ष, निवासी सरोजनीनगर उर्फ मोडिला, वार्ड नंबर-8, थाना सदर, जनपद सिद्धार्थनगर के रूप में बताई गई है। परिजनों के मुताबिक 30 जुलाई को गणेश अपनी पत्नी के साथ सदर थाना क्षेत्र के ग्राम रेहरा स्थित खेत में काम करने गया था। वहीं उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। अब गणेश द्वारा मौत से पहले पुलिस को दी गई बताई जा रही तहरीर ने पूरे प्रकरण को और संवेदनशील बना दिया है।

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खेत में पत्नी के साथ गया था गणेश, फिर आई मौत की खबर

परिजनों के अनुसार गणेश अपनी पत्नी कमलावती के साथ ग्राम रेहरा स्थित खेत में फसल काटने गया था। इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ने और बाद में मौत होने की बात सामने आई।

परिजनों का दावा है कि मौत के बाद गणेश की नाक से खून दिखाई दिया था तथा कुछ अन्य शारीरिक परिस्थितियां भी नजर आई थीं। हालांकि इन लक्षणों से अपने आप मौत का कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता।

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गणेश की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, किसी आकस्मिक अथवा चिकित्सकीय वजह से हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक घटना है—इसका निष्कर्ष पोस्टमार्टम के चिकित्सकीय निष्कर्ष और पुलिस जांच के आधार पर ही निकलेगा।

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| मौत से पहले पुलिस को दी थी तहरीर

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज गणेश द्वारा पूर्व में पुलिस को दी गई बताई जा रही तहरीर है।

उपलब्ध कराई गई तहरीर की प्रति के अनुसार गणेश ने अपनी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में उसने अपने साथ किसी अप्रिय घटना की आशंका भी जताई थी और पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी।

तहरीर में लिखी बातें शिकायतकर्ता गणेश के आरोप थे, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुरानी शिकायत पर पुलिस ने वास्तव में क्या-क्या कार्रवाई की थी, यह संबंधित पुलिस अभिलेखों और आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट होगा।

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परिजनों का सवाल—पहले प्रभावी कार्रवाई होती तो क्या बच सकती थी जान?

गणेश की मौत के बाद यही पुरानी तहरीर परिवार के आक्रोश का बड़ा कारण बन गई है।

परिजनों का आरोप है कि यदि गणेश द्वारा पूर्व में व्यक्त की गई आशंका को गंभीरता से लेकर प्रभावी कार्रवाई की गई होती तो संभवतः आज उसकी जान बच सकती थी।

यह परिजनों का आरोप है। पूर्व शिकायत के निस्तारण में पुलिस स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं, इसकी अभी स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इसीलिए इस पहलू पर निष्कर्ष निकालने से पहले पुरानी तहरीर, उस पर की गई पुलिस कार्रवाई और संबंधित अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण होगी।


| पत्नी बोली—पी रखी थी शराब; परिवार ने किया इनकार

गणेश की पत्नी का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। घटना के बाद पत्नी ने दावा किया कि उसका पति उस पर शक करता था और घटना वाले दिन खेत में काम करने के दौरान उसने शराब पी रखी थी।

इसके ठीक विपरीत मृतक के परिवार का दावा है कि गणेश शराब का सेवन नहीं करता था।

पत्नी और परिजनों के इन परस्पर विरोधी बयानों ने एक और सवाल खड़ा कर दिया है।

घटना के दिन मृतक ने शराब का सेवन किया था अथवा नहीं, इसे किसी एक पक्ष के बयान के आधार पर तथ्य नहीं माना जा सकता। इस संबंध में उपलब्ध चिकित्सकीय/फॉरेंसिक निष्कर्ष ही महत्वपूर्ण होंगे।

भाई ने पत्नी और एक अन्य व्यक्ति पर लगाए गंभीर आरोप

गणेश की मौत के बाद उसके भाई ने पुलिस को तहरीर देकर पत्नी और एक अन्य व्यक्ति की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

परिवार का आरोप है कि पत्नी की एक व्यक्ति से कथित नजदीकी को लेकर गणेश परेशान था और इसका विरोध करता था।

मृतक की सास ने भी अपनी बेटी के व्यवहार को लेकर सवाल उठाते हुए दामाद की मौत के मामले में जांच की मांग की है।

इन सभी कथनों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इनकी सत्यता पुलिस विवेचना में साक्ष्यों के आधार पर निर्धारित होगी।

पोस्टमार्टम के बाद सड़क पर शव, करीब घंटे भर चला प्रदर्शन

शुक्रवार शाम करीब चार बजे पोस्टमार्टम हाउस से गणेश का शव बाहर आने के बाद मामला एक बार फिर गरमा गया।

बताया जा रहा है कि आक्रोशित परिजनों ने शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके चलते आवागमन प्रभावित हुआ और मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।

परिजन गणेश की पुरानी तहरीर का हवाला देकर कार्रवाई की मांग करने लगे। उनका सवाल था कि जब मृतक ने पहले ही अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका जताई थी तो उस शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई?

करीब एक घंटे तक परिजन अपनी मांग को लेकर डटे रहे।

पुलिस अधिकारियों ने संभाली स्थिति

तनावपूर्ण स्थिति के बीच क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान और कोतवाली प्रभारी मिथिलेश राय ने परिजनों से बातचीत कर उन्हें समझाने-बुझाने का प्रयास किया।

पुलिस के आश्वासन और समझाने के बाद परिजन शांत हुए। इसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया और आवागमन सामान्य होने का रास्ता साफ हुआ।


| दो नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा

गणेश लोधी की मौत के मामले में अब पुलिस कार्रवाई भी आगे बढ़ी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दो नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई/विवेचना कर रही है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि FIR में किसी व्यक्ति का नाम होना अथवा उसके खिलाफ आरोप लगाया जाना स्वयं में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। आरोपों की सत्यता पुलिस विवेचना, साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे पीड़ादायक पहलू गणेश का परिवार है। बताया जा रहा है कि गणेश अपने पीछे करीब 14 वर्षीय बेटे दुर्गेश और लगभग आठ वर्षीय बेटी दुर्गावती को छोड़ गया है।

एक तरफ पिता की अचानक मौत और दूसरी तरफ गंभीर आरोपों के बीच चल रही पुलिस कार्रवाई ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।


| पुलिस जांच के सामने 6 बड़े सवाल

1. गणेश लोधी की मौत का वास्तविक कारण क्या है?

2. मौत से पहले दी गई तहरीर पर पुलिस ने उस समय क्या कार्रवाई की थी?

3. पत्नी के शराब संबंधी दावे और परिवार के इनकार की वास्तविकता क्या है?

4. पुरानी तहरीर में जिस दूसरे व्यक्ति का उल्लेख बताया जा रहा है, जांच में उसकी क्या भूमिका सामने आती है?

5. मृतक की नाक से खून आने के परिजनों के दावे का चिकित्सकीय कारण क्या था?

6. जिन दो लोगों को मुकदमे में नामजद किया गया है, उनके खिलाफ जांच में क्या साक्ष्य सामने आते हैं?

इन सवालों के जवाब आरोपों या चर्चाओं से नहीं बल्कि पोस्टमार्टम के निष्कर्ष, पुलिस विवेचना, संबंधित लोगों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से सामने आएंगे।

सारांश | अब तक क्या-क्या हुआ?

गणेश लोधी की खेत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत → मौत से पहले पुलिस को तहरीर देने की बात सामने आई → पत्नी और परिवार के बयान में शराब को लेकर विरोधाभास → भाई ने पत्नी व एक अन्य व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए → पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया → पुलिस अधिकारियों ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया → दो नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की जानकारी → अब विवेचना और चिकित्सकीय निष्कर्ष का इंतजार।

टिप्पणी | पुरानी तहरीर की भी हो निष्पक्ष पड़ताल, लेकिन आरोपों से तय न हो दोष

गणेश लोधी की मौत निश्चित रूप से गंभीर और संवेदनशील मामला है। मौत से पहले पुलिस को दी गई बताई जा रही तहरीर के कारण परिवार के सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह सामने आना जरूरी है कि शिकायत कब मिली, उसमें क्या आरोप थे और पुलिस ने नियमानुसार क्या कार्रवाई की।

लेकिन इसी के साथ यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि जनाक्रोश अथवा गंभीर आरोप किसी व्यक्ति को स्वतः दोषी नहीं बना देते।

दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस विवेचना का दायित्व और महत्वपूर्ण हो गया है। जांच बिना किसी पूर्वाग्रह के साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए। यदि किसी की आपराधिक भूमिका के प्रमाण मिलते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई हो और यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो वह तथ्य भी उतनी ही स्पष्टता से सामने आए।

गणेश के परिवार को न्याय मिलना चाहिए—लेकिन न्याय का रास्ता निष्पक्ष जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य और कानून से होकर ही गुजरता है।

 

मौत से पहले पुलिस को दी थी तहरीर, अब खेत में गणेश लोधी की संदिग्ध मौत; पत्नी और परिजनों के बयानों में विरोधाभास

पत्नी बोली—पति ने पी रखी थी शराब और करता था शक; परिवार का दावा—गणेश शराब नहीं पीता था, भाई ने पत्नी व एक अन्य व्यक्ति पर लगाए गंभीर आरोप


सिद्धार्थनगर। सदर थाना क्षेत्र में करीब 40 वर्षीय गणेश लोधी की खेत में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला इसलिए भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि परिजनों के अनुसार गणेश ने अपनी मौत से पहले पुलिस को एक तहरीर देकर पत्नी और एक अन्य व्यक्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे तथा अपने साथ किसी अप्रिय घटना की आशंका जताई थी। अब गणेश की मौत के बाद उसके भाई ने पत्नी और एक अन्य व्यक्ति की भूमिका पर संदेह जताते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं मृतक की सास ने भी अपनी बेटी के व्यवहार को लेकर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर पत्नी का कहना है कि उसका पति उस पर शक करता था और घटना वाले दिन उसने शराब पी रखी थी। परिवार का दावा इसके ठीक उलट है कि गणेश शराब नहीं पीता था। फिलहाल मौत का कारण स्पष्ट नहीं है और आरोपों की सत्यता पुलिस जांच व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेगी।


| कई सवाल छोड़ गई खेत में हुई मौत

मृतक की पहचान गणेश लोधी पुत्र स्वर्गीय दशरथ लोधी, निवासी सरोजनीनगर उर्फ मोडिला, वार्ड नंबर-8, थाना सदर, जनपद सिद्धार्थनगर के रूप में बताई गई है। परिजनों के अनुसार 30 जुलाई को गणेश अपनी पत्नी के साथ सदर थाना क्षेत्र के ग्राम रेहरा स्थित खेत में फसल काटने गया था। इसी दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई।

खेत में पत्नी के साथ गया था गणेश

परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक गणेश अपनी पत्नी कमलावती के साथ खेत में काम करने गया था। इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ने और मौत होने की बात सामने आई। परिजनों का दावा है कि मौत के बाद गणेश की नाक से खून दिखाई दिया था और कुछ अन्य शारीरिक परिस्थितियां भी नजर आईं।

हालांकि केवल इन परिस्थितियों के आधार पर मौत का कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता। यह मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, किसी चिकित्सकीय समस्या के कारण हुई अथवा इसके पीछे कोई अन्य वजह है, इसका निष्कर्ष पोस्टमार्टम और जांच के आधार पर ही निकलेगा।

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| मौत से पहले दी गई तहरीर ने बढ़ाई मामले की गंभीरता

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू गणेश द्वारा पूर्व में पुलिस को दी गई बताई जा रही तहरीर है। उपलब्ध कराई गई तहरीर की प्रति में गणेश ने अपनी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के संबंधों को लेकर आरोप लगाए थे। तहरीर में उसने यह भी आशंका जताई थी कि उसके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है।

तहरीर में यह भी उल्लेख है कि पूर्व में दोनों पक्षों के बीच विवाद सामने आया था। शिकायत में लगाए गए सभी आरोप गणेश के कथन हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बताया जा रहा है कि उस समय मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद दोनों पक्षों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया गया था। उस शिकायत पर पुलिस स्तर से वास्तव में क्या कार्रवाई हुई थी, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

पत्नी का पक्ष—“पति मुझ पर शक करता था”

गणेश की मौत के बाद उसकी पत्नी कमलावती से घटना के संबंध में पूछे जाने पर उसने कहा कि उसका पति उस पर शक करता था। पत्नी के मुताबिक घटना वाले दिन गणेश उसके साथ खेत में काम कर रहा था और उसने शराब पी रखी थी।

पत्नी के इस बयान के बाद मामले में एक और सवाल जुड़ गया है।


| परिवार बोला—गणेश शराब नहीं पीता था

मृतक के परिवार ने पत्नी के शराब संबंधी दावे से असहमति जताई है। परिजनों का कहना है कि गणेश शराब का सेवन नहीं करता था।

इस तरह पत्नी और मृतक के परिजनों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है।

गणेश ने घटना वाले दिन शराब का सेवन किया था अथवा नहीं, इसे फिलहाल प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। पोस्टमार्टम के दौरान किए गए आवश्यक चिकित्सकीय/फॉरेंसिक परीक्षण और जांच से इस पहलू पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

भाई ने पत्नी और एक अन्य व्यक्ति पर लगाया हत्या का आरोप

घटना के बाद मृतक के भाई की ओर से पुलिस को तहरीर देकर गणेश की पत्नी और एक अन्य व्यक्ति पर हत्या का आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि पत्नी की एक व्यक्ति से नजदीकी को लेकर गणेश परेशान रहता था और इसका विरोध करता था।

यहां स्पष्ट करना आवश्यक है कि हत्या का आरोप अभी परिजनों का आरोप है। किसी व्यक्ति की संलिप्तता अथवा अपराध सिद्ध होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।


मृतक की सास ने भी बेटी पर लगाए आरोप

मामले में एक असामान्य पहलू तब सामने आया जब मृतक की सास ने भी अपनी बेटी के आचरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

उनका दावा है कि उनकी बेटी का गांव में किराये पर रहने वाले एक व्यक्ति के साथ मेल-जोल था, जिसका उनका दामाद गणेश विरोध करता था। उन्होंने भी दामाद की मौत को लेकर संदेह जताया और जांच की मांग की।

हालांकि सास द्वारा लगाए गए आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें जांच से पहले तथ्य नहीं माना जा सकता।

एक वर्ष से संबंध होने की चर्चा, पुष्टि नहीं

स्थानीय स्तर पर पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के बीच करीब एक वर्ष से कथित नजदीकी होने की चर्चाएं सामने आई हैं। कुछ लोग इसी कथित संबंध को गणेश की मौत से जोड़कर देख रहे हैं।

FT News Digital ऐसी चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। किसी कथित प्रेम संबंध को हत्या का कारण बताना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। पुलिस को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही इस पहलू की सत्यता निर्धारित करनी होगी।

दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

बताया जा रहा है कि गणेश की उम्र करीब 40 वर्ष थी, जबकि पत्नी कमलावती की उम्र लगभग 35 वर्ष बताई गई है। परिवार में करीब 14 वर्षीय बेटा दुर्गेश और लगभग आठ वर्षीय बेटी दुर्गावती हैं।

गणेश की अचानक मौत के बाद परिवार में मातम है। वहीं आरोप-प्रत्यारोप के बीच दोनों बच्चों की स्थिति भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

जिला अस्पताल में जुटी भीड़, पुलिस ने पत्नी-बच्चों को सुरक्षा में बैठाया

गणेश की मौत की जानकारी मिलने के बाद जिला अस्पताल में परिजनों और परिचितों की भीड़ जमा हो गई। मौजूद लोगों में आक्रोश को देखते हुए अस्पताल परिसर स्थित पुलिस चौकी के पुलिसकर्मियों ने स्थिति संभाली।

बताया गया कि किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए मृतक की पत्नी और बच्चों को पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से अपने पास बैठा लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की जानकारी है।

जांच के सामने ये अहम सवाल

◆ गणेश लोधी की मौत का वास्तविक कारण क्या है?

◆ मौत से पहले दी गई कथित तहरीर पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की थी?

◆ पत्नी के शराब संबंधी बयान और परिवार के दावे में कौन-सा तथ्य सही है?

◆ परिजनों द्वारा जिस दूसरे व्यक्ति का जिक्र किया जा रहा है, उसकी भूमिका क्या थी?

◆ नाक से खून आने के दावे का चिकित्सकीय कारण क्या था?

◆ क्या मौत में किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका है या मामला किसी अन्य कारण से जुड़ा है?

इन सवालों के जवाब अनुमान या आरोपों से नहीं, बल्कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वैज्ञानिक साक्ष्य और पुलिस जांच से ही मिल सकते हैं।


| आरोप गंभीर, लेकिन फैसला जांच से पहले नहीं

गणेश लोधी की मौत से पहले दी गई बताई जा रही तहरीर और मौत के बाद परिवार की ओर से लगाए जा रहे आरोप निश्चित रूप से जांच के महत्वपूर्ण बिंदु हैं। पत्नी और परिवार के परस्पर विरोधी बयान भी जांच एजेंसी के सामने अहम पहलू हो सकते हैं।

लेकिन कानून की दृष्टि से आरोप और अपराध सिद्ध होना दो अलग बातें हैं। किसी महिला या अन्य व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले हत्यारा घोषित करना न केवल अनुचित होगा बल्कि कानूनी रूप से भी जोखिमपूर्ण हो सकता है।

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पुलिस के सामने अब पूर्व शिकायत, घटनास्थल की परिस्थितियां, संबंधित लोगों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को जोड़कर निष्पक्ष जांच करने की चुनौती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की आधिकारिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गणेश लोधी की मौत कैसे हुई और क्या इसमें किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका थी।

दो स्कूलों में लगातार चोरी से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, तीन दिन में दूसरी वारदात से शिक्षक और ग्रामीण चिंतित

स्कूलों के रसोईघर बने निशाना, गैस सिलेंडर चोरी होने से पुलिस के सामने खुलासे की चुनौती


स्थान : बर्डपुर/सिद्धार्थनगर

मुख्य बिंदु

तीन दिन के भीतर दो सरकारी विद्यालयों में चोरी।

दोनों मामलों में रसोईघर का ताला तोड़कर गैस सिलेंडर चोरी।

शिक्षकों और ग्रामीणों में बढ़ी चिंता।

पुलिस से शीघ्र खुलासे और सुरक्षा बढ़ाने की मांग।

सिद्धार्थनगर।

सिद्धार्थनगर जिले के सरकारी प्राथमिक विद्यालय लगातार चोरों के निशाने पर दिखाई दे रहे हैं। तीन दिनों के भीतर दो अलग-अलग विद्यालयों में रसोईघर का ताला तोड़कर गैस सिलेंडर चोरी होने की घटनाओं ने विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हुई इन वारदातों के बाद शिक्षक और ग्रामीणों में चिंता का माहौल है, जबकि पुलिस से शीघ्र खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है।

ताजा मामला कपिलवस्तु कोतवाली क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय मिश्रौलिया का है। विद्यालय प्रशासन के अनुसार गुरुवार सुबह स्कूल पहुंचने पर रसोईघर का ताला टूटा मिला। जांच करने पर गैस सिलेंडर गायब पाया गया। इसके बाद विद्यालय की ओर से पुलिस को सूचना देकर कार्रवाई की मांग की गई।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्याम नारायण ने बताया कि घटना की सूचना पुलिस को दे दी गई है और चोरी का खुलासा करने तथा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार इससे पहले 27 जुलाई की रात चिल्हिया थाना क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय रमवापुर में भी इसी तरह रसोईघर का ताला तोड़कर दो गैस सिलेंडर चोरी किए गए थे। दोनों विद्यालयों के बीच लगभग दो किलोमीटर की दूरी बताई जा रही है। लगातार सामने आई इन घटनाओं से विद्यालयों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ग्रामीणों और शिक्षकों ने विद्यालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, रात्रि गश्त बढ़ाने तथा घटनाओं का शीघ्र खुलासा करने की मांग की है।

पुलिस की ओर से मामले की जांच की जा रही है। चोरी की घटनाओं के संबंध में आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही कारणों और जिम्मेदार व्यक्तियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



संपादकीय टिप्पणी

विद्यालय शिक्षा के मंदिर माने जाते हैं। यदि लगातार सरकारी स्कूल ही चोरों के निशाने पर आने लगें, तो यह केवल संपत्ति की चोरी का मामला नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता का संकेत भी है। ऐसे मामलों में त्वरित जांच, नियमित रात्रि गश्त और विद्यालय परिसरों की सुरक्षा मजबूत करना आवश्यक है।

नशा मुक्त भारत की मुहिम को मिलेगा युवाओं का दम, सिद्धार्थनगर में 8 विधाओं की जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं

05 अगस्त को होगी प्रतियोगिता, 04 अगस्त तक करें ऑनलाइन आवेदन; विजेताओं को मिलेगा राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर


आयोजक: माय भारत (MY Bharat), युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार

अभियान: नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत

आवेदन की अंतिम तिथि: 04 अगस्त 2026

प्रतियोगिता: 05 अगस्त 2026, प्रातः 9:00 बजे

स्थान: बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज, सिद्धार्थनगर


युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” अभियान के तहत सिद्धार्थनगर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा अवसर मिला है। 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवा आठ विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकेंगे।

मुख्य खबर

सिद्धार्थनगर। माय भारत (MY Bharat) के तत्वावधान में “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” अभियान के अंतर्गत जनपद के युवाओं के लिए जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

इस अभियान का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताएं आयोजित करना नहीं, बल्कि युवाओं में नशा मुक्त जीवनशैली, सामाजिक जागरूकता, रचनात्मक सोच और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की भावना विकसित करना है।

प्रतियोगिताओं का आयोजन 05 अगस्त 2026 को बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज, सिद्धार्थनगर में होगा। इच्छुक प्रतिभागी 04 अगस्त 2026 तक MY Bharat Portal पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

इन 8 विधाओं में दिखा सकेंगे प्रतिभा

वाद-विवाद प्रतियोगिता

स्लोगन (नारा) लेखन

चित्रकला

समूह नृत्य

रील एवं लघु फिल्म निर्माण

कविता लेखन / स्लैम पोएट्री

संगीत एवं रैप

नुक्कड़ नाटक

प्रत्येक प्रतिभागी केवल एक प्रतियोगिता में भाग ले सकेगा।

जिले से राष्ट्रीय मंच तक का अवसर

जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सिद्धार्थनगर का प्रतिनिधित्व करेंगे। राज्य स्तर के विजेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा प्रदर्शन और सम्मानित होने का अवसर मिलेगा।

निष्पक्ष होगा मूल्यांकन

हर प्रतियोगिता का मूल्यांकन तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल द्वारा किया जाएगा। प्रतिभागियों की रचनात्मकता, विषय की समझ, प्रस्तुति, मौलिकता और सामाजिक संदेश के आधार पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान का चयन किया जाएगा।

सारांश

15–29 वर्ष के युवाओं से आवेदन आमंत्रित।

8 विधाओं में होगी जिला स्तरीय प्रतियोगिता।

आवेदन की अंतिम तिथि 04 अगस्त।

05 अगस्त को बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज में आयोजन।

विजेताओं को राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका।

संपादकीय टिप्पणी

नशे के विरुद्ध जागरूकता केवल कानून से नहीं, बल्कि युवाओं की सकारात्मक भागीदारी से मजबूत होती है। यदि युवा अपनी रचनात्मक प्रतिभा के माध्यम से समाज को सही संदेश दें, तो यह अभियान जनजागरण का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

ककरहवा में छात्र-छात्राओं, एसएसबी और सामाजिक संस्थाओं की संयुक्त रैली, ‘सतर्क समाज ही रोक सकता है मानव तस्करी’

ककरहवा में छात्र-छात्राओं, एसएसबी और सामाजिक संस्थाओं की संयुक्त रैली, ‘सतर्क समाज ही रोक सकता है मानव तस्करी’

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स्थान: ककरहवा, सिद्धार्थनगर

अवसर: अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रोकथाम दिवस

मुख्य उद्देश्य: मानव तस्करी के प्रति जनजागरूकता और सामाजिक सहभागिता बढ़ाना


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भारत-नेपाल सीमा पर मानव तस्करी के खिलाफ गुरुवार को जागरूकता की मजबूत आवाज गूंजी। सिद्धार्थनगर के सीमावर्ती कस्बा ककरहवा में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रोकथाम दिवस पर छात्र-छात्राओं, एसएसबी, शिक्षकों और सामाजिक संस्थाओं ने विशाल जागरूकता रैली निकालकर लोगों को इस गंभीर अपराध के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया। सीमा क्षेत्र में आयोजित यह अभियान आमजन को जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

मुख्य खबर

सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा से लगे ककरहवा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रोकथाम दिवस के अवसर पर मानव सेवा संस्थान, गोरखपुर (शाखा ककरहवा) एवं राजकीय इंटर कॉलेज ककरहवा के संयुक्त तत्वावधान में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत राजकीय इंटर कॉलेज परिसर से हुई, जहां से छात्र-छात्राओं ने हाथों में जागरूकता संबंधी बैनर और तख्तियां लेकर रैली निकाली। रैली ककरहवा बाजार एवं सीमा क्षेत्र के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। इस दौरान प्रतिभागियों ने मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता से जुड़े नारे लगाकर लोगों से सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना संबंधित एजेंसियों को देने की अपील की।

रैली के समापन पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के ककरहवा इंचार्ज असिस्टेंट कमांडेंट नीलेश मासुले ने कहा कि मानव तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी मुद्दा है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकों की सतर्कता और समय पर दी गई सूचना इस अपराध की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मानव सेवा संस्थान की आलिया गुप्ता (FAC), अखिलेश कुमार (CH) तथा मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान के राम शंकर (ब्लॉक कोऑर्डिनेटर) ने छात्र-छात्राओं को मानव तस्करी के विभिन्न स्वरूपों, इसके दुष्परिणामों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही इस अपराध के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार है।

विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय कुमार श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों से समाज में जागरूकता फैलाने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित विभागों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में शिक्षक-शिक्षिकाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही। अंत में सभी प्रतिभागियों ने मानव तस्करी मुक्त समाज के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।


भारत-नेपाल सीमा पर निकली जागरूकता रैली।

छात्र-छात्राओं ने मानव तस्करी के खिलाफ दिया संदेश।

एसएसबी व सामाजिक संस्थाओं ने किया संयुक्त आयोजन।

सीमा क्षेत्र में लोगों से सतर्क रहने की अपील।

मानव तस्करी मुक्त समाज बनाने का लिया संकल्प।

संपादकीय टिप्पणी

मानव तस्करी एक गंभीर सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय अपराध है, जिसकी रोकथाम केवल सुरक्षा एजेंसियों के भरोसे संभव नहीं। समाज, विद्यालय, परिवार और प्रशासन की संयुक्त जागरूकता ही इस अपराध के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच बन सकती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे अभियान लोगों को सचेत करने और अपराधियों के मंसूबों को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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“कागजों में बनी नाली, जमीन पर सवाल! ₹54,441 के भुगतान पर उठे बड़े सवाल”

₹54,441 का भुगतान, लेकिन नाली गायब?

सरकारी रिकॉर्ड में खर्च दर्ज, ग्रामीण बोले—बरसात में घरों में भर रहा पानी; डीएम के आदेश के बाद भी कार्रवाई का इंतजार


स्थान: ग्राम पंचायत सिकरी (बेलहसा), विकास खंड इटवा, जनपद सिद्धार्थनगर


रिकॉर्ड एक कहानी बयां कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण दूसरी। सिद्धार्थनगर के इटवा ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत सिकरी (बेलहसा) में नाली निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्राम पंचायत की कैश बुक में ₹54,441 के भुगतान का उल्लेख है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि धरातल पर नाली का निर्माण पूरा नहीं हुआ। शिकायत जिलाधिकारी तक पहुंचने और जांच के निर्देश दिए जाने के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।

सरकारी कागजों में भुगतान, जमीन पर सवाल

ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार 05 फरवरी 2026 को परशुराम के घर से तालाब तक नाली निर्माण के नाम पर ₹54,441 का भुगतान दर्ज है। वहीं, मौके की तस्वीरें और ग्रामीणों के आरोप यह सवाल खड़ा करते हैं कि यदि भुगतान हुआ तो कार्य पूरा क्यों नहीं दिख रहा?

ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी नाली को तोड़ दिया गया, लेकिन नई नाली का निर्माण नहीं कराया गया। आरोप है कि कुछ स्थानों पर मिट्टी डालकर जल निकासी का रास्ता भी बाधित कर दिया गया, जिससे बरसात में पानी लोगों के घरों और रास्तों में भर रहा है।

शिकायत पहुंची डीएम तक, फिर भी समाधान का इंतजार

ग्रामीणों ने 08 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर को शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की जांच की मांग की। ग्रामीणों का दावा है कि जांच के निर्देश भी दिए गए, लेकिन अब तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही किसी जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी मिली है।

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ग्रामीणों के प्रमुख सवाल

जब भुगतान दर्ज है तो निर्माण कार्य पूरा क्यों नहीं हुआ?

यदि कार्य अधूरा है तो भुगतान किस आधार पर हुआ?

जांच के निर्देश के बाद भी कार्रवाई में देरी क्यों?

बरसात में जलभराव की समस्या का जिम्मेदार कौन?

प्रशासन से ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा अधूरी नाली का निर्माण तत्काल पूरा कराया जाए।

FT NEWS DIGITAL की अपील

FT NEWS DIGITAL किसी भी व्यक्ति या संस्था को दोषी नहीं ठहराता। यह समाचार ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, शिकायत पत्र और स्थानीय लोगों के आरोपों पर आधारित है। संबंधित ग्राम प्रधान, सचिव, खंड विकास अधिकारी या अन्य संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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सारांश

₹54,441 भुगतान का रिकॉर्ड सामने आया।

ग्रामीणों ने नाली निर्माण अधूरा होने का आरोप लगाया।

बरसात में जलभराव से लोगों को परेशानी।

डीएम को शिकायत और जांच की मांग।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच और शीघ्र समाधान की अपेक्षा।

 

बूढ़ी राप्ती नदी के तट पर दिखा घड़ियाल, ग्रामीणों में दहशत; वन विभाग की टीम घंटों करती रही तलाश

ब्रेकिंग न्यूज़

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सिद्धार्थनगर के जोगिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम तनजवा में गुरुवार सुबह बूढ़ी राप्ती नदी के दाहिने तट पर एक घड़ियाल दिखाई देने से इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और खोजबीन शुरू कर दी। हालांकि घड़ियाल नदी में उतर गया, जिससे उसका पता नहीं चल सका। घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है और नदी किनारे लोगों की भारी भीड़ जुट गई।

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सिद्धार्थनगर के जोगिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम तनजवा में गुरुवार सुबह बूढ़ी राप्ती नदी के दाहिने तट पर एक घड़ियाल दिखाई देने से इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और खोजबीन शुरू कर दी। हालांकि घड़ियाल नदी में उतर गया, जिससे उसका पता नहीं चल सका। घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है और नदी किनारे लोगों की भारी भीड़ जुट गई।

सिद्धार्थनगर।

जनपद के जोगिया विकासखंड, तहसील बांसी के ग्राम तनजवा में गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब नदी किनारे शौच के लिए गए ग्रामीणों ने बूढ़ी राप्ती नदी के दाहिने तट पर एक घड़ियाल देखा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घड़ियाल कुछ देर तक नदी के किनारे मौजूद रहा। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग की बांसी रेंज को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग सक्रिय हो गया और अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंच गई।

मौके पर क्षेत्रीय वन अधिकारी शिवकुमार गुप्ता, वन दरोगा प्रदीप कुमार, वन दरोगा अरबाज खान, वन संरक्षक अरुणेश कुमार, वन संरक्षक जगदीश यादव तथा क्षेत्रीय सहायक राजू वाकर ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और घड़ियाल की तलाश शुरू की।

लेकिन वन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही घड़ियाल नदी में उतर चुका था। इसके बाद अधिकारियों ने नदी किनारे और आसपास के क्षेत्र में काफी देर तक खोजबीन की, लेकिन समाचार लिखे जाने तक घड़ियाल का दोबारा पता नहीं चल सका।

घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी किनारे पहुंच गए। बढ़ती भीड़ को देखते हुए वन विभाग के अधिकारियों ने लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने और नदी के किनारे अनावश्यक भीड़ न लगाने की अपील की।

वन विभाग ने ग्रामीणों को चेतावनी दी है कि जब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट न हो जाए, तब तक नदी में उतरने, बच्चों को अकेले नदी किनारे भेजने अथवा किसी भी वन्यजीव के नजदीक जाने से बचें। विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही है और घड़ियाल की तलाश जारी है।


: प्रशासन की अपील

✔ नदी के किनारे अनावश्यक भीड़ न लगाएं।

✔ बच्चों को अकेले नदी के पास न जाने दें।

✔ किसी भी वन्यजीव को पकड़ने या छेड़ने का प्रयास न करें।

✔ घड़ियाल दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना दें।

✔ अफवाहों से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

तथ्य एक नजर में

स्थान: ग्राम तनजवा, विकासखंड जोगिया, तहसील बांसी

नदी: बूढ़ी राप्ती

समय: सुबह लगभग 7:30 बजे

घटना: नदी किनारे घड़ियाल दिखाई दिया

कार्रवाई: वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, खोज अभियान जारी

स्थिति: समाचार लिखे जाने तक घड़ियाल का पता नहीं चल सका

संपादकीय टिप्पणी

बरसात के मौसम में नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ जलीय वन्यजीव नए क्षेत्रों में दिखाई दे सकते हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय सतर्कता बरतना और वन विभाग के निर्देशों का पालन करना सबसे सुरक्षित उपाय है। फिलहाल वन विभाग द्वारा खोज अभियान जारी है और लोगों से नदी के आसपास विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।


(यह समाचार वन विभाग से प्राप्त स्थानीय सूचना, प्रत्यक्षदर्शियों के विवरण और मौके पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में किसी प्रकार की अपुष्ट या भ्रामक जानकारी शामिल नहीं की गई है।)

घर में नागिन के अंडों से निकले 31 सांप! पूरे गांव में दहशत, देखने उमड़ी भीड़

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सिद्धार्थनगर के बढ़नी क्षेत्र में एक परिवार के घर से लगातार निकल रहे सांपों का आखिरकार राज खुल गया। घर के भीतर नागिन द्वारा दिए गए अंडों से अब तक 31 सांप निकलने की पुष्टि होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना पर वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर निगरानी शुरू कर दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

सिद्धार्थनगर।

जनपद के बढ़नी क्षेत्र स्थित एक गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब एक घर से लगातार छोटे-छोटे सांप निकलने लगे। शुरुआत में परिवार ने इसे सामान्य घटना समझा, लेकिन जब रोजाना सांप दिखाई देने लगे तो ग्रामीणों में दहशत फैल गई। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची टीम ने जांच की तो पता चला कि घर के सुरक्षित हिस्से में एक नागिन ने अंडे दिए थे। इन्हीं अंडों से अब तक 31 सांप निकल चुके हैं।

घटना के बाद आसपास के लोगों की भारी भीड़ मौके पर जुट गई। हर कोई इस अनोखी घटना को अपनी आंखों से देखने के लिए पहुंचने लगा। वहीं, परिवार के सदस्य भय के कारण घर में रहने से भी घबरा रहे हैं।

वन विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण कर लोगों से अपील की है कि किसी भी सांप को पकड़ने या मारने का प्रयास न करें। यदि कहीं सांप दिखाई दे तो तुरंत संबंधित विभाग या प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

विशेषज्ञों के अनुसार बरसात का मौसम सांपों के प्रजनन का समय होता है। मादा सांप सुरक्षित और शांत स्थान पर अंडे देती है। अनुकूल वातावरण मिलने पर एक साथ बड़ी संख्या में बच्चे निकल सकते हैं। इसी कारण घर से लगातार सांप निकलने की घटना सामने आई।

फिलहाल वन विभाग पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। आसपास के लोगों को भी घरों की नियमित सफाई करने, झाड़ियों और कबाड़ को हटाने तथा बच्चों को सतर्क रखने की सलाह दी गई है।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बरसात सांपों के प्रजनन का प्रमुख मौसम माना जाता है।

मादा सांप सुरक्षित स्थान पर अंडे देती है।

एक बार में कई अंडों से लगभग एक साथ बच्चे निकल सकते हैं।

सांप दिखाई देने पर घबराएं नहीं, सुरक्षित दूरी बनाएं।

तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

संपादकीय टिप्पणी

यह घटना जितनी चौंकाने वाली है, उतनी ही सावधानी बरतने की भी जरूरत है। अफवाहों से बचें, सांपों को लेकर अंधविश्वास न फैलाएं और केवल अधिकृत अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की सलाह का पालन करें। बरसात के मौसम में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

(यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और संबंधित विभागों द्वारा साझा तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी प्रकार की अपुष्ट या अंधविश्वास आधारित जानकारी को शामिल नहीं किया गया है।)

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